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बच्चे अक्सर बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी जैसे जीवाणुओं के संपर्क में आते हैं। लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि वो बीमार हो जाएंगे। मज़बूत इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बच्चों को प्राकृतिक रूप से रोगों से बचाव करने में मदद करती है। अगर आपका बच्चा अक्सर सर्दी जुकामफ्लू, कान के संक्रमण, पेट में गड़बडी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त होता है, तो इसका मतलब है कि आपके बच्चे की इम्युनिटी मज़बूत नहीं है।

सामान्य स्वास्थ्य समस्या से आसानी से निपटने के लिए आप अपने बच्चे के जीवनशैली और आहार में परिवर्तन लाकर, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बना सकते हैं।

तो पढ़िए बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय विस्तार से -

  1. स्तनपान कराने से बेहतर होती है बच्चों की इम्युनिटी - Breastfeeding improves child's immunity in Hindi
  2. बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खिलाएं फल और सब्जि़यां - Feed your child more fruits and vegetables to increase immunity in Hindi
  3. बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी है पर्याप्त नींद - Sound sleep is necessary for child's immunity in Hindi
  4. व्यायाम करने से बेहतर होती है बच्चो की रोग प्रतिरोधक क्षमता - Exercise improves child's immunity in Hindi
  5. बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने का उपाय है विटामिन डी - Vitamin D increases child's immunity in Hindi
  6. साफ़ - सफ़ाई रखने से बढ़ती है बच्चों के रोग प्रतिरोधक क्षमता
  7. बच्चों इम्युनिटी को मज़बूत बनाने के लिए अनावश्यक एंटीबायोटिक न दें - Prevent unnecessary antibiotics to strengthen immunity of children in Hindi
  8. प्रोबायोटिक बच्चो के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लाभकारी है - Probiotics help in improving the immune system of children in Hindi
  9. बच्चों इम्युनिटी बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय - Home remedies to increase child's immunity in Hindi
  10. भरपूर प्यार और स्नेह से बढ़ती है बच्चों की इम्युनिटी - Love and affection improves child's immunity in Hindi
  11. बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं के डॉक्टर

मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाने का एक शानदार तरीक़ा है। इसमें सभी प्रकार का प्रोटीन, चीनी और वसा मौजूद होते हैं, जो एक बच्चे को स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरत होती है। इसमें एंटीबॉडी और सफ़ेद रक्त कोशिकाएं भी होती हैं और ये दोनों रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाते हैं और रोग से लड़ने में मदद करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में 2002 में एक शोध के दौरान पाया गया कि मां जब बच्चे को स्तनपान कराती है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली के विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जबकि किसी दूसरे तरीक़े से बच्चे को दूध पिलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

स्वस्थ आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए अपने बच्चे के खाने-पीने पर अच्छी तरह नज़र रखें।

फल और सब्जी जैसे सेब, गाजर, शकरकंद, सेम की फली, ब्रोकोली, कीवी, खरबूजे, नारंगी और स्ट्रॉबेरी को अपने बच्चे के आहार में शामिल करें। ये रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद फ़ायदेमंद हैं। अपने बच्चे को कच्चे जैविक फल और सब्जियां खिलाएं। इसके अलावा आप बच्चे को फल और सब्जियों का जूस भी पिला सकते हैं।

छोटे बच्चे को रोज़ाना सभी प्रकार के फल और सब्ज़ी ज़रूर खिलाएं। ऐसा करने के लिए आप सबको मिलकर स्वादिष्ट स्मूथी, जूस या पेस्ट बना सकते हैं। बड़े बच्चों को पूरे दिन में अलग-अलग तरह के भोजन और स्नैक्स दें। फल और सब्जी खिलाने की सही मात्रा के लिए एक आसान सा नियम याद रखें - जितनी बच्चे की उम्र है, उसे प्रति भोजन उतने ही बड़े चम्मच फल-सब्ज़ी खिलाएं। उदाहरण के लिए यदि आप 2 साल के बच्चे को खिला रहे हैं, तो आप बच्चे को प्रति भोजन 2 बड़े चम्मच फल-सब्ज़ी दे सकते हैं।

बीज, फलियां, साबुत अनाज और अन्य खाद्य पदार्थ जो विटामिन ए, विटामिन बी 2, विटामिन बी 6 और विटामिन सी, जिंक, सेलेनियम और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। ये सभी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। अपने बच्चे को चॉकलेट, बिस्कुट, और अन्य अधिक चीनी वाले खद्या पदार्थ, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ और कोक, पेप्सी आदि न दें।

बढ़ते हुए बच्चे के लिेए पर्याप्त नींद और आराम बहुत आवश्यक होता है। नींद के अभाव में बच्चे में कई प्रकार की बीमारियां जन्म ले सकती हैं। 2012 में आर्काइव यूरोप जर्नल ऑफ़ फिजियोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक नींद प्रतिरतक्षा प्रणाली पर गहरा प्रभाव ड़लता है।

नवजात शिशु को एक दिन में 18 घंटे नींद की जरूरत होती है। जबकि अन्य बच्चों को उनकी उम्र के आधार पर एक दिन में 10 से 14 घंटे नींद आवश्यक होती है। अपने बच्चे को जिस कमरे में सुलाएं, उस कमरे में पूरी तरह से अंधेरा हो और वो कमरा पूर्ण रूप से बंद न हो इस बात का ज़रूर ध्यान रखें। अंधेरे में सोने से होर्मोन मेलेटोनिन के उत्पाद को बढ़ावा मिलता है, जो अच्छी नींद के लिए ज़रूरी हैं और आपके शरीर में एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है। अपने बच्चे के बेडरूम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वीडियो गेम्स आदि न रखें।

(और पढ़ें - उम्र के हिसाब से कितना सोना चाहिए)

व्यायाम आपके बच्चे को रोगों से मुक्त रखने का एक शानदार तरीका है। प्रतिदिन लगभग 30 मिनट का नियमित व्यायाम प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और इससे बच्चे को कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी मिलते हैं। व्यायाम के प्रति बच्चे की रूचि बढ़ाने के लिए जितना हो सके मदद करें। आप अपने बच्चे का रोल मॉडल बन जाएं। बच्चे को अकेले खेलने के लिए घर से बाहर भेजने के बजाए आप उसके साथ व्यायाम करें और उसे भी प्रोत्साहित करें। धीरे-धीरे आपके बच्चे को स्वस्थ जीवन शैली की आदत पड़ जाएगी। रोजाना लगभग 30 मिनट के लिए चलना, दौड़ना, जॉगिंग या साइकलिंग करना पूरे परिवार के लिए बेहतरीन शारीरिक व्यायाम हैं। इसके अलावा आप अपने बच्चे को उसके पसंद के अनुसार स्विमिंग, टेनिस क्लास या अन्य किसी खेल के लिए भेज सकते हैं।

प्रकृति, प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए एक उत्तेजक की तरह काम करती है। इसलिए अपने बच्चे के मन और शरीर के पोषण के लिए प्रकृति के साथ खुला छोड़ दें।

अमरीका में अधिकांश बच्चों में विटामिन डी की कमी है। विटामिन डी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में एक औषधि की तरह कार्य करता है। विटामिन डी की कमी वाले लोगों को जल्द बीमारी होने का जोखिम अधिक होता है। विटामिन डी की कमी से जल्द किसी भी संक्रमण के चपेट में आ जाना, अस्थमा, कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं।

अपने बच्चे को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सके इसलिए रोज़ाना सुबह 20 मिनट के लिए जल्दी सुबह सूरज की धूप में बहार ले जाएँ। लेकिन दिन की धूप से अपने बच्चे को बचाएं। इसके अलावा, सुबह की ताज़ी हवा आपके बच्चे के शरीर और मन दोनों के लिए बहुत लाभदायक है। अपने बच्चे के साथ सुबह पार्क में घूमने जाएं। साथ ही बच्चे को दौड़ना, जंप, डांस और क्लाइंबिग करने दें। इसके अलावा बच्चे को नंगे पैर घास में चलना भी सिखाएं। यह बच्चे में ताकत और फुर्ती को बढ़ावा देगा।

अपने बच्चे को साफ़-सफ़ाई और स्वच्छ रहने की आदतें सिखाएं ताकि वह इन अच्छी आदतों को जीवन भर अमल में ला सके। स्वच्छता रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा नहीं देती है, लेकिन ये कीटाणुओं से लड़ने और तनाव को कम करके बिमारियों से बचाने में मदद करता है।

सबसे पहले अपने बच्चे को अच्छी तरह से हाथ धोना सिखाएं। ये साधारण सी आदत सर्दी और फ्लू के संक्रमण की संभवना को बहुत कम कर देती है। अपने बच्चे को नियमित रूप से 20 सेकण्ड तक साबुन और गर्म पानी से हाथ धोना सिखाएं। स्कूल से आने के बाद, बाथरूम का उपयोग करने के बाद, पालतू जानवरों के साथ खेलने के बाद और भोजन खाने से पहले अपने बच्चे को हाथ धोना सिखाएं। इसके अलावा स्वच्छता से संंबंधित अन्य अच्छी आदतें जैसे दिन में दो बार ब्रश करना, साफ़ कपड़े पहनना, रोज़ाना नहाना, छींक या खांसी के बाद रूमाल का इस्तेमाल करना आदि के बारे में भी बताएं। साथ ही नाखून में जमें गंदगी को साफ करें और उसे भी साफ़ करना सिखाएं। साथ ही अपने घर और आस-पास के क्षेत्र को साफ और रोगाणु मुक्त रखें। अपने बच्चे की स्वच्छता प्रति सावधान होने के बावजूद उसके स्वच्छता के प्रति किसी ऐन्टीबैक्टिरीअल दवाओं का इस्तेमाल न करें, इससे बच्चे का रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकता है।

(और पढ़ें - बच्चों को सिखाएं अच्छी सेहत के लिए अच्छी आदतें)

हालांकि आज की दुनिया में एंटीबायोटिक्स हमारे लिए आवश्यक और सहायक हैं। लेकिन उन पर अत्याधिक निर्भर होने से हमारे शरीर को नुक़सान भी उठाना पड़ सकता है। एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर बनाता है क्योंकी ये अच्छे और ख़राब दोनों बैक्टीरिया को मार देता है। इसके अलावा, यह बैक्टीरिया एंटीबायोटिक प्रतिरोधी हो सकता है और किसी भी प्रकार के इलाज के प्रभाव की गति को धीमी कर देता है। बच्चे को सर्दी-जुकाम, फ्लू और गले में ख़राश होने पर डॉक्टर से हमेशा एंटीबायोटिक दवा के लिए सलाह न लें। 

प्रोबायोटिक्स और "अच्छे बैक्टीरिया" आंत के मार्ग के लिए बहुत उपायोगी होते हैं, जो हमें ख़राब बैक्टीरिया से बचाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अच्छे बैक्टीरिया इम्युनिटी पर सकारात्मक प्रभाव दाल सकते हैं और आंतों को भी मज़बूत बनाता है।

अपने बच्चे को नियमित रूप से प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दही, छाछ आदि खिलाएं। इसके अलावा आप प्रोबायोटिक्स के लिए बेबी फ़ूड या अन्य तरीक़े भी अपना सकते हैं।

नोट - यदि प्रोबायोटिक पूरक पदार्थ बच्चे को देना है, तो 7 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे को बीफिडस (bifidus; एक प्रकार का लाभदायक बैक्टीरिया) दें और 7 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे को एंटीबीफिडस दें।

प्रतिरक्षा को बढ़ाने वाले कुछ ज़डी-बटियां और उपाय बच्चे के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर करते हैं। इसमें सूक्ष्मजीवनिवारक गुण भी होते हैं, जो सामान्य संक्रमण जैसे सर्दी-जुकाम और फ्लू से बनाने में भी सहायक होते हैं।

  • नियमित रूप से अपने बच्चे को हल्दी दूध पिलाएं, खासकर फ्लू के मौसम में। इस दूध को तैयार करने के लिए, एक कप दूध में ¼ या आधा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ा काली मिर्च मिलाकर और उबाल लें। स्वाद के लिए थोड़ा सा कच्चा शहद भी मिला सकते हैं।
  • तुलसी की पत्तियों को धो लें और अपने बच्चे को रोज़ाना चबाने के लिए दें। हफ्ते में कई बार इसे बच्चे को चबाने के लिए दें।
  • पुराने ज़माने से चली आ रही आयुर्वेदिक उपाय है, जिसे च्यवनप्राश कहा जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के जड़ी-बूटियों, करौंदा और मसालों से तैयार किया जाता है। ये बच्चे के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता दोनों के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह 4 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को ¼ से 1 चम्मच की खुराक में दो बार दैनिक रूप से दिया जा सकता है।

बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए प्यार और स्नेह सबसे अधिक आवश्यक होता है। साथ में बेहतर रोगप्रतिरोधक क्षमता भी महत्वपूर्ण है। एक बच्चे को महंगे गिफ्ट और खिलौने की ज़रुरत नहीं होती हैं। बल्कि सुरक्षित और ख़ुशी जीवन के लिए उसे प्यार और भावनाओं की ज़रूरत होती है। सकारात्मक और अच्छी भावनाएं बच्चे के प्रतिरक्षा प्रणाली के कोशिकाओं को उत्तेजित करने में मदद करते हैं। 

अपने बच्चे के प्रति प्यार और देखभाल में किसी तरह का संकोच न करें। गले लगाना, चुंबन करना, के साथ उसे भरपूर प्यार दें। अपने बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं उसके साथ खेलें। रोजाना कम से कम पूरे दिन में एक बार अपने बच्चे के साथ भोजन करें और रोज़ाना उसके दैनिक कार्यों के बारे में उससे बात करें। साथ ही, तनावपूर्ण स्थिति से बचने का प्रयास करें। क्योंकि इससे बच्चे के इम्युनिटी मे बुरा प्रभाव पड़ता है और बिमारी से लड़ने की क्षमता भी कमज़ोर होती है। इसके अलावा अपने बच्चे को मुश्किल समय से निकलने के तरीक़े बताएं।

(और पढ़ें - इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय)

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