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  1. बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्या होता है? - Bone Marrow Transplant kya hai in hindi?
  2. बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्यों की जाती है? - Bone Marrow Transplant kab kiya jata hai?
  3. बोन मैरो ट्रांसप्लांट होने से पहले की तैयारी - Bone Marrow Transplant ki taiyari
  4. बोन मैरो ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है? - Bone Marrow Transplant kaise hota hai?
  5. बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल - Bone Marrow Transplant hone ke baad dekhbhal
  6. बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद सावधानियां - Bone Marrow Transplant hone ke baad savdhaniya
  7. बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जटिलताएं - Bone Marrow Transplant me jatiltaye

संक्रमण, बीमारी या कीमोथेरेपी (Chemotherapy) की वजह से अस्थि मज्जा (Bone Marrow; बोन मैरो) को क्षति पहुँच सकती है। अस्थि मज्जा का प्रत्यारोपण करने के लिए मूल कोशिकाओं (स्टेम सेल्स) का प्रत्यारोपण किया जाता है। ये नयी मूल कोशिकाएं रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करती हैं और नए अस्थि मज्जा की वृद्धि में मदद करती हैं। इस प्रक्रिया से अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant; बोन मैरो ट्रांसप्लांट) किया जाता है। 

अस्थि मज्जा का अस्वस्थ होना इस प्रत्यारोपण का प्रमुख कारण होता है। लम्बे समय से चला आ रहा संक्रमण अस्थि मज्जा को कुछ समय के बाद कमज़ोर करने लगता है। कीमोथेरेपी, जिसका उपयोग सामान्यतः कैंसर के उपचार में किया जाता है, भी स्वस्थ अस्थि मज्जा को क्षति पहुंचा सकती है। निम्न कारकों से बोन मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है:

अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia)
ऐसा विकार जिसमें अस्थि मज्जा रक्त कोशिकाओं का निर्माण बंद हो जाता है। 

ल्यूकीमिया (Leukemia)
यह रक्त बनाने वाले ऊतकों या अस्थि मज्जा का कैंसर है। ल्यूकेमिया से ग्रस्त व्यक्ति में रक्त कोशिकाओं का असामान्य उत्पादन होता है, आम तौर पर सफेद रक्त कोशिकाओं का।

लिंफोमा (Lymphoma)
यह लसीका प्रणाली (Lymphatic System) का कैंसर है। यह विशेष रूप से लिम्फोसाइटों (Lymphocytes) का कैंसर होता है जो कि एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं हैं। चूंकि ये सफ़ेद रक्त कोशिकाओं को अस्थि मज्जा में निर्मित किया जाता है, अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण लिंफोमा के लिए एक उपचार विधि के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

मल्टिपल मायलोमा (Multiple Myeloma)
यह प्लाज्मा कोशिकाओं (Plasma Cells), जो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, का कैंसर है। इन कोशिकाओं को अस्थि मज्जा में पाया जा सकता है और इसलिए, अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण मल्टिपल मायलोमा के लिए संभावित उपचार हो सकता है।

कीमोथेरपी (Chemotherapy)
यह कैंसर उपचार कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करता है। कीमो दवाओं की उच्च खुराक अस्थि मज्जा को प्रभावित कर सकती है और नयी रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने की अपनी क्षमता को नष्ट कर सकती हैं।

कंजेनिटल न्युट्रोपेनिया (Congenital Neutropenia)
कंजेनिटल का मतलब है कि रोग जन्म से मौजूद है। कंजेनिटल न्युट्रोपेनिया एक विकार है जिसमें संक्रमण बार बार होता रहता है।

सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia)
ये लाल रक्त कोशिकाओं के असामान्य आकार की वजह से उत्पन्न एनीमिया का प्रकार है। ये लाल रक्त कोशिकाएं कम ऑक्सीजन प्रदान करती हैं और रोगी आसानी से थका हुआ महसूस करता है। सिकल सेल एनीमिया उपचार के लिए अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एक विकल्प माना जाता है।

थैलेसीमिया (Thalassemia)
यह एक वंचित रक्त विकार जिसमें शरीर असामान्य प्रकार का हीमोग्लोबिन बनता है। हीमोग्लोबिन रक्त का एक महत्वपूर्ण घटक है और शरीर में प्रत्येक कोशिका को ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है।

बार बार विकिरण में अनावरण (Recurrent Exposure To Radiation)
विकिरण चिकित्सा (Radition Therapy; रेडिएशन थेरेपी) कैंसर के उपचार में प्रयोग किया जाने वाला एक विकल्प है। हालांकि यह मरीज़ के लिए लाभकारी है परन्तु इसके कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं। बार बार विकिरण के आधीन होने से अस्थि मज्जा को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों, जिनमें लम्बे समय तक विकिरण में रहने की आवश्यकता होती है, में काम कर रहे लोगों को भी यह परेशानी हो सकती है। 

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. सर्जरी से पहले किये जाने वाले विशिष्ट टेस्ट्स (Specific Tests Before Surgery)
    किस प्रकार की अस्थि मज्जा कोशिकाओं का प्रत्यारोपण किया जाना है ये जानने के लिए कई टेस्ट्स किया जाना आवश्यक है। उपर्युक्त बताये गए टेस्ट्स के अलावा अस्थि मज्जा बायोप्सी (Bone Marrow Biopsy), स्केलेटल स्ट्रक्चर (Skeletal Structure; कंकाल संरचना) के स्वास्थ्य का आंकलन, दांतों की जांच (Complete Dental Checkup), आदि। संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए डॉक्टर द्वारा बताये गए सारे टेस्ट्स करवाना आवश्यक है। 

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण दो प्रकार से किया जा सकता है: ऑटोलॉगस प्रत्यारोपण (Autologous Transplants) और एलोजेनिएक प्रत्यारोपण (Allogeneic Transplants)।

ऑटोलॉगस प्रत्यारोपण (Autologous Transplants)

इस प्रक्रिया में मरीज़ के ही शरीर की मूल कोशिकाओं से नयी रक्त कोशिकाएं बनाई जाती हैं। इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले मूल कोशिका हार्वेस्टिंग (Stem Cell Harvesting) करनी पड़ती है।

 स्टेम सेल हार्वेस्टिंग (Stem Cell Harvesting; मूल कोशिका हार्वेस्टिंग)

स्टेम सेल हार्वेस्टिंग के लिए, रक्त में प्रसारित परिधीय रक्त स्टेम सेल को एकत्रित किया जाता है और हार्वेस्ट किया जाता है। मोबिलाइजेशन उपचार (Mobilization Treatment) के माध्यम से, अस्थि मज्जा से मूल कोशिकाओं को खून में पारित किया जाता है। एक बार जब मूल कोशिकाएं रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाएँ, एकत्रित करने की प्रकिया शुरू की जा सकती है। 

रक्त को अलग करने की प्रक्रिया में कुछ घंटे लगते हैं और इसे एफेरेसिस मशीन (Apheresis Machine) का उपयोग करके किया जाता है। एक बार आवश्यक मात्रा की मूल कोशिकाएं एकत्रित हो जाती हैं, उन्हें स्टेम सेल प्रोसेसिंग (Stem Cell Processing) और क्रियोप्रिजर्वेशन प्रयोगशाला (Cryopreservation Laboratory) में हार्वेस्ट और फ्रीज किया जाता है। उन्हें प्रयोगशाला में तब तक रखा जाता है जब तक कि वे हार्वेस्टिंग के लिए तैयार न हो जाएँ। 

जैसे रक्त आधान (Blood Transfusion; खून चढ़ाना) की प्रक्रिया होती है, स्टेम सेल्स के फ्रोजेन बैग्स का विगलन किया जाता है और फिर प्रत्यारोपित किया जाता है। स्टेम सेल अस्थि मज्जा की तरफ जाते हैं और फिर अंततः नए रक्त कोशिकाओं का उत्पादन शुरू करते हैं। इस प्रक्रिया को एन्ग्राफ्टमेंट (Engraftment) कहा जाता है।

अंततः, रक्त उत्पादन में वृद्धि होगी। प्रारंभिक चरण में कम रक्त की संख्या के कारण रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है। संक्रमण या जटिलताओं की जांच के लिए प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रोगी की स्वास्थ्य स्थिति की जाँच की जाएगी। प्रक्रिया के बाद कई हफ़्तों तक रक्त परीक्षण किये जाएंगे जिससे यह जांच की सके कि रक्त कोशिकाओं की गणना बढ़ी है या नहीं।

एलोजेनिएक प्रत्यारोपण (Allogeneic Transplants)

आम तौर पर, इस प्रक्रिया को रक्त के कैंसर और अन्य जटिल, गंभीर विकारों जैसे ल्यूकेमिया (Leukaemia) और उसके प्रकार, मायलोमा (Myeloma), मायलोडिसप्लास्टिक सिंड्रोम (Myelodysplastic Syndromes), लिम्फोमा (Lymphoma), अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia) और अन्य दुर्लभ प्रकार के अस्थि मज्जा रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है।

इस प्रक्रिया में, रोगियों की मूल कोशिकाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि आनुवंशिक रूप से मिलने वाले स्टेम सेल डोनर द्वारा डोनेट किया जाता है। डोनर्स ज्यादातर रोगी के परिवार के ही सदस्य होते हैं - भाई या बहन। यदि परिवार का कोई भी सदस्य उपलब्ध नहीं है, तो असंबंधित स्टेम सेल जो रोगी के शरीर के लिए उपयुक्त है, उसे प्रत्यारोपित किया जाता है।

एलोजेनिएक अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण डोनर द्वारा डोनेट की गयी स्वस्थ मूल कोशिकाओं को प्राप्तकर्ता के प्रभावित या क्षतिग्रस्त स्टेम कोशिकाओं के साथ बदल देता है। कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा की ज़्यादा खुराक के कारण स्टेम सेल क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। डोनर्स के रक्त में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं को भी मूल कोशिकाओं के साथ प्रत्यारोपित किया जाता है ताकि संगतता बढ़ जाए और अंतर्निहित बीमारी भी ठीक हो जाये।

जब डोनर आनुवंशिक रूप से संबंधित नहीं होते तो इस प्रक्रिया की जटिलता बढ़ जाती है। असंबंधित स्टेम सेल में ज़रा सा भी अंतर जटिलताओं का कारण हो सकता है। इसलिए, 60 वर्ष से अधिक या गंभीर बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए, एलोोजेनिक अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की सलाह नहीं दी जाती।

वरिष्ठ व्यक्तियों के लिए 'मिनी-' या काम तीव्रता वाले प्रत्यारोपण एक विकल्प होता है। यह प्रक्रिया कम तीव्रता वाली है क्योंकि यह अस्थि मज्जा को पूरी तरह से नष्ट नहीं करती। यह विशेष रूप से अस्थि मज्जा कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए फायदेमंद है क्योंकि डोनर की प्रतिरक्षा प्रणाली (जिसमें सफेद रक्त कोशिकाओं भी शामिल हैं) प्राप्तकर्ता को कैंसर कोशिकाओं को मारने में सहायता करेगी। इसके अलावा यह अंतर्निहित रोगों को रोक देगा जिससे प्राप्तकर्ता के शरीर द्वारा अस्वीकृति की संभावना को कम हो जायेगी।

चूंकि, प्रक्रिया में डोनर द्वारा मूल कोशिकाओं को डोनेट करना शामिल है, उसे ग्रेन्युलोसाइट कॉलोनी स्टिमुलेटिंग फैक्टर (Granulocyte Colony Stimulating Factor, G-CSF) नामक इंजेक्शन की एक सीरीज दी जाती है। इंजेक्शन, आम तौर पर, रक्तप्रवाह में प्रवेश करने के लिए मूल कोशिकाओं को उत्तेजित करने के लिए चार खुराकों में वितरित चार दिनों के लिए दिया जाता है। एक बार स्टेम सेल या पेरीफेरल ब्लड स्टेम सेल (Peripheral Blood Stem Cells, PBSC) रक्तप्रवाह में आवश्यक मात्रा में इकट्ठा हो जाते हैं, तो उन्हें एफेरेसिस मशीन (Apheresis Machine) का उपयोग करके निकाला जाता है जो डोनर से जुड़ी होती है। प्रक्रिया पीड़ारहित है और डोनर उस ही दिन सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकता है।

प्रत्यारोपण के दौरान, डोनेट की गयी स्टेम कोशिकाओं को नसों के माध्यम से रोगी के रक्तप्रवाह में डाला जाता है। प्रक्रिया रक्त आधान के समान है। एक बार, स्टेम सेल प्राप्तकर्ता के रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं, वे अस्थि मज्जा तक जाते हैं और अंततः नयी रक्त कोशिकाओं का उत्पादन शुरू करते हैं।

प्रक्रिया के एक हफ्ते बाद, रक्तगणना में काफी गिरावट आ सकती है। इसलिए, इस अवधि के दौरान संक्रमण की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। कम रक्तगणना से बचने के लिए दवाओं और कभी-कभी, रक्त आधान की आवश्यकता पड़ सकती है।

रिकवरी में समय लगेगा। रिकवरी बिना किसी परेशानी के हो जाए इसके लिए निम्न बातों का ध्यान दें।

संक्रमण की जांच

प्रत्यारोपण के बाद, संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है, खासकर अगर शरीर पर प्रक्रिया का प्रभाव अनुकूल न हो। अगर संक्रमण हो, तो मरीज़ को अपने चिकित्सक को बताना चाहिए जिससे चिकित्सक संक्रमण से लड़ने के लिए दवा निर्धारित करदे। इसलिए उपयुक्त देखभाल से संक्रमण के खतरे को रोककर जटिलताओं से बचा जा सकता है। शुरूआती तीन महीनों में रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होती है लेकिन देखभाल करने से और समय के साथ रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। संक्रमण कई बार गंभीर भी हो सकते हैं, जो घातक सिद्ध हो सकते हैं।

ग्राफ्ट वर्सिस होस्ट डिज़ीज़ (Graft Versus Host Disease, GVHD) एक आम जटिलता है जो इस प्रत्यारोपण के बाद हो सकती है। इसमें डोनेट किया हुआ अस्थि मज्जा प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नहीं पहचान पाता और रक्षात्मक उपाय के रूप में उनपर हमला कर देता है।

स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। रोज़ नहाने से शरीर की त्वचा पर बैठने वाले बैक्टीरिया से बचा जा सकता है। मौखिक स्वच्छता का ध्यान रखना भी ज़रूरी है। दिन में दो बार दांत ब्रश करें। भोजन के बाद दांत साफ़ करने चाहिए। धूल-मिट्टी में न जाएँ। भोजन करने या टॉयलेट जाने के बाद हाथ ढंग से धोयें। सैनिटाइज़र का प्रयोग करें।

सर्जरी के बाद फॉलो-अप (Follow-Up)

डॉक्टर से नियमित रूप से चेक-अप करवाते रहना बहुत ज़रूरी है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित शिड्यूल का पालन करें और डॉक्टर ने जब कहा हो तब चेक-अप के लिए जाएँ। मरीज़ को कितने दिन में जांच करवानी होगी यह सर्जरी की प्रक्रिया और उसकी जटिलता पर निर्भर करता है। डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करें और समय पर दवा लें। निम्न कोई भी परेशानी लगातार कुछ दिनों तक होने पर डॉक्टर को दिखाएँ:

  1. उच्च तापमान ( ऑटोलॉगस प्रत्यारोपण के मरीज़ों में 100°F और एलोजेनिएक प्रत्यारोपण के मरीज़ों में 100.5°F)
  2. सूखी खांसी या हरे या पीले बलगम वाली खांसी लगातार होना 
  3. सांस लेने में कठिनाई
  4. जहाँ सेंट्रल वेनस कैथेटर (Central Venous Catheter) लगाया हो वहां सूजन या लाल होना 
  5. दस्त (और पढ़ें - डायरिया के घरेलू उपचार)

आहार (Diet, डाइट)

अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के बाद रिकवरी और भी बेहतर होगी अगर आप स्वस्थ भोजन का सेवन करेंगे। लाल रक्त कोशिकाओं की गणना को बढ़ाने के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, खजूर, आदि का सेवन करें। ध्यान रखें कि आप आयरन युक्त आहार खाने के बाद विटामिन सी (Vitamin C) युक्त कोई भी पदार्थ का सेवन करें जिससे आयरन आसानी से शरीर में अवशोषित हो जाए। पशु स्त्रोत से मिलने वाला आयरन पौधे या वनस्पति से प्राप्त होने वाले आयरन से अधिक आसानी से अवशोषित हो जाता है इसलिए आपको डॉक्टर द्वारा मीट खान के लिए कहा जा सकता है जिससे अरक्तता (Anaemia, एनीमिया) से बचा जा सके, जो कि आयरन की कमी से होने वाली बीमारी है। 

व्यायाम

शरीर के जल्दी रिकवर होने के लिए व्यायाम बहुत ज़रूरी है। शुरुआत में, आप ज़्यादा थकाने वाले व्यायाम नहीं कर पाएंगे। चलना, तैरना, योग, आदि व्यायाम रोज़ करें जिनसे मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव न पड़े। आप हलके व्यायाम से शुरू करके धीरे धीरे व्यायाम की तीव्रता को बढ़ा सकते हैं। (और पढ़ें – थकान के कारण)

इस प्रक्रिया का सफलता दर इस बात पर निर्भर करता है कि प्रत्यारोपण किये जाने का कारण क्या है। कैंसर के उपचार में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण काफी सफल प्रक्रिया के रूप में सामने आया है। इससे 85 प्रतिशत तक जीवन दर बढ़ा है जो एक समय में शून्य था। अन्य बीमारियों में भी यह काफी लाभकारी पाया गया है। किसी भी प्रकार के जोखिम से बचने और इस प्रक्रिया के सारे लाभ उठाने के लिए इस प्रक्रिया के बाद उपर्युक्त तरीकों और जैसा डॉक्टर कहे वैसे देखभाल किया जाना आवश्यक है। 

सर्जरी के बाद पूरी तरह रिकवरी होने में लगभग एक साल लग सकता है। प्रक्रिया के बाद के पहले 100 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं जिनमें स्धिक्तम जटिलताएं होने का खतरा रहता है। रिकवरी की प्रक्रिया हर मरीज़ के लिए अलग होगी। कुछ मरीज आराम से रिकवर हो जायेंगे और कुछ को परेशानियां हो सकती हैं।

अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण प्रक्रिया में कुछ जोखिम और जटिलताएं भी शामिल हैं। हालांकि, उचित दवाओं और उपचार के साथ उन्हें समाप्त किया जा सकता है। सामान्य जोखिम और जटिलताएं जो अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के बाद हो सकती हैं निम्न लिखित हैं:

  1. संक्रमण
  2. स्टेम सेल (ग्राफ्ट) प्रत्यारोपण विफल हो सकता है
  3. नए प्रकार का कैंसर विकसित हो सकता है
  4. एलोजेनिएक प्रत्यारोपण रोगियों में ग्राफ्ट वर्सिस होस्ट डिज़ीज़ (Graft Versus Host Disease, GVHD) के विकास की संभावना है
  5. किसी अंग को क्षति हो सकती है 
  6. प्रजनन क्षमता में कमी 
  7. मोतियाबिंद 
  8. बहुत दुर्लभ स्थितियों में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण घातक साबित हो सकता है। ऐसा तब होता है जब प्रत्यारोपित मूल कोशिकाओं द्वारा बिलकुल भी प्रतिक्रिया नहीं होती। 
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