myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

चेडिअक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) क्या है?

ऐल्बनिज्म का अर्थ त्वचा, बाल और आंखों का रंग असामान्य होने से है, जबकि चेडियक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) आंशिक ऐल्बनिज्म का एक अत्यंत दुर्लभ रूप है, जो प्रतिरक्षा और तंत्रिका तंत्र की समस्याओं का कारण बनता है।

इस विशिष्ट प्रकार के ऐल्बनिज्म में दृष्टि संबंधित समस्याएं जैसे कि रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, साफ न दिखना और आंख की अनैच्छिक गतिविधि शामिल है।

(और पढ़ें - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी)

चेडिअक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) के संकेत और लक्षण

क्लासिक सीएचएस के लक्षणों में शामिल हैं :

  • भूरे या हल्के रंग के बाल, जिनमें चांदी जैसी चमक हो सकती है
  • आंखों का रंग असामान्य होना
  • त्वचा का रंग सफेद या भूरा
  • आंख की अनैच्छिक गतिविधियां
  • फेफड़ों, त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली में बार-बार संक्रमण होना

अन्य लक्षण जो सीएचएस से ग्रस्त शिशुओं या छोटे बच्चों में देखे जा सकते हैं :

एक अध्ययन के अनुसार, सीएचएस से ग्रस्त लगभग 85 प्रतिशत बच्चे गंभीर अवस्था में पहुंच जाते हैं, जिसे 'एक्सेलेरेटेड फेज' कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्टेज किसी वायरल संक्रमण की वजह से ट्रिगर होता है। इस चरण के दौरान, असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं तेजी से और अनियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं, जिसकी वजह से बुखार, असामान्य रूप से ब्लीडिंग होना, गंभीर संक्रमण, किसी अंग का खराब होना इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं।

ऐसे बड़े और वयस्क बच्चे जिनमें देर से सीएचएस की समस्या शुरू होती है, उनमें हल्के लक्षण देखे जा सकते हैं। इनमें दौरे और तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं, जो निम्न परेशानियों का कारण बनती हैं :

चेडिअक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) के कारण

सीएचएस एक वंशानुगत स्थिति है, जो एलवाईएसटी जीन (जिसे सीएचएस1 जीन भी कहते हैं) में दोष के कारण होता है। एलवाईएसटी जीन एक ऐसा प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है, जिसे 'लाइसोसोमल ट्रैफिकिंग रेगुलेटर' के रूप में जाना जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रोटीन लाइसोसोम्स नामक संरचना में जरूरी तत्वों को भेजता है।

लाइसोसोम्स संरचनाएं विषाक्त पदार्थों को तोड़ती हैं, बैक्टीरिया को नष्ट करती हैं और कोशिकाओं के कार्यों को खराब करती हैं। एलवाईएसटी जीन में गड़बड़ी होने के कारण लाइसोसोम बहुत बड़ा होने लगता है। यह बढ़े हुए लाइसोसोम कोशिका के सामान्य कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, बैक्टीरिया को बाहर निकालने और उन्हें मारने से रोकते हैं, इसलिए शरीर संक्रमण के खिलाफ लड़ने में असमर्थ हो जाता है।

(और पढ़ें - कलर ब्लाइंडनेस)

चेडिअक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) का निदान

सीएचएस का निदान करने के लिए, डॉक्टर सबसे पहले मेडिकल हिस्ट्री (चिकित्सक द्वारा पिछली बीमारियों व उनके इलाज से जुड़े प्रश्न पूछना) चेक कर सकते हैं। इसके अलावा फिजिकल व कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं। एक फिजि​कल टेस्ट के जरिए लिवर या प्लीहा में सूजन और पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला होना) के लक्षण पता चल सकते हैं। इन टेस्ट में शामिल हो सकते हैं :

  • असामान्य सफेद रक्त कोशिकाओं की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट
  • एलवाईएसटी जीन में दोष की पहचान करने के लिए जेनेटिक ​टेस्टिंग
  • अनैच्छिक रूप से आंख की गतिविधि की पहचान के लिए आंखों की जांच (आफ्थैल्मोलॉजिक)

चेडिअक-हिगाशी सिंड्रोम (सीएचएस) का इलाज

सीएचएस का कोई इलाज नहीं है लेकिन इस स्थिति में लक्षणों का प्रबंधन किया जा सकता है।

संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं। दृष्टि में सुधार के लिए 'आई लेंस' निर्धारित किए जाते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली में दोष का इलाज करने के लिए अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की मदद ली जा सकती है। यदि कोई बच्चा ऐक्सेलेरेटेड फेज में है, तो ऐसे में डॉक्टर एंटीवायरल दवाइयां और कीमोथेरेपी दवाओं की सलाह दे सकते हैं।

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें