"मेरा बच्चा अच्छी तरह से खाना नहीं खता है" यह काफी आम शिकायत है जो आपको हर जगह सुनने को मिल जाएगी। एनोरेक्सिया (Anorexia) एक आम ईटिंग डिसऑर्डर है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। एनोरेक्सिया से पीड़ित व्यक्ति को भूख नहीं लगती है। एनोरेक्सिया में रोगी ज्यादा खाना नहीं खा पाता है और उसे बिना कुछ खाएं-पिएं ही खट्टी डकारें आने लगती है। यह समस्या दिखने में जितनी आसान लगती है, इसका सही समाधान खोजना उतना ही मुश्किल है। कई मामलों में, यह समस्या शारीरिक और मानसिक जटिलताओं के साथ जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

  1. बच्चों में भूख न लगने का कारण
  2. बच्चों में भूख न लगने के लक्षण
  3. बच्चों की भूख बढाने के उपाय

कुछ बच्चों को आनुवंशिक (genetic) रूप से यह बीमारी होने की संभावना होती है।

  • ईटिंग एटकिट (Eating Etiquette) के बारे में शिक्षण का अभाव
  • भोजन में हमेशा एक ही प्रकार के व्यंजन
  • बचपन में अवसाद (डिप्रेशन) या कोई डर।

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बच्चों में भूख न लगने के लक्षण इस प्रकार हैं -

  • वजन घटना
  • उम्र के अनुसार वजन ना बढ़ाना
  • ठंडी वस्तुओं का सेवन सहन ना कर पाना
  • रोगों से लड़ने की क्षमता कम होना
  • थकान, सुस्ती होना (और पढ़ें – थकान कम करने के घरेलू उपाय)
  • पसीना आना
  • पेट में समस्या होना
  • युवा लड़कियों में मासिक धर्म ना होना
  • डिप्रेशन (और पढ़ें – डिप्रेशन का देसी इलाज​)
  • बालों का झड़ना
  • घाव भरने में समय लगना आदि कुछ मुख्य लक्षण हैं जो कि आप बच्चे में देख सकते हैं।

मुख्य रूप से वजन घटना, उम्र के हिसाब से वजन ना बढ़ना, अवसाद और पेट में गड़बड़ी आदि ध्यान देने वाले महत्वपूर्ण लक्षण होते हैं। 

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बच्चों की भूख लगने की दवा है भारतीय मसाले

काली मिर्च, इलायची, दालचीनी और अदरक के रूप में भारतीय मसालों का बहुत कम मात्रा में नियमित रूप से उपयोग पेट, आंतों और जिगर के पाचन एंजाइमों के स्राव को समय पर उत्तेजित करता है।

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शारीरिक गतिविधियों से दूर करें बच्चों में भूख की कमी

मध्यम शारीरिक गतिविधियों के रूप में आउटडोर खेलों की वजह से शरीर को कैलोरी की जरूरत होती है, जिससे बच्चा ठीक से खाना खाने लगता है। लेकिन अत्यधिक शारीरिक गतिविधि एनोरेक्सिया का एक ज्ञात कारण है। इसलिए ध्यान रखें।

एनोरेक्सिया के लिए दूर करे अवसाद

अगर एनोरेक्सिया के लिए अवसाद या डर एक कारण है, तो आपको बच्चे के व्यवहार पर निगरानी रखने और अवसाद या डर के कारण का पता लगाने के साथ साथ उन्हें घर पर और स्कूलों में एक आरामदायक माहौल देने की जरूरत है। इसमें आपको एक विशेषज्ञ की मदद लेना अत्यधिक आवश्यक है। बच्चों में अवसाद के इलाज के लिए ज़रूरी है की आप उन्हें किसी मनपसंद हॉबी को करने की आदत डालें।

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बच्चों में भूख की कमी के लिए खिलायेँ घी

भारतीय घरों में, घी (मक्खन) बहुत कम उम्र में बच्चे को खिलाना शुरू कर दिया जाता है। घी न सिर्फ पाचन बेहतर बनाता है, बल्कि यह बच्चे की बुद्धिमत्ता के स्तर, आवाज और त्वचा के रंग में सुधार करता है। यहां तक कि जिन बच्चों को दूध से एलर्जी है वो आसानी से घी का सेवन कर सकते हैं।

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बच्चों की भूख बढाने के उपाय करें खाने की अच्छी आदतों से

बच्चों की भूख बढाने के लिए इन उपायों को अपनाएं - 

  • बच्चे को उचित समय से खाना खाने की आदत डालें।
  • जंक फूड, वातयुक्त पेय से बचाएँ।
  • एक बार जब बच्चा भोजन कर लें, तो कम से कम अगले दो घंटे तक उसको खाने के लिए कुछ भी ना दें।
  • बच्चे के स्वाद के अनुसार उसे खाने दें ताकि वो शौक से खाना खाएँ।
  • काली मिर्च, इलायची, दालचीनी और अदरक आदि मसाले अगर बच्चे को पसंद नहीं है, तो वे बच्चे को बिना बताए उसके पसंदीदा व्यंजन में आप मिला सकते हैं।
  • जब बच्चा खाना खा रहा हो, तब टीवी या वीडियो गेम बंद कर दें।
  • परिवार के साथ बैठ कर खाना एक अच्छी आदत है।(और पढ़ें – डायपर के रैशेस हटाने के घरेलू नुस्खे)
  • अगर एनोरेक्सिया का कारण आनुवांशिक है, तो आपके बच्चे को उचित उपचार की आवश्यकता है।

बच्चों में भूख की कमी के लिए घरेलू उपाय

1. भोजन के बाद घी के साथ काली मिर्च का सेवन करें। (और पढ़ें – गाय के घी के फायदे और नुकसान)

2. जीरा और हींग को छाछ के साथ मिश्रित कर लें और बच्चे को पीने के लिए दें। आप स्वाद के लिए चीनी भी मिला सकते हैं।

3. अरविन्दासव, बालामृतम जैसी आयुर्वेदिक दवाओं को अपने चिकित्सक की सलाह के आधार पर रोगी को दे सकते हैं।

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