देर रात खाना खाने की आदत - Night Eating Syndrome in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS,PG Diploma

October 03, 2019

March 06, 2020

देर रात खाना खाने की आदत
देर रात खाना खाने की आदत

नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्या है? 

एनईएस यानी नाइट ईटिंग सिंड्रोम (देर रात में खाना खाने की आदत) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को रात में अधिक खाना खाने का मन करता है साथ ही नींद आने में भी दिक्कत होती है। एनईएस से ग्रस्त व्यक्ति, डिनर के बाद भी बहुत खाना खाता है, उसे नींद आने में परेशानी होती है और रात में जागने पर खाने का मन करता है।

नाइट ईटिंग सिंड्रोम के लक्षण 

एनईएस से ग्रस्त व्यक्ति डिनर के बाद रोजाना के लिए जरूरी कैलोरी का एक चौथाई हिस्सा खा लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति सप्ताह में रात में कम से कम दो बार भोजन करने के लिए उठता है, तो उसे एनईएस हो सकता है। इसके अलावा यदि किसी को निम्न में से कोई तीन लक्षण दिखाई देते हैं तो इसका मतलब है कि वे एनईएस से ग्रस्त है:

  • सुबह भूख कम लगना
  • डिनर करने और सोने से पहले खाना खाने का मन करना
  • सप्ताह में चार या पांच रातों में अनिद्रा रहना
  • ऐसा महसूस होना कि सोने के लिए भोजन करना आवश्यक है
  • मूड खराब रहना और इस स्थिति का शाम के समय और खराब हो जाना

नाइट ईटिंग सिंड्रोम का कारण 

एनईएस के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। डॉक्टरों का मानना है कि इस समस्या का संबंध स्लीप-वेक-साईकल (16 घंटे जागना और 8 घंटे की नींद लेना) और कुछ हार्मोंस से हो सकता है। स्लीप शेड्यूल (नींद लेने का समय) और रूटीन में होने वाले बदलाव एनईएस के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

मोटापे या किसी अन्य भोजन से संबंधित विकार से ग्रस्त व्यक्ति में नाइट ईटिंग सिंड्रोम का खतरा ज्यादा रहता है। एनईएस में अवसाद, चिंता और एल्कोहल एवं नशे का आदी होना आम बात है। 

अनुवांशिक कारण

शोधकर्ताओं ने एनईएस और जेनेटिकस के बीच एक संभावित संबंध पाया है। PER1 नामक एक जीन बॉडी क्लॉक को नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जीन में दोष या विकार होने पर एनईएस हो सकता है। हालांकि, अभी इस विषय पर और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।

नाइट ईटिंग सिंड्रोम का निदान 

डॉक्टर सोने और खानपान से संबंधित आदतों के बारे में कुछ प्रश्न पूछकर एनईएस का पता लगाते हैं। इसके अलावा पॉलीसोम्नोग्राफी नामक स्लीप टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा सकता है जिसमें निम्न बातों का पता चलता है:

  • ब्रेन वेव्स (मस्तिष्क की तरंगें)
  • खून में ऑक्सीजन का स्तर
  • सांस और हृदय की गति

नाइट ईटिंग सिंड्रोम का ट्रीटमेंट 

  • अवसादरोधी दवा और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने वाली एक थेरेपी) एनईएस की स्थिति में मददगार साबित हुई है। हालांकि, एनईएस को लेकर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। 
  • एनईएस पर की गई एक स्टडी में पाया गया है कि रिलैक्सेशन ट्रेनिंग (व्यक्ति को आराम करने में मदद करने वाली विधि या प्रक्रिया) से एनईएस से ग्रस्त व्यक्ति की भूख को रात से सुबह के समय में शिफ्ट करने में मदद मिलती है।
  • कई अध्ययनों में अवसादरोधी दवाओं को एनईएस, मूड और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में असरकारी पाया गया है।
  • किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।



देर रात खाना खाने की आदत के डॉक्टर

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