आजकल की जीवनशैली की वजह से कमर दर्द और पेट दर्द की समस्या आम बन गयी है। ऐसे में हंसासन का अभ्यास आपके शरीर के लिए और दर्द से तुरंत आराम देने में बेहद लाभदायक है। इस आसन को करते समय आपके शरीर की अवस्था हंस जैसी हो जाती है। इसलिए इसे हंसासन कहा जाता है। इसका रोज अभ्यास करने से आपको यह आसन बेहद आसान लगने लगेगा। लेकिन इसकी शुरुआत करने के लिए किसी योग ट्रेनर की मदद जरूर लें। 

इस लेख में हंसासन करने के तरीके व उससे होने वाले लाभों के बारे में बताया गया है। साथ ही लेख में यह भी बतायाा गया है कि हंसासन के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए। 

(और पढे़ं - पेट दर्द के घरेलू उपाय)

  1. हंसासन के फायदे - Hansasana (swan pose) ke fayde in Hindi
  2. हंसासन करने का तरीका - Hansasana (swan pose) karne ke tarike in Hindi
  3. हंसासन का आसान रूपांतर - Hansasana (swan pose) ke Modifications in Hindi
  4. हंसासन करने में क्या सावधानी बरती जाए - Hansasana (swan pose) me kya savdhani barte in Hindi

हंसासन के लाभ कुछ इस प्रकार हैं -

  1. हंसासन पेट के सभी अंगों और मांसपेशियों की मालिश करता है और उन्हें उत्तेजित करता है।
  2. यह कब्ज और पेट की गैस को दूर करता है। साथ ही लीवर और गुर्दे की कार्य करने की क्षमता को तेज करता है।
  3. इस आसन से पेट और आँतों के कीड़ों को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  4. इस आसन का अभ्यास लगातार करते रहने से भूख बढ़ती है और पेचिश की समस्या से छुटकारा मिलता है।

हंसासन करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें -

  1. सबसे पहले घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। दोनों पंजों को साथ में रखें और घुटनों को अलग रखें। हथेलियों को जमीन पर रखें और उंगलियों को पैरों की ओर रखें।
  2. फिर दोनों हाथों की कलाइयों को एक दूसरे से सटा लें और भुजाओं के आगे के भाग को शरीर से चिपका लें।
  3. अब आगे की ओर इस प्रकार झुकें कि पेट आपकी कोहनियों के ऊपर रहे और छाती भुजाओं के ऊपर भाग पर रहे।
  4. संतुलन बनाये रखें और पैरों को धीरे-धीरे पीछे की ओर सीधा कर लें।
  5. पंजों को एक साथ रखें और पैरों की उंगलियों को जमीन पर टिका दें।
  6. सिर को ऊपर उठायें और नज़रे एकदम सामने रखें।
  7. आखिर में अपने शरीर का भार हाथों और पैरों की उंगलियों पर होना चाहिए।
  8. अपनी क्षमता के अनुसार इस अवस्था को बनाये रखें। ध्यान रखें हाथों या पैरों की उंगलियों पर ज्यादा जोर न लगाएं।
  9. फिर घुटनों को जमीन पर लें आएं और वज्रासन में बैठ जाएं।
  10. इस आसन को कम से कम दस मिनट तक करें।

इस आसान को आप या तो इस प्रकार कर सकते हैं या फिर मयूरासन में भी कर सकते हैं। मयूरासन करते समय आपको पेरों को उपर की तरफ उठाना है, बाकि पूरी प्रक्रिया ऐसे ही रहेगी। अपनी क्षमता के अनुसार आप इन आसनों का चयन कर सकते हैं।

हंसासन में बरतने वाली सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं -

  1. पेप्टिक अल्सर, अधिक अम्लता, हर्निया या उच्च रक्तचाप के रोगियों को यह आसन नही करना चाहिए।
  2. गर्भवती महिलायें कभी इस आसन को न करें।
  3. अगर इस आसन को करते समय आपको हाथों में दर्द या पैरों में ऐंठन महसूस होती है तो तभी इस आसन को रोक दें।
  4. कुछ देर आराम से बैठ जाएं और फिर से इस आसन को करने की कोशिश करें।
  5. अगर यह समस्या फिर से महसूस होती है तो अपने योग ट्रेनर को जरूर बताएं।

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