myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

नवजात शिशु के घर में कदम रखते ही एक तरफ जहां पूरा घर उसकी किलकारी और हंसी से गूंज उठता है वहीं, दूसरी तरफ उसे सभी तरह की बीमारियों, तकलीफों और बुरी नजर से बचाने की भी हर संभव कोशिश की जाती है। कोई बच्चे को काला धागा बांधता है, कोई नजर उतारता है। लेकिन ज्यादातर भारतीय घरों में बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए एक कॉमन चीज की जाती है और वह है- बच्चे की आंखों में काजल या सूरमा लगाना।

बच्चे को काजल लगाना पारंपरिक भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और यह सदियों से होता चला आ रहा है। बहुत से माता-पिता बच्चे की आंखों को बड़ा और खूबसूरत दिखाने के लिए भी काजल का इस्तेमाल करते हैं।हालांकि कई बार इसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं कि क्या छोटे बच्चों की आंखों में काजल लगाना सेफ है? क्या इससे बच्चे की किसी तरह का इंफेक्शन हो सकता है?

दरअसल, काजल, सूरमा या कोल (kohl) आंखों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक प्रकार का सौन्दर्य उत्पाद या कॉस्मेटिक है जिसे कालिख (तेल या घी को जलाकर तैयार होने वाली काली राख) से तैयार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि घर में प्राकृतिक सामग्रियों की मदद से तैयार किए गए काजल में कई तरह के चिकित्सीय गुण होते हैं और यह बड़ों के साथ-साथ बच्चों की आंखों के लिए भी फायदेमंद है।

(और पढ़ें: बच्चों की आंखों से पानी आना, कारण, लक्षण, इलाज)

कहते हैं कि काजल लगाने से आंखें साफ और ठंडी रहती हैं, विजन यानी देखने की क्षमता बेहतर होती है और आंखों को मजबूती मिलती है। साथ ही साथ आंखों से जुड़ी कई बीमारियां जैसे- कंजंक्टिवाइटिस, मोतियाबिंद और पलकों की सूजन के इलाज में भी काजल का इस्तेमाल होता है। साथ ही साथ काजल, बुरी नजर से भी बचाता है।  

हालांकि अब तक ऐसी कोई वैज्ञानिक स्टडी नहीं हुई है जो काजल लगाने से होने वाले इन फायदों को साबित कर पाए। लिहाजा अगर आप यह जानना चाहते हैं कि क्या नवजात शिशु और छोटे बच्चों को काजल लगाना चाहिए या नहीं तो हमारा सुझाव आपको यही होगा कि आपको अपने बच्चे की आंखों में काजल नहीं लगाना चाहिए। यह एक हानिकारक अभ्यास है जिससे बच्चे की आंखों को कई तरह से नुकसान हो सकता है। 

(और पढ़ें: बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याएं, इन बातों का रखें ध्यान)

इन वजहों से न करें काजल का इस्तेमाल

  • बाजार में व्यवसायिक रूप से तैयार कर बिकने वाले ज्यादातर काजल में लेड यानी सीसा की मात्रा अधिक होती है। लेड बेहद हानिकारक केमिकल होता है जिसका अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो शरीर में लेड का जमाव होने लगता है। इसका शिशु के ब्रेन और बोन मैरो पर बुरा असर पड़ता है। इससे शिशु का आईक्यू कमजोर हो सकता है और एनीमिया का भी खतरा रहता है।
  • एक स्टडी में यह बात सामने आयी है कि काजल में गेलेना, मिनियम, अमोरफस कार्बन, मैग्नेटाइट और जिंक ऑक्साइड भी होता है और ये सारे केमिकल्स भी बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बच्चे की आंखों में काजल लगाते वक्त अगर आपके हाथ या उंगलियां साफ नहीं हैं तो आपके हाथों का इंफेक्शन भी बच्चे की आंख के अंदर जा सकता है।
  • काजल लगाते वक्त अगर जरा सी भी असावधानी हुई तो आपकी उंगलियां या नाखून से भी बच्चे की आंखों को चोट पहुंच सकती है।
  • अगर आपने शिशु को नहलाने से पहले उसकी आंखों का काजल नहीं पोंछा तो हो सकता है कि यह नहाने के पानी के साथ मिलकर शिशु के शरीर के अंदर प्रवेश कर जाए जिससे उसे इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। 
  • बहुत से बच्चों में यह देखने को मिला है कि काजल से बच्चों की आंखों से पानी आने लगता है, आंखों में खुजली, जलन या कई दूसरी तरह की ऐलर्जी भी हो सकती है।

क्या घर पर बना होममेड काजल सेफ है?
अब आप सोच रही होंगी कि बाजार में मिलने वाले काजल में कई तरह के केमिकल्स होते हैं जिसका बच्चे की आंखों और शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। तो क्यों न घर पर ही बादाम का तेल या घी से काजल तैयार कर बच्चे को लगाया जाए। घर पर बना होममेड काजल भले ही केमिकल फ्री हो लेकिन उसके इस्तेमाल से भी बच्चे की आंखों को कोई नुकसान नहीं होगा, इसको साबित करने के लिए भी कोई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद नहीं है। 

(और पढ़ें: नवजात शिशु अंगड़ाई क्यों लेते हैं, जानें कारण)

लिहाजा अच्छा यही रहेगा कि आप बच्चे की आंखों में काजल का इस्तेमाल न करें। अगर आप परिवारवालों की बात मानकर या बुरी नजर से बचाने के लिए बच्चे को काजल लगाना ही चाहते हैं तो उसके कान के पीछे, माथे पर हेयरलाइन के पास या पैरों के तलवे में लगा दें। 

  1. बच्चों को काजल लगाना चाहिए या नहीं, जानें के डॉक्टर
Dr. Yeeshu Singh Sudan

Dr. Yeeshu Singh Sudan

पीडियाट्रिक

Dr. Veena Raghunathan

Dr. Veena Raghunathan

पीडियाट्रिक

Dr. Sunit Chandra Singhi

Dr. Sunit Chandra Singhi

पीडियाट्रिक

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें
कोरोना मामले - भारतx

कोरोना मामले - भारत

CoronaVirus
161126 भारत
33अंडमान निकोबार
3251आंध्र प्रदेश
3अरुणाचल प्रदेश
856असम
3296बिहार
288चंडीगढ़
399छत्तीसगढ़
2दादरा नगर हवेली
16281दिल्ली
69गोवा
15562गुजरात
1504हरियाणा
276हिमाचल प्रदेश
2036जम्मू-कश्मीर
469झारखंड
2533कर्नाटक
1088केरल
73लद्दाख
7453मध्य प्रदेश
59546महाराष्ट्र
55मणिपुर
21मेघालय
1मिजोरम
18नगालैंड
1660ओडिशा
51पुडुचेरी
2158पंजाब
8067राजस्थान
1सिक्किम
19372तमिलनाडु
2256तेलंगाना
242त्रिपुरा
500उत्तराखंड
7170उत्तर प्रदेश
4536पश्चिम बंगाल

मैप देखें