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साइटिका से राहत पाने के लिए योग एक बढ़िया गैर-चिकित्सीय विकल्प है। कुछ योगासान साइटिका से होने वाले पीठ दर्द और पैर के दर्द से आराम दिलाने में भी मदद कर सकते है।

रिसर्च में यह पाया गया कि कुछ योगासान कटिशूल (पीठ के निचले हिस्से में दर्द), सामान्य दर्द और आगे की ओर झुकने की परेशानी को कम कर सकते हैं। इसके अलावा साइटिका के साथ जुड़े अन्य लक्षण, जैसे चलने में परेशानी, भी योग से कम हो सकते हैं।

यहाँ साइटिका दर्द से राहत पाने के लिए ऐसे ही कुछ योगासन बताये गए हैं। इन आसन के नियमित अभ्यास से आपकी साइटिका की परेशानी कम होगी। लेकिन ध्यान रहे कि एक योग्य योग गुरु की देखरेख में ही आप ये योगाभ्यास शुरू करें। अगर किसी आसन को करने से परेशानी होती है, तो अपने शरीर के साथ जबर्दस्ती न करें और जितना हो सके बस उतना ही करें।

  1. साइटिका के लिए योगासन है भुजंगासन - Sciatica se raahat ke liye karein bhujangasana in hindi
  2. अपानासन है साइटिका के लिए योगा मुद्रा - Apanasana gives relief from sciatica pain in hindi
  3. साइटिका का अचूक उपाय है अधोमुख स्वानासन - Adho Mukha Svanasana is part of sciatica pain cure in yoga in hindi
  4. सुप्त पादांगुष्ठासन है साइटिका के लिए मुद्रा - Supta Padangusthasana is good yoga pose for sciatica in hindi
  5. साइटिका के लिए योगासन है शलभासन - Shalabhasana is yoga pose for sciatica pain in hindi
  6. साइटिका रोग का उपचार करें सेतुबंधासन से - Setu bandhasana is part of yoga treatment for sciatica pain in hindi
भुजंगासन को "गृध्रसी" के लिए योग-आधारित उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है, क्योंकि साइटिका का संदर्भ आयुर्वेदिक चिकित्सा में गृध्रसी नाम से दिया गया है। कोबरा मुद्रा पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने और रीढ़ की हड्डी के लचीलापन में सुधार करने में सहायता करती है। यह आसन दर्द से भी राहत दिला सकता है। 
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आसन कैसे करें:
अपने पेट के बल लेट जाओ, पंजे एक साथ और हाथ अपने कंधे से थोड़ा नीचे, हथेली जमीन की ओर।
अपने माथे को धीरे से फर्श को छूने दें। अब, आप अपने सिर को साँस अंदर लेते हुए फर्श से ऊपर उठाना शुरू कर दें। अपनी हथेलियों से शरीर को संभालते हुए अपना सीना भी ऊपर उठा लें। अब इस पोजीशन में कुछ सेकंड रहे और फिर साँस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। (और पढ़ें – भुजंगासन करने का तरीका और फायदे)
अपान आसन को साइटिका संबंधी दर्द और सुन्नता के उपचार के लिए सिफारिश किया जाता है। यह पवनमुक्तासन का ही एक रूप है।  
 
यह आसन पीठ के निचले हिस्से में दर्द कम करने के लिए किया जाता है, अपान आसन आपके पीठ के निचले हिस्से को गर्म करने में मदद कर सकता है।
 
आसन कैसे करें:
अपनी पीठ के बल सीधा जमीन पर लेट जायें। अब श्वास छोड़ते हुए दोनों घुटनों को मोड़ें और उन्हें को छाती की तरफ लाएं। घुटनों के ठीक नीचे दोनो हाथों की उंगलियों को एक दूसरे में फंसाकर पकड़ लें। अपने कंधो को जमीन पर ही टिका रहने दे। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहे और साँस छोड़ते हुए फिर प्रारंभिक पोजीशन में आ जाएं। इसे दो से तीन बार दोहराएं।
इस आसन का उपयोग करके अपने शारीरिक यांत्रिकी और मुद्रा में सुधार किया जा सकता है।
यह आसन एक ऊर्जावान मुद्रा है जो शरीर को स्ट्रेच करने में और मन को शांत करने में मदद कर सकता है। यह आपके साइटिका से जुड़े पीठ दर्द में भी आराम दे सकता है।
 
आसन कैसे करें:
अपने हाथों और घुटनों के बल पर नीचे लेटे, कंधे से आगे हाथों और घुटनों के ऊपर कूल्हों को संरेखित करें। अपने हाथ समानांतर और हथेलियां फैली हुई रखें।
धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए घुटनो को ऊपर उठाएं। ऊपर चित्र में दर्शाई गयी मुद्रा में एक से तीन मिनट तक रहे और फिर साँस छोड़ते हुए निचे आ जाएं।  (और पढ़ें – अधो मुख श्वानासन करने का तरीका और फायदे)
इस आसन से साइटिका से बहुत राहत मिलती है और प्रभावित मांसपेशियों के स्ट्रेच में मदद मिलती है, ऐंठन जैसे दर्द में आसानी हो सकती है। सुप्त पादांगुष्ठासन आपके कूल्हे, जांघों, हैमस्ट्रिंग और ग्रोइन क्षेत्र को स्ट्रेच करके साइटिका और पीठ दर्द से राहत में मदद करता है। यह आपके घुटनों को मजबूत बनाता है।
 
आसन कैसे करें
अपने पैरों को फैला कर पीठ के बल लेट जाएं। अब अपने बाएं पैर को उठायें और इसे पेट के पास लाएं। एक लचीली स्ट्रैप ले और उसे पंजे में डाल कर दोनों हाथों से पकड़ लें। अब पैर को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें। पैर घुटना मोड़े बिना अपने सर की तरफ थोड़ा झुकाएं। कुछ मिनट ऐसे ही रहें। अब पहले स्ट्रैप को छोड़े और तिस सेकंड तक पैर ऐसे ही रहने दे। इसके बाद साँस छोड़ते हुए पैर जमीन पर वापस लाएं।
साइटिका के लिए एक और प्रभावी योग आसन शलभासन है। पसलियों और श्रोणि के नीचे एक मुड़ा हुआ कंबल इस्तेमाल करना शुरुआत में आपके लिए अधिक आरामदायक हो सकता है। शलभासन जंघा के क्षेत्र की मांसपेशियों के सर्कुलेशन में सुधार करने में मदद करता है और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
 
अपने पेट के बल लेट जाएँ और हाथों को अपनी कमर के बगल में जमीन पर सीधे रखें। आपकी हथेलियां जमीन की और होनी चाहिए। अब साँस छोड़ते हुए सर को थोड़ा ऊपर उठायें और साथ ही अपनी टांगो को भी हवा में उठायें। उपरोक्त चित्र में दिखाई गयी स्थिति में तिस से साठ सेकंड तक रहे और साँस लें और छोड़े। इसके बाद साँस छोड़ते हुए निचे आएं। (और पढ़ें – शलभासन करने की विधि और फायदे)

सेतुबंधासन आपको साइटिका का सामना करने में मदद करता है। यदि आपको यह करना कठिन लगता है, सपोर्ट के लिए एक सिलेंडर का उपयोग करें। बस इसे कमर के नीचे रखें। आप अतिरिक्त सपोर्ट के लिए आपकी गर्दन के नीचे एक कंबल का इस्तेमाल कर सकते हैं। सेतुबंधासन से गर्दन, रीढ़ और छाती के स्ट्रेच में मदद के साथ पीठ के दर्द को कम करने और अपने पैरों को राहत देने में मदद मिलती है। यह आसन मन को शांत करने में भी मदद करता है। (और पढ़ें – सेतुबंधासन करने का तरीका और फायदे)

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