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इस दुनिया में मां और शिशु से ज्‍यादा खास और कोई रिश्‍ता नहीं है। जन्‍म लेने से पहले ही शिशु का रिश्‍ता उसकी मां के साथ बन जाता है और जन्‍म के बाद भी उसके लालन-पोषण का जिम्‍मा सबसे ज्‍यादा मां के ऊपर ही होता है। मां बनने के बाद महिलाओं की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी होती है बच्‍चे को दूध पिलाना यानि स्‍तनपान

जी हां, शिशु के विकास के लिए मां को स्‍तनपान करवाना होता है लेकिन अब बोतल से दूध पिलाने का भी चलन है। कई बार पहली बार मां बनी महिलाएं इस असमंजस में रहती हैं कि उनके शिशु के लिए स्‍तनपान ज्‍यादा फायदेमंद रहेगा या फिर वो इसके दूसरे विकल्‍प यानि बोतल से दूध पिला सकती हैं।

(और पढ़ें - बोतल से दूध पिलाने के लिए टिप्स)

अगर आप भी स्‍तनपान और बोतल से दूध पिलाने को लेकर उलझन में हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि शिशु की सेहत एवं विकास के लिए स्‍तनपान ज्‍यादा फायदेमंद है या बोतल का दूध।

आसान उपलब्‍धता
स्‍तनपान करवाने का सबसे अच्‍छा फायदा यही है कि आप जब चाहें अपने शिशु को दूध पिला सकती हैं लेकिन बोतल का दूध हर समय उपलब्‍ध नहीं रह सकता है।

बोतल के दूध के लिए दूध या पाउडर और बोतल का होना जरूरी है। अगर किसी परिस्थिति में आपके पास ये सब चीज़ें नहीं हैं तो आप अपने बच्‍चे को समय पर दूध नहीं पिला पाएंगीं। बोतल से दूध पिलाने के लिए आपको कुछ तैयारियां करनी पड़ती हैं लेकिन स्‍तनपान के लिए आपको कोई भी तैयारी करने की जरूरत नहीं है। शिशु को जब भी भूख लगे आप उसे आसानी से अपना दूध पिला सकती हैं।

(और पढ़ें - स्तनपान से जुड़ी समस्याएं

बीमारियों से बचाव

मां के दूध के ही नहीं बोतल से दूध पीने पर भी सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं जो कि इस प्रकार हैं:

  • स्‍तनपान से शिशु का पाचन तंत्र मजबूत होता है और दस्‍त एवं पेट खराब होने का खतरा कम रहता है। ये बच्‍चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कुछ रिसर्च में भी ये बात सामने आ चुकी है कि मां का दूध पीने वाले बच्‍चों का आईक्‍यू लेवल (दिमाग) बोतल से दूध पीने वाले बच्‍चों की तुलना में ज्‍यादा होता है। इसका मतलब है कि अगर आप अपने बच्‍चे को होशियार और बुद्धिमान बनाना चाहती हैं तो उसे स्‍तनपान जरूर करवाएं। (और पढ़ें - बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं
  • मां का दूध पीने से अचानक होने वाली शिशु की मृत्‍यु का खतरा भी कम रहता है। जो बच्‍चे मां का दूध पीते हैं उनमें अस्‍थमा, एलर्जी, डायबिटीज और मोटापे की संभावना कम रहती है। प्रीमैच्‍योर शिशु के लिए भी मां का दूध अमृत समान माना जाता है।
  • कुछ बच्‍चों को दूध से एलर्जी (लैक्‍टोज़ असहिष्‍णुता) होती है, ऐसे में उनके लिए मां का दूध या किसी पशु का दूध पचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ सप्‍लीमेंट फॉर्म्‍यूला मौजूद हैं जिनमें दूध का तत्‍व बहुत कम होता है। इन चीजों में विकल्‍प के तौर पर सोया प्रोटीन का इस्‍तेमाल किया जाता है।
  • अगर किसी शिशु को दूध से एलर्जी है तो उसे सही पोषण दे पाना बहुत मुश्किल हो जाता है लेकिन सप्‍लीमेंट फॉर्म्‍यूला में इस बात का खास ध्‍यान रखा जाता है कि शिशु को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाएं, जिससे बाकी बच्‍चों की तरह उसका विकास भी सामान्‍य रूप से हो सके। इसलिए ऐसी स्थिति में मां के दूध से ज्‍यादा फायदेमंद फॉर्म्‍यूला फीडिंग होती है।

पौष्‍टिकता

  • मां के दूध का ही पौष्‍टिक विकल्‍प फॉर्म्‍यूला दूध है और इसमें कुछ विटामिंस एवं पोषक तत्‍व भी होते हैं जो कि स्‍तनपान करने वाले बच्‍चों को सप्‍लीमेंट्स से लेने पड़ते हैं।
  • पाउडर या फॉर्म्‍यूला मिल्‍क को मां के दूध जितना पौष्‍टिक बनाने के लिए उनमें मुश्किल से मिलने वाले प्रोटीन, शुगर, फैट और विटामिंस डाले जाते हैं जिन्‍हें घर पर तैयार करना काफी मुश्किल होता है। इसलिए अगर आप अपने शिशु को स्‍तनपान नहीं करवा रही हैं तो उसे ऐसा फॉर्म्‍यूला मिल्‍क दें जिसमें ये सभी पोषक तत्‍व मौजूद हों।
  • हालांकि, मां के दूध में ढेर सारे पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं जो शिशु के विकास में मदद करते हैं। वहीं शिशु फॉर्म्‍यूला मिल्‍क यानि बोतल के दूध के मुकाबले मां के दूध को आसानी से पचा पाते हैं जबकि बोतल से दूध पीने वाले बच्‍चों में कम उम्र में ही मोटापे का खतरा ज्‍यादा रहता है।

समय की बचत

अगर अचानक से फॉर्म्‍यूला (पाउडर से बना) दूध खत्‍म हो जाए तो आप समय पर अपने शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं लेकिन स्‍तनपान करवाने के मामले में ऐसा बिलकुल नहीं है। घर या बाहर, दोनों ही स्थितियों में आप अपने शिशु को ताजा दूध पिला सकती हैं।

(और पढ़ें - मां का दूध बढ़ाने के उपाय

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बातें

  • मां के दूध की तुलना में फॉर्म्‍यूला मिल्‍क ज्‍यादा महंगा होता है। स्‍तनपान के लिए आपको बिलकुल भी पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती है।
  • बोतल से दूध पिलाना मां के लिए ज्‍यादा सहूलियतों से भरा होता है। अगर कभी आपको शिशु से दूर कहीं बाहर जाना हो तो ऐसे में बोतल का दूध ही काम आता है।
  • स्‍तनपान करवाने से महिलाओं का वजन जल्‍दी घटता है। मासिक धर्म समय पर आता है और प्रसव के बाद आयरन की कमी भी नहीं होती। वहीं बोतल से दूध पिलाने पर महिलाओं को अपनी डाइट को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं होती है। (और पढ़ें - प्रसव के बाद की देखभाल
  • बोतल से दूध पिलाने का एक फायदा ये भी है शिुश का संबंध घर के बाकी सदस्‍यों के साथ भी जुड़ पाता है जो कि स्‍तनपान की स्थिति में सिर्फ मां तक ही सीमित हो जाता है।
  • मां के दूध में मौजूद कोई भी एंटीबॉडीज़ फॉर्म्‍यूला मिल्‍क में नहीं मिलते हैं इसलिए शिशु को जिन इंफेक्शन और बीमारियों से सुरक्षा मां का दूध दे पाता है वो बोतल या फॉर्म्‍यूला मिल्‍क नहीं दे पाता है।

अब इन बातों को जाने के बाद आप खुद ही ये निर्णय ले सकती हैं कि आपके शिशु के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है। इन दो विक्‍ल्‍पों में से आपको क्‍या चुनना है, ये पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है। 

(और पढ़ें - बच्चों की बोतल को संक्रमण रहित बनाने के तरीके)

  1. स्तनपान या बोतल से दूध पिलाना: क्या है ज्यादा बेहतर? के डॉक्टर
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