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लो ब्लड प्रेशर (बीपी) की समस्या से पीड़ित लोगों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में पाया गया है कि लो ब्लड प्रेशर के कारण बुजुर्गों की मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो सकती है। युनाइटेड किंगडम के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस शोध के मुताबिक, यह संभावना ऐसे बुजुर्ग लोगों में और भी ज्यादा होती है जिनकी लो बीपी की परेशानी सामान्य से गंभीर रूप ले लेती है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़ी जानी-मानी पत्रिका ‘ऐज एंड ऐजिंग’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि शोध के तहत एक बड़े डेटा का विश्लेषण कर परिणाम निकाले गए। इसके बाद शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि रक्तचाप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों की समीक्षा करने की जरूरत है। हालांकि, यहां बताते चलें कि इस रिसर्च पर कई विशेषज्ञों ने सवाल भी खड़े किए हैं।

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चार लाख से ज्यादा बुजुर्गों का विश्लेषण
पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड स्थित एक्सेटर विश्वविद्यालय में वृद्धावस्था रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जेन मासोली और उनके सहयोगियों ने इस शोध को अंजाम दिया है। इसके तहत 75 साल या उससे अधिक उम्र के चार लाख 15 हजार से ज्यादा लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने इन बुजुर्गों को दुर्बलता (फ्रैल्टी) के आधार पर अलग-अलग वर्गों में रखा था। बता दें कि फ्रैल्टी वृद्धावस्था से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें व्यक्ति में शारीरिक कमजोरी आ जाती है, उसकी गतिविधि कम होने लगती है और वजन घटता है।

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने उम्मीद के मुताबिक पाया कि इन वृद्धों में हाई ब्लड प्रेशर के साथ दिल की बीमारियों का खतरा था। पत्रिका ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि 75 से 84 वर्ष और 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में बीपी की समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर उनका ब्लड प्रेशर 150mmHg से कम रहे तो भी मृत्यु होने का जोखिम हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय
रिसर्च से जुड़ी जानकारी के देते हुए डॉ मासोली बताती हैं, 'वैज्ञानिक ब्लड प्रेशर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के तहत आगे के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन हमारे शोध से मिले निष्कर्ष बताते हैं कि बुजुर्गों के लिहाज से यह गाइडलाइन्स उचित नहीं हैं।' मासोली आगे कहती है, ’हालांकि रिसर्च से मिले नतीजों के कारणों का पता करने के लिए हमें और रिसर्च करने जरूरत होगी ताकि बुजुर्गों में व्यक्तिगत रूप से बीपी से जुड़ी इस समस्या को नियंत्रित किया जा सके।'

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वहीं, ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर जेरेमी पियरसन अलग जानकारी देते हैं। वे कहते हैं कि नए शोध में यह माना गया है कि बुढ़ापे में उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, हार्ट फैल और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और पिछले अध्ययनों में कहा गया है कि वृद्धावस्था में बीपी कम करने से हृदय और रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के खतरे कम होते हैं। ऐसे में पियरसन बीपी को कम करने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक, जब तक डॉक्टर कोई और सलाह न दे, तब तक मरीजों को अपना रक्तचाप कम (मतलब संतुलित) करना जारी रखना चाहिए।

लो बीपी क्या है?
लो बीपी (रक्तचाप) को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। यह तब होता है जब रक्तचाप सामान्य से काफी कम हो जाता है। इसका मतलब है कि हृदय, मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों में पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। सामान्य रूप से रक्तचाप 120/80 (सिस्टोलिक/डायस्टोलिक) होना चाहिए। सिस्टोलिक के लिए 90 मिलीमीटर एचजी से कम और डायस्टोलिक के लिए 60 मिलीमीटर एचजी से कम को लो बीपी माना जाता है। हाई या लो ब्लड प्रेशर बुजुर्गों से जुड़ी सामान्य परेशानी है। हालांकि यह समस्या अन्य आयु वर्गों के लोगों को भी हो सकती है।

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