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साइटिका के लिए कई चिकत्सा उपचार हैं, लेकिन वे केवल अस्थायी रूप से दर्द को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टेरॉयड इंजेक्शन गंभीर दुष्प्रभाव भी पैदा कर सकता है। इससे बचने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों और प्राकृतिक उपचारों का उपयोग करके सूजन और साइटिक तंत्रिका पर दबाव कम कर सकते हैं। इसके अलावा, ज्यादातर मामलों में यह समस्या समय (लगभग 6 सप्ताह) और आराम करने से दूर हो जाती है।

  1. गर्म या ठंडे सेक से पाएं साइटिका से छुटकारा - Sciatica ka gharelu upay hai hot or cold compresses in hindi
  2. साइटिका का अचूक उपाय है कैप्सैसिन क्रीम - Capsaicin cream for sciatica in hindi
  3. साइटिका का घरेलू उपाय करें हल्दी से - Turmeric is good for sciatica in hindi
  4. साइटिका से बचने का उपाय है मेथी के बीज - Methi hai sciatica ka gharelu upchar in hindi
  5. साइटिका के दर्द के लिए करें मालिश - Massage Therapy for sciatica pain in hindi
  6. एक्यूपंक्चर दिलाय साइटिका के दर्द से राहत - Acupuncture for sciatic nerve pain relief in hindi
  7. साइटिका पेन रिलीफ करता है काइरोप्रैक्टिक - Chiropractic care for sciatica in hindi

गर्म या ठंडे सेक का प्रयोग करने से साइटिका दर्द और सूजन से राहत में मदद मिल सकती है। गर्म सेक के उपचार से तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम मिलता है जो कि साइटिक तंत्रिका पर दबाव डाल सकती हैं। ठंडा सेक तंत्रिका के आसपास सूजन कम कर देता है और दर्द को भी सुन्न कर देता है

आप गर्म या ठंडे सेक को वैकल्पिक रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, गर्म सेक से शुरू करें और ठंडे सेक के साथ समाप्त करें। गर्म सेक का उपयोग करते समय, भाप से गर्म तौलिये का उपयोग करें क्योंकि यह अधिक प्रभावी है।

15 से 20 मिनट के लिए प्रभावित क्षेत्र पर गर्म या ठंडे पैक रखें। जब तक आपको राहत नहीं मिलती है, तब तक यह हर कुछ घंटों में सेक करें।
नोट: यदि आपको सर्कुलेटरी समस्याएं हैं तो ठंडे सेक का उपयोग न करें।

लाल मिर्च में कैप्सैसिन नामक एक सक्रिय संघटक होता है जो एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में काम करता है। यह पदार्थ पी नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को कम करने में मदद करता है, जो दर्द के संकेतों को ट्रांसपोर्ट करता है।

0.025% से 0.075% कैप्सैसिन युक्त क्रीम या मलहम खरीदें। इसे प्रभावित क्षेत्र पर प्रति दिन 4 बार, कम से कम 1 सप्ताह के लिए उपयोग करें।

नोट:- कैप्सैसिन क्रीम या मरहम शुरू में जलन का कारण हो सकता है। कटी-फटी त्वचा पर इसे न लगाएं।

अपने सूजन विरोधी गुणों के कारण हल्दी साइटिका के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपाय है। इसमें कर्क्यूमिन नामक यौगिक शामिल है जो तंत्रिका दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।

1 चम्मच हल्दी में 1 कप दूध मिलाएं। इसमें एक छोटा दालचीनी का टुकड़ा भी डाल सकते हैं। अब इसे उबाल लें। शहद से इस स्वस्थ पेय को मीठा कर लें और एक बार या दो बार रोजाना पियें जब तक की आपको सुधार न दिखें। (और पढ़ें – हल्दी दूध बनाने की विधि, फायदे और नुकसान)

एक अन्य विकल्प है कुछ हफ्तों के लिए दिन में 3 बार 250 से 500 मिलीग्राम हल्दी के सप्लीमेंट्स लेना। लेकिन इसके लिए पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें। 

नोट: रक्त पतला करने वाली या शुगर की दवाइयां लेने वालों के लिए हल्दी उपयुक्त नहीं होती हैं। पित्त रोग से पीड़ित लोगों को भी इसके सेवन से बचना चाहिए।

इसके सूजन विरोधी लाभों के के कारण मेथी के बीज से तैयार किए गए प्रलेप (पोल्टिस) से साइटिका के दर्द को कम करने में मदद हो सकती है। यह रूमेटीइड गठिया और गाउट पीड़ा में भी राहत देता है।

मेथी के बीज की एक मुट्ठी पीसकर चिकना पेस्ट बनाने के लिए पर्याप्त दूध के साथ इस पाउडर को उबाल लें। इसे प्रभावित क्षेत्र पर प्रलेप के रूप में लगाएं। इसे साफ करने से पहले कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। इस उपचार को जब तक आपको राहत नहीं मिलती तब तक दोहराएं।

मालिश चिकित्सा साइटिका के दर्द को दूर कर सकती है और शरीर को भी ठीक करने में मदद कर सकती है, खासकर अगर समस्या मांसपेशियों की ऐंठन से होती है। इसके अलावा, यह तनाव कम करने में मदद करता है, रक्त संचरण को उत्तेजित करता है और गति बढ़ाता है।

सेंट जॉन वोर्ट तेल से दिन में 2 या 3 बार जब तक आपको राहत नहीं मिलती तब तक रोजाना प्रभावित क्षेत्र की मालिश करें। सेंट जॉन वोर्ट तेल में सूजन विरोधी गुण हैं जो कि साइटिका दर्द और सूजन से राहत देने में सहायता करते हैं।

एक अन्य विकल्प है कि जायफल पाउडर के 3 चम्मच में 1 कप तिल का तेल मिलाएं। इस मिश्रण को गरम करें। अब इससे ठंडा होने पर प्रभावित क्षेत्र पर मालिश करें। कुछ हफ्तों के लिए रोजाना दिन में कई बार मालिश करें।

एक्यूपंक्चर साइटिका के दर्द को दूर करने के लिए एक और प्रभावी प्राकृतिक उपचार है। ये मांसपेशियों को आराम और शरीर को खुद को ठीक करने में मदद करता है।

एक्यूपंक्चर का एक और तरीका यह है कि कुछ एक्यूपंक्चर बिंदुओं को उत्तेजित करके, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को भी उत्तेजित किया जाता है। इसके बदले में रसायनों का स्राव होता है जो या तो दर्द की धारणा को बदलते हैं या स्वस्थ होने की भावना पैदा करते हैं।

जर्नल ऑफ़ ट्रेडिशनल चीनी मेडिसिन में प्रकाशित एक 2009 के अध्ययन में पाया गया कि गर्म सुइयों के साथ गरम एक्यूपंक्चर से साइटिका का दर्द सुधारने में मदद मिली। वास्तव में, एक्यूपंक्चर थेरेपी के बाद 30 प्रतिभागियों में से 17 को साइटिका से पूरी तरह राहत मिली।

नोट:- हमेशा एक कुशल और अनुभवी एक्यूपंक्चरिस्ट द्वारा प्रदान एक्यूपंक्चर थेरेपी से ही उपचार करवाएं।

काइरोप्रैक्टिक गर्दन और पीठ दर्द के लिए एक तेजी से लोकप्रिय हो रहा प्राकृतिक उपचार है। काइरोप्रैक्टिक, रोग ठीक करने की ऐसी प्रणाली जिसमें रूढ़ या मेरू का अभिसाधन या प्रयोग किया जाता है। सूजन और साइटिका से संबंधित अन्य लक्षणों के लिए जिम्मेदार तंत्रिका की परेशानी को कम करने के लिए इसमें विभिन्न तकनीकों को शामिल किया जाता हैं जिसमे तेज़, छोटे झटके देना शामिल हैं।

जर्नल ऑफ मैनिपुलेटिव एंड फिजियोलॉजिकल थेराप्यूटिक्स में प्रकाशित एक 2010 के अध्ययन में पाया गया कि काइरोप्रैक्टिक से 60% प्रतिभागियों को साइटिका से शल्यचिकित्सा द्वारा होने वाले लाभ जितना लाभ हुआ था।

अपने साइटिका के दर्द के सटीक कारण के आधार पर उचित उपचार के लिए काइरोप्रैक्टिक के चिकित्सक से परामर्श करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान:-

  1. अचानक हिलने-डुलने से परहेज करें।
  2. अपनी पीठ के निचले हिस्से पर दबाव को दूर करने के लिए एक अच्छे पोस्चर को अपनाएं।
  3. अपनी पीठ सीधी और घुटने मोड़कर सामान उठाने की सही तकनीकों का अभ्यास करें।
  4. एक ऐसे गद्दे पर सोएं जो न तो बहुत सख्त और न ही बहुत नरम हो।
  5. नियमित व्यायाम करें, लेकिन बहुत अधिक न करें।
  6. सिगरेट के धूम्रपान से बचें, क्योंकि यह डिस्क अध: पतन (डिजनरेशन) को बढ़ावा देता है। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के लिए घरेलू उपचार)
  7. अन्य हर्बल उपचारों का उपयोग करें, जैसे कि मार्टीनिआ एन्नुआ (उलट-कांटा) दो बार रोजाना 1,500 से 2,000 मिलीग्राम, पारिजात की पत्तियों से तैयार किए गए शराब-आधारित अर्क, जिन्हें हर्षियांगर (वैज्ञानिक नाम, निक्टेंथस आर्बर ट्रिस्टिस) भी कहा जाता है, को भी साइटिका के इलाज में उपयोगी पाया गया है। इन जड़ी-बूटियों में सूजन विरोधी और दर्द शांत करने वाले गुण हैं। ध्यान रखें की मार्टीनिआ एन्नुआ (उलट-कांटा) कुछ दवाओं में हस्तक्षेप कर सकता है और पेप्टिक अल्सर से पीड़ित लोगों के लिए भी यह उपयुक्त नहीं है। एक हर्बल उपचार लेने से पहले, अपने चिकित्सक से मात्रा और उपयुक्तता पर सलाह लें ।
  8. अपने चिकित्सक से सलाह लेने के बाद विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम के सप्लीमेंट्स लेने पर विचार करें।
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