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ब्रेस्ट कैंसर एक घातक बीमारी है। इस संबंध में हर महिला को बुनियादी जानकारी आवश्यक रूप से होनी चाहिए। पर्याप्त जानकारी न होने की वजह से महिलाएं समय पर अपना इलाज नहीं करा पातीं। नतीजतन जब तक पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसके अलावा जिन महिलाओं को इस बाबत जानकारी है, उन्हें भी आधी-अधूरी सूचना है। ध्यान रखें कि आधी-अधूरी जानकारी का होना, जानकारी न होने से भी बुरा होता है। इसी वजह से तथ्य से ज्यादा मिथक महिलाओं को भ्रमित करते हैं। यहां हम आपको ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े मिथक और तथ्यों के बारे में बता रहे हैं। इन्हें जानें और फिट एंड हेल्दी रहें।

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  1. दूध पीने से ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है
  2. ब्रेस्ट में हर गांठ कैंसर होती है
  3. पुरूषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता
  4. मेमोग्राम से ब्रेस्ट कैंसर फैल सकता है
  5. अगर परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर है तो आपको भी ब्रेस्ट कैंसर होना निश्चित है
  6. ब्रेस्ट कैंसर फैलता है
  7. नियमित डियोड्रेंट के इस्तेमाल से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है
  8. ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता
  9. ब्रा की वजह से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है
  10. नियमित मेमोग्राम करवाते रहने से ब्रेस्ट कैंसर कभी नहीं होता

तथ्य : 
दूध या दुग्ध पदार्थ के सेवन को अक्सर ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ाने से जोड़ा जाता है। लेकिन कई दशकों तक इस विषय में हुए अलग-अलग अध्ययनों ने यह साबित किया है कि दुग्ध पदार्थ के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम नहीं बढ़ता। इनका आपस में कोई संबंध भी नहीं है। इसलिए आप बिना किसी हिचक जितना मन आए दूध पीएं और दुग्ध पदार्थों का सेवन करें।

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तथ्य : 
बहुत कम मामलों में ही ब्रेस्ट की गांठ कैंसर में बदलती है। यदि आप नोटिस करें कि आपके स्तन में बार-बार गांठ बन रही है या फिर ब्रेस्ट टिश्यूज में निरंतर बदलाव हो रहे हैं तो इसे लेकर लापरवाही न बरतें। ऐसी स्थिति में आपके लिए जरूरी है कि ब्रेस्ट एग्जाम के लिए डाॅक्टर से मिलें। वह आपकी जांच कर बताएंगे कि ब्रेस्ट में हुई गांठ हानिकारक है या फिर सामान्य है। ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जानने के लिए रोज खुद ब्रेस्ट एग्जाम करें। जरूरी हो तो मेमोग्राम भी करवाएं। इसके लिए विशेषज्ञ की मदद लें।

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तथ्य : 
इस मिथक के विपरीत अनुमान है कि प्रति वर्ष हजारों पुरूषों को ब्रेस्ट कैंसर होता है और इस बीमारी की वजह से सैंकड़ों पुरूषों की जान चली जाती है। हालांकि महिलाओं की तुलना में पुरूषों को यह बीमारी कम होती है। इसके बावजूद पुरूषों को इस संबंध में जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा नहाते समय नियमित अपना सेल्फ एग्जाम करते रहना चाहिए। किसी तरह का बदलाव महसूस करने पर डाॅक्टर से संपर्क करना जरुरी है। आपको बताते चलें कि पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर होने का मतलब है कि उनके निप्पल के नीचे सख्त गांठ का होना। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि महिलाओं की तुलना में पुरूष स्तन कैंसर से ज्यादा मरते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पुरूष इस बीमारी के संबंध में महिलाओं से कम जानकारी रखते हैं। नतीजतन वे इसके प्रति लापरवाह रहते हैं, जो कि भविष्य में जानलेवा साबित होता है।

तथ्य : 
ब्रेस्ट के मेमोग्राम या एक्स-रे से आसानी से ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जाना जा सकता है। ये बिल्कुल सटीक परिणाम देते हैं। लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि मेमोग्राम करवाने से यह बीमारी फैल सकती है। जबकि इसका तथ्य से कोई सरोकार नहीं है। मेमोग्राम कराने के दौरान ब्रेस्ट में दबाव बनता है, लेकिन इससे ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता। नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के अनुसार मेमोग्राम में बहुत कम रेडिएशन की आवश्यकता होती है। अतः रेडिएशन से हानि के जोखिम भी नाममात्र ही होते हैं। 40 साल की उम्र के बाद ही महिलाओं को मेमोग्राफिक स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त अपने डाॅक्टर इस बाबत सलाह लें और जरूरी सवालों के जवाब भी जानें।

तथ्य : 

माना जाता है कि जिन महिलाओं का स्तन कैंसर का पारिवारिक इतिहास है, उन्हें इसकी आशंका ज्यादा होती है। ये बात और है कि जिन महिलाओं के पारिवारिक इतिहास में ब्रेस्ट कैंसर मौजूद है, उनमें ब्रेस्ट कैंसर की आशंका ज्यादा देखी गई है। हालांकि ब्रेस्ट कैंसर ज्यादातर उन महिलाओं को हुआ है जिनके परिवार में इस बीमारी का कोई इतिहास नहीं रहा। हां, यदि परिवार में  किसी को पहले कभी ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो, तो अपने स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सजग रहें।

अगर किसी परिजन को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो निम्न बातों का ध्यान रखें:

प्रथम पीढ़ी के रिश्तेदार: अगर आपकी मां, बेटी और बहन यानी बिल्कुल करीबी रिश्तेदार को 50 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो आपको सजग हो जाना चाहिए। उन्हें जिस भी उम्र में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला है, आप उससे दस साल पहले से अपना ब्रेस्ट इमेजिंग टेस्ट करवाएं।

दूसरी पीढ़ी के रिश्तेदार: यदि आपकी दादी, बुआ को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो आपको भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम हल्का सा बढ़ जाता है। लेकिन यह जोखिम पहली पीढ़ी के रिश्तेदारों की वजह से होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की आशंका से कम होता है।

यदि पहली और दूसरी पीढ़ी के अलग-अलग रिश्तदारों को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो आपको अतिरिक्त सजग होने की जरूरत है। इसके साथ ही यह गौर करें कि कहीं एक से अधिक रिश्तेदारों को 50 साल की उम्र के पहले ब्रेस्ट कैंसर तो नहीं हुआ है। यदि ऐसा है तो आपके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर जीन्स द्वारा फैल रहे हैं। ऐसे में नियमित अपनी इमेजिंग टेस्ट करवाएं और अपने फैमिली डाॅक्टर को भी इस संबंध में जरूर सूचित करें।

तथ्य : 
ध्यान रखें कि आप किसी भी स्थिति में कैंसर को दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचा सकतीं और न ही किसी और से आपको यह बीमारी हो सकती है। आपको बता दें कि ब्रेस्ट कैंसर जीन बनाने में सहयोगी कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि की वजह से होता है जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता। हालांकि आप अच्छी जीवनशैली, जोखिम कारकों के प्रति सजग रहकर और पहले से जरूरी टेस्ट करवाकर खुद को इस बीमारी से दूर रख सकती हैं।

तथ्य : 
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं का कहना है कि वे अब तक इस तरह की बातों से वाकिफ नहीं हैं कि बगल (अंडरआर्म) में डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट लगाने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। अत: यह नहीं कहा जा सकता है कि इन्हें लगाने से ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है।

तथ्य : 
यह बिलकुल झूठ है। आप अपनी जीवनशैली और वातावरण के कारकों को संतुलित करके कैंसर के जोखिमों को कम कर सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए निम्न उपायों को आजमाएं -

  • वजन को संतुलित रखें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।
  • शराब का सेवन सीमित मात्रा में करें।

तथ्य : 
वायर वाली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम नहीं होता और न ही बढ़ता है। 2014 में ब्रा पहनने वाली महिलाओं और ब्रा नहीं पहनने वाली महिलाओं पर अध्ययन हुआ था। अध्ययन से पुष्टि हुई है कि ब्रा पहनने वाली या ब्रा न पहनने वाली महिलाएं समान रूप से ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से पीड़ित होती हैं। अत: ब्रेस्ट कैंसर का इससे कोई सम्बन्ध नहीं है।

तथ्य : 
मेमोग्राम महज एक प्रक्रिया है जिससे आप ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जान सकते हैं। लेकिन यह आपको ब्रेस्ट कैंसर से बचाता नहीं है। हालांकि ब्रेस्ट कैंसर के जरा भी संकेत नजर आने पर पता अवश्य लग जाता है। मतलब यह कि मेमोग्राम करने की वजह से समय रहते आप अपना इलाज करवा सकती हैं और स्वस्थ जिंदगी जी सकती हैं।

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