धूम्रपान यानी स्मोकिंग सेहत के लिए खतरनाक ही नहीं जानलेवा हो सकती है यह सब जानते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर तमाम मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा है कि धूम्रपान करने वाला कोई व्यक्ति कोरोना वायरस की चपेट में आ जाए, तो इससे होने वाली बीमारी कोविड-19 उसकी जान ले सकती है। लेकिन, अगर कोई यह कहे कि स्मोकिंग कोविड-19 से बचा सकती है तो हैरानी होना लाजमी है।
यह दिलचस्प बात फ्रांस से निकली है। वहां के शोधकर्ताओं ने इस संबंध में ऐसा हैरान करने वाला अनुमान (या हाइपोथीसिस) लगाया है, जिसे जानने के बाद स्मोकिंग और कोविड-19 को लेकर हमारी समझ को चुनौती मिलती है। इस अनुमान के तहत उन्होंने कहा है कि शरीर में निकोटीन की मौजूदगी से कोविड-19 से लड़ने में मदद मिल सकती है। फ्रांस के इन वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस अनुमान के तहत परीक्षण भी कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस के कई संस्थानों का ऐसा मानना है। इनमें फ्रांस के सरकारी अनुसंधान संस्थान 'सीएनआरएस' और 'इन्सर्म भी शामिल हैं। इसके अलावा वहां के हॉस्पिटल नेटवर्क के तहत आने वाली कुछ मेडिकल यूनिवर्सिटी भी यह दावा करने वालों में शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने एक फ्रांसीसी पत्रिका के लिए लिखे एक शोधपत्र में भी इस अनुमान का वर्णन किया है। फ्रांसीसी विशेषज्ञों के मुताबिक, उन्होंने दो वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के आधार पर यह दावा किया है। पहला, फ्रांस के एक अस्पताल में कोविड-19 से हुई मौतों के सांख्यिकीय विश्लेषण से जुड़ा है, जबकि दूसरा, मानव शरीर की बायोकेमिस्ट्री (जैव रसायन) से संबंधित है।
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सांख्यिकीय आधारित दृष्टिकोण
यह एक क्रॉस-सेक्शनल सर्वे आधारित अध्ययन था, जिसमें शोधकर्ताओं ने एक ही समय में मरीजों पर स्मोकिंग और कोविड-19 के प्रभाव का आंकलन किया। उन्होंने दो समूहों का अध्ययन किया। पहले में 349 मरीज थे, जिनका 28 फरवरी से 30 मार्च के बीच अस्पताल में इलाज किया गया था। दूसरे ग्रुप में 139 मरीज थे, जो इलाज के दौरान अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे। शोध में इन प्रतिभागियों से यह भी पूछा गया कि क्या वे कोविड-19 से ग्रस्त होने के समय धूम्रपान कर रहे थे। इसके बाद दोनों समूहों के धूम्रपान की दर की तुलना फ्रांस में स्मोकिंग करने वाले लोगों की संख्या से की गई। बता दें कि फ्रांस में 25 प्रतिशत से ज्यादा लोग सिगरेट पीते हैं।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देखा कि अस्पताल में भर्ती हुए 4.4 प्रतिशत कोविड-19 मरीज स्मोकिंग करते थे। वहीं, बिना भर्ती हुए मरीजों में से 5.3 प्रतिशत धूम्रपान करते थे। इस बारे में उन्होंने लिखा है, 'जो लोग इस समय स्मोक कर रहे हैं, उनमें आम जनसंख्या की तुलना में सार्स-सीओवी-2 के गंभीर लक्षण दिखने की संभावना कम है।' फ्रांस में मानव शरीर के केमिकल स्ट्रक्चर के प्रमुख विशेषज्ञ माने जाने वाले न्यूरोसाइंटिस्ट जीन पियेरे ने एक अन्य विशेषज्ञ प्रोफेसर जाहिर अमूरा के साथ मिल कर यह स्वतंत्र सांख्यिकीय अध्ययन किया था।
जैव रासायनिक दृष्टिकोण
कोविड-19 के विषय में रिसेप्टर शब्द अक्सर जानने को मिलता है। ये प्रोटीन से बने स्ट्रक्चर होते हैं, जो शरीर में मौजूद सिग्नल्स को रिसीव करने का काम करते हैं। ये सिग्नल शरीर में मौजूद अलग-अलग तत्वों या पदार्थों (हार्मोन, ड्रग, एंटीजन) से मिलते हैं। मिसाल के लिए, मानव कोशिका की सतह पर मौजूद एसीई2 रिसेप्टर नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के लिए शरीर में घुसने का रास्ता बनाता है।
फ्रांस के शोधकर्ताओं ने निकोटीन को लेकर जो अनुमान लगाया है, उसका केंद्रीय आधार एक रिसेप्टर ही है, जिसका नाम है 'एसीटोकोलीन', जो एक प्रकार का केमिकल भी है। इसीलिए इसे 'निकोटिनिक एसीटोकोलीन रिसेप्टर' नाम दिया गया है, जिसका एब्रीविएशन 'nAChR' है। यह रिसेप्टर तंत्रिका तंत्र, मांसपेशी और कुछ विशेष प्रकार के ऊतकों में पाया जाता है। जीन पियेरे इस रिसेप्टर पर दशकों से शोध कर रहे हैं।
निकोटीन शरीर में मौजूद nAChR रिसेप्टर को बांध देता है। इसी के आधार पर फ्रांसीसी शोधकर्ताओं ने अनुमानतः कहा है, 'अगर (एसीई2) रिसेप्टर में निकोटीन मौजूद हो और उसी दौरान कोरोना वायरस (शरीर में) आए तो निकोटीन, रिसेप्टर और वायरस की परस्पर प्रकिया को ब्लॉक कर देगा।' लेकिन इस थ्योरी का साबित होना अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निकोटीन की इस 'क्षमता' के सबूत के लिए 1,500 लोगों के साथ ट्रायल किया जाएगा, जिसमें मरीजों के साथ हेल्थवर्कर्स भी शामिल होंगे।
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