पेट में अल्सर (छाले) - Peptic Ulcer in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

June 28, 2017

September 07, 2021

पेट में अल्सर
पेट में अल्सर

पेप्टिक अल्सर को हम गैस्ट्रिक अल्सर ­(gastric ulcers) के नाम से भी जानते हैं। ये एक तरह से हमारे पेट के भीतरी परत में संक्रमित घाव होते हैं।

पेट में आंत के बाहरी हिस्से में भी ये अल्सर संक्रमित हो सकते हैं। इस तरह के अल्सर को डूआडनल अल्सर (duodenal ulcer) भी कहा जाता है। पेट के अल्सर और डूआडनल अल्सर (duodenal ulcer) दोनो को पेप्टिक अल्सर (peptic ulcers) भी कहा जाता है। 

पेप्टिक अल्सर क्या है?

पेप्टिक अल्सर एक तरह का घाव है जो कि पेट के भीतरी हिस्से की परत में, भोजन नली में और छोटी आंत में विकसित होते हैं। पेप्टिक अल्सर के दौरान पेट में दर्द होता है और ये दर्द नाभी से लेकर छाती तक महसूस होता है, ये पेप्टिक अल्सर के सबसे सामान्य लक्षण माने जाते हैं। अगर इस अल्सर का इलाज समय रहते न किया जाए तो ये और भी ख़तरनाक हो सकता है और अपने साथ कई अन्य बिमारियों को भी जन्म दे सकता है। औमतौर पर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया कि वजह से हमारे शरीर में सूजन होती है तथा पेट से अम्ल का क्षरण भी होता है। पेप्टिक अल्सर एक सामान्य बिमारी है।

पेट में अल्सर (छाले) के प्रकार - Types of Peptic Ulcer in Hindi

पेप्टिक अल्सर आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं -

  1. गैस्ट्रिक अल्सर (gastric ulcers) - ये अल्सर हमारे पेट में होते हैं।  
  2. एसोफेजल अल्सर (esophageal ulcers) - ये अल्सर हमारे भोजन नली मे होते हैं।
  3. डूआडनल अल्सर (duodenal ulcer) - ये अल्सर  हमारे छोटी आंत में होते हैं। 

पेट में अल्सर (छाले) होने के लक्षण - Peptic Ulcer Symptoms in Hindi

पेप्टिक अल्सर के लक्षण निम्नलिखित हैं 

पेट में दर्द पेप्टिक अल्सर का मुख्य लक्षण है। आमतौर पर अल्सर के लक्षण नहीं होते, हालांकि रक्तस्त्राव अल्सर का सबसे पहला संकेत माना जाता है। 

  • अल्सर का दर्द आमतौर पर पेट के ऊपरी मध्य भाग में होता है यह दर्द नाभी के ऊपर और छाती के नीचे होता है।
  • अल्सर कि वजह से पेट मे जलन, दांत काटने जैसा दर्द, ये दर्द हमारे पीछे के हिस्से में भी हो सकता है।
  • आमतौर पर पेट में दर्द तब होता है जब खाना खाने के कई घन्टे के बाद तक हमारा पेट खाली रहता है। 
  • खासकर रात और सुबह के समय यह दर्द ज्यादा प्रभावी हो जाता है।
  • अल्सर के दौरान होने वाला दर्द कुछ मिनटों से लेकर कई घंटो तक भी जारी रह सकता है। 
  • अल्सर के दर्द में भोजन, एंटासिड्स, या उल्टी से राहत मिल सकती है।

पेप्टिक अल्सर के कुछ और लक्षण निम्नलिखित हैं

  • जी मिचलाना - Nausea
  • उल्टी आना - Vomiting
  • भूख न लगना - Loss of appetite
  • वजन कम हो जाना - Loss of weight

अधिकांश अल्सर के मामलों में  पेट में रक्तस्त्राव होता है। हालांकि कभी-कभी केवल रक्तस्त्राव ही अल्सर का लक्षण होता है।रक्तस्त्राव कभी तेज तो कभी धीमी गति से होता है। हालांकि तेज़ रक्तस्त्राव का पता इन वजहों से पता चलता है। 

  • उल्टी के साथ ख़ून का बहार आना या कॉफ़ी कि तरह का काला पदार्थ बाहर आना। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है इसका मतलब है कि बिल्कुल भी लापारवाही न करें और बिना देर किए अस्पताल के एमर्जेंसी वॉर्ड में जाएं।
  • मल के साथ काले रंग का ख़ून, चिपचिपा दिखने वाला मल आना। 

पेट में छाले (अल्सर) के कारण - Peptic Ulcer Causes in Hindi

पेट में अल्सर (छाले​) क्यों होते हैं?

यह ज्ञात नही है कि पेप्टिक अल्सर किन कारणों से होता है। हालांकि हम जानते हैं कि यह ग्रहणी ( duodenum) और पेट में पाए जाने वाले पाचन तरल पदार्थ (digestive fluids) के बीच असंतुलन से होता है। पेप्टिक अल्सर अधिकांश मामले में छोटी आंत की परत में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया के संक्रमण की वजह से होता है।

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया 

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया, एक बेहद सामान्य बैकटीरिया है। इसके लक्षण इतने सामान्य होते  हैं की हम इन्हें महसूस भी नहीं कर पाते हैं और ये हमे प्रभावित करने लग जाते हैं। इनके लक्षण को समझना बेहद मुश्किल होता है। ये बैकटीरिया हमारे पेट के भीरत परत में होते हैं और किसी भी उम्र के लोग इसके चपेट में आ सकते हैं। 

 

हालांकि कुछ लोगों में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया कि वजह से पेट के भीतरी परत में जलन होने लगती है और ये बैकटीरिया हमारे पेट में खाना पचाने के लिए जो अम्ल पैदा होता है, उस क्षमता को कम करता हैं। इस बात का अभी तक पता नहीं चल पाया हैं कि कुछ लोग हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया कि चपेट में ज़्यादा क्यों आते हैं अन्य बैकटिरीया के तुलना में।

कुछ दवाईयों के सेवन से हमें अल्सर होने कि संभावनाएं और भी बढ़ जाती है।

जैसे नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs), आइब्यूप्रोफ़न (Ibuprofen), एस्पिरिन (aspirin), नेपरोक्सन (Naproxen) और भी कुछ दवाएं हैं।

नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) का प्रयोग बहुत लोग करते हैं। हालांकि इसका इस्तेमाल हमारे लिए जोखिम भरा हो सकता है। जैसे पेट का अल्सर और अगर हम इसका इस्तेमाल ज़्यादा मात्रा में करते हैं तो और भी हानिकारक हो सकता है। अगर किसी को वर्तमान में अल्सर है या पहले  था दोनों ही हालातों में नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पैरासिटामोल को हमेशा एक दर्दनिवारक के रूप मे इस्तेमाल किया जाता है, जो कि सुरक्षित माना जाता है।

कुछ दवाएं जैसे स्टेरॉयड (steroids) ऐन्टेकोऐग्यलन्ट (anticoagulants) और ड्रग्स (selective serotonin reuptake inhibitors,SSRIs) इसे इस नाम से भी जाना जाता है। ये हमारे किडनी, लिवर और फेफड़ों को बीमार कर सकते हैं।

अल्सर होने के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं।  

  • रोगी के परिवार में पहले किसी को अल्सर हुआ है तो उसकी जानकारी। 
  • 50 साल से अधिक उम्र होने पर। 
  • शराब का सेवन।
  • तम्बाखू का सेवन। 
  • तनाव
  • मासालेदार भोजन। 
  • लिवर, किडनी, फेफेडों से संबधित बिमारी से ग्रसित होने पर। 
  • रेडीएशन (रेडीएशन) क्षेत्र के उपचार में। 

पेट में छाले (अल्सर) से बचाव - Prevention of Peptic Ulcer in Hindi

शराब, धम्रपान, दर्दनिवारक दवा, कैफ़ीन और नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) से परहेज करके हम पेप्टिक अल्सर से खुद को दूर रख सकते है । इन सब के सेवन से हमारे पेट की रक्षात्मक शक्ति ख़त्म होती है और पेट में अमाशय रस की मात्रा भी बढ़ने लगती है।

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया से  बचाव के लिए दूषित खाना, दूषित पानी के साथ साथ स्वच्छता का भरपूर ध्यान रखें। गरम पानी से हाथ धोएं और बाथरूम में हमेशा साबुन का प्रयोग करें जैसे डायपर बदलने के बाद और खाना बनाने से पहले भी हमेशा साबुन से हाथ धोएं।

यदि आपको दर्द निवारक दवाएं, या नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) लेनी पड़ती है तो इन चीजों को ध्यान में रख अल्सर के जोखिम से आप दूर रह सकते है।

  • दूसरे प्रकार के नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) का इस्तेमाल करें जो पेट के लिए कम नुकसान दायक हो।  
  • अगर आप दिन में दवा कि कई खुराक लेते हैं तो इस पर नियंत्रण करें।
  • एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल) जैसी अन्य दवा लें।
  • डॉक्टर से संपर्क कर अपने आपको  सेहतमंद रखने के लिए सलाह लें। 

जो आपके डॉक्टर ने परहेज और सलाह दी है उसका पूर्णतः पालन  करके आप अल्सर के दोबारा विकसित होने की संभवना को कम कम कर सकते है। अगर आप हेलिकोबैक्टर पाइलोरी  बैक्टीरिया से ग्रसित है तो डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का पूर्ण रुप से पालन करें। 

पेट में अल्सर (छाले) का परीक्षण - Diagnosis of Peptic Ulcer in Hindi

पेप्टिक अल्सर या पेट के अल्सर का निदान

डॉक्टर किस तरह करते हैं पेप्टिक अल्सर का निदान, आइए जानते हैं 

सबसे पहले डॉक्टर हमारी पिछिली चिकित्सा संबधी जानकारी के बारे में जानते हैं, शरीरिक स्थिति को देखते हैं और कुछ टेस्ट भी करते हैं।

एंडोस्कोपी (Endoscopy) या एक्स-रे टेस्ट (X-ray test) इन दोनों टेस्ट्स द्वारा पेप्टिक अल्सर का पता लगाया जाता है।

पिछिली चिकित्सा संबधी जानकारी

पेप्टिक अल्सर के निदान और मदद के लिए डॉक्टर लक्षण तथा पिछली दवाओं के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं। जिन दवाओं का उपयोग आपने बिना डॉक्टर की सलाह के किया हो उन्हें जरुर डॉक्टर से साझा करें। खासकर नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) जैसे ऐस्परिन, आईब्यूप्रोफेन, नेपरोक्सन आदि । 

पेप्टिक अल्सर के लिए शरीरिक परीक्षण                                    

अल्सर के निदान में हमारा शरिरिक परिक्षण डॉक्टर के लिए मददग़ार हो सकता है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर परीक्षण के दौरान इन सब के बारे में जांच कर सकते हैं जैसे पेट में सूजन के लिए जांच, हमारे पेट कि आवाज़ को स्टेथस्कोप कि सहायता से सुनने कि कोशिश करते हैं और टेब का इस्तेमाल करके पेट के दर्द और पेट कि कठोरता और नरमीं को जानने  कि कोशिश करते हैं।

 पेप्टिक अल्सर के लिए लैब टेस्ट

अगर आप हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया से संक्रमित हैं तो डॉक्टर इन टेस्टों के लिए आपको सलाह दे सकते हैं। 

लैब टेस्ट तीन प्रकार के होते हैं

  1. ख़ून की जांच  (ब्लड टेस्ट)
  2. यूरिया ब्रेथ टेस्ट (Urea breath test)
  3. मल परीक्षण (Stool test)

1. खून की जांच (ब्लड टेस्ट)

इस परीक्षण में हमारे ख़ून का सैम्पल लिया जाता है और ये देखा जाता है कि हमारे खून में संक्रमण का स्तर सामान्य है या उससे नीचे ।

2. यूरिया ब्रेथ टेस्ट (Urea breath test)

इस टेस्ट में मरीज को एक विशेष तरह का पेय पदार्थ पिलाया जाता है, इस पेय कि वजह से हमारे शरीर में प्रोटीन का विभाजन होता है और अगर मरीज के शरीर में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया उपस्थित होते हैं तो, ये इस अपशिष्ट उत्पाद को कार्बन-डाइऑक्साइड में बदल देते हैं और जब हम सांस छोड़ते हैं तो ये दिखाई देते हैं। उसके बाद हमारी सांस का सैम्पल लिया जाता है और उसके परिक्षण के लिए लैब में भेजा जाता यदि मरीज के सैंम्पल में कार्बन डाइऑक्साइड अधिक मात्रा में पाया जाता है तो इसका मतलब हमारे पेट में या आंत में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया उपस्थित हैं।

3. मल परीक्षण (Stool test)

मल परीक्षण में मरीज के मल को डॉक्टर लैब में भेजता है और उसका परीक्षण किया जाता है। मल में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया का पता लगाया जाता है।  

पेप्टिक अल्सर के परीक्षण के दो और तरीक़े

  1. अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टनल एंडोस्कोपी (Upper gastrointestinal (GI) endoscopy and biopsy) एवं बायोप्सी
  2. कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (Computerized tomography  ,CT scan)

अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टनल एंडोस्कोपी (Upper gastrointestinal (GI) endoscopy and biopsy) और बायोप्सी में अपर जीआई एन्डोस्कोपी टेस्ट के दौरान डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट), सर्जन या कोई अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर एन्डोस्कोप का उपयोग कर रोगी के जी.आई. ट्रैक्ट (GI tract) को भीतर से जानने का प्रयास करते हैं यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल में होती है। टेस्ट के दौरान  शिरा इंजेक्सन को रोगी के बांह में लागाया जाता है तथा सीडेटिव (sedative, इक प्रकार का दर्दनिवारक दवा) जो कि इस एन्डोस्कोपी टेस्ट के दौरान रोगी को राहत पहुंचाता है। अगर किसी कारण बस रोगी को बेहोशी का इन्जेक्सन नहीं दिया जाता है तो उस स्थिति में एक विशेष प्रकार के तरल पेय से कुल्ला कराया जाता है या गले के पीछे वाले हिस्से में बेहोशी वाला स्प्रे लगाया जाता है। कंप्यूटर के मॉनिटर में वीडियो इमेज भेजने के लिए एन्डोस्कोपी में एक बहुत ही छोटा सा कैमरा लगाया जाता है। हमारे पेट और डूअडीनल (duodenal) में एन्डोस्कोपी के द्वारा पम्प किया जाता है जिससे कि जी.आई. ट्रैक्ट के ऊपरी परत का करीब से निरीक्षण किया जा सके।

1. ऊपरी जी आई श्रृंखला (Upeer GI series)  

ऊपरी जी.आई. श्रृंखला (Upeer GI series) इसके तहत हम उपरी जी.आई. ट्रैक्ट की संरचना को जानने का प्रयास करते हैं। 

अपर जी.आई सिरीज (Upper GI series)

अपर जी.आई सिरीज (Upper GI series) से हमें ऊपरी जी.आई ट्रैक्ट (GI tract) के आकार का पता चलता है। इस टेस्ट को अस्पताल में किया जाता है। रेडियोलोजिस्ट एक्स-रे के फ़ोटो को देख कर इसका पता लगता है। इस टेस्ट में रोगी को बेहोश नहीं किया जाता है। डॉक्टर, रोगी को टेस्ट के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए और साथ में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखाना चाहिए सबकुछ बताते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान, आप एक एक्स-रे मशीन के सामने खड़े होंते हैं या बैठते हैं साथ ही बेरियम (Barium ) जो कि एक तरल पदार्थ है, मरीज के भोजन नलिका, पेट और छोटी आंत में एक आवरण बनाने का काम करता है, जिसकी वजह से डॉक्टर रोगी के अंगों के आकार को एक्स-रे के माध्यम से ज़्यादा स्पष्ट रूप से देख पाते हैं।

परीक्षण के बाद थोड़े समय के लिए रोगी को सूजन और घबराहट हो सकती है। इस प्रक्रिया के कई दिनों बाद तक बेरियम के कारण आपका मल सफ़ेद या हल्के रंग का हो सकता है। एक अच्छे डॉक्टर से हमेशा रोगी को परीक्षण के बाद खाने, पीने के बारे में सलाह लेनी चाहिए।

2. कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी सीटी स्कैन (CT scan)

सीटी स्कैन (CT scan) में एक्स-रे और कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल करके चित्र बनाता है। सीटी स्कैन के लिए, डॉक्टर रोगी को पीने के लिए एक घोल या एक विशेष प्रकार के द्रव्य वाला इंजेक्शन देते हैं। इस प्रक्रिया के लिए रोगी एक टेबल पर लेटता है जो कि एक सुरंग के आकर के यन्त्र में फिसलता है और एक्स-रे करता है। एक्स-रे अस्पताल में किया जाता है और रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे में बने चित्र  की व्याख्या करता है। इस प्रक्रिया के लिए रोगी को बेहोश करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

पेप्टिक अल्सर, जो कि रोगी के पेट और छोटी आंत की दीवार में छेद बना देते हैं। सीटी स्कैन (CT scan) के द्वारा इसके निदान करने में मदद मिलती है।

पेट में अल्सर (छाले) का इलाज - Peptic Ulcer Treatment in Hindi

पेप्टिक अल्सर के उपचार किस तरह की जाती है?

जीवन शैली में परिवर्तन करें - धूम्रपान का त्याग करें, शराब का सेवन बंद करें, नॉन-स्टेरायडल एंटी इनफ्लेमेंट्री ड्रग्स (NSAIDs) जैसी दवाओं के सेवन से बचें।

  • अम्ल तत्व नाशक दवा से बचें,
  • उन दवाओं को लें जो पेट के भीतरी हिस्से कि परत को सुरक्षित करता है।
  • हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया  के कारण होने वाले अल्सर के लिए "ट्रिपल-थेरेपी" या "ड्यूल-थेरेपी उपलब्ध है। 

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया के संक्रमण के समय कोई भी दवा इससे छुटकारा नहीं दिला सकती है उस समय ट्रिपल थेरिपी (Triple-therap) या डबल थेरिपी (dual-therapy) अल्सर से बचाव करते हैं।

ट्रिपल थेरिपी

बिस्मथ सबसैलिसिलेट (Bismuth Subsalicylate) ये एक तरह की औषधि है, जो पेट की ख़राबी, जी मिचलाना, दस्त जैसे बिमारी में काम आता है। एंटीबायोटि टेट्रासाइक्लिन (Tetracycline) और मेट्रोनिडाजोल (Metronidazole) जो कि एक तरह की दवाई है जो पेट के संक्रमण, गम और दंत के संक्रमण जैसी बिमारियों से बचाव करता है। इन तीनों को जब एक साथ दिया जाता है। 80% से 95% अल्सर से ग्रसित लोग ठीक हो जाते हैं और आजकल इसे ही बेहतर इलाज माना जाता है और ये दवाएं एक गोली या टैबलेट कि तरह दी जाती है। बिस्मथ सबसैलिसिलेट (Bismuth Subsalicylate) और टेट्रासाइक्लिन (Tetracycline) दोनों को दिन में चार बार दिया जाता है जबकि मेट्रोनिडाजोल (Metronidazole) को दिन में तीन बार दिया जाता है इसी वजह से अधिकतर लोगों के लिए नियमित समय पर यह दवाएं लेना आसान नहीं होता है।

डबल थैरेपी

इस थेरेपी का विकास ट्रिपल थेरिपी के हानिकारक प्रभाव तथा जटिलता को कम करने के लिए किया गया। अमोक्सीसीलीन (Amoxicillin) और मेट्रोनिडाजोल (Metronidazole) दोनों एंटिबायोटिक्स रोगी को साथ में दी जाती है। दोनों को गोली या टैबलेट कि तरह प्रयोग किया जाता है और दिन में तीन बार ली जाती है, इसके साथ ही प्रोटॉन पंप इनहिबिटर(पीपीआई) का प्रयोग भी किया जाता है। इस थेरेपी के सरल होने के चलते ज्यादा अपनाया जाता है।

क्लेरिथ्रोमाइसिन (Clarithromycin) को 15% -25% लोगों के लिए प्रतिस्थापित किया जा सकता है जिनके संक्रमण मेट्रोनिडाजोल (Metronidazole) के प्रतिरोधी हैं। आमतौर पर प्रोटॉन पंप इनहिबिटर जैसे ऑपेराज़ोल (प्रिलोसेक, प्रिलोसेक ओटीसी) को अल्सर के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।

इस उपचार को आमतौर पर दो सप्ताह तक दिया जाता है। 

यदि एक बार हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया रोगी के पाचन तंत्र से नष्ट हो जाता हैं तो दोबारा नही आता हैं।

अल्सर में रक्तस्त्राव का इलाज ख़ून की कमी और अधिकता पर निर्भर करता है। 

IV तरल पदार्थ

आंत को आराम देना – जब हम कुछ दिन आराम करते हैं और भोजन का सेवन छोड़ कर मात्र तरल पदार्थ का सेवन करते हैं, तो इससे हम अल्सर के प्रकोप को कम कर सकते हैं।

नासोगौस्ट्रिक ट्यूब (नासोगौस्ट्रिक नली)- नाक के माध्यम से पतली, लचीली ट्यूब को पेट के निचले हिस्से में डाला  जाता है, जो पेट के दबाव को कम करता है और रोगी को आराम देता है।
तत्काल एंडोस्कोपी या सर्जरी  

क्षतिग्रस्त और रक्त वाहिकायों में रक्त स्त्राव होना, इस स्थिति में एंडोस्कोपी की सलाह दी जाती है। एंडोस्कोप में एक छोटा ताप उपकरण होता है जो रक्त वाहिकाओं को रोकता है। 
इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि निदान सही नहीं है तो ये उपचार काम नहीं करेगा। यदि डॉक्टर उपचार कर रहा है तो इस बात को निर्धारित करना बेहद जरुरी है कि अल्सर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैकटीरिया कि वजह से तो नही है।

 



संदर्भ

  1. Am Fam Physician. 2007 Oct 1;76(7):1005-1012. [Internet] American Academy of Family Physicians; Peptic Ulcer Disease.
  2. National Health Service [Internet]. UK; Stomach ulcer.
  3. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Peptic Ulcers (Stomach Ulcers).
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Peptic ulcer
  5. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Ulcers

पेट में अल्सर (छाले) के डॉक्टर

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पेट में अल्सर (छाले) की दवा - Medicines for Peptic Ulcer in Hindi

पेट में अल्सर (छाले) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

पेट में अल्सर (छाले) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Peptic Ulcer in Hindi

पेट में अल्सर (छाले) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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