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साइटिका आयुर्वेद में गृध्रसी के रूप में जाना जाता है, जो ख़राब पाचन के कारण होता है। एक दोषपूर्ण पाचन तंत्र विषाक्त पदार्थों (एएमए) के निर्माण का कारण बनता है जो शरीर की सूक्ष्म प्रणालियों में जमा होते हैं।

साइटिका के आयुर्वेदिक उपचार में पहले शोधन करने वाली जड़ी-बूटियां दी जाती है जो जहरीले तत्वों को खत्म करती हैं, इसके बाद पाचन के लिए उपयोगी जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है जो सही पाचन को बहाल करती हैं। (और पढ़ें – पाचन क्रिया सुधारने के आयुर्वेदिक उपाय)

नर्वस सिस्टम को पोषण देने और शरीर की असंतुलित ऊर्जा को कम करने के लिए टोनिंग और शांतिदायक जड़ी बूटियां भी दी जाती हैं।

साइटिक तंत्रिका को शांत करने के लिए औषधीय तेलों का भी उपयोग किया जा सकता है। पंचकर्म मालिश से उपचार साइटिका के दर्द को कम करने में प्रभावी हो सकता हैं।

साइटिका के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां निम्नलिखित हैं, जिनका उपयोग दर्द प्रबंधन के लिए किया जाता है:

  1. साइटिका का आयुर्वेदिक उपचार करें निर्गुण्डी से - Nirgundi for sciatica in hindi
  2. गुग्गुलु से करें साइटिका का आयुर्वेदिक इलाज - Sciatica ka ayurvedic upchar karen guggulu se in hindi
  3. साइटिका की आयुर्वेदिक दवा है अरंडी की जड़ें - Sciatica ayurvedic treatment by eranda roots in hindi
  4. अश्वगंधा है साइटिका में प्रयोग होने वाली जड़ी बूटी - Sciatica ki ayurvedic dawa hai ashwagandha in hindi
  5. साइटिका की दवा के रूप में उपयोग करें पिप्पली - Sciatica ka ayurvedic ilaj hai long pepper in hindi
  6. साइटिका आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट में उपयोग करें जायफल - Nutmeg hai sciatica ka ayurvedic upchar in hindi
  7. साइटिका के दर्द में करें तगर का उपयोग - Benefit of Valerian Root for sciatica in hindi
  8. सफेद विलो छाल है साइटिका में लाभदायक - Willow Bark is ayurvedic remedy for sciatica in hindi
  9. साइटिका की आयुर्वेदिक दवा और इलाज के डॉक्टर

यह वात तंत्रिका और जोड़ों को शांत करने के लिए एक प्रभावी जड़ी बूटी है। इसका उपयोग जलन और जोड़ों में सूजन को कम करने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। निर्गुण्डी काढ़ा गठिया, जोड़ों के दर्द और साइटिका के लिए भाप स्नान हेतु प्रयोग किया जाता है। पीठ दर्द को कम करने में यह विशेष रूप से बहुत प्रभावी है।

यह सबसे पुराने उपचारों में से एक के रूप में जाना जाता है, यह जड़ी बूटी पीठ के निचले हिस्से में दर्द के लिए सबसे अच्छा इलाज है। यह स्वाभाविक रूप से पीठ की मांसपेशियों और ऊतकों का पोषण करती है। यह हड्डियों और मांसपेशियों को ताकत और सपोर्ट प्रदान करती है।

यह जड़ी बूटी सभी दर्दनाक स्थितियों में उपयोगी है, जिसमें रुमेटीयड गठिया, ओस्टियो गठिया और गंभीर जोड़ो के दर्द और स्त्रीरोग संबंधी विकार भी शामिल हैं। साइटिका के इलाज के लिए जड़ और जड़ की छाल का काढ़ा उपयोग किया जाता है। अरंडी सख़ीरा पाक अरंडी के बीज से तैयार दवा है और इसे दूध में प्रोसेस्ड किया जाता है। यह दर्द से राहत के लिए चिकित्सक की सलाह के तहत ली जा सकती है। (और पढ़ें – गठिया रोग का इलाज हैं यह 10 जड़ीबूटियां)

अश्वगंधा को तिल के तेल में डालकर दर्दनाक ऑर्थरिटिक जोड़ों और जमे हुए कंधों पर रगड़ना चाहिए। यह तंत्रिका दर्द जैसे कि साइटिका, सुन्नता, मांसपेशियों में ऐंठन और पीठ दर्द को कम करने में प्रभावी है। इस जड़ी बूटी की जड़ में स्टेरायडल गुण होते हैं जो सूजन के उपचार में प्रभावी हो सकते हैं। यह दर्द को आरंभ करने वाले वात लक्षणों को समाप्त करने के लिए जानी जाती है।

पिप्पली के बीज को पानी में उबाल कर तरल को ठंडा होने दे। इसे दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर कपूर के पाउडर और अदरक मूल के साथ मिला कर उपयोग कर सकते हैं।

जायफल कफ और वात दोष को दबाने वाली जड़ी बूटी है। जायफल को बारीक़ पीस कर तिल के तेल में तले जब तक यह भूरा न हो जाए। इस तेल से धीरे-धीरे प्रभावित भागों में नसों के दर्द, गठिया और साइटिका से राहत पाने के लिए मालिश करें।

इन जड़ी बूटियों से साइटिका दर्द के लिए उपचार किया जा सकता है। हालांकि, आप अपने चिकित्सक से पता कर सकते हैं कि कौनसी जड़ी बूटियां आपके लिए सुरक्षित हैं। (और पढ़ें – आयुर्वेद के तीन दोष वात पित्त और कफ क्या हैं?)

तगर की जड़ से मांसपेशियों को आराम और पुराने तंत्रिका दर्द से राहत मिलती है। यह विशेष रूप से मांसपेशियों की ऐंठन के कारण साइटिका का दर्द कम करने के लिए अच्छा है। यह नींद लेन में सहायता के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें और कुछ हफ्तों के लिए 150 मिलीग्राम वैलेरियन रूट सप्लीमेंट दिन में 3 बार लें।

आप 1 कप गर्म पानी में सूखे वेलेरियन जड़ के 1 चम्मच को डाल कर 10 मिनट के लिए रहने दें। इस वेलेरियन चाय को कुछ हफ्तों के लिए सप्ताह में कई बार आप पी सकते हैं।

लंबे समय तक चलने वाले दर्द से राहत के लिए सफेद विलो छाल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सैलिसिन के साथ फेनोलिक ग्लायकोसाइड्स पाया जाता हैं, जो सूजन विरोधी और एनाल्जेसिक लाभ प्रदान करते है।

कुछ हफ्तों तक प्रतिदिन 120 या 240 मिलीग्राम सफेद विलो छाल का सप्लीमेंट लें। इससे पहले एक बार अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

Dr. Jyoti Kumbar

Dr. Jyoti Kumbar

आयुर्वेदा

Dr. Bibin M. V.

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आयुर्वेदा

Dr. Ashwini Ghogale

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आयुर्वेदा

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