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हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह (वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक) मनाया जाता है। इसे मनाए जाने के पीछे का मुख्य कारण नवजातों के स्वास्थ्य की देखभाल करना और महिलाओं में स्तनपान के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस साल की थीम है - इंपॉवर पेरेंट्स, इनेबल ब्रेस्टफीडिंग (Empower Parents. Enable Breastfeeding)।

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में कुल शिशुओं में से लगभग 60% शिशु जन्म के बाद शुरुआती छह माह स्तनपान से वंचित रह जाते हैं। स्तनपान को लेकर लोगों के मन में कुछ मिथ्या भी रहती है, जिसके बारे में इस आर्टिकल में बताया जा रहा है।

स्तनपान के दौरान दर्द होना सामान्य बात है।

कई माओं को शिशु को दूध पिलाने में असहजता महसूस होती है। अगर आपको निप्पल्स में कोई दर्द महसूस हो रहा है तो आपको अपनी ब्रेस्टफीडिंग पोजीशन पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपका बच्चा स्तन (ब्रेस्ट) से सही तरीके से दूध ले पा रहा है या नहीं। अगर आपको स्तनपान की वजह से निप्पल में दर्द महसूस हो रहा है तो आपको लैक्टेशन कंसल्टेंट या स्त्री रोग विशेषज्ञ से मदद लेनी चाहिए।

(और पढ़ें - स्तनपान के दौरान हो रहे दर्द और सूजन का एक अनोखा उपाय)

स्तनपान से बीमारी का खतरा कम होता है। 

स्तनपान से होने वाले स्वास्थ्य लाभों की सूची बहुत लंबी है और यह पूरी तरह से सच भी है कि स्तनपान से मां और बच्चे दोनों की सेहत को कई फायदे मिलते हैं। अगर आपने भी ऐसा कुछ सुना है कि मां का दूध पीने वाले शिशु स्वस्थ रहते हैं तो आपको बता दें कि ये बात बिलकुल सच है और इससे कई बीमारियों के खतरे से बचा जा सकता है। 

(और पढ़ें - स्तनपान से जुड़ी समस्याएं)

स्तनपान से पहले निप्पल्स को धोना चाहिए? 

स्तनपान करवाने से पहले निप्पल्स को धोना आवश्यक नहीं है। जब बच्चे पैदा होते हैं, तो वे पहले से ही अपनी मां की महक और आवाज से परिचित होते हैं। स्तन के निप्पल्स से एक ऐसा पदार्थ बनता है जिसे शिशु सूंघ लेते हैं और उसमें 'अच्छे बैक्टीरिया' होते हैं, जो बच्चों के लिए स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण में मदद करता है इसलिए स्तनपान से पहले निप्पल्स को नहीं धोना चाहिए वरना ये गुड बैक्टीरिया निप्पल से हट जाता है। 

(और पढ़ें - बच्चों को मां का दूध पिलाने के फायदे)

बच्चा अगर अधिक स्तनपान करे, तो इसका मतलब है कि उसे पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा है। 

स्तन का दूध पचाने में आसान होता है, ऐसे में शिशुओं को जल्दी और बार-बार भूख लगती है। फॉर्मूला फीड (शिशु के लिए उपलब्ध पाउडर) लेने वाले बच्चों की तुलना में स्तनपान करने वाले शिशुओं को जल्दी भूख लग जाती है। इसलिए ये कहना गलत होगा कि बच्चा यदि अधिक स्तनपान करता है तो उसे पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा है। स्तनपान करने वाले नवजात शिशु को हर दो से तीन घंटे में दूध पिलाना जरूरी है।

(और पढ़ें - बच्चे को दूध पिलाने का तरीका)

एक्सरसाइज से दूध का स्वाद प्रभावित होता है? 

एक्सरसाइज सभी के लिए जरूरी होती है फिर चाहे वो स्तनपान करवाने वाली मां ही क्यों न हो। रही बात दूध के स्वाद बदलने की तो, इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि एक्सरसाइज से दूध का स्वाद प्रभावित होता है या नहीं। 

फॉर्मूला फूड लेने वाले बच्चे बेहतर नींद लेते हैं? 

न्यूयॉर्क में किए गए एक शोध से पता चला है कि फॉर्मूला फ़ूड लेने वाले बच्चे अच्छी नींद नहीं ले पाते हैं। हालांकि ये जरूर मुमकिन है कि वे अधिक समय तक सोते हों। वास्तव में बोतल का दूध जल्दी पचता नहीं है इसलिए शिशु को भूख नहीं लगती है और वो अधिक समय तक सोते हैं।  

(और पढ़ें -स्तनपान या बोतल से दूध पिलाना: क्या है बेहतर)

यदि आप स्तनपान करवाने में असमर्थ हैं, तो अपने बच्चे को फॉर्मूला दूध देना पूरी तरह से ठीक है। यह आपके बच्चे को वो सभी पोषक तत्व प्रदान कर सकता है जिसकी उसे आवश्यकता है। हालांकि, मां के दूध में एंटीबॉडी और अन्य तत्व भी होते हैं, जो आपके बच्चे को बीमारी से बचाने में सक्षम होते हैं इसलिए मां के दूध को ही शिशु के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

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