अधिकतर लोग हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के बीच अंतर समझ नहीं पाते हैं, जबकि कुछ लोग इन दोनों को एक ही प्लान समझते हैं। यही नहीं कुछ लोग समझते हैं कि हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में से कोई भी एक बीमा पॉलिसी काफी है। वास्तव में हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के बीच काफी बड़ा अंतर है।

ये दोनों अपनी जगह पर अलग-अलग जरूरतों के लिए तैयार किए गए हैं, इन्हें एक-दूसरे के विकल्प रूप में नहीं खरीदा जा सकता है। अपने लिए उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा चुनाव करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि आप सही निर्णय ले सकें। ऐसा न करने से मेडिकल इमर्जेंसी के दौरान आपको मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है।

यह लेख उन लोगों के लिए है, जो हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स को एक ही समझते हैं या फिर जिन लोगों को इन दोनों बीमा पॉलिसियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। चलिए इस लेख में पढ़ते हैं कि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स और हेल्थ इन्शुरन्स में क्या अंतर है -

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  1. हेल्थ इन्शुरन्स किसे कहा जाता है - What is called Health insurance in Hindi
  2. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स किसे कहा जाता है - What is called critical health insurance in Hindi
  3. हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के बीच क्या अंतर है - What is the difference between health insurance and critical illness insurance in Hindi

हेल्थ इन्शुरन्स किसे कहते हैं?

हेल्थ इन्शुरन्स यानी स्वास्थ्य बीमा एक प्रकार की बीमा पॉलिसी है, जिसमें बीमा कंपनी बीमाधारक को किसी प्रकार की मेडिकल इमर्जेंसी होने पर उसके इलाज के खर्च के लिए धन देती है। बीमाधारक द्वारा चुने गए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में आमतौर पर सर्जरी, डे केयर ट्रीटमेंट व अन्य मेडिकल खर्चों पर कवरेज प्रदान किया जाता है। जैसे myUpchar बीमा प्लस एक हेल्थ इन्शुरन्स है और इसके तहत आपके हॉस्पिटलाइजेशन के साथ-साथ प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन को कवर किया जाता है।

सरल भाषा में कहा जाए तो हेल्थ इन्शुरन्स बीमा कंपनी और बीमाधारक के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें बीमा कंपनी एक निश्चित अवधि तक बीमाधारक को मेडिकल खर्च पर कवरेज प्रदान करती है। बीमा की अवधि कितनी है, परिवार के कितने लोग इसमें शामिल हैं और किन-किन बीमारियों के इलाज के खर्च पर कवरेज दिया जा रहा है, यह आमतौर पर इन्शुरन्स पॉलिसी के दस्तावेजों में लिखा होता है।

इसके अलावा भुगतान किए गए प्रीमियम में सेक्शन 80डी के तहत टैक्स पर विशेष छूट भी मिल सकती है।

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स किसे कहा जाता है?

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है, एक सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स सीमित ऑफर व लाभ उपलब्ध करा पाता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में जब आप किसी गंभीर रोग जैसे कैंसर, स्ट्रोक और हृदय रोग आदि की चपेट में आ जाते हैं, तो आपको धन संबंधी विशेष मदद की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी गंभीर स्थितियों में आपका सामान्य स्वास्थ्य बीमा से मिलने वाली मदद से काम नहीं चल पाता है। क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स उन महत्वपूर्ण बीमा पॉलिसियों में से एक है, जो आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं।

यदि आपने क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स खरीद रखा है और दुर्भाग्यपूर्ण आपको कोई गंभीर रोग (कैंसर या हृदय रोग आदि) हो जाता है, तो इस प्लान की मदद से आपको फाइनेंस कवरेज मिलती है। यदि आपके परिवार में पहले किसी को कैंसर या स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो चुकी हैं, तो यह समस्या आपको होने का खतरा भी बढ़ जाता है जिसे “जेनेटिक कंडीशन” कहते हैं। फैमिली हिस्ट्री की स्थिति में क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान खरीदना सुरक्षा की ओर रखा गया कदम है।

चूंकि, मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, तो गंभीर बीमारियों में एक सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान आपकी मदद नहीं कर पाएगा और इस कारण से क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान होना जरूरी है।

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हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में क्या अंतर है?

ऊपर हमने आपको दोनों के बारे में बता दिया है, जिसमें आप समझ भी गए होंगे कि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स एक सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स से अलग है। लेकिन, इसके साथ-साथ आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स एक सामान्य स्वास्थ्य बीमा योजना से बेहतर कैसे है। नीचे कुछ पॉइंट्स के माध्यम से हम आपके सामने इन दोनों प्लान के बीच का अंतर स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे, जो कुछ इस प्रकार हैं -

  • मूल विशेषता -
    एक सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान आपके अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मेडिकल और ओपीडी के खर्च को कवर करता है। हालांकि, यह भी हो सकता है कि यह आपके अस्पताल में भर्ती होने के दौरान भी सभी बीमारियों को कवर न कर पाए और न ही लंबे समय तक आपके अस्पताल में भर्ती रहने के खर्च को कवर कर पाएं।
    इसके विपरीत क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान जानलेवा बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च को कवर करता है जैसे कैंसर, बाइपास सर्जरी और गुर्दे व हृदय रोग आदि। बीमाधारक को जैसे ही कोई गंभीर बीमारी होती है, उसे इलाज के खर्च के लिए राशि मिल जाती है।
     
  • लाभ -
    यदि आपने सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स खरीद रखा है, तो आपके अस्पताल में भर्ती होने पर मेडिकल खर्च पर कवरेज मिलती है, जो कि इस प्लान का मुख्य लाभ है। यदि आप बीमा कंपनी के नेटवर्क में किसी अस्पताल से ट्रीटमेंट करवा रहे हैं, तो आप कैशलेस सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। कैशलेस सुविधा में बीमा कंपनी सीधे अस्पताल से संपर्क करके आपके मेडिकल बिल का भुगतान कर देती है। जब आप क्लेम करते हैं, तो आपका हेल्थ इन्शुरन्स प्लान सिर्फ तब तक ही जारी रहता है, जब तक आपकी पूरी बीमा राशि समाप्त नहीं हो जाती।
    यदि आप क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान के धारक हैं, तो इसके अपने कुछ लाभ हैं। जब आपको कोई गंभीर रोग हो जाता है, तो आपको टैक्स मुक्त एक राशि प्राप्त होती है। इसमें बीमाधारक को ऑरिजिनल बिल दिखाने की जरूरत नहीं है, वह बिल की फोटोकॉपी दिखाकर भी मेडिकल खर्च के कवरेज के लिए राशि प्राप्त कर सकता है। जैसा कि इसमें पूरी राशि एक ही बार में सौंप दी जाती है, तो बीमाधारक इस पैसे को अपनी इच्छानुसार कहीं भी इस्तेमाल कर सकता है।
     
  • कवरेज -
    हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी और क्रिटिकल इलनेस प्लान दोनों में कवरेज का एक अलग दायरा है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी दुर्घटनाओं और कई बीमारियों को कवर करती है। स्वास्थ्य बीमा एक निश्चित अवधि (वेटिंग पीरियड) के बाद पहले से ही मौजूद बीमारियों के इलाज के खर्च को भी कवरेज देती है। 
    जबकि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स मुख्य और जानलेवा रोगों के इलाज पर होने वाले खर्च को कवरेज प्रदान करता है। आपके क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान में कितनी गंभीर बीमारियों को कवर किया जा रहा है, यह मुख्य रूप से बीमाकर्ता कंपनी पर निर्भर करता है। यदि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान के दस्तावेजों में लिखा गया है, तो यह एम्बुलेंस और ऑपरेशन के बाद की देखभाल पर होने वाले खर्च को भी कवर करती है।
     
  • बीमित राशि के लिए क्लेम
    यदि आपने हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदा हुआ है और आपको अस्पताल में भर्ती हुए 24 घंटे से ऊपर हो गया है, तो आपको मेडिकल खर्च पर कवरेज मिल जाता है। हालांकि, यदि आपको अपने प्लान में डे केयर की सुविधा भी मिली हुई है, तो हो सकता है कि आपको 24 घंटे तक भर्ती रहने की भी आवश्यकता न पड़े। हेल्थ इन्शुरन्स के कुछ प्लान में इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल के बिल दिखाकर अपने मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति कर सकते हैं।
    यदि आपने क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स का प्लान खरीदा हुआ है, तो बीमाधारक को उसके मेडिकल खर्च के अनुसार बीमित राशि दे दी जाती है। हालांकि, इसमें भी अलग-अलग बीमा कंपनियों के अपने अलग मानदंड होते हैं, कोई कंपनी सीधे अस्पताल से बिल भरती है, जबकि कुछ कंपनियां बीमित राशि बीमाधारक को देती हैं।
     
  • बीमा की हुई राशि
    वैसे तो बीमित राशि हर बीमाकर्ता कंपनी और बीमाधारक व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कुछ सीमाएं हैं जो सभी पर लागू होती हैं। मेडिकल खर्च के लिए कवरेज की गई राशि हेल्थ इन्शुरन्स प्लान की तुलना में क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स अधिक हो सकती है। उदाहरण के तौर पर यदि आपने हेल्थ इन्शुरन्स का प्लान लिया हुआ है और आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं तो उसके इलाज पर होने वाला मेडिकल खर्च आपके सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान की बीमित राशि से अधिक भी हो सकता है।
     
  • प्रीमियम -
    अगर प्रीमियम भुगतान की बात करें तो सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में भरा गया प्रीमियम अधिक होता है, क्योंकि यह हर छोटी मेडिकल समस्या पर कवरेज प्रदान करता है।
    हालांकि, यदि आपने क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान खरीदा हुआ है, तो उसका प्रीमियम अपेक्षाकृत कम होता है, क्योंकि यह प्लान सिर्फ मुख्य व गंभीर रोगों के इलाज पर ही कवरेज प्रदान करता है। इस प्रकार क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान के प्रमियम आपकी जेब पर ज्यादा असर नहीं डालते हैं, जबकि हेल्थ इन्शुरन्स प्लान का प्रीमियम भुगतान आपको परेशान कर सकता है।
     
  • कवर किए गए सदस्य -
    हेल्थ इन्शुरन्स प्लान को किसी एक व्यक्ति या पूरे परिवार के मेडिकल खर्च को कवर करने के लए लिया जा सकता है। जबकि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स को सिर्फ एक ही व्यक्ति के लिए खरीदा जा सकता है।
    लेकिन हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में जितने सदस्य होते हैं, उसका प्रीमियम उतना ही बढ़ जाता और ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।
     
  • वेटिंग पीरियड -
    हेल्थ इन्शुरन्स और क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स दोनों में प्रतीक्षा अवधि होती है। यदि आपने हेल्थ इन्शुरन्स खरीदा है, तो आप प्लान लेने के एक महीने बाद (यदि  बीमार पड़ते हैं तो) क्लेम कर सकते हैं। इसके विपरीत क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स की स्थिति में आपको क्लेम लेने के लिए 3 महीने तक का समय लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में कई गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है, जिनके लिए वेटिंग पीरियड बढ़ाना पड़ता है। हालांकि, जिस व्यक्ति का बीमा किया जाता है, उसके स्वास्थ्य के अनुसार वेटिंग पीरियड को कम या ज्यादा भी किया जा सकता है।

(और पढ़ें -सबसे अच्छा हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है?

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