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अपने नवजात बच्चे के लिए स्तनपान या फ़ॉर्मूला फूड का चयन आपका एक व्यक्तिगत निर्णय है। वास्तव में, यह पहला महत्वपूर्ण निर्णय है जो कि एक नई माँ को लेने की जरूरत होती है। किंतु स्तनपान आप और आपके बच्चे दोनों के लिए कई लाभ प्रदान करता है। मगर, सबसे अच्छी बात यह है कि माँ का दूध आपके शिशु को वह प्रदान करता है, जिसकी जरुरत उसे जिंदगी के पहले छह महीनों में बढ़ने के लिए होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ अमेरिकी बाल रोग अकादमी (आप-अमेरिकन अकॅडमी ऑफ पेदियट्रिक्स) सलाह देते हैं कि मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम पौष्टिक आहार होता है।

एएपी(AAP) के अनुसार, माँ का दूध विटामिन और पोषक तत्वों से युक्त होता है जो जन्म के पहले छह महीनों में शिशु के लिए बहुत जरुरी होते हैं, जिसका व्यापक और लंबे समय तक आपके बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के विकास पर असर पड़ता है।

यह सिर्फ़ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि माताओं को भी अपने नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने से कई लाभ होते हैं।

यहाँ माताओं और शिशुओं के लिए स्तनपान के शीर्ष 10 लाभ बताए जा रहे हैं।

  1. बच्चे को दूध पिलाने के फायदे बढ़ाएं मानसिक विकास - breastfeeding for baby IQ in Hindi
  2. माँ के दूध के फायदे करें शिशु की देखभाल - Maa ke doodh ke fayde kare bache ki dekhbhal in Hindi
  3. माँ के दूध के लाभ बचाए कैंसर से - Breastfeeding Reduces Breast Cancer in Hindi
  4. बच्चे को दूध पिलाने के लाभ बेहतर दृष्टि के लिए - Bache ko doodh pilane ke flabh for eyesight in Hindi
  5. ब्रेस्टफीडिंग के फायदे रखें पाचन तंत्र को स्वस्थ - Breastfeeding ke fayde for Digestion in Hindi
  6. स्तनपान के लाभ करे माताओं का वजन कम - Stanpan ke labh for weight loss in Hindi
  7. ब्रेस्टफीडिंग के लाभ करे बच्चे में दाँत क्षय का खतरा कम - Breastfeeding ke labh for teeth and gums in Hindi
  8. स्तनपान के गुण करे मधुमेह के खतरे को कम - Stanpan ke gun rakhe diabetes ko dur in Hindi
  9. स्तनपान के फायदे बढ़ाएं बच्चों का विकास - Breast milk ke fayde for baby growth in Hindi
  10. स्तनपान के लाभ बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता - Breastfeeding for Boosting Immunity in Hindi
  11. स्तनपान या बोतल से दूध पिलाना: क्या है ज्यादा बेहतर?

माँ के दूध में कुछ ऐसे अम्ल होते हैं जो बच्चे के दिमाग़ का विकास पूर्ण रूप से करते हैं। जिन्हें वसीय अम्ल कहा जाता है। जो नवजात शिशु की बुद्धि के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। शिशु के जन्म के शुरुआती कुछ माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशु का संज्ञानात्मक विकास बेहतर होता है। जिसका मतलब है कि स्तनपान आपके शिशु को अधिक बुद्धिमान बनाता है। मां का दूध का बच्चों के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है।

2008 में जनरल मनश्चिकित्सा के अभिलेखागार में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट है कि लंबे समय तक स्तनपान बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में सुधार करता हैं। जिन बच्चो ने जितने लम्बे समय तक स्तनपान की होती है उनमें मानसिक विकास तेजी से होता है और वो अधिक बुद्धिमान भी होते है |

न्यूरोइमॉगे में प्रकाशित एक अध्ययन में 2013 की रिपोर्ट है कि शिशु को स्तनपान बच्चों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है।

एक महीनें से एक साल की उम्र में शिशु में SIDS (अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण) का खतरा रहता है। कम से कम छह महीनो के लिए अपने बच्चे की अच्छे से देखभाल करना अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) को रोकने में मदद कर सकता है, क्योंकि मां का दूध शिशु को इस ख़तरे से बचाता है।

बाल रोग के जर्नल में प्रकाशित 2009 के एक अध्ययन की रिपोर्ट है कि स्तनपान करने से 50 प्रतिशत तक SIDS का जोखिम को कम हो जाता है।

स्तनपान अधिक आसानी से शिशुओं को नींद से जगा देता है, जो बदले में SIDS के खिलाफ शिशु की रक्षा करता हैं। इसके अलावा, प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण में सहायता करता है।

स्तनपान कराने से बच्चो को ही नहीं बल्कि माताओं को भी बहुत सारी बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। स्तनपान बच्चों में कैंसर के खतरे के साथ साथ माताओं में भी इसके खतरे को कम करता है।

बाल चिकित्सा और बाल स्वास्थ्य के जर्नल 2008 में प्रकाशित अध्ययन में पाया है कि स्तनपान पीडियाट्रिक कैंसर के साथ जुड़ा हुआ है इसलिए पूर्ण रूप से स्तनपान करने से इससे बचाव किया जा सकता है।

मानव स्तनपान के जर्नल 2012 में प्रकाशित अध्ययन में पाया है कि मानव दूध में लिम्फोब्लासटिक ल्यूकेमिया(lymphoblastic leukemia) जैसे रोग के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करने के लिए TRAIL नामक प्रोटीन पाया जाता है।

एक्टा पएडियट्रिका 2015 में प्रकाशित ताजा अध्ययन में पाया गया है कि माताओं के लिए अधिक से अधिक 12 महीनों के लिए स्तनपान कराना स्तन या गर्भाशय के विकास के साथ जुड़े जोखिम को कम करता है। इससे महिलाओं में स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी कम होता है। 

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स्तनपान कराना भी आपके बच्चे की चश्मा पहनने की समस्या को कम कर देता है।

लंदन में 2007 के अध्ययन बाल स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन बच्चों ने शिशुओं के रूप में स्तनपान किया था उनमें बेहतर दृष्टि पाई गई है।

शोधकर्ताओं ने 4 और 6 की उम्र के बीच 262 बच्चों पर अध्ययन किया, जिनमे 78 को स्तनपान कराया गया था और 184 को फार्मूला दूध दिया गया था। जिसमें स्तनपान करने वाले बच्चों की दृष्टि अधिक तेज पाई गई।

मां के दूध में फैटी एसिड और DHA  होता है जो बच्चो में उच्च एकाग्रता और बेहतर दृष्टि के पीछे का कारण है। DHA आंख की रेटिना के मुख्य संरचनात्मक घटकों में से एक है।

इसके अलावा, मां का दूध नेत्र संक्रमण का मुकाबला करने के लिए अच्छा है। इसके प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। 

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स्तनपान करने वाले बच्चों को दस्त और पेट की ख़राबी से ग्रस्त होने की कम संभावना होती है। बच्चों में एक स्वस्थ पाचन तंत्र विकसित करने के लिए, मां का दूध पोषक तत्वों के सही संतुलन में मदद करता है। विशेष रूप से, वसा और एंटीबॉडी युक्त कोलोस्ट्रम बच्चों की जरूरतों के लिए अनुकूल रूप से विकास में मदद करता है।

मां के दूध के संघटक आदर्श रूप से आपके शिशु की आंतों के लिए अनुकूल है। इसलिए यह आसानी से पच जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तनपान जर्नल 2014 में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि स्तनपान शिशु की दस्त और तीव्र श्वसन संक्रमण के खिलाफ रक्षा करता है। 

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स्तनपान, प्रसवोत्तर के बाद वजन को कम रखने में मदद करता है। जैसे ही मां बच्चो को स्तनपान करवाने लगती है, जिससे उनके शरीर में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण उनका वजन कम होने लगता है।

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एक बच्चे को स्तनपान कराते समय, एक माँ को दैनिक रूप से अतिरिक्त 400 से 500 कैलोरी की जरूरत होती है। लेकिन स्तनपान के समय, एक ही समय में, 500 कैलोरी एक दिन में ख़र्च हो जाती है।

क्लीनिकल न्यूट्रीशन के अमेरिकन जर्नल 2008 में प्रकाशित एक अध्ययन से निष्कर्ष निकाला है कि जिन महिलाओं का गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में वजन बढ़ जाता है वो प्रसव के छह महीने बाद तक स्तनपान कराने से अतिरिक्त वजन को कम कर सकती है। 

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स्तनपान जबड़े की हड्डी और ऊपरी वायु मार्ग की मांसपेशियों के विकास में मदद करता है, जो बच्चों में मौखिक गुहा के बेहतर तालमेल के लिए महत्वपूर्ण है।

चार से पांच महीने के लिए स्तनपान बच्चे में दाँत क्षय का खतरा भी कम कर देता है।

2007 में ब्राजील के रेविस्टा दे साúदे पúब्लिका(Revista de Saúde Pública) में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि नौ महीने से अधिक के लिए स्तनपान मालोचकलुशन(malocclusion) को रोकने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।

स्तनपान दोनों माँ और उसके शिशु में मधुमेह के खतरे को कम करता है। मधुमेह गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है जैसे हृदय रोग, तंत्रिका क्षति, गुर्दे की क्षति, आंख की क्षति, पैर क्षति और त्वचा की समस्याओं के रूप में। जिन बच्चों को बचपन में पर्याप्त रूप से मां का दूध पीने को नहीं मिलता, उनमें बचपन से शुरू होने वाले मधुमेह की बीमारी अधिक होती है।

मधुमेह आवाज 2007 में प्रकाशित एक अध्ययन का सुझाव है कि दोनों माताओं और शिशुओं के लिए स्तनपान का मधुमेह के दोनो टाइप 1 और टाइप 2 पर काफी प्रभाव पड़ता है।

जिन माताओं को मधुमेह नहीं है, स्तनपान कराने से उनके जीवन में मधुमेह का खतरा भी कम हो जाता है, जबकि मधुमेह के साथ माताओं को इंसुलिन के लिए उनकी आवश्यकता को कम और  नियंत्रण में सुधार कर सकते हैं।

मधुमेह समीक्षा की 2011 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, स्तनपान भविष्य में दोनों टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के विकास के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।

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मां के दूध में प्रोटीन, वसा, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट का सही संयोजन होता है जो आपके बच्चे के विकास में मदद करते हैं। मां के दूध में मौजूद प्रोटीन आसानी से पच जाता है और इसमें संक्रमण-सुरक्षा के गुण होते हैं। मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। माँ का दूध प्राकृतिक रूप से शिशु वृद्धि के लिए आवश्यक सभी घटकों से परिपूर्ण होता है। इसलिए यह आपके शिशु के जीवन के लिए जरूरी है।

मां के दूध में कैल्शियम और लोहा होता है जो शिशु के द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिए जाते हैं, जो स्वस्थ हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। इसके अलावा, मां के दूध में स्वस्थ वसा शामिल हैं जो कि मस्तिष्क, रेटिना और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए आवश्यक है।

लैक्टोज, कार्बोहाइड्रेट भी मां के दूध में पाया जाता है, जो शिशुओं में कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य खनिजों के अवशोषण से आंतों में सुधार लाता हैं।

स्तनपान बच्चे को हर रोग से लड़ने के लिए सक्षम करता है। खाद्य एलर्जी, एक्जिमा और अस्थमा उन बच्चों में कम पाए गये जिन्होनें कम से कम चार महीने के लिए स्तनपान किया है।

यह एक कम वसा और उच्च प्रोटीन वाला दूध है जो नवजात शिशु की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। इसलिए यह आपके शिशु के जीवन के लिए जरूरी है। इसके अतिरिक्त, स्तनपान टीकाकरण के लाभ बढ़ा देता है। 

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एलर्जी, दमा और इम्यूनोलॉजी के इतिहास में 2003 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया स्तनपान भविष्य में एलर्जी जैसे रोगों के विकास के खिलाफ रक्षा में मदद करता है।

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