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इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाना खाने का निश्चित समय होता है। इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग को काफी पसंद किया जा रहा है। खासकर वजन कम करने के लिए इसे लाभकारी माना जा रहा है। इसके साथ ही कई बीमारियां जैसे बीपी, कोलेस्ट्रोल के स्तर को संतुलित रखने में भी यह कारगर है। जिस तरह लंबे समय तक कम कैलोरी वाले आहार खाने से वजन कम होता है, उसी तरह इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी रुक रुक कर उपवास करने से वजन कम करने में फायदा मिलता है। हालांकि कोई भी शोध यह नहीं कहता कि इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने के लिए अन्य सभी तरीकों से बेहतर है। इसके बाजवूद इससे आपको कुछ स्वास्थ्य लाभ अवश्य मिलता है।

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इंटरनमिटेंट फास्टिंग कैसे की जाती है?

 ​इंटरनमिटेंट फास्टिंग को इस तरह समझ सकते हैं:

  • वैकल्पिक दिन में व्रत रखना:
    इसके तहत व्यक्ति एक दिन व्रत रखता है जबकि दूसरे दिन सब कुछ खाता है। जो भी उसका मन हो। उदाहरण के तौर पर समझें सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को आप व्रत रखते हैं जबकि बाकी बचे दिन में आप हर चीज खाते हैं। इसे ही वैकल्पिक दिन में व्रत रखना कहते हैं।
     
  • पूरे दिन व्रत रखना:
    इसके तहत व्यक्ति सप्ताह के एक दिन या दो व्रत रखता है। व्रत रखने के दौरान वह कुछ नहीं खाता जबकि दूसरे दिनों में मन मुताबिक चीजें खाता है। उदाहरण के तौर पर समझें। इसे आप 5:2 फंडा कह सकते हैं। जैसे कि सप्ताह के 5 दिन खाने में किसी तरह की सीमा नहीं है, लेकिन सप्ताह के दो दिन बिल्कुल कुछ नहीं खाना है। इस तरह आप पूरे सप्ताह संतुतिल कैलोरी ही लेते हैं। 
     
  • कुछ समय के लिए व्रत रखना:
    इसके तहत व्यक्ति विशेष दिन में किसी एक निश्चित समय में रोजाना कुछ नहीं खाता। उदाहरण के तौर पर समझें। अगर आप सुबह 8 बजे से दोपहर के 3 बजे तक मन मुताबिक खाते हैं और दिन के बाकी समय कुछ नहीं खाते। यह भी इंटरनमिटेंट फास्टिंग का एक तरीका है।

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इंटरमिटेंट फास्टिंग से कैसे होता है वजन कम?

शरीर में जमा वसा केवल संग्रहीत ऊर्जा का ही रूप है। इसका मतलब यह है कि यदि आप भोजन नहीं करते हैं, तो आपका शरीर वसा के रूप में मौजूद ऊर्जा को इस्तेमाल करता है। जब आप कुछ नहीं खाते हैं, तो यह उपवास होता है। इससे आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं और बढ़ते वजन को भी संतुलित कर सकते हैं। फास्ट रखने की वजह से जब भी शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है तो शरीर में मौजूद वसा ऊर्जा की जरूरत में इस्तेमाल हो जाती है। इस तरह शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा खत्म हो जाती है या फिर शरीर में अतिरिक्त वसा जमा नहीं होती है। जब आप ऐसा नियमित करते हैं तो इससे शरीर में बहुत अधिक मात्रा में वसा बन ही नहीं पाती। यही वजह है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग की वजह से मोटापा कम हो सकता है।

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इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे

  • इंटरमिटेंट फास्टिंग करके आप निश्चित डाइट प्लान का अनुसरण करने लगते हैं।
  • आप अपने मन मुताबिक खा-पी सकते हैं। किसी तरह की बाध्यता नहीं होती और न ही मन मारने की जरूरत होती है।
  • इस डाइट पर टिके रहने की वजह से बढ़ती उम्र के लक्षण कम उम्र में नजर नहीं आते।
  • अगर आप डायबिटीज की सीमा तक पहुंच गए हैं, तो इस डाइट पर टिके रहने की वजह से डायबिटीज को होने से पहले ही नियंत्रित कर सकते हैं।

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