कोविड-19 की वैक्सीन बनाने की दौड़ में अब थाइलैंड भी शामिल हो गया है। खबर है कि वहां चूहों पर किए गए परीक्षण कामयाब रहे हैं। इसके बाद थाइलैंड सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अगले साल तक उनके यहां कोविड-19 की वैक्सीन तैयार हो सकती है।
थाइलैंड में चूहों पर किए गए ट्रायलों के सकारात्मक परिणाम आने के बाद अब वहां के वैज्ञानिक बंदरों पर यह एमआरएनए आधारित वैक्सीन आजमाएंगे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अगले हफ्ते से यह ट्रायल शुरू हो जाएगा। थाइलैंड सरकार द्वारा गठित 'सेंटर फॉर कोविड-19 सिचुएशन एडमिनिस्ट्रेशन' के प्रवक्ता तावीसिन विसानुयोथिन ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि थाइलैंड सबसे पहले यह वैक्सीन बनाने वाला देश बनना चाहता है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा, 'थाइलैंड की वैक्सीन अगले साल से इस्तेमाल में आ सकती है।'
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गौरतलब है कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए इस समय दुनियाभर में सौ से ज्यादा वैक्सीनों पर शोध कार्य और परीक्षण चल रहे हैं। इनमें से कई क्लिनिकल ट्रायल की स्टेज पर हैं। हाल के दिनों में कई कंपनियों की वैक्सीनों और दवाओं ने काफी चर्चा बटोरी है। इनमें अमेरिकी दवा कंपनी गिलीड साइंसेज की रेमडेसिवियर ड्रग, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की 'सीएचएडीओएक्स1 एनसीओवी-19', और मॉडेर्ना, फाइजर-बायोएनटेक, कैनसीनो बायोलॉजिक्स जैसी कंपनियों की वैक्सीन प्रमुख रूप से शामिल हैं। ज्यादातर कंपनियों ने दावा किया है कि वे इस साल के अंत या अगले की शुरुआत तक वैक्सीन उपलब्ध करा देंगी। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अप्रैल में ही साफ कर दिया था कि कोविड-19 की वैक्सीन आने में अभी कम से कम 12 से 18 महीनों का समय है।
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बहरहाल, थाइलैंड के नेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट में जो वैक्सीन तैयार की गई है, उसे नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के मेसेंजर-आरएनए (एमआरएनए) से बनाया गया है। यह मॉलिक्यूल कोशिकाओं की मदद से एंटीजन (वायरसों की सतह पर मौजूद मॉलिक्यूल्स) पैदा करता है, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस के खिलाफ एक्शन मोड में आ जाता है। गौरतलब है कि फाइजर-बायोएनटेक और मॉडेर्ना जैसी कंपनियां भी एमआरएनए की मदद से ही कोविड-19 की कारगर वैक्सीन बनाने में लगी हुई हैं। यहां बताते चलें कि मॉडेर्ना कंपनी की वैक्सीन के शुरुआती ह्यूमन ट्रायल भी कामयाब रहे हैं, जिसके बाद इसे कोरोना वायरस संकट के खिलाफ नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
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गौरतलब है कि चीन के बाहर कोविड-19 के पहले मामले थाइलैंड में ही सामने आए थे। इस महामारी के शुरुआती दिनों में थाइलैंड मरीजों की संख्या के मामले में पांचवें नंबर पर था। लेकिन उसने इस संकट से बेहतरीन तरीके से निपटने का उदाहरण पेश किया है। यही वजह है कि केवल 3,034 मरीजों के साथ थाइलैंड आज 70वें नंबर पर है। जबकि अमेरिका और यूरोपीय देश अपने खराब प्रबंधन के चलते सबसे बुरे हालात का सामना कर रहे हैं। थाइलैंड में कोविड-19 से अब तक केवल 56 लोगों की मौत हुई है, जो कुल मामलों का केवल 1.84 प्रतिशत है। वहीं, यहां कोरोना वायरस से बचाए गए मरीजों का आंकड़ा 2,888 है, जो कुल मरीजों का 95 प्रतिशत है।
उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें थाइलैंड भी कोविड-19 की वैक्सीन बनाने की दौड़ में शामिल, अगले साल तक उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई है
- Proctosedyl BD Cream - ₹118
- Anovate Ointment - ₹117
- Covifor Injection - ₹3780
- Fabiflu 400 Tablet - ₹856
- Fabiflu 200 Mg Tablet - ₹1292
- Fabiflu (Favipiravir) 200 Mg Tablet - ₹1292
- Fabiflu (Favipiravir) 400 Mg Tablet - ₹1224
- Pilo GO Cream - ₹75
- Anovate Cream - ₹111
- Remdesivir Injection - ₹10500
- Molusafe Capsule - ₹457
- Movfor 200 Mg Capsule - ₹2490
- Molflu 200 Mg Capsule - ₹1400
- Molulife 200 Capsule - ₹1399
- Cipmolnu 200 Mg Capsule - ₹2000
- Molxvir 200 Mg Capsule - ₹1520
- Alzumab Injection - ₹8229
- Immunocin Alpha Plus 1.6mg Injection - ₹5998
- Imualfa 1.6mg Injection 1ml - ₹2628
- Molnutor 200 Mg Capsule - ₹2000




