myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत
  1. ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन क्या होता है? - Breast Cancer Surgery kya hai in hindi?
  2. ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी क्यों की जाती है? - Breast Cancer Surgery kab kiya jata hai?
  3. स्तन कैंसर का ऑपरेशन होने से पहले की तैयारी - Breast Cancer Surgery ki taiyari
  4. स्तन कैंसर का ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - Breast Cancer Surgery kaise hota hai?
  5. स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद देखभाल - Breast Cancer Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद सावधानियां - Breast Cancer Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. स्तन कैंसर के ऑपरेशन में जटिलताएं - Breast Cancer Surgery me jatiltaye

स्तन कैंसर मुख्य रूप से एक महिला विशिष्ट रोग माना जाता है। हालांकि सेल की अनियंत्रित वृद्धि जो ट्यूमर में परिवर्तित हो जाती है पुरुषों को भी पीड़ित कर सकती है। अग्रिम चरण में ट्यूमर को हटाने के लिए या अगर कैंसर के उपचार के लिए दवाएं अप्रभावी हों तो स्तन कैंसर की सर्जरी की जाती है। स्तन कैंसर के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार के शल्य चिकित्सा पद्धतियां उपयोग की जाती हैं। किस पद्धति का प्रयोग किया जाना है यह इस पर निर्भर करता है कि कैंसर किस चरण पर है। 

स्तन कैंसर 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में पाया गया है। यह महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। 

सर्जरी करने के लिए तब ही कहा जाता है जब कैंसर अग्रिम चरण में हो और सर्जरी के अलावा अन्य कोई विकल्प न बचे। सर्जरी एक विकल्प तब भी है जब स्तन कैंसर को नष्ट करने के लिए न तो दवाएं और न ही चिकित्सा काम कर पा रही हो। निम्न स्थितियों में आपको डॉक्टर द्वारा स्तन कैंसर की सर्जरी करने का निर्णय लिया जा सकता है। अगर पूरे स्तन ऊतक को हटा दिया जाए तो ही कैंसर की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है। 

अग्रिम चरण के कैंसर के लक्षण - कैंसर के अग्रिम चरण पर होने के थोड़े से भी लक्षण दिखने पर ये सर्जरी मददगार है।

कैंसर का अन्य अंगों तक फैलना - इस सर्जरी से ये भी पता चल सकता है कि कहीं कैंसर आसपास के किसी अन्य अंग तक तो नहीं पहुँच गया।

कैंसर को हटाने हेतु - सर्जरी का एक और लक्ष्य शरीर से पूरी तरह से कैंसर के ट्यूमर के सभी लक्षणों को नष्ट करना है।

(और पढ़ें - ब्रेस्ट कैंसर)

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. सर्जरी से पहले किये जाने वाले विशिष्ट परीक्षण (Specific Tests Before Surgery)
    बायोप्सी (Biopsy; जीवित ऊतकों की जांच) और मैमोग्राम (Mammogram) की मदद से डॉक्टर सर्जरी का प्रकार चुनता है। इन परीक्षणों की सहायता से डॉक्टर स्तन कैंसर द्वारा शरीर को पहुंचाई हई क्षति और बचे हुए स्वस्थ ऊतकों का आंकलन करता है। 

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

ट्यूमर के आकार और स्थान के अनुसार स्तन कैंसर के लिए उपचार का फैसला किया जाता है। यह उस पर भी निर्भर करता है कि शरीर के जिस अंग में कैंसर की उत्पत्ति हई थी वहां से दुसरे अंगों तक कैंसर का ट्यूमर कितना और किस मात्रा में फैला है। स्तन कैंसर की सर्जरी की कुछ उपचार तकनीकें निम्नानुसार हैं:

1. मास्टेक्टॉमी (स्तन-उच्छेदन; Mastectomy)

इस प्रक्रिया में स्तन कैंसरग्रस्त स्तन को हटा दिया जाता है। मास्टेक्टॉमी प्रक्रिया शुरू करने से पहले, एक इंट्रावेनस (नसों में) ड्रिप को रोगी के शरीर से जोड़ा जाता है जिससे आसानी से उसके शरीर में दवा डाली जा सके। पूरी सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण संकेतों की लगातार निगरानी करने के लिए एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम मशीन रोगी के शरीर से जुड़ी हुई होती है। इसके बाद रोगी को एनेस्थीसिया दिया जाता है।

सर्जरी की अवधि कैंसर के विस्तार-क्षेत्र और मास्टेक्टॉमी के प्रकार पर निर्भर करती है। मास्टेक्टॉमी का प्रकार कई कारकों जैसे ट्यूमर के चरण, ग्रेड, आकार पर निर्भर करता है। 

इस प्रक्रिया के उप-प्रकार निम्नलिखित हैं:

  1. कुल मास्टेक्टॉमी (टोटल मास्टेक्टॉमी; Total Mastectomy)
    कुल मास्टेक्टॉमी को साधारण मास्टेक्टॉमी भी कहा जाता है। इसमें लिम्फ नोड्स का काटना/ हटाना शामिल नहीं है। इस प्रक्रिया में एक लंबे चीरे (जो लंबाई में 6 से 8 इंच का होता है) के माध्यम से पूरे स्तन का हटाया जाता है। चीरे को स्तन के अंदर से शुरु करके ऊपर की ओर बगल की तरफ काटा जाता है। इस प्रकार से कैंसर की पुनरावृत्ति, निपल्स का पैगट रोग (एक प्रकार का कैंसर; Paget's Disease Of Nipples) और सीटू में नली का कार्सिनोमा (एक प्रकार का स्तन कैंसर; Ductal Carcinoma In Situ) रोकने के लिए किया जाता है।  इस प्रक्रिया में पूरे स्तन को हटाया जाता है और इसमें निप्पल और एरोला भी हटाए जाते हैं। जब दोनों स्तनों पर की जाए तो इसे डबल मास्टेक्टॉमी (Double Mastectomy) कहा जाता है।
  2. अवत्वचीय मास्टेक्टॉमी (सबक्यूटेनियस मास्टेक्टॉमी; Subcutaneous Mastectomy)
    इसे निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी (Nipple-Sparing Mastectomy) भी कहा जाता है। इसमें सिर्फ स्तन के कैंसरग्रस्त ऊतकों को ही हटाया जाता है। सर्जन और ऑन्कोलॉजिस्ट (ट्यूमर के निदान और उपचार के विशेषज्ञ; Oncologist) इसे ऐसी स्थितियों में उपयुक्त नहीं मानते जिनमें ट्यूमर का आकर बहुत बड़ा होता है या वह निप्पल या एरोला के नीचे होता है। इसके अलावा, इस पद्धति का उपयोग साइड स्तन पुनर्निर्माण सर्जरी  (Side Breast Reconstruction Surgery) के साथ हमेशा किया जाता है, जिससे यह स्तन मूल स्तन से बेहतर लगता है।
  3. संशोधित कणिक मास्टेक्टॉमी (मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमीModified Radical Mastectomy)
    जब कैंसर लिम्फ नोड्स से आगे बढ़ जाता है तो ऐसे में यह प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। इसमें निप्पल, एरोला और स्तन के आसपास के ऊतकों को हटाया जाता है। स्तन कैंसर के इस प्रारंभिक चरण की सर्जरी 2-4 घंटों में की जाती है। इस सर्जरी के बाद स्तन पुनर्निर्माण भी संभव है। इस सर्जरी में सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसके बाद सर्जन छाती पर एक चीरा बनाता है और स्तन ऊतकों को हटा देता है।
  4. आंशिक मास्टेक्टॉमी (पार्शियल मास्टेक्टॉमी; Partial Mastectomy)
    इस पद्धति में, ट्यूमर के आस-पास के ऊतकों और ट्यूमर दोनों को ही हटा दिया जाता है। आम तौर पर ये तब किया जाता है जब कैंसर प्रारंभिक चरण में होता है। इसे क्वाड्रांटेक्टॉमी के रूप में भी जाना जाता है। आंशिक मास्टेक्टोमी निपल्स के चारों ओर स्तनों में एक चीरे के माध्यम से की जाती है। सर्जरी के बाद निप्पल्स की पोजीशन बदल जाती है। ऑपरेटेड और स्वस्थ स्तन के आकर को बराबर करने के लिए ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी की जाती है।
  5. कणिक मास्टेक्टॉमी (रैडिकल मास्टेक्टॉमी; Radical Mastectomy)
    इस पद्धति में भी स्तन के ऊतकों, बगल और छाती में लिम्फ नोड्स और निपल्स हटाना शामिल है। एक संशोधित कणिक मास्टेक्टॉमी अधिक प्रभावी है और इसलिए, इन दिनों रेडिकल पद्धति का उपयोग नहीं किया जाता। यह एक बहुत ही कम इस्तेमाल किया उपचार प्रकार है। यह केवल तभी किया जाता है जब व्यक्ति का स्तन कैंसर खतरनाक चरण तक बढ़ गया हो।

2. लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy)

लम्पेक्टॉमी को स्तन-संरक्षण पद्धति भी कहा जाता है क्योंकि इसमें पूरे अंग के बजाय स्तन के एक छोटे हिस्से को हटाया जाता है। जब कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तब कैंसर की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लम्पेक्टॉमी को विकिरण चिकत्सा के साथ संयोजन में किया जाता है। रोगी को होने वाली तकलीफ चीरे की जगह और किस मात्रा में ऊतक निकाले गए हैं इसपर निर्भर करती है।  

जब स्तन में असामान्यताओं का पता लगाया जाता है, तो एक रेडियोएक्टिव मार्कर (Radioactive Marker) सर्जरी से पहले ट्यूमर की जगह पर डाला जाता है। यह मार्कर उस जगह की तरफ पॉइंट आउट करता है जिसे ऑपरेशन की ज़रुरत है। तब निकाले हुए ट्यूमर को विश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाता है। उसके बाद टांके की सहायता से चीरों को बंद कर दिया गया है। अगर सेंटिनल लिम्फ नोड्स (Sentinel Lymph Nodes) या एक्सीलरी लिम्फ नोड्स (Axillary Lymph Nodes) पर ऑपरेशन की आवश्यकता है, तो भी प्रक्रिया यही रहती है ।

हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद रिकवरी के लिए डॉक्टर द्वारा दी गयी हर सलाह का पालकन करें।

  1. पूरा दिन आराम करते या सोते न रहें। शरीर की सक्रियता बनाये रखने के लिए व्यायाम करें। रिकवरी की अवधि में व्यायाम करने से गहरी नसों में थक्कों का गठन होने से बचा जा सकता है।
  2. आपको दर्द निवारक गोलियों की ज़रुरत हो सकती है। रिकवरी के समय अगर कभी दर्द असहनीय हो जाये तो दर्द निवारक दवाओं से मदद मिल सकती है। 
  3. भारी सामान और बिजली के उपकरणों को न उठायें। 
  4. छाती की अकड़न, झुनझुनाहट या पीड़ा से बचने के लिए व्यायाम करना ज़रूरी है। इसके लिए फ़िज़ियोथेरेपिस्ट द्वारा बनाये गए व्यायाम रूटीन का पालन करें और नियमित रूप से व्यायाम करें।
  5. सर्जरी के बाद रिकवरी का आंकलन करने के लिए डॉक्टर से नियमित चेक-अप करवाते रहना बहुत आवश्यक है।
  6. कुछ रोगियों में, सर्जरी के दौरान बांह के निचले हिस्से (बगल) में एक ड्रेनेज ट्यूब (Drainage Tube) लगायी जाती है जिससे रिकवरी के प्रारंभिक दिनों के दौरान रक्त और अन्य द्रव को जमा किया जा सके। इस ट्यूब को लगाने के शुरूआती 2 सप्ताह तक ट्रैक करने की आवश्यकता होती है, जब तक ये चिकित्सक द्वारा बाहर न निकाल दिया जाए।
  7. अगर रिकवरी की अवधि के दौरान आपको ड्रेसिंग में से रक्तस्त्राव, चिंता या अवसाद (डिप्रेशन), आँतों को खाली करने में कठिनाई, दर्द निवारक लेने के बावजूद दर्द कम न होना जैसी परेशानियां महसूस हों तो अपने डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ। 
  8. रिकवरी के दौरान मरीज़ सरल और स्वस्थ आहार का सेवन करें। किसी भी तरह के भोजन के सेवन पर रोक नहीं है हालांकि आपको वसा-युक्त भोजन, मदिरा आदि का सेवन न करें। धूम्रपान न करें। 

इस सर्जरी की रिकवरी में शारीरिक और भावनात्मक दोनों प्रकार की रिकवरी ज़रूरी है। मरीज़ की रिकवरी पूरी तरह से सर्जरी के बाद की गयी देखभाल पर निर्भर करती है। 

मास्टेक्टॉमी (स्तन-उच्छेदन; Mastectomy) से जुड़े जोखिम:

  1. इस सर्जरी के बाद सूजन होना आम है जो कुछ हफ़्तों बाद अपने आप खत्म हो जाएगी। 
  2. रक्तगुल्म (Haematona; ऊतकों से रक्तस्त्राव होना जिससे सूजन और दर्द होता है) की भी सम्भावना रहती है। ऐसा होने पर अपने डॉक्टर से बात करें। 
  3. घाव पर संक्रमण होने का जोखिम है जिससे घाव में सूजन हो सकती है, घाव लाल हो सकता है या घाव से स्त्राव हो सकता है। 
  4. स्तन कैंसर का निदान होने के बाद इसका आपके दिनचर्या, व्यवसाय और रिश्तों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सर्जरी करवाने का फैसला और सर्जरी करवाना अपनेआप में एक दर्दनाक अनुभव हो सकता है। 
  5. इस प्रक्रिया के बाद कई लोगों को बुखार महसूस हो सकता है। इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं। (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)
  6. सर्जरी के दौरान जहाँ चीरा काटा गया होता है वहां पर द्रव का निर्माण हो सकता है। यह द्रव आम तौर पर 3-4 हफ़्तों में हट जाता है। 
  7. स्तन के आसपास की त्वचा में संवेदना कम हो जाती है।
  8. सर्जरी के बाद स्तन में भारीपन या तकलीफ महसूस की जा सकती है। हालांकि यह एक आरामदायक ब्रा पहनने से कम किया जा सकता है। 
  9. इस सर्जरी के बाद कुछ महिलायें शरीर के पोस्चर में बदलाव महसूस कर सकती हैं। स्तन प्रोस्थेसिस (कृत्रिम अंग; Prosthesis) से सहायता हो सकती है।

लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) से जुड़े जोखिम:

  1. एनेस्थीसिया से होने वाले दुष्प्रभाव
  2. स्तन में रक्तस्त्राव 
  3. घाव पर निशान पड़ जाना 
  4. स्तन के आकर में विषमता

नींद में परेशानी होना, मतली, शरीर के बालों का झड़ जाना, रक्तस्त्राव आदि कीमोथेरेपी से जुड़े कुछ जोखिम हैं। विकिरण चिकित्सा से जुड़े कुछ जोखिमों में ह्रदय के विकार भी शामिल हैं। 

और पढ़ें ...