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नए कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर सबसे पहले चर्चा में आए एंटीवायरल ड्रग्स लोपिनावीर और रिटोनावीर को कोविड-19 के इलाज में 'अप्रभावी' बताया गया है। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के मरीजों पर इस ड्रग कॉम्बिनेशन के असर को जानने के लिए बड़े पैमाने पर अध्ययन किया था। ऑक्सफोर्ड के चर्चित 'रिकवरी' ट्रायल के तहत किए गए इस अध्ययन के परिणामों में इन दवाओं को कोरोना वायरस के ऐसे मरीजों के लिए बेअसर बताया गया है, जो वेंटिलेटर पर नहीं हैं। 

खबरों के मुताबिक, अध्ययन कहता है, 'हमारे आंकड़े अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 मरीजों की मृत्यु के संबंध में लोपिनावीर-रिटोनावीर के किसी प्रकार से लाभकारी होने की बात को खारिज करते हैं।' इस परिणाम के बाद शोधकर्ताओं ने लोपिनावीर-रिटोनावीर को अपने ट्रायल से हटा लिया है और इनका इस्तेमाल कर रहे अन्य देशों को राय दी है कि वे कोविड-19 के इलाज के संबंध में अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव कर इन दवाओं को हटा लें।

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बताया गया है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रैंडम तरीके से कोविड-19 के 1,596 मरीजों को यह ड्रग कॉम्बिनेशन दिया था। वहीं, उनके स्वास्थ्य में इन दवाओं से होने वाले बदलावों की तुलना करने के लिए 3,376 कोरोना मरीजों को अलग से ट्रायल में शामिल किया गया। इन मरीजों को ये दोनों ड्रग्स नहीं दिए गए और इनका सामान्य तरीके से इलाज किया गया। पता चला कि इन मरीजों में से चार प्रतिशत को वेंटिलेटर पर जाने की जरूरत पड़ी, जबकि 70 प्रतिशत को ऑक्सीजन सपोर्ट लेना पड़ा। वहीं, 26 प्रतिशत मरीजों को इनमें से किसी भी अतिरिक्त इलाज की जरूरत नहीं पड़ी।

अध्ययन शोधकर्ताओं को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे उन्हें पता चलता कि एचआईवी ड्रग्स देने के बाद मरीजों के वेंटिलेटर पर जाने का खतरा या इलाज होने तक अस्पताल में रहनी की अवधि कम हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 28 दिनों तक चले अध्ययन में लोपिनावीर-रिटोनावीर लेने वाले मरीजों की मृत्यु दर 22.1 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य इलाज वाले संक्रमितों में यह दर 21.3 प्रतिशत रही। इस तरह, एचआईवी ड्रग्स देने के बाद भी मौतों में कोई विशेष अंतर नहीं आया। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अन्य छोटे-छोटे समूहों में किए गए इसी प्रकार के ट्रायलों में भी ऐसे ही परिणाम सामने आए, जिसके बाद उन्होंने यह राय बनाई कि लोपिनावीर-रिटोनावीर कोविड-19 के मरीजों के इलाज में प्रभावशाली नहीं हैं।

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कोविड-19 के मरीजों के इलाज के संबंध में लोपिनावीर-रिटोनावीर तब चर्चा में आई थीं, जब एक अन्य ड्रग ओसेल्टामिवीर के साथ मिश्रण के रूप में इनके इस्तेमाल से एक चीनी महिला को कोरोना वायरस से बचाए जाने का दावा किया गया था। बीते फरवरी महीने में आई खबरों के मुताबिक, थाइलैंड के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने इसी ड्रग कॉम्बिनेशन से महिला को बचाया था। बाद में और भी कई देशों में इन दवाओं को कोरोना संक्रमण के खिलाफ असरदार बताया गया। बाद में भारत में भी बुजुर्ग कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इन दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। यह मंजूरी केवल बुजुर्ग मरीजों की जान बचाने के लिए दी गई थी। हालांकि अब भारत में कोविड-19 की रोकथाम के लिए कई दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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