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हमारे घरों में प्रतिदिन कई प्रकार के मसालों को उपयोग किया जाता है। मसाले कई स्वास्थ्य संबंधी विशेषताओं से भरपूर होते हैं। मसालों को प्रकृति के वरदान के रूप में जाना जाता है। कोरोना जैसे महामारी के समय में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के लिए कई मसालों के सेवन पर जोर दिया जा रहा है।

घर की रसोई में मौजूद दालचीनी, तेजपत्ता, लौंग, काली मिर्च हो या हल्दी सभी के अपने विशेष गुण हैं। ऐसे ही तमाम स्वास्थ्य-बर्धक गुणों को समेटे हुए एक मसाला है- पैपरिका। इसे लाल शिमला मिर्च के पाउडर के रूप में भी जाना जाता है। यह सूखी लाल शिमला मिर्च से बनाया जाता है। दुनियाभर में पैपरिका का उपयोग किया जाता है, ​विशेषकर चावल के डिशों को बेहतर स्वाद देने में यह काफी पसंदीदा मसालों में से एक है। दुनिया के तमाम देशों में पैपरिका को तैयार किया जाता है। हंगरी वर्तमान में उच्चतम गुणवत्ता वाले पैपरिका के रूप में जाना जाता है। हंगरी के प्रसिद्ध गौलेश सूप का स्वाद बढ़ाने वाले मसालों में पैपरिका को सबसे महत्वपूर्ण माना है।

पैपरिका के गुणों की बात करें तो यह न केवल एंटीऑक्सिडेंट में समृद्ध है, साथ ही इसमें विटामिन और खनिज भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसकी छोटी सी मात्रा से विटामिन ए प्राप्त किया जा सकता है।

इस लेख में हम आपको इस गुणकारी मसाले से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे।

  1. पोषक तत्वों से भरपूर है पैपरिका - Nutrition se bharpoor hai Paprika
  2. कैंसर के जोखिमों को कम कर सकती है पैपरिका - Cancer risk ko kam krti hai paprika
  3. मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए करें पैपरिका का सेवन - Diabetes Control karne ke liye kare paprika ka sevan
  4. आंखों के लिए फायदेमंद पैपरिका - Aankho ke liye faydemand hai paprika

पैपरिका की छोटी सी मात्रा में कई सारे चमत्कारी गुण मौजूद होते हैं। यह कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और लाभकारी यौगिकों से पूर्ण होता है। इसके लाभ को ऐसे समझा जा सकता है।

पैपरिका के 1 बड़े चम्मच (करीब 6.8 ग्राम) में निम्नलिखित तत्वों की मौजूदगी होती है।

  • कैलोरी : 19
  • प्रोटीन : करीब 1 ग्राम
  • वसा : करीब 1 ग्राम
  • कार्ब : 4 ग्राम
  • फाइबर : 2 ग्राम
  • विटामिन ए : दैनिक आवश्यकता का 19 फीसदी
  • विटामिन ई: दैनिक आवश्यकता का 13 फीसदी
  • विटामिन बी6 : दैनिक आवश्यकता का 9 फीसदी
  • आयरन : दैनिक आवश्यकता का 8 फीसदी

उल्लेखनीय है कि मात्र एक चम्मच पैपरिका से दैनिक रूप से विटामिन-ए की लगभग 20 फीसद आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। इतना ही नहीं इस मसाले में विभिन्न प्रकार के एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स के कारण कोशिकाओं को होने वाली क्षति से भी बचा सकते हैं। फ्री रेडिकल क्रोनिक बीमारियों जैसे हृदय रोग और कैंसर को जन्म दे सकते हैं। ऐसे में पैपरिका जैसे एंटीऑक्सिडेंट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से इस प्रकार की स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।

पैपरिका में कई प्रकार के ऐसे यौगिकों की मौजूदगी होती है जो आपको कैंसर से बचा सकते हैं। बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन और जैक्सैंथिन सहित पैपरिका में पाए जाने वाले कई कैरोटेनॉइड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ने में मदद करते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।

इस संबंध में एक अध्ययन किया गया। इसमें 2,000 ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया, जिनके खून में बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन, जैक्सैंथिन की मात्रा अधिक थी। विशेषज्ञों ने पाया कि ऐसी महिलाओं में तुलनात्मक रूप से स्तन कैंसर विकसित होने की आशंका 25-35 फीसद कम थी। इतना ही नही विशेषज्ञों का मानना है कि पैपरिका में पाया जाने वाला रसायनिक यौगिक कैप्साइसिन कैंसर कोशिकाओं का विकास नहीं होने देता है।

पैपरिका में मौजूद रसायनिक यौगिक कैप्साइसिन मधुमेह को नियंत्रित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कैप्साइसिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण जीन को प्रभावित करने के साथ शरीर में शुगर ब्रेक डाउन करने वाले एंजाइम को भी रोक सकता है। इतना ही नहीं मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने में भी यह काफी कारगर है।

इसी संबंध में किए गए एक अध्ययन में मधुमेह रोगी 42 गर्भवती महिलाओं को 4-सप्ताह तक दैनिक रूप से 5-मिलीग्राम कैप्साइसिन सप्लीमेंट दिया गया। परिणामस्वरूप पाया गया कि दूसरों की तुलना में इन महिलाओं में भोजन के बाद के ब्लड शुगर के स्तर में काफी कमी आई है।

पैपरिका में मौजूद विटामिन ई, बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन और जैक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व आंखों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने कई अध्ययनों में पाया कि यह पोषक तत्व उम्र से संबंधित मैक्युलर डीजेनेरेशन (एएमडी) और मोतियाबिंद के जोखिमों को कम कर सकते हैं। पैपरिका में पाया जाने वाला ल्यूटिन और जैक्सैन्थिन एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं, जो आंखों को कई प्रकार के नुकसान से बचा सकते हैं।

इस संबंध में 1,800 से अधिक महिलाओं पर अध्ययन किया गया। इसमें कुछ महिलाओं को ल्यूटिन और जैक्सैंथिन की उच्च मात्रा, जबकि कुछ को इसकी कम मात्रा दी गई। परिणामस्वरूप पाया गया कि जिन महिलाओं को ल्यूटिन और जैक्सैंथिन की उच्च मात्रा दी गई उनमें मोतियाबिंद विकसित होने की आशंका 32 फीसदी कम थी। इसी तरह 4,519 वयस्कों के साथ किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि ल्यूटिन और जैक्सैंथिन की उच्च संतुलित मात्रा एएमडी के खतरे को भी कम कर सकती है।

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