सिर और गर्दन का कैंसर जिसमें मुंह का कैंसर, फैरिंग्स यानी ग्रसनी का कैंसर और लैरिंग्स यानी कंठ या स्वर यंत्र का कैंसर शामिल है, इसमें सभी तरह के कैंसर का 15% हिस्सा होता है। सिर और गर्दन का कैंसर होने का स्पष्ट कारण क्या है, ये अब तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, कई अलग-अलग कारक हैं जो सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़ते जोखिम के लिए जिम्मेदार हैं, जैसे- तंबाकू और शराब का सेवन करना, खानपान की गलत आदतें, दांतों की खराब सेहत और एचपीवी इंफेक्शन। इन सभी में से सिगरेट पीना, सिर और गर्दन के कैंसर के स्थापित कारणों में से एक माना जाता है।

इंटरनैशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) ने एक वर्गीकरण किया है जिसके मुताबिक सिगरेट पीना इंसानों के लिए ग्रुप1 कैंसरकारी है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास सिगरेट स्मोकिंग और सिर और गर्दन के कैंसर के बीच संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त सबूत भी मौजूद हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सिगरेट में विभिन्न कैंसरकारी (कैंसर पैदा करने में सक्षम पदार्थ) होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आनुवंशिक परिवर्तन होता है जो कैंसर का कारण बनता है।

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पैसिव स्मोकिंग या निष्क्रिय धूम्रपान
निष्क्रिय धूम्रपान (पैसिव स्मोकिंग) या अनैच्छिक धूम्रपान (तंबाकू या सेकेंड हैंड धूम्रपान के लिए अनैच्छिक एक्सपोजर) की वजह से भी व्यक्ति तंबाकू के धुएं में मौजूद कैंसरकारी तत्वों के संपर्क में आता है। अनैच्छिक धूम्रपान में ये 2 चीजें शामिल हैं:

  • डाइरेक्ट या सीधे धूम्रपान करना: धूम्रपान करने वालों द्वारा सिगरेट का धुंआ सीधे अंदर और बाहर निकाला जाता है
  • पैसिव या निष्क्रिय रूप से धूम्रपान करना: सिगरेट की जलती हुई कोन से हर कश के बीच में हवा में निष्क्रिय धुंआ निकलता है

तंबाकू-विशिष्ट कैंसरकारी 4-(मेथाइलनाइट्रोसैमिनो)-1-(3-पाइरिडाइल)-1-ब्यूटेनोन(एनएनके) के छोटे-छोटे अणु (मेटाबोलाइट्स) धूम्रपान न करने वाले वैसे लोगों के पेशाब में देखे गए जो अनैच्छिक यानी इन्वॉलेंटेरी या पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आए थे। अमेरिका के सर्जन जनरल के अनुसार, वयस्कता या प्रौढ़ता के दौरान पैसिव स्मोक के संपर्क में आना और धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़े का कैंसर होना- इन दोनों के बीच अनौपचारिक संबंध है। 

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निष्क्रिय धूम्रपान और कैंसर
सिगरेट स्मोकिंग, विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं के माध्यम से कैंसर का कारण बनती है, जिसमें डीएनए एडिक्ट्स या अभिवर्तन का बनना (कैंसर पैदा करने वाले रसायन से जुड़े डीएनए के टुकड़े) और डीएनए की मरम्मत में किसी तरह का व्यवधान शामिल है। यह शरीर की कोशिकाओं की वृद्धि और कोशिकाओं की प्रतिकृति बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। निष्क्रिय धुएं के जोखिम से जुड़ी कैंसरकारी प्रक्रिया भी कुछ इसी तरह से काम करती है।

निष्क्रिय धूम्रपान करने वालों में भी तंबाकू के धुएं के बायोमार्कर की उपस्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि अनैच्छिक रूप से भी अगर कोई व्यक्ति कैंसरकारी तत्वों को धुएं के जरिए शरीर के अंदर ले रहा है तो निष्क्रिय धूम्रपान करने वालों द्वारा वह मेटाबोलाइज हो रहा है और कैंसर के खतरे को बढ़ाने की क्षमता रखता है। चूंकि ज्यादातर लोग अपना अधिकांश समय घर या ऑफिस में बिताते हैं, इसलिए यही वो जगहें हैं जहां पर अनैच्छिक धूम्रपान के जोखिम का खतरा सबसे अधिक है।

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शोध से यह पता चलता है कि अनैच्छिक धूम्रपान एक्सपोजर सिर और गर्दन के कैंसर के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है, विशेष रूप से फैरिन्जिअल यानी ग्रसनी और लैरिंजिअल यानी स्वर यंत्र के कैंसर के लिए। साथ ही यह जोखिम इस बात से पूरी तरह से स्वतंत्र है कि व्यक्ति सक्रिय रूप से तंबाकू के धुएं या अल्कोहल का सेवन करता है या नहीं। जब घर पर या काम की जगह पर अनैच्छिक धूम्रपान जोखिम की अवधि के प्रभाव और फैरिंजिअल और लैरिंजिअल कैंसर के जोखिम की बात आती है तो परिणाम की स्थिरता इन दोनों कैंसर के साथ कारण-संबंधी विश्वसनियता भी जुड़ जाती है। अल्कोहल द्वारा अवशिष्ट संकरण को समाप्त करने के लिए, जो सिर और गर्दन के कैंसर के लिए एक मान्यता प्राप्त जोखिम कारक है, उन लोगों के बीच एक विश्लेषण किया गया जिन्होंने कभी तंबाकू और शराब का इस्तेमाल नहीं किया था, और इससे उनके ताल्लुक की पुष्टि की गई थी।

लिहाजा इस बात से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पैसिव स्मोकिंग या निष्क्रिय धूम्रपान का, सिर और गर्दन के कैंसर में हेतुविज्ञान या एटियोलॉजिक रोल है। पैसिव स्मोकिंग की वजह से कभी धूम्रपान न करने वालों में भी ओरोफैरिंग्स कैंसर का ताल्लुक हो सकता है।

(इस आर्टिकल को डॉ मनदीप सिंह मल्होत्रा ने लिखा है जो फोर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज में हेड, नेक और ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टी के एचओडी हैं)

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