भारत रूस द्वारा निर्मित कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक 5 को लेकर उससे संपर्क में है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कोरोना वायरस संकट को लेकर होने वाली दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि जहां तक रूस द्वारा विकसित की गई स्पूतनिक 5 वैक्सीन की बात है तो दोनों देश इसे लेकर एक-दूसरे के संपर्क में हैं। राजेश भूषण ने कहा कि वैक्सीन के संबंध में कुछ जानकारियां दोनों देशों के बीच शेयर की गई हैं और कुछ डिटेल्स के आने का इंतजार किया जा रहा है।

कुछ दिन पहले ही रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने स्पूतनिक 5 को 'दुनिया की सबसे पहली कोविड-19 वैक्सीन' बताते हुए इसे औपचारिक रूप से रजिस्टर करा लिया था। हालांकि उनके इस दावे पर कई तरह के सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन रूसी सरकार के तहत दवा के डेवलेपमेंट में वित्तीय भूमिका निभाने वाला रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) वैक्सीन के उत्पादन के लिए भारत के साथ साझेदारी करने की कोशिश में लगा हुआ है। बीते हफ्ते आरडीआईएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी थी कि स्पूतनिक 5 के निर्माण में वित्तीय भूमिका निभाने वाली रूसी सरकार की यह कंपनी वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग को लेकर भारत के साथ साझेदारी करने पर विचार कर रही है।

आरडीआईएफ का दावा है कि लैटिन अमेरिका, एशिया और मध्य पूर्व के कई सारे देशों ने स्पूतनिक 5 में रुचि दिखाई है और वे इसके प्रॉडक्शन को लेकर भी दिलचस्पी ले रहे हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी सिलसिले में आरडीआईएफ के सीईओ दिमित्रेव ने कहा था, 'वैक्सीन का उत्पादन एक अहम मुद्दा है। इस वक्त हम भारत के साथ साझेदारी करने पर विचार कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि वे गामालेया (जिस रूसी संस्थान ने वैक्सीन को तैयार किया) द्वारा निर्मित वैक्सीन का उत्पादन करने की क्षमता रखते हैं। उन साझेदारियों से ही हम अपेक्षित मांग को पूरा कर पाएंगे।' अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सरकार के शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया है कि मास्को स्थित भारतीय दूतावास भी स्पूतनिक के संबंध में रूसी मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के संपर्क में है।

क्या है स्पूतनिक 5?
रूस द्वारा निर्मित कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक 5 को वहां के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ मिल कर तैयार किया है। टीका तैयार करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा है कि इसे एडीनोवायरस नामक एक हल्के कोल्ड वायरस की मदद से तैयार किया गया है, जिसमें कोरोना वायरस के वंशाणु को जोड़ा गया है। दावा है कि शरीर में जाने के बाद एडीनोवायरस सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस को खत्म करने या उसे रोकने वाले एंटीबॉडी पैदा करने का काम करता है। बता दें कि ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी की चर्चित कोविड-19 वैक्सीन कोवीशील्ड के निर्माण में भी इसी वायरस का इस्तेमाल किया गया है। खबरों के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने भी अपनी 'प्रभावी' वैक्सीन में सर्दी-जुकाम देने वाले इस वायरस को उपयोग किया है। वैक्सीन निर्माण में यह एक नई तकनीक है, जिसे इबोला वायरस के इलाज के लिए भी वैक्सीन बनाने में इस्तेमाल किया जा चुका है। बीते जून में इस टीके को अप्रूवल भी मिल चुका है।

लेकिन ऑक्सफोर्ड और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियां जहां अंतिम चरण के ट्रायलों की तैयारियों में जुटी हुई हैं, वहीं रूस ने केवल पहले चरण के तहत मात्र 38 लोगों पर आजमाने के बाद वैक्सीन को लॉन्च कर दिया। हालांकि ट्रायल में सभी प्रतिभागियों के शरीर में एंटीबॉडी पैदा होने का दावा किया गया था, लेकिन लाखों की आबादी के लिए वैक्सीन के इस्तेमाल का इसे मजबूत आधार नहीं माना जा रहा। हालांकि हाल में रूस ने तीसरे चरण के ट्रायल शुरू करने की बात कही है। लेकिन उससे पहले ही वैक्सीन को लेकर काफी विवाद हो चुका है, क्योंकि रूस इसे दुनिया की पहली कोविड वैक्सीन घोषित कर रजिस्टर करा चुका है, जो कि कई लोगों को उचित नहीं लगा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने वैक्सीन को लेकर खासतौर पर एतराज जताते हुए इसे खरीदने से पहले से इनकार किया हुआ है। यही कारण है कि रूस वैक्सीन को लेकर भारत से आस लगा रहा है।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19: स्पूतनिक 5 वैक्सीन को लेकर भारत और रूस एक-दूसरे के संपर्क में- स्वास्थ्य मंत्रालय है

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