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नवजात शिशु के घर में कदम रखते ही एक तरफ जहां पूरा घर उसकी किलकारी और हंसी से गूंज उठता है वहीं, दूसरी तरफ उसे सभी तरह की बीमारियों, तकलीफों और बुरी नजर से बचाने की भी हर संभव कोशिश की जाती है। कोई बच्चे को काला धागा बांधता है, कोई नजर उतारता है। लेकिन ज्यादातर भारतीय घरों में बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए एक कॉमन चीज की जाती है और वह है- बच्चे की आंखों में काजल या सूरमा लगाना।

बच्चे को काजल लगाना पारंपरिक भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और यह सदियों से होता चला आ रहा है। बहुत से माता-पिता बच्चे की आंखों को बड़ा और खूबसूरत दिखाने के लिए भी काजल का इस्तेमाल करते हैं।हालांकि कई बार इसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं कि क्या छोटे बच्चों की आंखों में काजल लगाना सेफ है? क्या इससे बच्चे की किसी तरह का इंफेक्शन हो सकता है?

दरअसल, काजल, सूरमा या कोल (kohl) आंखों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक प्रकार का सौन्दर्य उत्पाद या कॉस्मेटिक है जिसे कालिख (तेल या घी को जलाकर तैयार होने वाली काली राख) से तैयार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि घर में प्राकृतिक सामग्रियों की मदद से तैयार किए गए काजल में कई तरह के चिकित्सीय गुण होते हैं और यह बड़ों के साथ-साथ बच्चों की आंखों के लिए भी फायदेमंद है।

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कहते हैं कि काजल लगाने से आंखें साफ और ठंडी रहती हैं, विजन यानी देखने की क्षमता बेहतर होती है और आंखों को मजबूती मिलती है। साथ ही साथ आंखों से जुड़ी कई बीमारियां जैसे- कंजंक्टिवाइटिस, मोतियाबिंद और पलकों की सूजन के इलाज में भी काजल का इस्तेमाल होता है। साथ ही साथ काजल, बुरी नजर से भी बचाता है।  

हालांकि अब तक ऐसी कोई वैज्ञानिक स्टडी नहीं हुई है जो काजल लगाने से होने वाले इन फायदों को साबित कर पाए। लिहाजा अगर आप यह जानना चाहते हैं कि क्या नवजात शिशु और छोटे बच्चों को काजल लगाना चाहिए या नहीं तो हमारा सुझाव आपको यही होगा कि आपको अपने बच्चे की आंखों में काजल नहीं लगाना चाहिए। यह एक हानिकारक अभ्यास है जिससे बच्चे की आंखों को कई तरह से नुकसान हो सकता है। 

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इन वजहों से न करें काजल का इस्तेमाल

  • बाजार में व्यवसायिक रूप से तैयार कर बिकने वाले ज्यादातर काजल में लेड यानी सीसा की मात्रा अधिक होती है। लेड बेहद हानिकारक केमिकल होता है जिसका अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो शरीर में लेड का जमाव होने लगता है। इसका शिशु के ब्रेन और बोन मैरो पर बुरा असर पड़ता है। इससे शिशु का आईक्यू कमजोर हो सकता है और एनीमिया का भी खतरा रहता है।
  • एक स्टडी में यह बात सामने आयी है कि काजल में गेलेना, मिनियम, अमोरफस कार्बन, मैग्नेटाइट और जिंक ऑक्साइड भी होता है और ये सारे केमिकल्स भी बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बच्चे की आंखों में काजल लगाते वक्त अगर आपके हाथ या उंगलियां साफ नहीं हैं तो आपके हाथों का इंफेक्शन भी बच्चे की आंख के अंदर जा सकता है।
  • काजल लगाते वक्त अगर जरा सी भी असावधानी हुई तो आपकी उंगलियां या नाखून से भी बच्चे की आंखों को चोट पहुंच सकती है।
  • अगर आपने शिशु को नहलाने से पहले उसकी आंखों का काजल नहीं पोंछा तो हो सकता है कि यह नहाने के पानी के साथ मिलकर शिशु के शरीर के अंदर प्रवेश कर जाए जिससे उसे इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। 
  • बहुत से बच्चों में यह देखने को मिला है कि काजल से बच्चों की आंखों से पानी आने लगता है, आंखों में खुजली, जलन या कई दूसरी तरह की ऐलर्जी भी हो सकती है।

क्या घर पर बना होममेड काजल सेफ है?
अब आप सोच रही होंगी कि बाजार में मिलने वाले काजल में कई तरह के केमिकल्स होते हैं जिसका बच्चे की आंखों और शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। तो क्यों न घर पर ही बादाम का तेल या घी से काजल तैयार कर बच्चे को लगाया जाए। घर पर बना होममेड काजल भले ही केमिकल फ्री हो लेकिन उसके इस्तेमाल से भी बच्चे की आंखों को कोई नुकसान नहीं होगा, इसको साबित करने के लिए भी कोई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद नहीं है। 

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लिहाजा अच्छा यही रहेगा कि आप बच्चे की आंखों में काजल का इस्तेमाल न करें। अगर आप परिवारवालों की बात मानकर या बुरी नजर से बचाने के लिए बच्चे को काजल लगाना ही चाहते हैं तो उसके कान के पीछे, माथे पर हेयरलाइन के पास या पैरों के तलवे में लगा दें। 

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