myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

अब जब आपका शिशु चार महीने का हो गया है तो आप उस के साथ पहले से अधिक समय खेलने में व्यतीत कर रही होंगी। अब शिशु न केवल आपकी शारीरिक गतिविधियों से आकर्षित हो रहा होगा, बल्कि अब वह आपकी आवाज के प्रति भी हंसकर या अजीब-अजीब आवाजों से प्रतिक्रिया दे रहा होगा। शिशु इस समय तक और अधिक सक्रिय हो जाता है। 

यह आपके और शिशु दोनों के लिए विकास का मजेदार दौर है। शिशु का विकास ठीक से हो, इसके लिए उसके खेलने का समय बढ़ाएं। उसे एक ऐसा वातावरण दें, जहां वह ठीक तरह से खेले और खाए। अब वह रात को आराम से सोएगा और बार-बार खाने के लिए नहीं उठेगा। इससे आपको भी पर्याप्त नींद मिल पाएगी। शिशु अब भी दूध से एंटीबॉडीज और पोषक तत्व ले रहा है, इसलिए स्तनपान करवाते रहें।

शिशु में विभिन्न रोगों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो, इसके लिए समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है। चार महीने में आपके शिशु को रोटावायरस, पोलियो, डिप्थीरिया, टिटनेस और व्हूपिंग कफ के लिए दूसरी खुराक दी जाएगी। इस बात का ध्यान रखें कि वैक्सीन का कोई रिएक्शन न हो और शरीर पर किसी भी तरह के चकत्ते होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

यदि आप कामकाजी महिला हैं तो अब शिशु को अपने बिना रहने की आदत डालने में आसानी होगी। शिशु को थोड़े-थोड़े समय के लिए छोड़कर इसकी आदत डाल सकती हैं। इससे शिशु को सेपरेशन एंग्जायटी कम होगी और आप आसानी से काम पर जा सकेंगी। चौथे महीने में शिशु के विकास से जुड़ी सभी बातें जो आपको जाननी चाहिए इस लेख में बताई गई हैं।

  1. चौथे महीने में शिशु का विकास - Chauthe Mahine me Shishu ka Vikas
  2. चार महीने के शिशु को क्या खिलाना है - Char Mahine ke Bacche ko kya Khilana Chahiye
  3. चार महीने का शिशु कैसे सोता है - Char Mahine ka Baccha Kaise Sota Hai
  4. चार महीने के शिशु को लगने वाले टीके - Char Mahine ke Shishu ko Lagne wale Teeke
  5. चार महीने के शिशु के लिए सुरक्षा संबंधी सावधानियां - Char Mahine ke Bacche ke liye Sawdhaniyan
  6. चार माह के शिशु के साथ अपनी देख-रेख कैसे करें - Bacche ke sath-sath Kaise Rakhein Khud ka bhi Khayal

चौथे महीने में आपके शिशु में बहुत सारे बदलाव दिखाई देंगे। खिलौने पकड़ना, फेंकना उनसे खेलना, हाथ मुंह में रखना आदि सभी बदलाव दिखने लगेंगे। अब शिशु और अधिक सक्रिय हो जाता है। इसका मतलब है कि अब आपको ज्यादा सतर्क रहना है। ध्यान रखना है कि शिशु खुद को नुकसान न पहुंचाए। उस पर नजर रखें कि वह कुछ ऐसा मुंह में न रखे, जिससे उसे चोट लगने या संक्रमण का खतरा हो। शिशु इस समय निम्न तरह से विकसित हो रहा है :

  1. चार महीने में शिशु का वजन - Char Mahine ke Bacche ka Weight
  2. शिशु की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं - Shishu ki Bhavnatamak Kriya
  3. मांसपेशियों में तालमेल - Bacche ki Maanspeshiyon ka Taalmel
  4. अब शिशु लंबे समय तक बैठ सकता है - Baccha Jyada Der tak Baith Paega
  5. शिशु की दृष्टि का विकास - Shishu ki Drishti ka Vikas
  6. चौथे महीने में संज्ञानात्मक विकास - Char Mahine ke Bacche ka Maansik Vikas
  7. अब शिशु अधिक उत्सुक होगा - Bacche ka Adhik Utsuk Hona

चार महीने में शिशु का वजन - Char Mahine ke Bacche ka Weight

चार महीने के शिशु का वजन जन्म के समय से लगभग दोगुना हो जाता है। हालांकि, हर शिशु अलग तरह से बढ़ता है और अगर शिशु का जन्म समय से पहले (प्रीमिच्योर) हुआ है तो अभी उसका वजन सामान्य से कम हो सकता है। फिर भी अपने शिशु के वजन को लेकर चिंतित हैं तो डॉक्टर से चेकअप करवा लें।

(और पढ़ें - जन्म के समय बच्चे का वजन)

शिशु की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं - Shishu ki Bhavnatamak Kriya

अब आपका शिशु लोगों को देखकर प्रतिक्रिया देगा। वह ज्यादा खेलना चाहता है और अब माता-पिता के अलावा अन्य लोगों के साथ भी सहज लगेगा। इस समय आप शिशु को रोकें नहीं, बल्कि अन्य बच्चों के साथ खेलने दें।

मांसपेशियों में तालमेल - Bacche ki Maanspeshiyon ka Taalmel

अब शिशु की मांसपेशियां अधिक विकसित हो चुकी हैं। वह अब उनमें तालमेल बिठाना भी सीख चुका है। अब वह न केवल खिलौनों को उठा पाएगा, बल्कि उठाकर घुमा भी पाएगा। शिशु पेट के बल घूम पाएगा। पेट के बल लेटने पर कोहनी को ऊपर उठाना और मजबूत सतह पर खड़ा करने पर टांगे जोर से हिलाना आदि क्रियाएं करता हुआ दिखेगा। इस समय का लाभ उठाते हुए शिशु को और अधिक ऐसे खिलौने दें, जिनसे उसकी मांसपेशियां मजबूत हों और तेजी से बढ़ें।

अब शिशु लंबे समय तक बैठ सकता है - Baccha Jyada Der tak Baith Paega

अब आपके शिशु का सिर स्थिर होने लगेगा। यानी सिर को स्थिर रखने के लिए उसे किसी तरह के सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी। बच्चा बिना सहारे के अब लंबे समय तक बैठने में सक्षम होगा। आपके शिशु की गर्दन की मांसपेशियां मजबूत हो चुकी हैं और अब पीठ व रीढ़ में मजबूती आएगी। इसके लिए आपको चाहिए कि अब शिशु को देर तक बैठने में मदद करें।

शिशु की दृष्टि का विकास - Shishu ki Drishti ka Vikas

शिशु शुरू में दूर की चीजें नहीं देख पाते हैं, लेकिन चार महीना का होने तक वह चमकीले और गहरे रंगों में भेद कर सकता है। उसकी दृष्टि विकसित हो रही है। अब शिशु हिलती वस्तुओं को पहचान पाएगा और रंगों में अंतर कर पाएगा। यह उचित समय है कि जब आप उसे रंग-बिरंगे खिलौने और कपड़े दे सकते हैं। आप शिशु को रंग-बिरंगी तस्वीरों वाली किताबें भी दे सकती हैं, इससे उसका संज्ञानात्मक विकास भी तेजी से होगा।

चौथे महीने में संज्ञानात्मक विकास - Char Mahine ke Bacche ka Maansik Vikas

आपके शिशु का संज्ञानात्मक विकास इस समय बहुत तेजी से हो रहा है। उसके व्यक्तित्व का विकास होना भी शुरू हो चुका है। शिशु स्नेह, हिलती-डुलती वस्तुओं, चेहरे के भावों, एक जैसी वस्तुओं के प्रति प्रतिक्रिया करेगा। अब वह दुख, गुस्सा और खुशी के भावों को दर्शाना शुरू करेगा। हाथों और आंखों के बीच तालमेल अच्छा होने लगेगा। यानी कोई आकर्षक वस्तु दिखने पर अब शिशु उस तक आसानी से पहुंच पाएगा।

अब शिशु अधिक उत्सुक होगा - Bacche ka Adhik Utsuk Hona

चूंकि शिशु का संज्ञानात्मक और मोटर विकास तेजी से हो रहा है तो अब वह उसके आस-पास की दुनिया को लेकर उत्साहित होगा। उसकी पहुंच में आने वाली वस्तुओं को वह न सिर्फ पकड़ेगा, बल्कि मुंह में डालने का प्रयास भी करेगा। मुंह और जीभ उसके प्रमुख अंग हैं और इन्हीं से वह पोषण व संतुष्टि का अनुभव करता है, इसलिए हर चीज को मुंह में लेगा। इससे बच्चे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए ध्यान दें कि नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी चीज बच्चे की पहुंच में नहीं होनी चाहिए।

आपके शिशु को अब भी आपके दूध की जरूरत है। अगर डॉक्टर फॉर्मूला दूध की सलाह दे रहे हैं तो यह भी दे सकती हैं। आपके और शिशु के लिए स्तनपान के फायदे बहुत अधिक हैं, इसलिए शिशु को 12 से 18 माह का होने तक स्तनपान करवाएं। हालांकि, शिशु जब भी दूध मांगे आपको उसे देना चाहिए, लेकिन अब अंतराल नियमित होने लगेगा। इसके अलावा अब आपके शिशु को यह पता चलने लगेगा कि उसे भूख लग रही है, वह रोने के अलावा दूसरे संकेत देने लगेगा। शिशु निम्न संकेत कर सकता है -

  • चीजें फेंक कर
  • होठों को चाटकर
  • अंगूठा चूसकर
  • आवाजें निकाल कर आपको बुलाने की कोशिश करते हुए
  • आपके स्तनों को पकड़ने का प्रयास करते हुए

रात-रातभर जागकर शिशु को शांत करवाने की पीड़ा का अब अंत हो चुका है। अब आपको देर रात जागकर उसे खिलाना और सुलाना नहीं पड़ेगा। अब शिशु की नींद नियमित हो चुकी है और आपको भी सोने का पर्याप्त समय मिलेगा। 

आपका चार महीने का शिशु अब दिन भर में 12 से 18 घंटे के लिए सोएगा। इनमें वह छह से आठ घंटे के लिए लगातार सोएगा। बाकी का समय शिशु दिन में दो से तीन घंटे की छोटी-छोटी नैप में सोएगा।

आपको यह ध्यान रखना है कि अभी आपका शिशु सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) के खतरे में हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें कि शिशु जहां सो रहा है वह जगह सुरक्षित हो। वहां शोर न हो और बच्चे की नींद में कोई खलल न पड़े।

किसी भी शिशु के जीवन में टीकाकरण बहुत जरूरी होता है। सुनिश्चित करें कि आपके शिशु को उसकी जरूरत के अनुसार सभी टीके लग चुके हैं। चौथे महीने तक शिशु को निम्न रोगों के लिए दूसरी खुराक दी जाएगी -

  1. टीकाकरण के दौरान शिशु को पकड़ने का सही तरीका - Vaccination ke Dauran Bacche ko Kaise Pakde
  2. टीकाकरण के बाद की देख-रेख - Vaccination ke Baad Bacche ka Kaise Dhyan Rakhein

टीकाकरण के दौरान शिशु को पकड़ने का सही तरीका - Vaccination ke Dauran Bacche ko Kaise Pakde

टीकाकरण के दौरान शिशु को ठीक तरह से पकड़कर आप उसे सुरक्षित महसूस करवा सकती हैं। शिशु को अपनी छाती के पास रखें और उसका एक हाथ अपनी बांह के नीचे रखें। उसके सिर को अपनी बांह पर रखें। शिशु की दूसरी बांह को अपने हाथ से पकड़ें। अब उसके पैरों को अपनी दूसरी बांह के नीचे रखें ताकि सभी चीजें आपके नियंत्रण में हों।

टीकाकरण के बाद की देख-रेख - Vaccination ke Baad Bacche ka Kaise Dhyan Rakhein

बहुत से शिशुओं के लिए टीकाकरण एक खराब अनुभव होता है। शिशुओं को आमतौर पर कुछ हल्के साइड इफेक्ट होते हैं, जैसे- बुखार, त्वचा पर चकत्ते या इंजेक्शन लगी जगह पर सूजन। ये सभी अस्थायी हैं, लेकिन आप सुई लगी जगह पर आइस पैक लगा सकते हैं। इस समय आप शिशु को स्तनपान करवाकर या कपड़े में लपेट कर भी आराम दे सकती हैं। टीकाकरण के चौबीस घंटों बाद तक शिशु का ठीक तरह से न खाना सामान्य है। ज्यादा चिंतित न हों और धैर्य रखें। यदि आपको ज्यादा चिंता हो रही है या शिशु में गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे लेकर डॉक्टर के पास जाएं।

(और पढ़ें - शिशु को कपड़े में लपेटने का सही तरीका)

जैसे-जैसे शिशु की मोटर और संज्ञानात्मक कौशलों का विकास होता है आपको और अधिक सतर्क होने की जरूरत होती है। आपको हर उस चीज को दूर हटा देना चाहिए, जिस तक पहुंचकर वह खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। आपको निम्न बातों का ध्यान रखना होगा -

  • धारदार वस्तुएं और रस्सियां, तारें शिशु की पहुंच से दूर रखें।
  • ध्यान रखें कि शिशु के साथ हमेशा कोई न कोई मौजूद रहे, ताकि गिरने की या चोट लगने की आशंका को कम किया जा सके।
  • शिशु के पास किसी भी गर्म चीज को न रखें। अब वह चीजें पकड़ सकता है, तो इससे वह खुद को जला सकता है।
  • यदि आप बच्चे को लेकर कार में जा रहे हैं तो ध्यान दें कि आपकी कार की सीट शिशु के लिए ठीक हो। देखें कि सुरक्षा बेल्ट ठीक तरह से लगी हुई है। इसके साथ ही शिशु को कभी भी कार में अकेला न छोड़ें। 
  • देखें कि आपका शिशु जिस भी चीज को पकड़ रहा है वह सुरक्षित और साफ है, क्योंकि वह हर चीज को मुंह में डालना चाहेगा।
  • शिशु के सोने का स्थान बिल्कुल सुरक्षित होना चाहिए। वहां ऐसे कोई भी खिलौने, कंबल या तकिया न हों, जिनसे उसका दम घुटने का खतरा हो।
  • शिशु के व्यवहार, मल और यूरिन को ठीक तरह से देखें, यदि आपको किसी भी तरह की परेशानी महसूस होती है तो आप डॉक्टर से बात कर सकते हैं।

अब शिशु चार महीने का हो चुका है तो आपको अपने लिए पर्याप्त नींद व आराम के लिए समय मिलना चाहिए। यदि आप कामकाजी महिला हैं तो फिर से ऑफिस जाने के बारे में सोच सकती हैं। जहां शिशु की अच्छे से देख-रेख करना और उसकी सभी जरूरतों को पूरा करना महत्वपूर्ण है, वहीं आपका भी स्वयं को ठीक रखना जरूरी है क्योंकि शिशु को सबसे पहले आपकी जरूरत है। आप जितनी स्वस्थ होंगी, उतना अधिक स्वस्थ आपका शिशु होगा। यहां कुछ चीजें हैं जो आपको करनी चाहिए -

  • काम को बांट दें। शिशु की देखभाल पूरे दिन अकेले करने से आप बहुत थक सकती हैं। इसके बजाय आप अपने पार्टनर या किसी करीबी रिश्तेदार और दोस्त से मदद ले सकती हैं।
  • पर्याप्त पोषण लें। स्वस्थ खाने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहेगी और क्योंकि आप स्तनपान करवा रही हैं यह सबसे जरूरी है। इस दौरान शराब व कैफीन न लें और न ही धूम्रपान करें, क्योंकि हानिकारक पदार्थ शिशु में दूध के माध्यम से जा सकते हैं।
  • सामाजिक बनें। आप मां बन गई हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि आप खुद को सार्वजनिक जीवन से हटाकर केवल घर में ही रहें। घरवालों से, दोस्तों से बातें करें। किताबें पढ़ें, फिल्में देखें और अन्य चीजें करें, जिनसे आपको अच्छा महसूस होता है। अब क्योंकि आपका शिशु बड़ा हो गया है तो आप उसे प्रैम (बच्चों का घुमाने वाला पालना) में बिठाकर अपने साथ पार्क भी ले जा सकती हैं। बाहर की ताजा हवा से आपको अच्छा महसूस होगा और वहां मौजूद ढेर सारे रंगों और क्रियाओं से आपका शिशु जुड़ा रहेगा। यह उसके विकास के लिए जरूरी है।
और पढ़ें ...

References

  1. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Important Milestones: Your Baby By Four Months
  2. Stanford Children's Health: Lucile Packard Children's Hospital [Internet], Stanford. USA; The Growing Child: 4 to 6 Months
  3. American Academy of Pediatrics [internet] Illinois, United States; Emotional and Social Development: 4 to 7 Months.
  4. National Health Service [Internet]. Hertfordshire. UK; Your Child's Development: 4-6 Months
  5. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Vaccines at 4 Months
  6. Winston, Robert and Chicot, Rebecca. The importance of early bonding on the long-term mental health and resilience of children. London J Prim Care (Abingdon). 2016; 8(1): 12–14. PMID: 28250823
ऐप पर पढ़ें
कोरोना मामले - भारतx

कोरोना मामले - भारत

CoronaVirus
5734 भारत
103पश्चिम बंगाल
33उत्तराखंड
361उत्तर प्रदेश
1त्रिपुरा
427तेलंगाना
738तमिलनाडु
381राजस्थान
101पंजाब
5पुडुचेरी
42ओडिशा
1मिजोरम
1मणिपुर
1135महाराष्ट्र
229मध्य प्रदेश
14लद्दाख
345केरल
181कर्नाटक
4झारखंड
158जम्मू-कश्मीर
18हिमाचल प्रदेश
147हरियाणा
179गुजरात
7गोवा
669दिल्ली
10छत्तीसगढ़
18चंडीगढ़
38बिहार
28असम
1अरुणाचल प्रदेश
348आंध्र प्रदेश
11अंडमान निकोबार

मैप देखें