नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे की जाए? यह एक मां से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। अपने बच्चे से जुड़ी हर एक बात मां को पता होती है। नवजात शिशु, जो बोल भी नहीं सकता लेकिन फिर भी मां ही है जो उसकी हर समस्या को समझती है और उसका इलाज भी करती है। लेकिन कई बार एक सवाल उन्हें भी परेशान करता है कि दूध पीने के तुरंत बाद ही बच्चा उल्टी क्यों कर देता है?
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हालांकि शिशुओं में यह समस्या आम होती है लेकिन फिर भी यह जानना तब ज्यादा जरूरी हो जाता है जब बात छोटे बच्चे की हो। कई बार डकार आने के बाद भी बच्चे उल्टी कर देते हैं। आज इस लेख के माध्यम से जानेंगे की बच्चे दूध पीने के बाद ही उल्टी क्यों कर देते हैं?
- दूध पीने के तुरंत बाद बच्चे क्यों कर देते हैं उल्टी - Doodh pine ke turant baad bacche kyu kar dete hain ulti
- शिशु को ज्यादा उल्टी आने पर उनके विकास पर क्या असर पड़ता है - Jyada ulti aane se shishu ke vikas par prabhav
- बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी आये तो डॉक्टर से सम्पर्क करें - Bacche ko doodh pine ke baad ulti aaye to doctor se sampark kare
- बच्चे दूध की उल्टियां करना कब बंद करते हैं - Bacchon me doodh ki ultiyan karna kab band hota hai
दूध पीने के तुरंत बाद बच्चे क्यों कर देते हैं उल्टी - Doodh pine ke turant baad bacche kyu kar dete hain ulti
यह तो सभी जानते हैं कि नवजात शिशुओं का पाचन तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होता है इसके अलावा भी निम्नलिखित कारणों से बच्चे दूध पीने के तुरंत बाद उल्टी कर देते हैं:
- जब आप खाते या पीते हैं, तो भोजन ग्रासनली से गुजरता है और इसके बाद भोजन पेट के एसिड से मिल कर आंतों तक पहुंचता है जहां पाचन क्रिया शुरू होती है। ग्रासनली और पेट के बीच एक वाल्व होता है जो भोजन को भोजन नली में वापस जाने से रोकता है। शिशुओं में, यह वाल्व पूरी तरह से विकसित नहीं होता है जिसके कारण बच्चों को पिलाया जाने वाला दूध पाचन क्रिया में आने से पूर्व ही लौट जाता है और उन्हें उल्टी होती है इस स्थिति को गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स के रूप में जाना जाता है।
- शिशुओं का पेट बहुत छोटा होता है इसलिए वह ज्यादा दूध नहीं पी पाते। चार महीने तक बच्चे का पेट थोड़ी मात्रा में ही दूध को पचा सकता है। लेकिन बच्चे के बढ़ने के साथ ही वाल्व भी विकसित होता है जिससे भोजन वापस ग्रासनली तक नहीं जाता और बच्चों को उल्टी की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।
शिशुओं के दूध उलटने के कुछ अन्य कारण:
- कई बार जल्दी-जल्दी और ज्यादा दूध पीने के कारण भी शिशु को उल्टी हो सकती है।
- ऐसा तब भी होता है जब बच्चा रो रहा हो, उसे खांसी हो या वो थका हुआ हो। (और पढ़ें - बच्चों को चुप कराने का तरीका)
शिशु को ज्यादा उल्टी आने पर उनके विकास पर क्या असर पड़ता है - Jyada ulti aane se shishu ke vikas par prabhav
ज्यादा उल्टी आने से शिशु का स्वास्थ्य तब तक प्रभावित नहीं होगा जब तक की वह ठीक से खा रहा हो और उसका वजन भी पर्याप्त हो। जितना शिशु को दूध पिलाया गया हो उसके हिसाब से अगर कम मात्रा में उल्टी के माध्यम से दूध बाहर निकलता है तो ऐसा होना सामन्य है। इससे बच्चे के विकास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी आये तो डॉक्टर से सम्पर्क करें - Bacche ko doodh pine ke baad ulti aaye to doctor se sampark kare
- बच्चे को गोद में सीधा रखकर दूध पिलाना चाहिए। दूध पिलाने के बाद भी लगभग 15 - 30 मिनट तक उसी अवस्था में रखना चाहिए। इससे भोजन को सुचारू रूप से पाचन तंत्र तक पहुंचने में मदद मिलती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा खाने के तुरंत बाद खेले नहीं। (और पढ़ें - बच्चे को दूध पिलाने के तरिके)
- बच्चे को लिटाकर बोतल से दूध नहीं पिलाना चाहिए। इससे तरह से दूध पिलाने से बच्चे को उल्टी की समस्या बढ़ सकती है। (और पढ़ें - स्तनपान या बोतल से दूध पिलाना: क्या है बेहतर?)
- ध्यान रखें बच्चे को दूध पिलाते समय आसपास किसी तरह का कोई शोर न हो इससे बच्चे का ध्यान भटक सकता है।
- बच्चे को ज्यादा दूध नहीं पिलाना चाहिए। जल्दी-जल्दी लेकिन कम मात्रा में दूध पिलाना चाहिए। यह ध्यान दें की बच्चे को भूख कितनी देर में लगती है उस हिसाब से ही बच्चे को दूध दें।
- बच्चे को चुस्त कपड़े नहीं पहनाने चाहिए। डायपर को बहुत ज्यादा टाइट न पहनाएं। (और पढ़ें - डायपर रैश के कारण)
अगर बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए :
- अगर बच्चे का वजन न बढ़ रहा हो या बच्चे को सांस लेने में दिक्क्त हो रही हो तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। (और पढ़ें - वजन बढ़ाने के तरीके)
- उल्टी के साथ खून आना।
- ज्यादातर शिशुओं को उल्टी के माध्यम से फटा दूध निकलता है लेकिन अगर शिशु को उल्टी में फटा दूध न निकल कर सिर्फ दूध निकले तो यह भी चिंता का विषय है।
- बच्चे को हरे या भूरे रंग की उल्टी होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
बच्चे दूध की उल्टियां करना कब बंद करते हैं - Bacchon me doodh ki ultiyan karna kab band hota hai
शिशुओं को आमतौर पर छह या सात महीने तक उल्टी आना बंद हो जाती है लेकिन कुछ शिशु एक साल तक उल्टी करना बंद नहीं करते। शिशु के बढ़ने के साथ उसकी मांसपेशियां विकसित और मजबूत होती हैं जिससे भोजन पेट में ही रहता है और उल्टी नहीं होती।
(और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)
छोटे बच्चों को खाने के तुरंत बाद ही उल्टी होने की समस्या आम है लेकिन इसके आलावा भी अगर कभी बच्चे में कोई असामान्य लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।



