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भुजंगासन का नाम "भुजंग" शब्द पर रखा गया है। भुजंग का मतलब होता है साँप। इस आसन में आप फॅन फैलाए साँप की मुद्रा में होते हैं, इस लिए नाम दिया गया "भुजंगासन"।

(और पढ़ें - योग क्या है)

इस लेख में भुजंगासन के फायदों और उसे करने के तरीको के बारे में बताया है। साथ ही इस लेख में भुजंगासन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। लेख के अंत में भुजंगासन से संबंधित एक वीडियो शेयर किया गया है।

(और पढ़ें - प्राणायाम क्या है)

  1. भुजंगासन के फायदे - Bhujangasana (Cobra Pose) ke fayde in Hindi
  2. भुजंगासन करने से पहले यह आसन करें - Bhujangasana (Cobra Pose) se pahle ye aasan kare
  3. भुजंगासन करने का तरीका - Bhujangasana (Cobra Pose) karne ka tarika in Hindi
  4. भुजंगासन का आसान रूपांतर - Bhujangasana (Cobra Pose) ke easy Modifications in Hindi
  5. भुजंगासन करने में क्या सावधानी बरती जाए - Bhujangasana (Cobra Pose) me kya savdhani barte in Hindi
  6. भुजंगासन करने के बाद आसन - Bhujangasana (Cobra Pose) ke baad aasan in Hindi
  7. भुजंगासन का वीडियो - Bhujangasana (Cobra Pose) Video in Hindi

भुजंगासन के कुछ फायदे हैं यह:

  1. भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है। (और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी के लिए योगासन)
  2. छाती व फेफड़ों, कंधों, और पेट में खिचाव लाता है।
  3. नितंबों को मज़बूत बनाता है भुजंगासन ।
  4. पेट के अंगों को उत्तेजित करता है भुजंगासन।
  5. भुजंगासन तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है। (और पढ़ें – थकान से बचने के उपाय)
  6. साइटिका से राहत दिलाता है।
  7. अस्थमा (दमा) के लिए चिकित्सीय है भुजंगासन।
  8. पारंपरिक ग्रंथों का कहना है कि भुजंगसासन शरीर की गर्मी को बढ़ाता है, रोग को नष्ट कर देता है और कुंडलिनी जगाता है।

(और पढ़ें - मेडिटेशन के लाभ)

 करने से पहले आप यह आसन कर सकते हैं:

  1. बालासन (Balasana or Child's Pose)
  2. गरुडासन (Garudasana or Eagle Pose)
  3. मार्जरी आसन (Marjariasana or Cat Pose)

भुजंगासन करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें।

  1. अपने पेट के बल फ्लैट जायें। पैरों के तलवे छत की और होने चाहिए।
  2. अपने बाज़ुओं को धड़ की लंबाई के साथ सीधा रखें।
  3. हाथों को आगे लाकर सिर के पास रखें।
  4. हाथों पर वज़न डाल कर छाती को धीरे धीरे उपर उठायें। आपके पेट से नीचे शरीर का सारा हिस्सा ज़मीन से नहीं उठना चाहिए।
  5. पैरों को उंगलियों के बल ही टिका कर रखें। पीठ जितनी मोड़ सकें आराम से, उतनी ही मोड़ें। ज़बरदस्ती क्षमता से ज़्यादा ना मोड़ें।
  6. इस मुद्रा में आपके बाज़ू पूरी तरह सीधे नहीं होते हैं।
  7. कुल मिला कर पाँच बार साँस अंदर लें और बाहर छोड़ें ताकि आप आसन में 30 से 60 सेकेंड तक रह सकें। धीरे धीरे जैसे आपके शरीर में ताक़त और लचीलापन बढ़ने लगे, आप समय बढ़ा सकते हैं — 90 सेकेंड से ज़्यादा ना करें।

(और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)

अगर आपकी पीठ बहुत ही सख़्त है तो पीठ को कम मोड़ें।

(और पढ़ें - पीठ में दर्द होने के कारण)

  1. अगर आपकी पीठ में चोट हो तो भुजनासान ना करें।
  2. जिन्हे कार्पल टनल सिंड्रोम हो उन्हे यह आसन नहीं करना चाहिए।
  3. अगर आपको सिरदर्द हो रहा हो तो भुजंगासन ना करें। (और पढ़ें – सिर दर्द का देसी इलाज​)
  4. गर्भावस्था में इस आसान को ना करें।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में देखभाल)

भुजंगासन के बाद आप यह आसन कर सकते हैं।

  1. बितिलासन (Bitiliasana or Cow Pose)
  2. ऊर्ध्व मुख श्वानासन (Urdhva Mukha Svanasana or Upward-Facing Dog Pose)
  3. सेतुबंधासन (Setu Bandahasana or Bridge Pose)

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