खाने बनाने के लिए हम जिन तेलों का उपयोग करते हैं, वह हमारे स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद हैं यह जानना बेहद आवश्यक है। आमतौर पर खाना पकाने के लिए जब हम तेल को ज्यादा गर्म कर देते हैं, तो इस प्रक्रिया के दौरान तेल में मौजूद कई लाभकारी यौगिक नष्ट हो जाते हैं और हानिकारक फ्री रैडिकल्स का निर्माण होता है। ये फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर में मौजूद अणुओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में हमें वैसे तेल का इस्तेमाल करना चाहिए जिनका स्मोकिंग पॉइंट अधिक हो यानी उच्च तापमान पर भी उनकी गुणवत्ता नष्ट न होती हो। अगर आप भी इसी तरह के कुकिंग ऑयल की तलाश में हैं इस लेख में हम आपको गुणकारी कुसुम तेल के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

कुसुम तेल का न्यूट्रल फ्लेवर इसे अलग-अलग व्यंजनों के लिए भी खास बनाता है। खाने को स्वादिष्ट बनाने के अलावा इस तेल का उपयोग कई प्रकार की बीमारियों जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह आदि के लिए भी किया जाता है। कुछ शोध बताते हैं कि इसका आहार के रूप में सेवन और त्वचा पर लगाना काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कुसुम के तेल का स्मोकिंग प्वांइट, जैतून के तेल, मक्के के तेल, कैनोला के तेल और तिल के तेल जैसे अन्य विकल्पों की तुलना में काफी अधिक होता है। लिहाजा गर्म करने के बाद भी यह पौष्टिक गुणों से युक्त रहता है। इस तेल से जुड़ी कुछ सामान्य बातों के बारे में यहां जानते हैं-

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  • वैज्ञानिक नाम: कार्थैमस टिन्क्टोरियस
  • फैमिली: एस्टेरैसिया
  • प्रयोग में लाए जाने वाले हिस्से: बीज और पत्ते।
  • सामान्य नाम: अलाज़ोर, अमेरिकन सैफ्रन, बेनीबाना, बेनिबाना ऑयल, बेनिबाना फ्लावर।                 

कुसुम का पौधा लंबा होता है। इसके पत्ते और फूल दोनों ही नुकीले होते हैं और इस पौधे के फूल का रंग पीला और नारंगी होता है। मिस्र में पुराने समय में इन फूलों का उपयोग कपड़ों में रंग भरने के लिए डाई के रूप में किया जाता था। मौजूदा समय में कई स्थानों पर कुसुम की पंखुड़ियों को केसर के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। कुसुम के बीज से तेल निकाला जाता है जो कई प्रकार से हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

कुसुम तेल की दो किस्में उपलब्ध हैं: हाई-लिनोलिक और हाई-ओलिक। हाई-लिनोलिक कुसुम का तेल पॉलीअनसैचुरेटेड फैट से समृद्ध होता है है, जबकि हाई-ओलिक में मोनोअनसैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है। पॉलीअनसेचुरेटेड कुसुम का तेल उन चीजों के लिए अच्छा माना जाता है जिन्हें गर्म करने की जरूरत नहीं होती जैसे- विनिग्रेट (सलाद का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल, सिरका और जड़ी बूटियों का मिश्रण) और मोनोअनसैचुरेटेड कुसुम का तेल उच्च तापमान पर पकाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के लिए अच्छा है।

(और पढ़ें- सैचुरेटेड फैट क्या होता है?)

  1. कुसुम तेल के पौष्टिक गुण - Nutrition facts of Kusum Oil in Hindi
  2. कुसुम तेल के फायदे - Benefits of Kusum Oil in Hindi
  3. कुसुम तेल के साइड इफेक्ट्स - Side Effects of Kusum Oil in Hindi
कुसुम तेल के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) के मुताबिक एक चम्मच यानी करीब 14 ग्राम कुसुम के तेल में निम्न प्रकार के पौष्टिक तत्वों की मौजूदगी होती है-

कुसुम तेल में वसा की मात्रा

कुसुम के तेल में तीन अलग-अलग प्रकार के वसा पाए जाते हैं। इस तेल में संतृप्त वसा की बहुत कम मात्रा होती है। संतृप्त वसा को नुकसानदायक माना जाता है क्योंकि ये हृदय रोगों का कारण बन सकते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक हमें ऐसे तेलों को प्रयोग में लाना चाहिए जिसके एक चम्मच में संतृप्त वसा की मात्रा चार ग्राम से कम हो। कुसुम के तेल में प्रति चम्मच संतृप्त वसा की मात्रा केवल एक ग्राम होती है।

क्लिनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि कुसुम का तेल हमारे स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। कुसुम के तेल का रोजाना उपयोग टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और इन्फ्लेमेशन (सूजन) के स्तर को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों के मुताबिक अनसैचुरेटड फैटी एसिड रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कुसुम का तेल हमारे स्वास्थ्य के लिए और किस प्रकार से फायदेमंद है-

कुसुम तेल के फायदे फैटी एसिड के लिए - Kusum Oil Benefits for Fatty Acids in Hindi

कुसुम का तेल असंतृप्त फैटी एसिड का समृद्ध स्रोत है, जिसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट शामिल है। शरीर को कार्य करने के लिए इन दोनों प्रकार के वसा की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ आमतौर पर असंतृप्त फैटी एसिड को संतृप्त वसा के मुकाबले अधिक स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं।

कुसुम के तेल में पाया जाने वाला वसा, हार्मोन को रेग्युलेट करने औऱ याददाश्त बढ़ाने के लिए आवश्यक है। वे शरीर को वसा में घुलनशील विटामिन एविटामिन डीविटामिन ई और  विटामिन के को अवशोषित करने की अनुमति देते हैं। भोजन के माध्यम से इस प्रकार के वसा का सेवन करने से पेट भरा हुआ महसूस होता है।

कुसुम के तेल में संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है, जिसे बैड फैट के रूप में जाना जाता है। आहार में गुड फैट की अधिक और बैड फैट की मात्रा कम होने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे यह सूजन को कम करने के साथ हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करने में महत्वपूर्ण होता है।

कुसुम तेल के फायदे ब्लड शुगर कम करने के लिए - Kusum Oil Benefits to improve Blood Sugar Level in Hindi

साल 2016 में किए गए एक अध्ययन की समीक्षा के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि आहार में असंतृप्त वसा की मात्रा अधिक होने से ब्लड ग्लूकोज के स्तर को सुधारने में मदद मिलती है।

साल 2011 के एक अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं बताया गया है कि 4 महीने तक रोजाना 8 ग्राम कुसुम के तेल का सेवन करना टाइप-2 मधुमेह वाले लोगों में सूजन को कम करने के साथ ब्लड शुगर के स्तर में सुधार करने में सहायक हो सकता है। यहां ध्यान देना आवश्यक है कि इस अध्ययन में शामिल महिलाओं को टाइप 2 मधुमेह के साथ मोटापे की भी शिकायत थी और वे मेनोपॉज के स्टेज को पार कर चुकी थीं।  शोधकर्ताओं का सुझाव है कि मधुमेह के उपचार के साथ गुणवत्ता वाले डाइट्री फैट का सेवन करने से मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

कुसुम तेल के फायदे हृदय को स्वस्थ रखने में - Kusum Oil Benefits for Healthy Heart in Hindi

साल 2011 के उसी अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि 4 महीने तक कुसुम के तेल का उपयोग ब्लड शुगर में सुधार करने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी सुधार करता है जिससे हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। यह निष्कर्ष अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के उस सुझाव का समर्थन करता है जिसमें बताया गया था कि असंतृप्त वसा, रक्त में लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) या बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को हृदय रोग का जोखिम कारक माना जाता है।

कुसुम का तेल कई अन्य तरीकों से भी हृदय को स्वास्थ रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुसुम के तेल में पाया जाने वाला अनसैचुरेटेड फैट खून को पतला करने में भी सहाय​क है। इसके अलावा यह रक्त के थक्कों को बनने से भी रोकता है जो दिल का दौरा और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाते हैं। कुसुम का तेल ब्लड प्रेशर कम करके रक्त वाहिकाओं को भी आराम दिलाने में मददगार है। यह सभी स्थितियां हमारे हृदय को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होती हैं।

कुसुम तेल के फायदे इंफ्लेमेशन दूर करने में - Kusum Oil Benefits for Inflammation in Hindi

कुसुम के तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं। क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कुसुम तेल में पाए जाने वाला असंतृप्त फैटी एसिड इंफ्लेमेशन मार्करों में सुधार करता है। ऐसे में यह मधुमेह और हृदय रोग सहित कई अन्य स्थितियों को ठीक करने में मदद कर सकता है।

कुसुम तेल के फायदे त्वचा के लिए - Kusum Oil Benefits for Skin in Hindi

कुसुम का तेल हमारी त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। विशेषज्ञों के मुताबिक शुष्क त्वचा या सूजन वाली त्वचा पर कुसुम का तेल लगाने से त्वचा को मुलायम और कोमल बनाने में मदद मिलती है। वैसे तो त्वचा के लिए कुसुम तेल के फायदों से संबंधित ज्यादातर रिसर्च किस्सों में ही हैं, बावजूद इसके कई प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों और त्वचा की देखभाल करने वाले उत्पादों में कुसुम का तेल का महत्वपूर्ण घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 

कुसुम के तेल में विटामिन ई पाया जाता है जो त्वचा के लिए कई तरह से लाभदायक होता है। विटामिन ई दशकों से त्वचा संबंधी उत्पादों में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। कुछ शोध बताते हैं कि विटामिन ई, त्वचा को सूरज की रोशनी के प्रभाव और फ्री रेडिकल्स से भी बचाता है। फ्री रेडिकल्स हानिकारक अणु होते हैं जो शरीर में कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि त्वचा पर कुसुम तेल को उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना अच्छा रहता है। इसके लिए बाहों पर तेल की कुछ बूंदों  को डालकर रगड़ें और उसे 24 घंटे के लिए छोड़ दें। यदि त्वचा पर इसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है तो इसका उपयोग आपके लिए सुरक्षित माना जाता है।

कुसुम तेल के अन्य लाभ - Other Benefits of Kusum Oil in Hindi

ऊपर बताए गए फायदों के अलावा भी कुसुम का तेल कई अन्य तरह से हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि निम्नलिखित समस्याओं में कुसुम तेल के फायदों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में इन स्थितियों में कुसुम के तेल को प्रयोग में लाने से पहले विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें-

  • सीने के दर्द में कुसुम तेल के लाभ (एनजाइना): प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि मानक दवा के साथ कुसुम के फूल के एक घटक, सैफ्लावर येलो को जब चीन के लोगों में नसों के माध्यम से दिया गया तो उनमें सीने में दर्द के लक्षणों में थोड़ा सुधार देखने को मिला। हालांकि इसका प्रयोग सिर्फ डॉक्टरी सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
  • हृदय रोग: रोजाना डेढ़ चम्मच कुसुम का तेल जो ओलिक एसिड से भरपूर होता है का सेवन करने से हृदय रोग से बचने में मदद मिलती है। लेकिन इस फायदे से जुड़ी रिसर्च सीमित है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस: शुरुआती रिसर्च से पता चलता है कि 1 साल तक कुसुम का तेल का सेवन करने से बच्चों में सिस्टिक फाइब्रोसिस की गंभीरता नहीं बढ़ती।
  • मधुमेह के कारण किडनी की समस्यामानक दवा के साथ कुसुम के फूल के एक घटक, सैफ्लोवर येलो को नसों के माध्यम से रोगी को देने से मधुमेह के कारण होने वाली किडनी की क्षति को कम करने के साथ किडनी की कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है।
  • हाइपरकोलेस्ट्रॉलीमियामाता-पिता से बच्चों में कोलेस्ट्रॉल की जो समस्या पारित होती है उसके इलाज में कुसुम का तेल कितना फायदेमंद है इसके सबूत परस्पर विरोधी हैं। शुरुआती रिसर्च से पता चलता है कि डाइट्री बटर की जगह कुसुम तेल का इस्तेमाल करने से इस बीमारी से पीड़ित लोगों में बैड कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है तो वहीं अन्य रिसर्च से पता चलता है कि कुछ लोगों पर इसका कोई असर नहीं होता। 

अब तक हुए अध्ययनों में ज्यादातर लोगों पर कुसुम के तेल के साइड इफेक्ट्स देखने को नहीं मिले हैं। हालांकि कुछ लोगों में इसके दुष्प्रभाव हो भी सकते हैं। जैसे कुसुम का तेल खून को पतला करने और रक्त का थक्के बनने से रोकने में प्रभावी है, इस वजह से कुछ लोगों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।

  • जिन लोगों में रक्तस्राव के विकार हैं।
  • जिन लोगों की सर्जरी हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान कुसुम तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। कुसुम का फूल पीरियड्स ला सकता है और गर्भपात का कारण बन सकता है। वहीं स्तनपान कराने वाली महिलाओं में इसके प्रभाव को लेकर कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं है, ऐसे में सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

इसके अलावा चूंकि कुसुम रक्त के थक्के बनाने की गति को धीमा कर सकती है, इसलिए सर्जरी के बाद कुछ समय तक इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे सर्जरी के दौरान और बाद में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। सर्जरी के कम से कम 2 सप्ताह पहले कुसुम तेल का उपयोग करना बंद कर दें।

कुछ लोगों को कुसुम तेल से एलर्जी हो सकती है। लिहाजा अगर आपको पहले से किसी तरह की एलर्जी है तो अपने डॉक्टर से बात करने के बाद ही इस तेल का इस्तेमाल करें।

Dt. Akanksha Mishra

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Surbhi Singh

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