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एबीओ ब्लड ग्रुप में ओ, ए, बी या एबी ब्लड ग्रुप हैं। आरएच एंटीजन एक ऐसा फैक्टर है, जो खून की रेड ब्लड सेल्स की सतह पर मौजूद हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। आरएच टेस्ट से इस बात की जांच की जाती है कि उस व्यक्ति का ब्लड आरएच पॉजिटिव है या आरएच निगेटिव है। 

(और पढ़ें - ब्लड ग्रुप टेस्ट कैसे होता है)

  1. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट क्या होता है? - What is blood group ABO and RH Test in Hindi?
  2. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of blood group ABO and RH Test in Hindi?
  3. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट से पहले - Before blood group ABO and RH test in Hindi
  4. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट के दौरान - During blood group ABO and RH test in Hindi How It Is Done
  5. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट के बाद - After blood group ABO and RH test in Hindi
  6. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट के क्या जोखिम हैं? - What are the risks associated with blood group ABO and RH mean in Hindi?
  7. रक्त समूह एबीओ एंड आरएच टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of blood group ABO and RH test mean in Hindi?

इस टेस्ट से यह जानने का प्रयास किया जाता है कि व्यक्ति का ब्लड ग्रुप कौन सा है। सभी व्यक्तियों के ब्लड ग्रुप एक नहीं होते हैं। कई प्रकार के ब्लड ग्रुप होते हैं। कुछ ग्रुप ज्यादातर लोगों में पाए जाते हैं तो कुछ ग्रुप बहुत दुर्लभ होते हैं। 

अगर आपका ब्लड ग्रुप किसी के ब्लड ग्रुप से मैच कर गया तो आप को उस व्यक्ति के साथ कॉम्पैटेबल कहा जाता है। ऐसी स्थिति में आप-दोनों जरूरत पड़ने पर आपस में एक दूसरे के खून का लेन-देन कर सकते हैं। यानी आप-दोनों को एक दूसरे का खून चढ़ाया जा सकता है। 

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इस टेस्ट के माध्यम से यह जाना जाता है कि व्यक्ति का ब्लड ग्रुप किस प्रकार का है। व्यक्ति के किसी अंग के प्रत्यारोपण के समय या फिर किसी गर्भवती महिला के ब्लड ग्रुप को उसके बच्चे के ब्लड ग्रुप से मैच कराने के लिए या फिर अगर आप किसी को ब्लड डोनेट करना चाह रहे हैं तो इन सारी परिस्थितियों में यह जानना जरूरी होता है कि आपका ब्लड ग्रुप क्या है। आपका ब्लड ग्रुप उस व्यक्ति के ग्रुप के साथ मिलता है या नहीं, जिसे आप अपना खून दे रहे हैं या फिर जिसके अंगों को ट्रांसप्लांट किया जा रहा है।

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इस टेस्ट को करवाने से पहले आपको किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती है। अन्य ब्लड टेस्ट की तरह इस टेस्ट में भी खून का सैंपल लिया जाता है। इसलिए जांच के लिए जाते समय आधी बांह की या फिर ढीली शर्ट पहनकर जाएं तो ज्यादा ठीक रहेगा। इससे डॉक्टर को खून का सैंपल लेने में आसानी होगी। इसके अलावा अगर आप किसी तरह की कोई दवा, हर्ब्स या फिर अल्कोहलिक चीज का सेवन करते हैं तो जांच से पहले अपने डॉक्टर से एक बार बता दें। 

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इस टेस्ट के लिए डॉक्टर निम्नलिखित तरीके से आपके खून का सैंपल लेंगे:

  • डॉक्टर आपके हाथ की भुजा पर एक इलास्टिक बैंड बांध देंगे। इससे खून का बहाव रुक जाएगा। खून का बहाव रुक जाने से नसें फूल जाती हैं। इसके बाद नसों में से खून का सैंपल पतली सी सूई चुभोकर आसानी से निकाल लिया जाता है। 
  • सुई चुभोने से पहले उस जगह पर अल्कोहाल से साफ किया जाता है। (और पढ़ें - शराब की लत छुड़ाने के घरेलू उपाय)
  • अब सुई को नस में चुभोकर खून का सैंपल लिया जाता है।
  • अगर सुई सही जगह नहीं चुभोई गई तो एक से अधिक जगह से सैंपल लेने का प्रयास किया जा सकता है।
  • सुई के साथ एक ट्यूब या कोई शीशी साथ रखते हैं। इस शीशी में सैंपल रखते हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में खून का सैंपल ले लेने के बाद सूई बाहर निकाल ली जाती है। इसके बाद इलास्टिक बैंड को भी खोल देते हैं।
  • सुई हटाने के बाद उस जगह पर, जहां सूई चुभोई गई होती है, वहां किसी रूई या फिर किसी गत्ते से हल्के हाथों से सहलाया जाता है। ऐसा करके उस जगह से खून बहने से रोका जाता है।
  • इसके बाद वहां पर हल्के हाथों से दबाकर बैंडेज से बांध दिया जाता है। 

खून के सैंपल आपके हाथ की नस में से लिया जाता है। इसके लिए इलास्टिक बैंड बांधी जाती है। यह इलास्टिक बैंड आपकी भुजा पर बांधी जाती है।  यह काफी कसा हो सकता है। इस दौरान खून का सैंपल लेने पर आपको किसी खास तरह की तकलीफ नहीं होगी या फिर सुई चुभोए जाते समय थोड़ी सी तकलीफ हो सकती है। 

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खून का सैंपल लेने की प्रक्रिया में बहुत कम खतरा होता है। जिस जगह पर आपको सूई चुभोई जाती है, वहां आपको हल्का सा दर्द या चुभन हो सकती है। सूजन भी आ सकती है। उस जगह से पर आप थोड़ी देर तक हल्के हाथ दबाकर परेशानी दूर कर सकते हैं। बहुत दुर्लभ मामलों में ऐसा होता है कि सई चुभोए जाने वाली जगह पर सैंपल लेने के बाद नस में सूजन आ जाती है। इस समस्या को फ्लेबिटिस कहते हैं। सूजन वाली नस की हल्की सी सेंकाई करके नस की सूजन कम किया जा सकता है। 

किसी व्यक्ति का भी खून किसी को चढ़ाने से पहले एक दूसरे के खून का ग्रुप पता किया जाता है। गर्भवती महिलाओं के इलाज से पहले भी ब्लड ग्रुप की जांच की जाती है। नीचे दी गई सारणी से आप समझ सकते हैं कि खून के दाता और ग्राही यानी खून देने वाले और खून लेने वाले व्यक्ति कब एक दूसरे के लिए कॉम्पैटिबल कहे जाएंगे। 

नीचे दिए गए टेबल को देखें और जानें:  अगर किसी व्यक्ति को A- ब्लड ग्रुप है तो वह A- ग्रुप या O- ग्रुप के खून को चढ़वा सकता है। 

खून के वो प्रकार जो मैच करते हैं: 

Blood Group and Rh Type of Patient Safe (Compatible) Blood Types for RBC Transfusion*
A पॉजिटिव A पॉजिटिव, A निगेटेव, O पॉजिटिव, O निगेटेव
A निगेटेव A निगेटेव, O निगेटेव
B पॉजिटिव B पॉजिटिव, B निगेटेव, O पॉजिटिव, O निगेटेव
B निगेटेव B निगेटेव, O निगेटेव
AB पॉजिटिव AB पॉजिटिव, AB निगेटेव, Aपॉजिटिव, A निगेटेव, B पॉजिटिव, B निगेटेव, O पॉजिटिव, O निगेटेव
AB निगेटेव AB निगेटेव, A निगेटेव, B निगेटेव, Oनिगेटेव
O पॉजिटिव O पॉजिटिव, O निगेटेव
O निगेटेव O निगेटेव
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