गैलवे-मोएट सिंड्रोम - Galloway-Mowat Syndrome in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

January 07, 2021

January 13, 2021

गैलवे-मोएट सिंड्रोम
गैलवे-मोएट सिंड्रोम

गैलवे-मोएट सिंड्रोम एक दुर्लभ न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है। न्यूरोडीजेनेरेटिव का मतलब है मस्तिष्क के कुछ हिस्सों का काम करना बंद कर देना। इस विकार में विकास संबंधी समस्याएं व शारीरिक असामान्यताएं हो सकती हैं। इस बीमारी (जीएमएस) से प्रभावित बच्चे अक्सर जन्म के शुरुआती कुछ वर्षों के बाद जीवित नहीं रह पाते हैं। गैलवे-मोएट सिंड्रोम वाले रोगियों में किडनी खराब होने की वजह से बचपन में ही इंट्रैक्टेबल दौरे (ऐसे दौरे जो दवाओं से नियंत्रित नहीं होते) और नेफ्रोटिक सिंड्रोम (किडनी डिसऑर्डर), साइकोमोटर डिलेय, मानसिक मंदता और बचपन की शुरुआती अवस्था में ही मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है।

इस बीमारी को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे गैलवे सिंड्रोम, माइक्रोसेफली नेफ्रोसिस सिंड्रोम, हाइटल हर्निया माइक्रोसेफली नेफ्रोसिस इत्यादि।

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गैलवे-मोएट सिंड्रोम का संकेत और लक्षण - Galloway Mowat Syndrome Symptoms in Hindi

गैलवे-मोएट सिंड्रोम के संकेत और लक्षणों में शामिल है:

  • सिर का आकार छोटा होना (माइक्रोसेफली)
  • विकास में देरी (और पढ़ें - बच्चों का देर से चलना)
  • दौरे पड़ना
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम
  • हाइटल हर्निया
  • ऑप्टिक एट्रोफी
  • मूवमेंट डिसआर्डर (चलने फिरने में दिक्कत)
  • इंट्लेक्चुअल डिसेबिलिटी (सीखने, प्रॉब्लम को सॉल्व करने या निर्णय लेने में कठिनाई)

गैलवे-मोएट सिंड्रोम का कारण - Galloway Mowat Syndrome Causes in Hindi

गैलवे-मोएट सिंड्रोम का कारण जीन में बदलाव है। यह डब्लूडीआर73 (WDR73) नामक जीन में गड़बड़ी की वजह से होता है। यह ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न के जरिये बच्चों में परित होता है, जिसका मतलब है कि प्रभावित बच्चे को उसके माता पिता दोनों से जीन की खराब प्रतियां मिली हैं। हालांकि माना जाता है कि कुछ अन्य जीन भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

यह जीन ऐसे प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देते हैं, जो शरीर के कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब इन जीन में गड़बड़ी होती है, तो ऐसे में प्रोटीन दोषपूर्ण, अक्षम या अनुपस्थित हो सकता है। प्रोटीन के कार्यों के आधार पर, यह शरीर के अलग अलग अंगों व उनकी कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

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गैलवे-मोएट सिंड्रोम का निदान - Galloway Mowat Syndrome Diagnosis in Hindi

गैलवे-मोएट सिंड्रोम का निदान जन्म के बाद नैदानिक मूल्यांकन (क्लिनिकल इवैलुएशन), शारीरिक लक्षण, लैब टेस्ट, इमेजिंग टेक्निक (जैसे एक्स रे, अल्ट्रासाउंड इत्यादि) और जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए किया जा सकता है। जेनेटिक परीक्षण एक प्रकार का मेडिकल टेस्ट है जो गुणसूत्रों यानी क्रोमोसोम, जीनों या प्रोटीनों में गड़बड़ी की पहचान करता है। इसके अलावा विकार से जुड़े कई मुख्य लक्षण जैसे- नेफ्रोटिक सिंड्रोम और मस्तिष्क का आकार सामान्य से छोटा होना जैसी दिक्कतें जन्म के समय साफ तौर पर नजर आती हैं जिससे इस सिंड्रोम की पहचान की जा सकती है।

गैलवे-मोएट सिंड्रोम का इलाज - Galloway Mowat Syndrome Treatment in Hindi

गैलवे-मोएट सिंड्रोम के उपचार का उद्देश्य इसके लक्षणों का प्रबंधन करना है जो हर मरीज में अलग-अलग हो सकता है। इसके अलावा विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयासों की भी आवश्यकता हो सकती है। इस टीम में बाल रोग विशेषज्ञ, किडनी स्पेशलिस्ट (नेफ्रोलॉजिस्ट), गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, सर्जन, फिजिकल थेरेपिस्ट और/या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा प्रभावित व्यक्तियों व उनके परिवारों के लिए आनुवांशिक परामर्श (जेनेटिक काउंसलिंग) भी फायदेमंद हो सकता है।

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गैलवे-मोएट सिंड्रोम के डॉक्टर

Dr. Abhas Kumar Dr. Abhas Kumar न्यूरोलॉजी
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