एक शोध में बताया गया है कि कोविड-19 के जिन मरीजों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं, उनके जरिये कोरोना वायरस कुछ ही समय में कहां-कहां पहुंच कर वातावरण को दूषित कर सकता है। अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिसीजिज' पर प्रकाशित यह शोध कोविड-19 के दो मरीजों की जांच से जुड़े परिणामों पर आधारित है। इसके मुताबिक, कोरोना वायरस के बिना लक्षण वाले इन मरीजों को क्वारंटीन के लिए जिन होटल रूमों में रखा गया था, वहां कई प्रकार की सतहों - जैसे तकिये, शीट, रजाई कवर आदि - पर कोरोना वायरस मिला है। अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं की मानें तो दोनों मरीजों में लक्षण दिखने से पहले ही उनके शरीर में फैले वायरस ने कमरों की कई सतहों को दूषित कर दिया था। इस आधार पर शोधकर्ताओं ने लिखा है कि नया कोरोना वायरस बिना लक्षण वाले मरीजों में इनके दिखने से पहले ही आसानी से वातावरण को दूषित कर सकता है।
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क्यों और कैसे किया गया शोध?
मरीजों में लक्षण दिखने से पहले ही सार्स-सीओवी-2 के फैलने से जुड़ी जांच के लिए शोधकर्ताओं ने कोविड-19 से ग्रस्त दो चीनी छात्रों के नमूने लिए थे। इन दोनों को एक होटल के अलग-अलग कमरे में क्वारंटीन किया गया था। इनमें से पेशंट 'ए' 19 मार्च को चीन लौटा था और पेशंट 'बी' 20 मार्च को।
ये दोनों मरीज जब चीन लौटे थे तो इनमें कोविड-19 का कोई भी लक्षण नहीं था। इन्हें एहतियातन 14 दिन के क्वारंटीन के तहत होटल ले जाया गया था। स्थानीय मेडिकल स्टाफ ने नियमित रूप से सुबह और दोपहर को इनके शरीर के तापमान की जांच की, यह देखने के लिए क्या उनमें कोई लक्षण दिख रहे हैं या नहीं। दो दिनों तक उन्हें न तो बुखार हुआ और न ही कोई लक्षण दिखाई दिए। लेकिन इस पर ध्यान दिए बिना उनका टेस्ट किया गया, जिसमें वे फिर पॉजिटिव पाए गए। बाद में उन्हें इलाज के लिए एक स्थानीय अस्पताल में भेज दिया गया। वहां भी उनमें कोई लक्षण नहीं दिखे, लेकिन नाक, मल और बलगम के सैंपल टेस्ट पॉजिटिव आते रहे। सभी सैंपलों में कोरोना वायरस का स्तर काफी ज्यादा था।
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अस्पताल में दो दिन बीतने के बाद पेशंट 'ए' में बुखार और खांसी के कुछ लक्षण दिखाई दिए। छठवें दिन पेशंट 'बी' में भी ये लक्षण दिखे। उसके फेफड़ों की स्कैनिंग पर पता चला कि संक्रमण के प्रभाव में उनमें समस्या पैदा हो गई थी। ऐसे में शोधकर्ताओं ने उनके होटल के कमरे से नमूने इकट्ठे किए। उन्होंने तकियों, तौलिये, शीट और रजाई के कवर से सैंपल लिए। इसके अलावा दरवाजों के हैंडलों, थर्मोमीटर, टेलीविजन रिमोट, बाथरूम के दरवाजे के हैंडल, लाइट स्विच, टॉइलेट सीट और फ्लश तक से नमूने इकट्ठा किए गए। चूंकि कोविड-19 संकट के चलते होटल 24 फरवरी से ही बंद था, इसलिए अध्ययन के परिणामों की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए उन कमरों से भी सैंपल लिए गए, जिनमें कोई नहीं ठहरा था।
बाद में जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों मरीजों के कमरों से लिए गए कुल 22 सैंपलों में से आठ पॉजिटिव निकले थे। इनमें से छह सैंपल पेशंट 'ए' के कमरे से थे, जहां शीट, रजाई कवर, तकियों के खोलों और तौलिये में कोरोना वायरस होने की पुष्टि हुई। वहीं, पेशंट बी के कमरे के नल और तकिये के खोल की सतह पर कोरोना वायरस मिला। उधर, बिना मरीजों वाले होटल कमरों के सैंपल नेगेटिव निकले।
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क्या कहते हैं शोधकर्ता?
इन परिणामों के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा, 'हमारे अध्ययन में प्री-सिम्टोमैटिक मरीजों में ज्यादा वायरल लोड होने का पता चला है, जैसा कि पहले के शोधों में भी सामने आया है। साथ ही, इसके सबूत भी मिले हैं कि ऐसे मरीज लक्षण दिखने से पहले भी वायरस का ट्रांसमिशन कर सकते हैं। वे बहुत छोटे वक्त में वायरस फैला कर वातावरण को दूषित कर सकते हैं।'
इसके अलावा टीम ने बताया कि जिन चीजों से कोविड-19 के ऐसे मरीजों का संपर्क ज्यादा होगा, उनके वायरस से दूषित होने का स्तर भी अधिक होगा। यही कारण है कि कमरों में रखे तकियों पर वायरस ज्यादा मात्रा में मिला, जबकि दरवाजों के हैंडल और लाइट स्विच में यह अपेक्षाकृत कम था। ऐसे में इस प्रकार की चीजों की नियमित रूप से साफ-सफाई जरूरी हो जाता है।
उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19 के प्री-सिम्टोमैटिक मरीज वातावरण को बहुत कम समय में कोरोना वायरस से दूषित कर सकते हैं: शोधकर्ता है
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