नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के मरीजों में अब इसका एक और नया लक्षण देखने को मिल रहा है। पूरी दुनिया से ऐसी कई रिपोर्टें आई हैं, जिनमें डॉक्टरों ने बताया है कि कैसे कोरोना वायरस के मरीजों के शरीर में खून के थक्के या खून के जमने (ब्लड क्लॉटिंग) के लक्षण दिख रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन, इटली और अमेरिका में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या आई है। इन अनुभवों ने कोविड-19 के संंबंध में डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है।
खबरों के मुताबिक, मार्च के अंत में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर स्थित माउंट सिनाई अस्पताल के डॉक्टरों ने कोविड-19 के कुछ मरीजों में कुछ अजीब लक्षण देखे। उन्होंने पाया कि इन मरीजों के शरीर के अलग-अलग अंगों में ब्लड क्लॉटिंग हो रही थी। रिपोर्टों की मानें तो अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों की किडनी में समस्या होने पर जब विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनकी जांच की तो पाया कि उनकी किडनी की नलिकाएं ब्लड क्लॉटिंग के चलते जम गई थीं। वहीं, कुछ मरीजों के फेफड़ों में अजीब कारणों से रक्त प्रवाह की कमी देखी गई। जब जांच की गई तो पता चला कि उनमें भी ब्लड क्लॉटिंग की समस्या थी। इसके अलावा, न्यूरोसर्जन्स ने कोरोना वायरस से संक्रमित कुछ लोगों में स्ट्रोक के लक्षण देखे, जिसकी वजह उनकी दिमाग में हुई ब्लड क्लॉटिंग थी।
इन अनुभवों के बाद अस्पताल के एक न्यूरोसर्जन डॉ. जे मोक्को ने कहा कि कुछ डॉक्टर मानते हैं कि कोविड-19 केवल फेफड़ों से जुड़ी बीमारी नहीं है। वे बताते हैं कि मार्च महीने के मध्य में अस्पताल ने 30 से ज्यादा मरीजों के मामले में देखा कि उनके दिमाग में रक्त प्रवाह कई जगहों से रुका हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से पांच मरीजों की उम्र 49 साल के कम थी। वहीं, एक मरीज की उम्र तो 31 साल थी। इनमें से किसी में भी पहले से स्ट्रोक के लक्षण नहीं थे। डॉ. मोक्को ने बताया कि इन 32 मरीजों में से कम से कम आधे कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे।
वहीं, न्यूयॉर्क स्थित वेल कॉर्नेल मेडिसिन अस्पताल के रुधिर रोग विशेषज्ञ डॉ. जेफरी लॉरेंस के मुताबिक, अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कोविड-19 के कई मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या देखने को मिली है। 'लाइव साइंस' ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि डॉक्टरों ने तो मरीजों के पैरों में भी क्लॉटिंग के निशान देखे हैं। यह हालत तब थी जब डॉक्टर इस समस्या से मरीजों को बचाने के लिए ब्लड-थिनिंग (रक्त को पतला करना) का इस्तेमाल कर रहे थे। अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसी तरह के मामले इटली और चीन में भी सामने आ चुके हैं।
यही वजह है कि अब कोविड-19 के मरीजों को ब्लड-थिनिंग की हाई डोज दी जा रही हैं। माउंट सिनाई अस्पताल के प्रेजिडेंट डॉ. डेविड रेक का कहना है कि शायद इससे इस बीमारी को ज्यादा गंभीर होने से रोकने में मदद मिले। हालांकि इस संबंध में प्रोटोकोल स्पष्ट हैं कि ज्यादा गंभीर मरीजों पर ये डोज नहीं आजमानी हैं, क्योंकि इससे दिमाग या शरीर के दूसरे अंगों में ब्लीडिंग हो सकती हैं।
उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोरोना वायरस के मरीजों में हो रही ब्लड क्लॉटिंग, डॉक्टरों ने नया लक्षण होने को अंदेशा जताया है
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