वाचाघात एक ऐसी स्तिथि है जो आपके संचार की शक्ति छीन सकती है। वाचाघात आपकी लिखित और मौखिक भाषा व्यक्त करने और समझने की शक्ति को भी प्रभावित कर सकती है।  

वाचाघात अक्सर अचानक लगने वाले झटके या सिर की चोट से होता है। पर यह धीरे धीरे फैलने वाले ब्रेन ट्यूमर( brain tumour) या किसी अपक्षयी रोग (degenerative disease) से भी हो सकता है। विकलांगता की मात्रा, दिमाग़ी क्षति के स्थान और गंभीरता पर निर्भर करती है।  

एक बार जड़ से इलाज होने के बाद, वाचाघात का मुख्य इलाज भाषण रोगोपचार (speech therapy) है जो भाषा को दोबारा सीखने और अभ्यास करने तथा संपर्क करने के अन्य तरीकों पर ध्यान देती है। वाचाघात से प्रभावित व्यक्ति का परिवार अकसर इस प्रक्रिया में उसके लिए संचार साथी बनकर, उसकी सहायता करता है। 

  1. वाचाघात के प्रकार - Types of Aphasia in Hindi
  2. वाचाघात के लक्षण - Aphasia Symptoms in Hindi
  3. वाचाघात के कारण और जोखिम कारक - Aphasia Causes & Risk Factors in Hindi
  4. वाचाघात का निदान - Diagnosis of Aphasia in Hindi
  5. वाचाघात का उपचार - Aphasia Treatment in Hindi
  6. वाचाघात की जटिलताएं - Aphasia Complications in Hindi
  7. वाचाघात के डॉक्टर

वाचाघात के प्रकार-

  • नोफ्लुएंट वाचाघात (nonfluent aphasia) : दिमाग के बॉय ऊपरी तरफ, भाषा नेटवर्क में क्षति से ब्रोका (broca) वाचाघात होता है, जिसे नोफ्लुएंट वाचाघात भी कहते हैं। इस विकार से प्रभावित लोगों को शब्द बोलने में परेशानी होती है और वह बहुत छोटे वाक्यों का प्रयोग करते हैं या बोलते समय कुछ शब्द छोड़ देते हैं। ब्रोका वाचाघात से प्रभावित व्यक्ति बाकी लोगों की बातों को कुछ हद्द तक समझ पाता है। प्रभावित व्यक्तियों को अक्सर अपने अभाव के बारे में जानकारी होती है जो उन्हें चिड़चिड़ा बना सकती है। इसके साथ ही, ब्रोका वाचाघात से प्रभावित व्यक्ति को बॉय ओर की पेरालिसिस (लकवा) या कमज़ोरी भी हो सकती है।  
  • फ़्लूएंट वाचाघात (fluent aphasia): वर्णिके वाचाघात, दिमाग के दाय ओर के बीच के हिस्से में भाषा नेटवर्क की क्षति की वजह से होता है। इसे हम फ़्लूएंट वाचाघात भी कहते हैं। ऐसे वाचाघात से प्रभावित व्यक्ति अक्सर लम्बे, जटिल वाक्य बोलते हैं जिनका कोई अर्थ नहीं होता और उनके वाक्यों  में अनावश्यक, गलत शब्दों का प्रयोग होता है जिन्हें पहचानने में परेशानी होती है। वह अक्सर मौखिक भाषा समझ नहीं पाते और यह भी नहीं जान पाते कि उनकी भाषा किसी को समझ नहीं आ रही है।  
  • वैश्विक वाचाघात(global) :यह दिमाग में ज़्यादा मात्रा में हुई क्षति के कारण होता है।  वैश्विक वाचाघात से प्रभावित व्यक्ति, अभिव्यक्त करने और समझने की गंभीर अपंगता का शिकार होता है। 

वाचाघात किसी और स्तिथि जैसे की आघात (stroke) या ब्रेन ट्यूमर का लक्षण भी हो सकता है :

जिस व्यक्ति को वाचाघात हो वह :

  • बोलते समय छोटे या अधूरे वाक्यों का इस्तेमाल करता है
  • वह ऐसे वाक्य बोलता है जिनका कोई अर्थ नहीं होता 
  • अनजान शब्दों का प्रयोग करता है 
  • लोगों की बातों को नहीं समझ पाता 
  • वह केवल प्रतीक, चिन्ह और फोटो की मदद से ही भाषा समझ पाता है 
  • उसके लिखे हुए वाक्यों का कोई अर्थ नहीं होता 

वाचाघात की समस्याओं की गुंजाईश और गंभीरता, प्रभावित क्षेत्र की सीमा पर निर्भर करती है। कुछ व्यक्ति लोगो की बातों को आसानी से समझ लेते हैं पर उन्हें बोलने में परेशानी होती है। कुछ व्यक्ति जो पढ़ते हैं, वह आसानी से समझ जाते हैं पर उन्हें बोलने में परेशनी होती है जिससे दूसरों को उनकी बातें समझ नहीं आती। 

डॉक्टर से कब संपर्क करें 

क्योकि वाचाघात एक गंभीर बीमारी है, जैसे की आघात(stroke), ज़रुरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता लें ,अगर अचानक आपको :

  • बोलने में परेशानी हो 
  • बातें समझने में परेशानी हो 
  • शब्दों को याद करने में परेशानी हो 
  • पढ़ने या लिखने में परेशानी हो 

वाचाघात का सबसे आम कारण, दिमागी नस के अवरोध या फटने से होने वाली क्षति है। दिमाग में रक्त की कमी, दिमागी कोशिका को ख़तम कर सकती है और दिमाग के भाषा समझने वाले हिस्स्से को प्रभावित कर सकती है। गंभीर सिर की चोट, ट्यूमर या संक्रमण से होने वाली दिमागी क्षति वाचाघात का कारण बन सकती है। ऐसी स्तिथि में वाचाघात अक्सर दूसरे संज्ञानात्मक रोगों के साथ होता है, जैसे की भूलने की बीमारी या उलझन।  

 धीरे फैलने वाली संचार समस्या को प्राइमरी प्रोग्रेसिव वाचाघात  (primary progressive aphasia) कहते हैं।  यह भाषा नेटवर्क में मौजूद कोशिकाओं के धीरे धीरे खराब होने के कारण होता है। कई बार इस तरह का वाचाघात पागलपन की ओर बढ़ सकता है।  

कभी कभी वाचाघात के अस्थायी एपिसोड भी हो सकते हैं। यह सिर के दर्द (migraine), दौरे या टी.आई.ऐ (transient ischemic attack) के कारण हो सकता है। अगर दिमाग के किसी हिस्से में रक्त का अस्थायी अवरोध हो तो टी. आई. ऐ. हो सकता है। जिन लोगों को टी.आई.ऐ. हो चूका है उन्हें भविष्य में आघात(stroke) होने का खतरा बढ़ जाता है।

 आपके डॉक्टर आपकी शारीरिक और तांत्रिक सम्बंधित परीक्षा ले सकते हैं, आपकी ताकत की जांच, भावनाओं और सजगता की जांच,आपके दिल की धड़कन और गर्दन की नसों को भी सुन सकते हैं। वो आपको एक एम्.आर. आई. करवाने को भी कह सकते हैं जिससे वाचाघात के कारण का जल्द से जल्द पता चल सके।  

 

अपनी भाषा योग्यता जानने के लिए आपको कुछ जांच और अनोपचारिक देख रेख भी करवानी पड़ सकती है जैसे कि :

  • आम चीज़ों की पहचान करके उनके नाम बताना 
  • बातचीत करना 
  • शब्दों को समझना और उनका प्रयोग करना 
  • किसी पढ़े या सुने हुए किस्से से सम्बंधित सवालो के जवाब देना 
  • शब्दों और वाक्यों को दोहराना 
  • आदेशों का पालन करना 
  • आम चीज़ों के बारे में हाँ या ना में जवाब देना 
  • लिखना और पढ़ना 

 

आगरा किसी की दिमाग़ी क्षति काम है तो आपकी भाषण योग्य्ता बिना किसी उपचार के वापिस आ सकती है। हालाँकि ज़्यादतर लोग भाषण रोगोपचार (speech therapy) के द्वारा ही अपनी भाषण योग्यता सुधारने की कोशिश करते हैं।  

भाषण और भाषा का पुनर्वास 

भाषा योग्यता का सुधार एक धीमी पर्तिक्रिया है। हालाकिं ज़्यादातर लोग धीरे प्रगति करते हैं, कुछ लोग चोट लगने से पहले जैसी योग्यता पाने में सफल होते हैं। 

वाचाघात के लिए, भाषा रोगोपचारिता (therapy) व्यक्ति की संचार योग्यता सुधारने की कोशिश करती है, खोयी हुई भाषा को वापिस लाने के अन्य तरीके भी ढूंढती है।  

रोगोपचारिता  (therapy) :

  • जल्दी शुरू होने वाली रोगोपचारिता (therapy) - कुछ अध्ययन के अनुसार रोगोपचारिता अगर जल्दी शुरू हो जाये तो दिमाग़ी चोट पर उसका असर सबसे ज़्यादा होता है। 
  • समूह में काम करने वाली रोगोपचारिता (therapy) - वाचाघात से जुंझ रहे व्यक्तियों का एक समूह, अपनी संचार योग्यता को सुधार सकता है। प्रतिभागी साथ मिलकर बात चीत शुरू कर सकते हैं और गलतफहमियां दूर कर सकते हैं। 
  • कम्प्यूटर का उपयोग - रोगोपचारिता (therapy) में कम्प्यूटर का इस्तेमाल क्रिया शब्द और शब्द ध्वनि को याद करने में फ़ायदेमंद हो सकता है।   

वाचाघात आपकी जीवन गुणवत्ता को कई तरीको से प्रभावित कर सकता है क्यूंकि संचार आपके जीवन का बहुत ही ज़रूरी हिस्सा है। संचार करने में परेशानी आपकी कई चीज़ों को प्रभावित कर सकती है, जैसे की :

  • नौकरी
  • निजी सम्बन्ध 
  • दैनिक दिनचर्या 

संचार में बाधा, शर्मिंदगी, अवसाद (डिप्रेशन) और संबंधों में समस्या का कारण बन सकती है।   

Dr. Kapil Sharma

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Mayank Yadav

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Dr. Nilesh shirsath

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