पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारी क्रोन से पीड़ित लोग आमतौर पर डिप्रेशन का शिकार होते हैं। मेडिकल पत्रिका 'गट' में प्रकाशित इस जानकारी को ऐसे भी कह सकते हैं कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में क्रोन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस (आंतों में सूजन) बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है। इन दोनों बीमारियों को संयुक्त रूप से इन्फ्लेमेटरी बोवेल डिसीजेज या आईबीडी कहा जाता है। ब्रिटेन स्थित सैंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, इंपेरियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोन रोग से पीड़ित 15 हजार लोगों के रिकॉर्ड्स का अध्ययन कर यह दावा किया है कि इन बीमारियों के डायग्नॉसिस से पहले इनके मरीज सामान्यतः डिप्रेशन में होते हैं।

अध्ययन के आधार पर इसके शोधकर्ताओं ने कहा है कि आईबीडी से पीड़ित लोग इसके डायग्नॉसिस के पहले से पिछले नौ सालों से डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। आईबीडी होने पर मरीज को पेट की मांसपेशियों में दर्द, डायरिया और मलाशय से ब्लीडिंग (रेक्टल ब्लीडिंग) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अध्ययन में कहा गया है कि डायग्नॉसिस से पहले पीड़ित लोग कई सालों से आंतों से जुड़े इन लक्षणों (गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल या जीआई सिंपटम) के साथ जी रहे होते हैं।

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अध्ययन में वैज्ञानिकों ने डिप्रेशन और आईबीडी होने की संभावना का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया है कि जिन लोगों ने डिप्रेशन डेवलेप होने से पहले जीआई लक्षणों की शिकायत की थी, उनमें आईबीडी डेवलेप होने की आशंका बिना डिप्रेशन वाले लोगों की अपेक्षा 40 प्रतिशत ज्यादा थी। हालांकि, जिन लोगों में गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सिंपटम पहले से ही नहीं थे, उनमें डिप्रेशन होने के बाद भी आईबीडी से डायग्नॉस होने की संभावना बिना डिप्रेशन वाले लोगों की अपेक्षा नहीं थी।

अध्ययन कहता है कि आईबीडी के डेवलेपमेंट के लिए डिप्रेशन अपनेआप में कोई रिस्क फैक्टर नहीं है। लेकिन जिन लोगों में पहले से जीआई लक्षण दिखते रहे हैं, उन्हें डिप्रेशन होने पर क्रोन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस का सामना करना पड़ सकता है। इस जानकारी पर अध्ययन के प्रथम लेखक और सैंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के रिसर्च फेलो डॉ. जॉनथन ब्लैकवेल कहते हैं, 'अवसाद और आईबीडी के बीच का संबंध स्पष्ट नहीं है। लेकिन ऐसी संभावना है कि पहले से जीआई लक्षणों का अनुभव कर चुके लोग आईबीडी से डायग्नॉस होने से पहले डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। (यानी) अगर आप डिप्रेशन के साथ पेट से संबंधित दर्द महसूस कर रहे हैं या डायरिया अथवा रेक्टल ब्लीडिंग से परेशान हैं तो डॉक्टर को दिखाएं और टेस्ट करवाएं।'

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वहीं, अध्ययन के एक और वरिष्ठ लेखक और सैंट जॉर्ज में ही गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रोफेसर रिचर्ड पोलोक कहते हैं, 'बिना डायग्नॉसिस के क्रोन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस के आंत संबंधी लक्षणों के साथ रह रहे लोगों के डिप्रेशन से ग्रस्त होने की संभावना है। कोविड-19 महामारी के दौर में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आंतों से जुड़ी इन कंडीशंस से लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से बचाने के लिए उनका समय रहते डायग्नॉसिस किया जाए, जिसके लिए रणनीति बनाने की जरूरत है।'

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