कोविड-19 महामारी का प्रभाव सामान्य जीवन पर तो पड़ा ही है, लेकिन इस संक्रमण के चलते स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 महामारी के कारण ट्यूबरक्लोसिस (टीबी, तपेदिक) और एचआईवी जैसी घातक बीमारियों की टेस्टिंग (जांच) कम हुई है। दरअसल एड्स को लेकर यूएन के विशेष प्रतिनिधि की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई है जिसे समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जारी किया है।
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एचआईवी के कम मामले हुए दर्ज- रिपोर्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में एचआईवी और तपेदिक के परीक्षणों में गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में एड्स पर ज्वाइंट यूनाइटेड नेशंस प्रोग्राम के यूएन स्पेशल एडवाइजर मिशेल कैजचकाइन का कहना है कि नए कोरोना वायरस की वजह से टेस्टिंग प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उनके मुताबिक संक्रमण की रोकथाम और कोविड-19 के रोगियों के इलाज संबंधी सुविधाओं को बढ़ाने के चलते एचआईवी और टीबी के कम ही मामलों का पता चल पाया है।
एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में उन्होंने कहा, 'महामारी के कारण संयुक्त राष्ट्र को अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में देरी होगी। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इससे मृत्यु दर में भी वृद्धि होगी।' रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 के पहले छह महीनों में, रूस के फेडरल एड्स सेंटर ने एचआईवी संक्रमण से जुड़े 38,126 नए मामलों की जानकारी दी जो कि साल 2019 के पहले छह महीनों के मुकाबले 20.5 फीसद कम हैं। हालांकि, इसको लेकर केंद्रीय संगठनों ने एक अलग प्रतिक्रिया दी है उनका कहना है कि एचआईवी टेस्टिंग के आंकड़ों में गिरावट की एक वजह एड्स केंद्रों में आने वाले रोगियों की संख्या में होने वाली कमी है।
टीबी संक्रमण से जुड़े मामलों में भी बड़ी गिरावट
मिशेल कैजचकाइन का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल मई में टीबी संक्रमण के 48 प्रतिशत कम मामलों के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को जानकारी मिली। उनके मुताबिक यह कोविड-19 के चलते लॉकडाउन और लोगों के घर में कैद हो जाने का नतीजा है, जिसके कारण गतिविधियां सीमित हो गईं। 'लेकिन यह इस तथ्य से भी जुड़ा है कि टीबी की रोकथाम के लिए काम करने वाले कर्मचारियों और टीबी अस्पतालों व सुविधा केंद्रों को कोविड-19 की रोकथाम के कार्य में झौंक दिया गया था।'
मिशेल कैजचकाइन की मानें तो मल्टी ड्रग-रेजिस्टेंस ट्यूबरक्लोसिस के नए मामलों में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जो कि एक बड़ी चिंता का विषय है। यूएन एड्स डेटा के अनुसार पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में लगभग 17 लाख (1.7 मिलियन) लोग एचआईवी संक्रमण से पीड़ित हैं। डब्ल्यूएचओ यूरोपीय क्षेत्र में साल 2017 में टीबी की बीमारी के परिणामस्वरूप हजारों लोगों की मौत हुई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस क्षेत्र में 2,75,000 लोग टीबी से संक्रमित हुए थे, जबकि 24,000 टीबी मरीजों की मृत्यु हो गई थी।
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