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बच्चे के विकास में चलना शुरू करना एक महत्वपूर्ण चरण होता है। सामान्यतः बच्चे 9 से 12 महीनों में पहला कदम ले लेते हैं और 15 महीने की होते-होते चलना सीख जाते हैं। अपने पहले जन्म दिन तक अधिकतर बच्चे किसी चीज का सहारा लेकर चलना शुरू कर देते हैं। लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो देर से चलना सीखते हैं। बच्चों के देर से चलने के कई कारण हो सकते हैं। अपने बच्चे को उसकी उम्र के अन्य बच्चों के मुकाबले न चलता देख मां-बाप घबरा जाते हैं। कई बार सामान्य होने पर भी बच्चे देर से चलना शुरू करते हैं। लेकिन फिर भी यह समस्या माता-पिता को परेशान कर देती है।

इस लेख में आपको बच्चों के देर से चलने की समस्या को विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही इसमें बच्चों के देर से चलने को कैसे पहचाने, बच्चों के देर से चलने के कारण और बच्चों के देर से चलने पर डॉक्टर के पास कब जाएं आदि विषयों को भी बताने का प्रयास किया गया है।

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  1. बच्चे के देर से चलने की पहचान कैसे करें - Bache ke der se chalne ki pehchan kaise kare
  2. बच्चे के देर से चलने के कारण - Bache ke der se chalne ke karan
  3. बच्चे के देरी से चलने पर डॉक्टर के पास कब जाएं - Bache ke der se chalne pr doctor ke pass kab jaye
  4. बच्चों का देर से चलना के डॉक्टर

हर बच्चा अलग-अलग समय पर चलना सीखता है। बच्चे अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर चलना सीखते हैं और हर बच्चे में यह समय भिन्न हो सकता है। यदि आपके बच्चे की उम्र के किसी बच्चे को चलते हुऐ तीन से चार महीने हो गए हैं और आपका बच्चा अभी तक भी चलना नहीं सीखा है, तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं कि आपका बच्चे को कोई समस्या है या वह देर से चलना सीख रहा है।    

अगर आपके बच्चे की उम्र के अन्य बच्चे चलना सीख गए हैं और आपका बच्चा अब भी घुटनों के बल पर ही चल रहा है, तो यह आपके बच्चे की मांसपेशियों के नियंत्रण संबंधी समस्या की ओर इशारा करता है। बच्चे का 18 महीनों का होने पर भी न चल पाने को आप देरी से चलने की श्रेणी में रख सकते हैं, लेकिन कई बार यह सामान्य स्थिति भी होती है। ऐसा होने पर आप अपने बच्चे को एक बार डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं, क्योंकि बच्चे का देरी से चलना किसी अन्य समस्या का भी कारण हो सकता है।

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अगर आपका बच्चा चलने की सामान्य उम्र में भी चलना न सीख पाए, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बच्चे के देर से चलने के कुछ कारणों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

  1. मांसपेशियों में नियंत्रित विकसित न हो पाना –
    मांसपेशियों में नियंत्रण न होना भी बच्चे के देरी से चलने के कारणों में से एक माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके बच्चा का खुद की मांसपेशियों को नियंत्रण करने में ज्यादा समय लगता है। आपके बच्चे का अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना देर से चलने की यह भी एक मुख्य वजह हो सकती है।

    इस स्थिति में आप घबराएं नहीं, बच्चे इस समस्या से जल्द ही ठीक हो जाते हैं। मांसपेशियों पर नियंत्रण न होना कोई गंभीर समस्या नहीं होती है। चलना सीखने वाले बच्चों को वाकर देने के बजाय आप उसको खुद से ही चलने का प्रयास करने दें। छोटे-छोटे परिवर्तनों से बच्चे में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। (और पढ़ें - बच्चों की सेहत के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज)
     
  2. बच्चे के पैरों का झुका हुआ होना –
    बच्चे के झुके हुए पैर (bowed legs) माता-पिता की चिंता का एक आम कारण होते हैं। जन्म के समय लगभग हर बच्चे के पैर झुके हुए होते हैं। इसमें घुटने की हड्डियां बाहर की ओर होती है, आमतौर पर बच्चे के 2 साल का होने पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। पैरों का बाहर की ओर झुका होने से बच्चे को चलने में दोनों तरफ झुकना पड़ता है। इस समस्या के कारण न तो बच्चा देरी से चलता है और न ही उसे चलना सीखने में समस्या होती है। 
    बेहद ही कम मामलों में जब यह समस्या बच्चे के दो साल का होने पर भी ठीक नहीं हो पाती है, तो इसकी वजह से बच्चे के घुटने बाहर की ओर हो जाते हैं और पैर की हड्डियां मुड़ जाती हैं। ऐसा होने पर बच्चे को घुटनों की समस्या हो सकती है। अगर दो साल तक बच्चे के पैर ठीक न हों, तो आपको तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। (और पढ़ें - शिशु का वजन कैसे बढ़ाएं)
     
  3. बच्चे का स्वभाव –
    देरी से चलने के पीछे बच्चे का स्वभाव भी मुख्य वजह होता है। आप बच्चे को कितना ही प्रोत्साहित क्यों न करें, लेकिन कुछ बच्चे चलना सीखने में थोड़ा ज्यादा समय लेते हैं। अगर आपके बच्चे को आराम करना पसंद हो, वह घुटनों के बल चलता हो या एक जगह टकटकी लगाकर देखता हो, तो यह संभावनाएं बढ़ जाती है कि आपका बच्चा देरी चलना सीखेगा। बच्चे के देरी से चलने की इस वजह के लिए माता-पिता को चिंतित नहीं होना चाहिए। दरअसल इस स्वभाव के बच्चे को चलने की आवश्यक महसूस ही नहीं होती है। (और पढ़ें - डायपर के रैशेस हटाने के घरेलू नुस्खे)
     
  4. घर के माहौल की वजह से देरी से चलना –
    घर का माहौल भी बच्चे को चलना सिखाने में सहायक होता है। हर समय बच्चे को गोद में घूमाने व उसको चलने के लिए प्रोत्साहित न करना भी बच्चे के देरी से चलने का कारण हो सकता है। बच्चे की जरूरत से ज्यादा देखभाल भी उसके देर से चलने की वजह होती है। बच्चे के वाकर को उससे दूर रखें, चलने के दौरान जब बच्चा ठोकर खाता है और गिरता है, तो इससे वह मजबूत बनता है।
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  5. बच्चे के तलवों का सपाट होना –
    जन्म के समय सभी बच्चों के तलवे सपाट ही होते हैं। तलवों का घूमावदार बनने में थोड़ा समय लगता है। सपाट तलवे होना बेहद ही कम मामलों में चलने में समस्या का कारण होता है और बच्चों में यह मुख्यतः दो से तीन साल में अपने आप ही ठीक हो जाता हैं। यदि बच्चे के तलवे बिलकुल सपाट हैं तो इस कारण से चलने के दौरान उनके टखने अंदर की मुड़े हुए दिखते हैं। इसके इलाज की जरूरत बेहद कम मामलों में पड़ती है और बच्चा जब तक बढ़ा नहीं होता, तब तक इस समस्या को गंभीर नहीं माना जाता। सपाट तलवे होना एक पारिवारिक समस्या होती है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है। (और पढ़ें - दाँत निकलते समय बच्चे के दर्द को दूर करने के घरेलू उपाय)
     
  6. बच्चे का बीमार होना – 
    कई बार बच्चे के बीमार होने के कारण भी वह देरी से चलना शुरू करता है। बीमारी से ठीक होने में लगने वाले समय के चलते भी आपके बच्चे को चलने में देरी हो सकती है।

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यदि आपका बच्चा 18 महीनों का होने के बाद भी न चलता हो, बच्चा पूरे तलवों की जगह पर केवल पंजो के बल पर चलता हो या बच्चे को पैर से संबंधित अन्य समस्या हो, तो आपको उसे डॉक्टर के पास दिखाना चाहिए, क्योंकि यह समस्याएं भी बच्चे के देरी से चलने का कारण होती है। 

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अगर आपको ऐसा लगता है कि आपका बच्चा देरी से चलना सीख रहा है, तो सबसे पहले आपको उसकी मेडिकल जांच करवानी चाहिए। इस जांच में बच्चे की तंत्रिकाओं और उसकी मांसपेशियों की मजबूती व उनके कार्यों की जांच की जाती है, साथ ही इसमें बच्चे की मुद्रा (पोजीशन) की भी जांच की जाती है। इसमें डॉक्टर बच्चे के बोलने और मांसपेशियां के साथ नियंत्रण आदि विकास से संबंधी कुछ अन्य विषयों की भी विस्तार से जांच करते हैं।

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बच्चे का देरी से चलना सामान्य तौर पर किसी समस्या का कारण नहीं होता है। कई बार देर से चलने वाले बच्चे देर से ही बैठना और घुटनों के बल पर चलना सीखते हैं। जांच के दौरान डॉक्टर आपके बच्चे के चलने से संबंधी अन्य आदतों पर भी गौर करते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि उसकी मांसपेशिया के निरंतर विकास की क्या स्थिति है।

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अगर डॉक्टर बच्चे के अंग में अकड़न या किसी प्रकार विकृति महसूस करते हैं, तो वह बच्चे को तंत्रिका विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह देते हैं। जिसमें बच्चे के दिमागी विकास की जांच की जाती है। बच्चे की समस्या की पहचान होने पर थेरेपी की मदद से उसकी शारीरिक शक्ति और लचीलेपन में सुधार किया जाता है। इसके साथ ही अन्य शारीरिक समस्या को ऑपरेशन करके ठीक किया जाता है।

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