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बच्चे को स्पर्श करना कई चीजों का प्रतीक होता है। स्पर्श के द्वारा ही बच्चे बाहरी दुनिया से जुड़ पाते हैं। शायद इसीलिए बच्चे परेशानी में अपने माता-पिता के साथ दुलार करना पसंद करते हैं। यदि स्पर्श के माध्यम से बच्चे को स्वस्थ और मजबूत बनाने का कोई तरीका है, तो वह सिर्फ मसाज है। मालिश करने से आपका बच्चे के साथ गहरा रिश्ता बनाता है। मसाज से कई फायदे होते हैं।

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मां बनने के बाद कई महिलाएं अपने बच्चे की मसाज करना चाहती हैं, लेकिन मसाज का सही तरीका मालूम न होने के कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आपकी इसी परेशानी को देखते हुए, इस लेख में नवजात शिशु की मालिश के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही आपको नवजात शिशु की मालिश क्या है, नवजात शिशु की मालिश कब शुरू करें और कितनी बार करें, नवजात शिशु की मालिश के फायदे, नवजात शिशु की मसाज करने का सही समय, शिशु की मालिश कैसे करें, बच्चे की मालिश के लिए टिप्स व नवजात शिशु की मालिश कब तक करनी चाहिए, आदि बातों के बारे में भी बताया जा रहा है।

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  1. नवजात शिशु की मालिश क्या है
  2. बेबी की मसाज करने का सही समय
  3. नवजात शिशु की मालिश कब शुरू करें और कितनी बार करें
  4. नवजात शिशु की मालिश के फायदे
  5. नवजात शिशु की मालिश शुरु करने से पहले की जरूरी बातें
  6. नवजात बच्चे की मालिश कैसे करें
  7. नवजात शिशु की मालिश कब तक करनी चाहिए
  8. नवजात शिशु की मालिश के लिए जरूरी टिप्स
बच्चे की मालिश के डॉक्टर

नवजात शिशु की मालिश अभिभावकों के द्वारा की जाती है। इसमें आप बच्चों की मालिश के लिए बने तेल या लोशन का इस्तेमाल कर, उनके शरीर को सहलाते हुए तेल लगाते हैं। तेल मालिश बच्चे के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। साथ ही यह बच्चे और आप के बीच बेहतर तालमेल कायम करने के लिए जरूरी होती है।  

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नवजात शिशु की मसाज करने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब वह पूरी तरह से आराम कर चुका हो और शांत व खुश हो। दिन में कम से कम दो बार खाना खाने के बाद बच्चे को कम भूख लगती है, ऐसे में आप बच्चे की मसाज कर सकती हैं। दूसरी बार भोजन करने के करीब 45 मिनट बाद ही बच्चे की मालिश करनी चाहिए। इसके अलावा, मालिश के बाद बच्चे को खाना खिलाने के लिए कम से कम 15 मिनट जरूर रुकें। इस दौरान आपके बच्चे के शरीर को आराम करने का समय मिल जाएगा।

बच्चे के नहाने से पहले या उसके सोने से पहले मालिश करना बेहद उपयोगी माना जाता है। इसमें नहाने से पहले बच्चे की मालिश करना बेहद कारगर माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि मालिश के बाद नहाने से बच्चे के शरीर में जमा हुआ अतिरिक्त तेल साफ हो जाता है और इससे उसकी त्वचा को संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है। नहाने से पहले बच्चे की मालिश का विकल्प आप तब चुन सकती हैं जब आपके बच्चे की त्वचा शुष्क हो। साथ ही आपको मालिश का सही समय जानने के लिए बच्चे के डॉक्टर से भी सलाह ले लेनी चाहिए।

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बच्चे की मालिश कब शुरू करें

सामान्यतः लोगों की राय यह है कि एक माह पूरे होने के बाद ही आपको अपने बच्चे की मालिश शुरू करनी चाहिए। दरअसल, जन्म के बाद आपके बच्चे की त्वचा पूरी तरह से विकसित नहीं होती है और इसे पूरी से विकसित होने में करीब 15 दिनों का समय लगता है। जन्म के बाद बच्चे की नाभि को सही तरह से ढकने में करीब 15 दिन लगते हैं। यदि मालिश वाला तेल नाभि से बच्चे के अंदर चल जाए तो इससे उसको संक्रमण होने का खतरा रहता है। अगर आप अपने बच्चे की मालिश अन्य बच्चों के साथ करने पर विचार कर रहीं हैं, तो आपको करीब छह सप्ताह तक इंतजार करना चाहिए, क्योंकि छोटे बच्चों को भीड़ भरे माहौल में तनाव होने लगता है।

एक माह के बाद ही शिशु की मालिश का उचित समय माना जाता है। जन्म के बाद के पहले माह में बच्चे की नाभि पूरी तरह से सही स्थिति में आ जाती है। साथ ही जन्म के समय के मुकाबले बच्चे की त्वचा में संवेदनशीलता कम होती है।

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बच्चे की मालिश कितनी बार करें

बच्चे की मालिश को कितनी बार करनी चाहिए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। बच्चे को लंबे समय तक फायदे प्रदान करने के लिए आपको उसकी नियमित मालिश करनी चाहिए। अगर मालिश से बच्चे को कोई परेशानी का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए और उनसे नियमित मालिश करने के तरीकों के बारे में जानना चाहिए।

मालिश से बच्चों को कई फायदे मिलते हैं, इसके कुछ फायदों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

सामाजिक और मानसिक विकास को बढ़ाने में सहायक

एक अध्ययन से पता चला है कि मालिश से बच्चे को जो स्पर्श महसूस होता है वह स्पर्श की भावना बच्चे के मानसिक और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। इसके अलावा मालिश से माता-पिता के साथ बच्चे के रिश्ता मजबूत बनते हैं।

तनाव कम होता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है

मालिश से शिशु का तनाव कम होता है। शिशु की मालिश से उसके शरीर में खुशी को महसूस कराने वाला हार्मोन ऑक्सीटोसीन जारी होने लगाता है, साथ ही तनाव का कारण बनने वाला हार्मोन (कोर्टिसोल) में कमी आती है। इसके अलावा बच्चे की मांसपेशियों में आराम मिलता है, जिससे आपके बच्चे का विकास तेजी से होता है।

तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है

मालिश बच्चे की तंत्रिका तंत्र के लिए फायदेमंद होती है, इससे मांसपेशियों के तालमेल (motor skills) में सुधार होता है।

बच्चे की बेहतर नींद में मदद करती है

मालिश के बाद शिशु अच्छी नींद ले पाते हैं। नींद लेने के दौरान मांसपेशियां तेजी से विकसित होने लगती हैं, जिससे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार आता है। सोने से पहले शिशुओं की मालिश करने से उनके शरीर अधिक मात्रा में मेलाटोनिन उत्पन्न होता है, मेलाटोनिन को नींद को नियंत्रित करने वाला हार्मोन माना जाता है।

विकलांग बच्चों की जिंदगी में सुधार करती है

डॉउन सिंड्रोम और सेरेब्रल पाल्सी जैसे रोगों से पीड़ित बच्चों के लक्षणों को कम करने में मालिश काफी प्रभावी होती है। मालिश समय से पहले पैदा हुए बच्चों में मांसपेशिय तालमेल को सही बनाने में सहायक होती है। इसके साथ ही समय से पहले पैदा होने वाले जिन बच्चों की नियमित मालिश होती है उनका वजन अन्य की तुलना में तेजी से बढ़ता है और उनको बार-बार अस्पताल भी नहीं जाना पड़ता। डिलीवरी के समय अवसाद से ग्रस्त महिलाओं के बच्चे मालिश के दौरान कम रोते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी भावनाओं में बढ़ोतरी होने लगती है।

नवजात बच्चे की मालिश के लिए आपको कई तरह की तैयारियों की जरूरत होती है, जैसे कि -

  • मालिश शुरु करने से पहले आप बेड पर या जमीन पर बैठने से पहले तौलिया बिछा लें। इसके अलावा आप जहां पर आप बच्चे को खड़ा करेंगी उस जगह पर भी तौलिया बिछा लें। तौलिया बच्चे के शरीर पर लगे अतिरिक्त तेल को साफ कर देता है।
  • कमरे का तापमान शरीर के तापमान के अनुसार ही रखें। यह सुनिश्चित करें कि सर्दियों के समय कमरा गर्म और गर्मियों के समय कमरा ठंडा हो। इसके अलावा कमरे में ताजा हवा भी आनी चाहिए। मालिश के समय शिशु जल्द गर्मी महसूस करते हैं और परेशान हो जाते हैं।
  • मालिश वाले कमरे में उचित रोशनी होना महत्वपूर्ण है, जितना संभव हो प्राकृतिक रोशनी को कमरे में आने दें। (और पढ़ें - डायपर रैश को दूर करने के घरेलू नुस्खे)
  • मालिश के लिए बच्चों के लिए बनाए गए तेल को ही चुने। बिना खुशबूदार तेल को ही बच्चे की मालिश के खरीदें।
  • आप बच्चे को डायपर पहने या बिना डायपर भी मालिश कर सकती हैं। लेकिन मालिश करने से पहले अपने बच्चे के डायपर को पेट से थोड़ा ढीला कर लें। बिना डायपर के मालिश करते समय आपके बच्चा अचानक बिस्तर को गंदा कर सकता है। मगर मालिश करते समय आपको बच्चे के पूरे शरीर की मालिश करनी चाहिए।

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आगे नवजात शिशु की मालिश को निश्चित क्रम अनुसार जानें-

स्टेप 1 – बच्चे को मसाज के लिए तैयार करें

  • मालिश करने के लिए सबसे पहले आपको अपने बच्चे को इसके लिए तैयार करना होगा, क्योंकि अगर बच्चे को मालिश करते समय शांत नहीं होगा तो वह आपको सही तरह से मालिश नहीं करने देगा।  बच्चे को मालिश के लिए तैयार करने का सरल तरीका है आप अपनी हथेलियों में थोड़ा सा तेल ले और धीरे-धीरे बच्चे के पेट व कानों के पीछे लगाएं। ऐसा करते समय आप बच्चे के शरीर की प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करें। अगर बच्चा आप से दूर होने लगे, आपके छुने से परेशान होने लगे या रोने लगे तो आप समझ जाएं कि वो अभी मालिश नहीं करवाना चाहता है। लेकिन आपके द्वारा बच्चे के पेट और कान पर तेल लगाते समय वह शांत रहे हैं तो आपको उसकी मालिश शुरु कर देनी चाहिए। (और पढ़ें - गर्भावस्था को सप्ताह के अनुसार जानें)
  • ध्यान रखें कि, मालिश के शुरुआती दौर में आपका बच्चा असहज महसूस कर सकता है, क्योंकि यह उसके लिए एक नया अनुभव होता है। लेकिन जब आप बार-बार मालिश करती हैं तो वह इससे परेशान होने के बजाय आनंद लेने लगता है।

स्टेप 2 – पैरों की मालिश करें

  • एक बार बच्चा मालिश के लिए तैयार हो जाए तो आप उसके पैरों से मालिश को शुरू करें। इसके लिए आप अपने हथेलियों पर तेल की कुछ बूंदें लें और बच्चे के तलवों पर मसाज करें। अपने हाथों के अंगूठे की मदद से बच्चे के पैरों की अंगुली और एड़ियों पर मालिश करें। फिर, अपनी हथेलियों से बच्चे के पैर पर नीचे और ऊपर हल्के से हाथ फेरें। धीरे-धीरे दोनों पैरों के नीचे और पंजों पर अंगूठे को गोल-गोल घुमाते हुए मालिश करें। व्यस्कों की मसाज की तरह आप बच्चों के पैरों की अंगुलियों को न खीचें। बच्चों के पैरों की मसाज के लिए आप उनके दोनों पंजों के ऊपरी भाग को हल्के हाथों से मालिश करें। इससे उनकी तंत्रिकाएं उत्तेजित होने में मदद मिलती है। (और पढ़ें - डिलीवरी के बाद माँ की देखभाल)
  • बच्चे के किसी एक पैर को उठाएं और टखने पर हल्के दबाव के साथ हाथ फेरें, उसके बाद जांघों की ओर ले जाएं। यदि आपका बच्चा शांत और आराम से हो, तो आप एक साथ दोनों पैरों की मालिश भी कर सकती हैं।
  • पैरों को मालिश को समाप्त करते समय आप दोनों हाथों से बच्चे की जांघों को धीरे-धीरे दबाएं। जैसे आप शरीर को तौलिए से पौंछते हैं, ठीक वैसे ही बच्चे के पैरों पर धीरे-धीरे हाथ फेरें।  

स्टेप 3 – नवजात शिशु के हाथों की मालिश

  • शिशु के पैरों की मालिश के बाद आपको उसके हाथों की मालिश करनी चाहिए। हाथों की मालिश का तरीका भी काफी हद तक पैरों की मालिश की तरह ही होता है। इसकी शुरुआत में आप बच्चे के हाथों को पकड़े और उसकी हेथलियों पर हल्के से हाथ को फेरें। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चे की हथेलियों से उसकी उंगली के पोरों तक मालिश करें। (और पढ़ें - बॉडी मास इंडेक्‍स क्‍या है)
  • धीरे-धीरे बच्चे के हाथों को मोड़े और हल्के दबाव के साथ उसके हाथ के पिछले हिस्से से कलाई तक मालिश करें। इसके बाद बच्चे के कलाई पर अपने हाथों को गोल-गोल घुमाते हुए (सर्कुलर मोशन में) मालिश करें, जैसे किसी चूड़ी को पहनाया जाता है।
  • हल्के दबाव के साथ बच्चे की बांह और हाथ के ऊपरी हिस्से पर मालिश करें। इसके बाद बच्चे के पूरे हाथ को सर्कुलर मोशन में जैसे तौलिए को निचोड़ने की तरह, मालिश करें।  

स्टेप 4 – शिशु के सीने और कंधों की मालिश करना

  • बच्चे के दोनों कंधों के टेंडन (Tendon: हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले ऊतक) से सीने तक हल्के दबाव के साथ मालिश करें। इसके बाद दोबारा अपने हाथों को कंधों पर ले जाएं और इस प्रक्रिय को दोहराएं। इसके बाद आप अपने दोनों हाथों को बच्चे के सीने के बीच में रखें और बहार की ओर रगड़ते हुए मालिश करें।
  • हल्के दबाव के साथ हाथों को गोल गोल घुमाते हुए बच्चे के सीने पर मालिश करें। (और पढ़ें - कंधे में दर्द के घरेलू उपाय)

स्टेप 5 – नवजात शिशु के पेट की मसाज

  • इसके बाद आपको बच्चे के पेट की मालिश शुरु करनी चाहिए। पेट बच्चे के शरीर का नाजुक हिस्सा होता है, इसलिए ध्यान रखें कि पेट की मालिश करते समय दबाव न डालें। पेट की मालिश की शुरुआत आप सीने के ठीक नीचे के हिस्से से शुरु कर सकती हैं। इसके बाद हाथों को घड़ी की सुईयों की तरह गोल-गोल घुमाते हुए शिशु के पेट और नाभि के पास मालिश करें। बच्चे के पेट की मालिश बेहद ही हल्के हाथों से करें।
  • मालिश करते समय नाभि पर दबाव न बनाएं। जन्म के कुछ दिनों बाद ही बच्चे की नाभि अपनी सही स्थिति में आती है, ऐसे में बच्चे की नाभि बेहद ही संवेदनशील होती। (और पढ़ें - बच्चों की नाभि की देखभाल का वीडियो)

स्टेप 6 – बच्चे के सिर और चेहरे की मालिश

  • बच्चे के चेहरे और सिर की मालिश करना आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि बच्चे ऐसा करने पर ज्यादा हिलते-ढुलते हैं। लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को मालिश करने की तरह ही महत्वपूर्ण होता है। चेहरे की मालिश के लिए आप अपने बच्चे के माथे पर अपनी तर्जनी उंगली को रखें और धीरे-धीरे उसके पूरे चेहरे पर हल्के दबाव के साथ मालिश शुरू करें। बच्चे की ठोड़ी से अपनी उंगली को उसके गालों की ओर ले जाएं और धीरे-धीरे सर्कुलर मोशन में गालों की मालिश करें। इसी प्रक्रिया को दो से तीन बार दोहराएं। (और पढ़ें - चेहरे की मसाज कैसे करें)
  • चेहरे की मालिश के बाद आपको बच्चे के बालों की जड़ों पर मालिश करनी चाहिए। बच्चे के सिर पर ऐसे मालिश करें जैसे आप उसके बालों पर शैंपू लगा रहीं हो। बच्चे का सिर बेहद ही नाजुक होता है, इसलिए आप मालिश के दौरान ज्यादा दबाव न बनाएं और हल्के हाथों से ही मालिश करें।
  • आप अपनी उंगुलियों की सहायता से बच्चे के माथे के बीच से बाहर की ओर मालिश कर सकती हैं।

स्टेप 7 – बच्चे की पीठ की मालिश करना

  • इसके लिए आपको अपने बच्चे को पेट के बल लेटाना होता है। पीठ की मालिश शुरु करने से पहले बच्चों के हाथों को अगल-बगल न रखकर सामने की ओर रखें।
  • इसके बाद अपनी उंगुलियों के पोरों को बच्चे की पीठ के ऊपरी हिस्से में रखें और हल्के दबाव के साथ धीरे-धीरे गोल घुमाते हुए पीठ के निचले हिस्से तक मालिश करें।
  • मालिश के दौरान आप अपनी तर्जनी उंगली और मध्य उंगली को बच्चे की रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ रखें और फिर हल्के हाथों से पूरी पीठ की मसाज करें। इसी प्रक्रिया को दो से तीन बार या कुछ समय के लिए दोहराएं। ध्यान रखें कि बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर अपनी उंगुलियों को न रखें। लेकिन आप दो उंगुलियों को बच्चे की रीढ़ की हड्डी के दोनों अगल-बगल रखकर ऊपर से नीचे की ओर मालिश कर सकती हैं।

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नवजात शिशु की मालिश किस उम्र तक करनी चाहिए इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। आप अपने बच्चे की मालिश अपनी सहूलियत के अनुसार कभी तक भी जारी रख सकती हैं। जब बच्चा स्तनपान को छोड़ देता है या घुटनों के बल पर चलने लगाता है तो कई माताएं उनकी मालिश करना बंद कर देती हैं।

मालिश आपके और बच्चे के बीच अच्छा रिश्ता बनाने व बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चे की नियमित मालिश करें और इससे संबंधित कोई शंका हो तो आप अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।

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बच्चों की तेल मालिश करना बहुत ही ज़्यादा ज़रूरी है। आयुर्वेद के अनुसार, यह सभी उम्र के स्वस्थ बच्चों के लिए ज़रूरी है। मालिश के लिए तेल का चयन काफी हद तक बच्चे की त्वचा टोन, सेहत और सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

कुछ ऐसी गलतियां हैं जिन्हें आपको बच्चे की मालिश करते समय नहीं करनी चाहिए -

  • मालिश करते समय बच्चे के शरीर पर बहुत ज़्यादा दबाव ना दें। हल्के दबाव से मालिश करें।
  • हर्बल तेल की कई सामग्रियां गर्म होती है, जिनके बच्चों की आंखों के संपर्क में आने से बच्चे की आंखों में जलन पैदा हो सकती है। इसलिए ध्यान दें कि तेल बच्चे की आंख में ना जाए। (और पढ़ें – जानिए अरण्डी तेल के फायदे और नुकसान बच्चों के लिए)
  • यदि तेल बच्चे के मुंह में ग़लती से चला जाए, तो गले में जलन और उल्टी हो सकती है।
  • क्योंकि तेल बहुत चिकना होता है, आपका बच्चा आपके हाथ से फिसल सकता है। इसलिए उसे एक चटाई या एक नर्म तौलिये पर मालिश के लिए बैठाएं। 
  • अगर बच्चे को ठंड और बुखार है, तो मालिश ना करें। (और पढ़ें - बुखार बढ़ाने के घरेलू उपाय)
  • मालिश के बाद, केवल गुनगुना पानी स्नान के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वरना तेल त्वचा पर रह सकता है।
  • आदर्श रूप में, तेल की मालिश और स्नान के बीच 10-15 मिनट का अंतराल होना बच्चों के लिए काफी अच्छा है। अधिक समय के लिए शरीर पर तेल ना छोड़ें।
  • बच्चे को फीड (खाना खिलाना या दूध पिलाना) कराने के एकदम पहले या बाद में मालिश करने से बच्चे को अपच या उल्टी हो सकती है। आदर्श रूप में भोजन और मालिश के बीच 30-45 मिनट तक का न्यूनतम अंतर होना चाहिए। (और पढ़ें – बच्चे के दाँत निकलते समय बच्चे के दर्द और बेचैनी का घरेलू इलाज)
  • मालिश के लिए एक बहुत ठंडे तेल का प्रयोग ना करें। अगर आप एक ठंडे क्षेत्र में रहते हैं या सर्दियों का मौसम है, तो मालिश के लिए उपयोग करने से पहले 40 डिग्री सेल्सियस तक तेल को गर्म कर सकती हैं।
  • मालिश करते समय टीवी, फेसबुक/ट्विटर देखने की बजाय अपने प्यारे बच्चे को देखें। अपने बच्चे की तेल मालिश एक अच्छा तरीका है बच्चे की मजबूत हड्डियों के लिए, बच्चे के शरीर की ताकत और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने का, अगर सही तरीके से की जाए।
Dr. Adarsh Bagali

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Dr Bishant Kumar

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10 वर्षों का अनुभव

Dr. Indrajeet L Bahekar

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पीडियाट्रिक
6 वर्षों का अनुभव

संदर्भ

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