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  1. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी क्या होता है? - ACL surgery kya hai in Hindi
  2. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी क्यों की जाती है? - ACL Surgery kab ki jati hai?
  3. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी होने से पहले की तैयारी - ACL Surgery ki taiyari
  4. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी कैसे की जाती है? - ACL Surgery kaise hoti hai?
  5. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद देखभाल - ACL Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद सावधानियां - ACL Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी की जटिलताएं - Anterior Cruciate Ligament Reconstruction Surgery me jatiltaye

ACL पुनर्निर्माण सर्जरी (ACL Reconstruction Surgery) घुटने की कार्यवाही को सुधारने के लिए की जाती है। एसीएल, जिसे Anterior Cruciate Ligament के रूप में भी जाना जाता है, जांघ की हड्डी (फेमूर) को शिन की हड्डी (टिबिया) के साथ जोड़ता है। जो लोग बहुत सारे मैदानी खेल खेलते हैं वे अपने ACL को क्षतिग्रस्त या चोटिल कर सकते हैं। जब लिगामेंट के उपचार के लिए गैर-आक्रामक तरीके काम नहीं करते हैं, तो एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी ही अंतिम उपाय रह जाता है। घुटने के सामान्य कार्यों को ठीक करने या सुधारने के लिए क्षतिग्रस्त (फटे हुये) लिगामेंट को ग्राफ्ट (Graft; उपरोपण) से बदल दिया जाता है।

ACL का प्रमुख कार्य घुटने की Hyperextensibility (सामान्य डिग्री से अधिक फैला पाने की क्षमता होना) को रोकना है (पैर की हड्डी और जांघ की हड्डी के बीच का एंगल उससे ज़्यादा नहीं होना चाहिए जितना पूरी तरह से सीधा होने के बाद होता है)। यह घुटने को घुमाने की स्थिरता को भी बनाये रखता है।

  1. ACL की चोटें ऐसे एथलीट्स में आम हैं जो घुटनों को मोड़ने या इस्तेमाल करने वाले खेलों से जुड़े हैं, जैसे कि बास्केटबॉल, फुटबॉल, स्कीइंग, नृत्य आदि।
  2. हड्डियों की संरचना के रूपांतरण, पेशी नियंत्रण और समन्वय, और लिगामेंट की हीलिंग (इलाज करने की) क्षमता पर एस्ट्रोजन के प्रभाव की वजह से महिलाओं में पुरुषों की तुलना में यह होने की अधिक संभावनाएं हैंl
  3. ACL पुनर्निर्माण 'Unhappy Triad' (रोगी त्रय) वाले मरीजों में सही विकल्प माना जाता है - घुटने के Medial Meniscus, Medial Cruciate Ligament और Anterior Cruciate Ligament का नुक्सान। फुटबॉल खिलाड़ियों में यह त्रय सामान्य है।
  4. क्षतिग्रस्त ACL और कार्यात्मक अस्थिरता वाले मरीज़ों को इस विकल्प पर विचार करना चाहिए।
  5. छोटे बच्चों में इसे नहीं करवाया जाना चाहिए क्योंकि इससे हड्डियों के विकास को नुकसान पहुँच सकता है।
  6. अगर ACL के साथ Menisci या Articular Cartilage को भी नुक्सान पहुंचा हो तो ऐसे में सर्जरी की जानी चाहिए। 

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. ध्यान रखने वाली अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Surgery)
    घुटने को बहुत साफ़ रखें। इसे दिन में बार बार धोएं ताकि संक्रमण के खतरे को टाला जा सके। ध्यान दें कि आपके घुटने पर किसी भी तरह की चोट या कट या घाव न लगे। घुटने पर शेविंग (बाल हटाने) की ज़रुरत नहीं है। यदि आप बैसाखी का प्रयोग करते हैं तो उन्हें अपने साथ ही रखें। 
    एक सामान्य ACL पुनर्निर्माण सर्जरी को लगभग एक से डेढ़ घंटे लग सकते हैं। आप इसके बाद घर जा सकते हैं।
  9. सर्जरी से पहले किये जाने वाले विशिष्ट परीक्षण (Specific Tests Before Surgery)
    सामान्य टेस्ट्स के साथ आपके डॉक्टर द्वारा आपको निम्न टेस्ट्स करवाने के लिए भी कहा जा सकता है:
    अल्ट्रासोनोग्राफ़ी (Ultrasonography): ध्वनि तरंगों का उपयोग नरम ऊतकों की छवियां उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, और अगर कोई क्षति हो तो इससे उसका भी पता चल जाता है।
    आर्थ्रोग्राम (Arthrogram): एक डाई को घुटने के जोड़ों के क्षेत्र में लगाया जाता है जो चोट के क्षेत्रों को आउटलाइन करेगा।
    आर्थ्रॉन्स्टेसिस(Arthrocentesis): सुई और सिरिंज की सहायता से श्लेष द्रव का एक सैंपल लिया जाता है। अध्ययन से सूजन के सूचक दिख सकते हैं।
    Lachman's टेस्ट: आर्थोपेडिक सर्जन यह शारीरिक परीक्षा (टिबिया द्वारा सहन हो जाने वाली कार्यवाही करवाकर) ACL को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए करता है।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

यह सर्जरी निम्न क्रम में की जाती है:

  1. आर्थरोस्कोप (Arthroscope) नामक एक उपकरण को घुटने के क्षतिग्रस्त जोड़े में डाला जाता है। उसपर एक कैमरा लगाया हुआ होता है। 
  2. जोड़ों पर फिर एक सेलाइन (Saline) इंजेक्ट किया जाता है जिससे आर्थरोस्कोप द्वारा और बेहतर तरीके से देखा जा सकता है।
  3. फिर इस क्षत्र पर हुई क्षति का निरिक्षण किया जाता है। 
  4. इसके बाद डोनर के शरीर से या आपके ही शरीर से लिए हुआ ग्राफ्ट लगाया जाता है। अगर डोनर से लिया गया है तो ग्राफ्ट को सही तरह से उस जगह का आकार दिया जाता है जहाँ उसे लगाना होता है। 
  5. हड्डी में दो सुरंगों को खोला जाएगा: एक टिबियल सुरंग (शिन की हड्डी में) और एक फेमुरल सुरंग (जांघ की हड्डी में)। ये दो सुरंग पुनर्निर्मित ACL को पकड़ेंगी। 
  6. इन सुरंगों के माध्यम से एक पिन पार करवाई जाएगी और नए ACL को इसके अंत में जोड़ा जाएगा। इसे अब फेमूर और टिबिया से स्क्रू की मदद से लगाया जायेगा। स्क्रू (Screw) धातु से बने हो सकते हैं। 
  7. समय के साथ, ग्राफ्ट आसपास की हड्डी पर बढ़ने लगता है।

ग्राफ्ट (Graft)
ग्राफ्ट एक जीवित या सिंथेटिक ऊतक का एक टुकड़ा है जो सर्जरी में शरीर में डाला जाता है। ACL पुनर्निर्माण में विभिन्न प्रकार के ग्राफ्ट का उपयोग किया जाता है:

  1. ऑटोग्राफ्ट (Autograft):

    ग्राफ्ट का स्रोत रोगी का अपना शरीर ही होता है। ग्राफ्ट हैमस्ट्रिंग (घुटने के पीछे की पाँच नसों में एक नस) के कण्डरा या पेटेलेर लिगामेंट (Patellar Ligament) से लिया हो सकता है। पटेलर लिगामेंट के स्थान पर क्वाड्रिसिप कण्डरा (Quadriceps Tendon) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑटोग्राफ्ट का एक फायदा यह है कि अन्य ग्राफ्ट के मुकाबले इसमें अस्वीकृति की संभावना कम होती है। और नुकसान यह है कि, अब रिकवरी सिर्फ एक नहीं बल्कि शरीर में किये गए दो चीरों की होगी।

  2. एलोग्राफ्ट (Allograft): 

    स्रोत किसी अन्य शरीर (जीवित या मृत) से होता है। Achilles कण्डरा, पेटेलेर लिगमेंट या Tibialis Anterior कण्डरा का इस्तेमाल किया जाता है। इन ग्राफ्ट्स को ठीक से विकिरणित किया जाता है और अपनी नई जगह के अनुकूल होने से पहले उसे Sterelise (संक्रमण रहित) किया जाता है।

  3. ब्रिज एनहांस्ड एसीएल रिपेयर (Bridge Enhanced ACL Repair):

    एक स्पंज जैसी संरचना का प्रयोग पुल के रूप में किया जाता है ताकि एसीएल को सुधारा जा सके। यह प्रायोगिक चरण में है लेकिन एक आशाजनक प्रक्रिया की तरह लग रही है। यह कम छेदकर या चीरकर किया जाने वाला उपचार है और बेहतर सफलता दर देने की क्षमता रखता है।

ग्राफ्ट का विकल्प रोगी की उम्र और जीवन शैली के द्वारा पूर्व निर्धारित किया जाता है। इसके अलावा, आप्का सर्जन किस प्रकार उसको स्थानांतरित करता है और आसपास के भागों की स्थिरता भी महत्वपूर्ण निर्धारक हैं।

हाल ही में, स्टेम कोशिका के उपचार का पता लगाया जा रहा है ताकि उन्ही की क्षमता से नए लिगामेंट का निर्माण किया जा सके। स्टेम सेल बहुसंख्यक होते हैं और यदि सही तरीके से सुधारी जाए तो किसी भी नए प्रकार के सेल के रूप में पृथक किये जा सकते हैं। 

चूंकि इस सर्जरी के बाद उस ही दिन घर जा सकते हैं, जैसा आपके डॉक्टर को ठीक लगे। हालांकि आपको एनेस्थीसिया दिए गया होगा इसलिए आपको सर्जरी के बाद थोड़ा समय (जब तक एनेस्थीसिया का असर रहता है) रिकवरी रूम में रहना होगा। 

  1. आपको शिन और एड़ी पर सूजन या घाव महसूस हो सकता है या वे लाल हो सकते हैं। यह श्लेष द्रव, जोकि आपके पैरों से नीचे की ओर जा रहा है, की वजह से है। यह सामान्य है और सर्जरी के बाद कई दिन तक ऐसा हो सकता है।
  2. इसके बाद आपको उनींदापन महसूस हो सकता है। यह एनेस्थीसिया की वजह से होता है।
  3. सर्जरी के बाद दर्द से बचने के लिए दर्द निवारक और सूजन रोधी दवाइयां दी जाएँगी।
  4. सूजन कम करने के लिए आपको एक Cryocuff, जिसमें बर्फ होगी, भी दिया जा सकता है।
  5. सर्जरी के बाद नर्स आपकी ड्रेसिंग बदलेगी। ड्रेसिंग को आप सर्जरी के 4 दिन बाद निकाल सकते हैं। 

घाव की देखभाल:

आप 4 दिन के बाद ही नहा सकते हैं। ध्यान दें कि चीरे पर पानी न लगे। घाव को साफ और सूखा रखें। स्पंज बाथ भी एक अच्छा विकल्प है। अवशोषित टांके अपने आप खुल जाएंगे। अगर धागे नज़र आने लगे तो आप अस्पताल जाकर इन्हे कटवा सकते हैं। 

सर्जरी के बाद दर्द कम करने के लिए ध्यान देने वाली बातें:

इसके लिए आराम करें। घाव पर बर्फ लगाएं और इसे दबाकर रखें। अपने पैरों को ह्रदय के स्टार से ऊँचा उठायें। इससे रक्त शरीर के निचले हिस्सों में नहीं जमेगा। इसका पालन रात को भी करें। व्यायाम से आधे घंटे पहले दर्द निवारक गोलियां खा लें। 

गतिविधि:

बैसाखी का प्रयोग करें। चलते समय शरीर का वज़न बैसाखी पर रखें और पैर पर उतना ही वज़न रखें जितना डॉक्टर ने बताया हो। नी ब्रेसेस (Knee Braces) का प्रयोग करें और उनको पहनकर चलने का प्रयास करें। बैसाखी पर अत्यधिक निर्भर न हों। जब आप ठीक महसूस करने लगें तो धीरे धीरे नी कैप पहनकर पैर पर वज़न डालना शुरू करें। आपका डॉक्टर आपकी इसमें सहायता करेगा।

कुछ डॉक्टर आपको Continuous Passive Motion (CPM) नामक एक उपकरण भी प्रयोग करने के लिए कह सकते हैं। इसे सर्जरी के बाद शुरूआती हफ़्तों में इस्तेमाल किया जाता है। यह आपके पैरों की मूवमेंट (गतिविधि) बनाये रखता है, जब आप बिस्तर में होते हैं या आराम कर रहे होते हैं। इसको 5 से 7 दिनों तक रोज़ 10 घंटे के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके बाद आप फ़िज़ियोथेरेपिस्ट (Physiotherapist) के पास जा सकते हैं।

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy):

सर्जरी के एक हफ्ते बाद से इसे शुरू किया जा सकता है। आपको डॉक्टर द्वारा कई प्रकार के व्यायाम सिखाये जाएंगे जिससे जोड़ों की ताकत वापस आने में मदद मिलेगी। यह 24 हफ़्तों तक चल सकती है। अगर आप किसी खेल से जुड़े हैं तो अपने डॉक्टर से पूछें कि आप कबसे फिर खेलना शुरू कर सकते हैं। अगर आप फिर से खेल शुरू करना चाहते हैं तो स्विमिंग या ऐसी चीज़ों से शुरू करें जिनमें ज़्यादा मुड़ने या उछलने की ज़रुरत न हो।

सर्जरी के बाद डॉक्टर के साथ फॉलो-अप (जांच):

आपको सर्जरी के बाद पहले तो हर 2-4 हफ़्तों में डॉक्टर से मिलना होगा, फिर हर 3 महीनों में उसके बाद 6 महीनों और फिर 1 या 2 साल में। घुटने की गतिविधि का आंकलन किया जाता है। फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आपके व्यायाम को बदलते रहेंगे। सर्जरी के बाद कभी भी दर्द या कोई और परेशानी महसूस हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 

आप 2 से 6 हफ़्तों में गतिहीन कार्य करना शरू कर सकते हैं, हलके शारीरिक काम करना 3 से 4 महीनों में और थकाने वाली अतिउत्साही काम शुरू करने के लिए 9 महीने लग सकते हैं। ACL ग्राफ्ट के बाद पूर्ण रिकवरी में करीब एक साल लगेगा। 

(और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)

इस सर्जरी का सफलता दर लगभग है। हालांकि अन्य सर्जरी की तरह इस सर्जरी में भी कई जोखिम हो सकते हैं:

  1. पहले 5-7 दिनों में संक्रमण होने का जोखिम रहता है। इससे बचने के लिए एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं। कुछ गंभीर समस्यायों में फिर सर्जरी करने की आवश्यकता हो सकती है।
  2. सर्जरी के बाद 2-3 हफ़्तों तक पैरों में रक्त के थक्कों (Deep Vein Thrombosis; गहरी नसों में भी थक्के बन सकते हैं) के बनने की सम्भावना हो सकती है। इन्हें Blood Thinner (खून पतला करने की दवा) से ठीक किया जा सकता है।
  3. रक्त के थक्कों की या किसी अन्य वजह से फेफड़ों की धमनियों में रूकावट पैदा हो जाना जिससे फेफड़ों में रक्त की आपूर्ति पूरी नहीं हो पाती। इसे पल्मोनरी एम्बोलिस्म (Pulmonary Embolism) कहते हैं।
  4. रक्त वाहिकाओं या नसों को भी क्षति हो सकती है जिससे उनको कार्यवाही में परेशानी या असमर्थता हो सकती है। 
  5. ऊतकों में बने थक्कों में सूजन हो सकती है। जो अपने आप 3-4 हफ़्तों के बाद ठीक हो जाती है।
  6. एनेस्थीसिया के साथ जुड़े जोखिम जैसे उनींदापन, चक्कर, उलटी, अवसाद, श्वास सम्बन्धी परेशानियां हो सकती हैं।
  7. हो सकता है कि सूजन और दर्द जाने में 3-4 महीने लग जाएँ। 
  8. सर्जरी के बाद शारीरिक कामों को जल्दी शुरू कर देने से ऐसा हो सकता है की ग्राफ्ट पूरी तरह से शरीर के अनुकूल न बैठ पाए
और पढ़ें ...

References

  1. Shea, Kevin G, Carey, James L.Management of Anterior Cruciate Ligament Injuries: Evidence-Based Guideline.JAAOS - Journal of the American Academy of Orthopaedic Surgeons: May 2015 - Volume 23 - Issue 5 - p e1–e5
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