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भृंगराज तेल एक श्रेष्ठ आयुर्वेदिक तेल है। भृंगराज तेल भृंगराज पौधे से निकाले जाने वाला तेल है। इसका पौधा पूरे विश्व में पाया जाता है।  यह सफ़ेद बालों, बालों के झड़ने, सिरदर्द और मानसिक कमजोरी के इलाज में मदद करता है। यह मेमोरी भी बढ़ाता है, बालों के विकास को बढ़ावा देता है और बालों के झड़ने को रोकता है। आयुर्वेद में, इसका उपयोग सभी प्रकार की बालों की समस्याओं के लिए करने की सलाह दी जाती है।

  1. भृंगराज तेल के फायदे रोकें बालों का गिरना - Bhringraj Oil for Hair Fall in Hindi
  2. भृंगराज तेल के गुण रूसी के लिए लाभकारी - Bhringraj Oil for Dandruff in Hindi
  3. भृंगराज का तेल बचाएँ बालों को सफेद होने से - Bhringraj Oil for Grey Hair in Hindi
  4. भृंगराज आयल के फायदे फोलिक्युलाईटिस के लिए - Bhringraj Tel ke Fayde for Scalp Folliculitis in Hindi
  5. भृंगराज तेल बचाएं फंगल संक्रमण से - Bhringraj Oil Benefits for Ringworm on Scalp in Hindi
  6. भृंगराज तेल से मालिश दिलाएँ सिर दर्द से राहत - Bhringraj Oil Massage for Headache in Hindi
  7. भृंगराज आयल बेनिफिट्स करें दृष्टि में सुधार - Bhringraj Oil to Improve Eyesight in Hindi
  8. तनाव को दूर करें भृंगराज तेल के फायदे - Bhringraj Oil ke Fayde for Stress in Hindi
  9. भृंगराज तेल का उपयोग कैसे करें - How to Use Bhringraj Oil in Hindi
  10. भृंगराज तेल के नुकसान - Bhringraj Oil Side Effects in Hindi
  11. भृंगराज तेल बनाने की विधि – Bhringraj Tel Banane ki Vidhi in Hindi

आयुर्वेद के अनुसार, बालों का गिरना शरीर में वात की अधिकता के कारण होता है, जो कि पित्त या कफ से जुड़ा हो सकता है। आम तौर पर, पित्त या कफ हालत आम होती है। ऐसे मामले में, बाल कमजोर और पतले हो जाते हैं। इसके अलावा स्कैल्प का अधिक ड्राई होना और कुपोषित हेयर फॉलिकल्स भी बालों के झड़ने के कारण कारण हैं।

भृंगराज तेल का सभी तीन दोषों पर प्रभाव होता है। यह वात और कफ को कम कर देता है और पित्त को सुधारता है। भृंगराज तेल का नियमित उपयोग स्कैल्प स्किन के रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और बालों के रोम को उचित पोषण प्रदान करता है। अच्छे परिणाम प्राप्त करने और बालों के झड़ने को कम करने के लिए भृंगराज हेयर आयल के साथ 5 से 10 बार मालिश करना आवश्यक है।

आयुर्वेद के अनुसार दोष विश्लेषण के अनुसार रूसी के तीन प्रकार होते हैं।

  1. वात प्रबलता: शुष्क त्वचा के कारण त्वचा की परत (Flaking) सामान्य होती है। फलैक्स आम तौर पर छोटे होते हैं। ऐसे मामलों में आपकी त्वचा का प्रकार ड्राई हो सकता है।
  2. पित्त प्रबलता और अमा (AMA) संघ वाले लोगों में रूसी पीले और हल्की चिकनी हो सकती है। स्कैल्प लाल हो सकती है। पीली और खराब गंध की स्कैल्प या हेयर अमा के साथ पित्त एसोसिएशन से जुड़े होते हैं।
  3. कफ प्रभुत्व: ऑइली और इर्रिटेबल स्कैल्प त्वचा ऐसे प्रकार का सबसे आम कारण है। ऐसे मामले में, फलैक्स हल्के सफेद या सफेद और चिकने हो सकते हैं। इस श्रेणी के तहत सेबोरिक डर्मेटाइटिस स्थिति सामान्य होती है।

भृंगराज तेल सभी परिस्थितियों में प्रभावी है। इस तेल के साथ 5 से 10 मिनट की मालिश से कुछ दिनों में रूसी से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके बाद, एक नियमित तेल की जगह एक सप्ताह में 2-3 बार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। भृंगराज तेल को नियमित तेल के रूप में सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। मालिश के लिए गुनगुने भृंगराज तेल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

भृंगराज तेल में भृंगराज और जटामांसी के सक्रिय पदार्थ होते हैं जो बालों के समय से पहले सफेद होने को रोकने और उनका इलाज करने के लिए मुख्य तत्व होते हैं। दोनों जड़ी बूटियां बालों के प्राकृतिक रंग को बहाल करने में मदद करती है और आगे बढ़कर बालो को सफ़ेद होने से रोकती है। हालांकि, वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए दैनिक आधार पर दीर्घकालिक (कम से कम 6 महीने) उपयोग करना आवश्यक है। इसके अलावा, कुछ लोगों को आंतरिक / मौखिक दवाओं की आवश्यकता भी हो सकती है। अधिकतर यह स्थिति शरीर या अम्लीय शरीर में पित्त दोष के कारण होती है। ऐसे मामले में, फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाना चाहिए।

फोलिक्युलाईटिस (Folliculitis - फुंसियाँ, मुहाँसे) आमतौर पर बालों के रोम की सूजन होने पर होती है जो आमतौर पर जीवाणुओं के कारण होता है। स्टैफाइलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus Aureus) अन्य रोगाणुओं, कवक, वायरस भी फोलिक्युलाईटिस पैदा कर सकते हैं।

भृंगराज ऑयल भृंगराज (एक्लिटा अल्बा) के सक्रिय पदार्थ हैं, जो रोगाणुरोधी गुण प्रदर्शित करते हैं। यह स्टैफाइलोकोकस ऑरियस के विरुद्ध भी प्रभावी है, क्योंकि कैंसर के रोगियों के अध्ययन के अनुसार इस खोज का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, भृंगराज तेल की सामग्री में सूजन को कम करने वाले गुण होते हैं। (और पढ़ें – कैंसर का इलाज)

टिनिआ कैपिइटिस (एक फंगल संक्रमण) बाल शाफ्ट और स्कैल्प की स्किन को प्रभावित करता है। यह इची स्किन स्कैल्प, गंजा या खोपड़ी पर स्केल पैच का कारण हो सकता है। भृंगराज तेल में एंटिफंगल गुण होते हैं।

भृंगराज तेल की मालिश सिर दर्द से राहत पाने के लिए अधिक प्रभावी होती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस प्रकार का दर्द अतिरिक्त वात के कारण होता है। भृंगराज तेल के साथ नाक प्रशासन (नास्य - nasal administration) सिरदर्द में भी प्रभावी है, जो आम तौर पर सुस्त प्रकार का दर्द होता है जिसमें रोगी सिर में भारीपन अनुभव करता है। (और पढ़ें - सिरदर्द के कारण)

भृंगराज तेल का नेसल एडमिनिस्ट्रेशन से दृष्टि में सुधार की संभावना है। दृष्टि सुधार करने के लिए सुबह में प्रत्येक नथुने में भृंगराज तेल के 2 बूंदों को डालना चाहिए। लेकिन इसका कोई क्लीनिकल अनुभव नहीं है।

भृंगराज तेल का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसका इस्तेमाल तनाव से निपटने के लिए होता है। अपने सिर की मालिश करना और कभी-कभी इस तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से तनाव काफी कम हो सकता है। यह आपके कंधे से अनावश्यक चिंताओं को उठाने में मदद कर सकता है और आपको जीवन का अधिक आनंद लेने में मदद कर सकता है।

  1. अपने हाथों को धोएं और भृंगराज तेल को गर्म करें।
  2. भृंगराज तेल की एक छोटी राशि लें और इसे बालों की जड़ों पर लगाएं।
  3. 5 से 10 मिनट के लिए धीरे धीरे मालिश करें। यह भृंगराज तेल लका अवशोषण बढ़ाने में मदद करता है।
  4. अपने नियमित बालों के तेल की जगह नियमित आधार पर भृंगराज तेलल को लगाएं।

भृंगराज तेल का सिर पर लगाने से कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन इसके नेसल एडमिनिस्ट्रेशन के परिणामस्वरूप निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं:

  1. नाक में जलन
  2. गले में जलन
  3. नाक में बर्निंग सेंसेशन
  4. छींक आना
  5. सिरदर्द (दुर्लभ)

1 लीटर जैतून का तेल
50 ग्राम आवंला
100 ग्राम अमरबेल
50 ग्राम जटामांसी
50 ग्राम नागरमोथा
50 ग्राम शिकाकाई
50 ग्राम भृंगराज
इन में से जैतून के तेल को छोड़कर सभी सामग्रियों को 2 लीटर पानी में उबालें और जब पानी उबलकर एक चौथाई रह जाए तब इसमें 1 लीटर जैतून का तेल मिलाकर पकाएं और सारा पानी सूख जाने पर बचे हुए तेल को किसी काँच की बोतल में सुरक्षित रख लें। पुरुष इस तेल को 2-3 मी.ली की मात्रा में रोज और महिलाएं 10 मी.ली की मात्रा में सप्ताह में 2-3 बार लगाएँ, तो इससे बालों का झड़ना, असमय सफेद होना कम होता है।

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