ब्लड इंफेक्शन यानी सेप्सिस किसी संक्रमण की वजह से होने वाली एक हानिकारक स्थिति है। लेकिन क्या गंभीर सेप्सिस के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा कोविड-19 बीमारी के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है? अब तक कई दवाओं को कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल करने की खबरें सामने आई हैं। इनमें एंटी-मलेरिया (एचसीक्यू), इबोला वायरस और एचआईवी के इलाज से जुड़े ड्रग्स शामिल हैं। अब खबर है कि इस सिलसिले में सेप्सिस की दवा 'सेप्सिवैक' को कोविड-19 के मरीजों पर टेस्ट किया जाने वाला है। यह परीक्षण कहीं और नहीं, बल्कि भारत में होने जा रहा है।
50 मरीजों को दी जाएगी दवा
अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद स्थित कैडिला फार्मास्युटिकल्स और काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के संयुक्त सहयोग से 'सेप्सिवैक' दवा बनाई जाती है। रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली और भोपाल स्थिति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स और चंडीगढ़ पीजीआई में 50 कोविड-19 मरीजों को यह दवा दी जाएगी। जम्मू के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन के निदेशक राम विश्वकर्मा ने बताया कि अगले दो महीनों में इस दवा के इन्सानों पर होने वाले ट्रायल के नतीजे में भी सामने होंगे।
(और पढ़ें- कोरोना वायरस: गुजरात में तीन गुना से भी ज्यादा तेजी से बढ़े मामले)
अखबार ने बताया है कि सीएसआईआर की प्रयोगशाला 'आईआईआईएम' में सेप्सिवैक दवा को लेकर परीक्षण किए गए थे जिसके बाद यह फैसला किया गया है। ऐसा मानना है कि यह दवा कोविड-19 के गंभीर रूप से बीमार रोगियों की प्रतिरक्षा-प्रणाली को मजबूत करने का काम कर सकती है। हालांकि इसके कुछ दुष्प्रभावों की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन फिलहाल शोधकर्ता परीक्षण को ध्यान में रखकर चल रहे हैं। डॉ. विश्वकर्मा का कहना है, ‘अच्छी बात यह है कि हमारे पास बनी बनाई दवा उपलब्ध है। इसलिए अब इसका टेस्ट किया जा सकता है। हमें पहले ही तीन चरणों के ट्रायल की अनुमति मिल गई है और अगर दवा से अच्छे संकेट मिलते हैं तो ट्रायल को बढ़ाया जा सकता है।
कैसे काम करती है यह दवा?
जानकारी के मुताबिक, सेप्सिवैक में माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (एमडब्ल्यू) का इस्तेमाल किया गया है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने का काम करती है। पिछले कुछ ट्रायलों में इस दवा के सेवन से सेप्सिस के रोगियों की मृत्यु दर में सीधे 11 प्रतिशत की कमी आई है और 55.5 प्रतिशत रोगियों की दर में तुलनात्मक रूप से कमी देखी गई है। दवा निर्माता कंपनी कैडिया फार्मास्युटिक्लस ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दावा किया है कि सेप्सिवैक के इस्तेमाल से मरीज के वेंटिलेटर पर होने की अवधि को कम किया जा सकता है। इसके अलावा संक्रमण को दोबारा फैलने से भी रोका जा सकता है।
उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोरोना वायरस: भारत में कोविड-19 के इलाज के लिए अब ब्लड इन्फेक्शन या सेप्सिस की दवा का होगा ट्रायल है
- Proctosedyl BD Cream - ₹118
- Anovate Ointment - ₹117
- Covifor Injection - ₹3780
- Fabiflu 400 Tablet - ₹856
- Fabiflu 200 Mg Tablet - ₹1292
- Fabiflu (Favipiravir) 200 Mg Tablet - ₹1292
- Fabiflu (Favipiravir) 400 Mg Tablet - ₹1224
- Pilo GO Cream - ₹75
- Anovate Cream - ₹111
- Remdesivir Injection - ₹10500
- Molusafe Capsule - ₹457
- Movfor 200 Mg Capsule - ₹2490
- Molflu 200 Mg Capsule - ₹1400
- Molulife 200 Capsule - ₹1399
- Cipmolnu 200 Mg Capsule - ₹2000
- Molxvir 200 Mg Capsule - ₹1520
- Alzumab Injection - ₹8229
- Immunocin Alpha Plus 1.6mg Injection - ₹5998
- Imualfa 1.6mg Injection 1ml - ₹2628
- Molnutor 200 Mg Capsule - ₹2000




