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रमदान का पाक महीना शुरू हो चुका है। रमदान इस्लामी कैलेंडर का नौंवा महीना होता है। वास्तव में रमजान का माह अल्लाह की राह पर जाने के लिए प्रेरणा देने वाला समय है। यही वजह है कि इस्लाम में रमजान बहुत महत्व रखता है।

रमजान में रोजा रखने के दौरान पूरा दिन कुछ भी नहीं खाया जाता है और इस वजह से ये दिन काफी मुश्किल होते हैं।  सामान्य या स्वस्थ व्यक्ति तो फिर भी रोजा रख पाते हैं लेकिन टाइप 2 डायबिटीज  के मरीजों के लिए रमजान में पूरा दिन बिना कुछ खाये पिए बिताना बहुत ही ज्यादा कठिन होता है। 

यदि इन दिनों वे अपना अच्छी तरह ख्याल न रखें, अपनी डाइट के प्रति सतर्क न रहें तो उन्हें इसका खामियाजा भरना पड़ सकता है जो कि उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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तो चलिए जानते हैं कि रमजान के दौरान टाइप 2 डायबिटीज के मरीज किस तरह अपना ख्याल रखें सकते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज के लिए जोखिम

  • हाइपोग्लाइसीमिया: 
    जो मरीज इंसुलिन या डायबिटीज की कोई दवा लेते हैं, रोजा रखने की वजह से उनका ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। इसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहें। इस सम्बन्ध में डाॅक्टर से अवश्य बात करें। अगर दवा लेने की वजह से कोई जोखिम बढ़ रहा है, तो समय रहते उससे बचाव किया जा सके। 
     
  • हापरग्लाइसीमिया: 
    जिस तरह रोजा रखने की वजह से मरीजों का ब्लड शुगर  लेवल गिर सकता है, उसी तरह कुछ खा लेने के बाद ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। ऐसा ओवरईटिंग करने की वजह से हो सकता है। ध्यान रखें कि रोजा के दौरान जब भी खाना खाते हैं, बहुत ज्यादा मीठा न खाएं। बहुत ज्यादा खाना खाने के बजाय सामान्य मात्रा में खाएं। 
     
  • निर्जलीकरण: 
    रोजा में पानी भी नहीं पिया जाता है, इस वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। वैसे भी गर्मी के दिनों में निर्जलीकरण की समस्या सामान्य रूप से देखी जाती है। इसलिए कोशिश करें कि इफ्तार या सहरी के समय कैफीन और शुगर फ्री ड्रिंक लें। इससे प्यास कम लगेगी और शरीर में पानी की कमी की आशंका भी कुछ कम होगी।

ये हैं जरूरी बातें

यूं तो रोजा रखना हर व्यक्ति की अपनी पसंद है। लेकिन डायबिटीज के मरीज खासकर टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए रोजा रखने के दौरान सजग रहना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। खाना खाने के बीच लम्बा गैप होने से उनकी तबियत खराब हो सकती है। 

जैसा कि आप जानते हैं कि रमादान के दिनों में सूरज ढलने के बाद और सूरज निगलने से पहले खाना खाते हैं। लेकिन टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए यह स्थिती मुश्किल भरी हो सकती है। इससे उनका इंसुलिन लगातार घट-बढ़ सकता है। इसलिए रोजा रखने से पहले अपने स्वास्थ्य के संबंध में विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए।

हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। यही वजह है कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को सलाह दी जाती है कि रमदान के दो से तीन माह पहले ही इस संबंध में डॉक्टर से परामर्श कर अपनी जीवनशैली को नियंत्रित करना चाहिए।

इसके अलावा रात को रोजा तोड़ने के दौरान कुछ लोग सामान्य से ज्यादा खा लेते हैं। इससे भी ब्लड ग्लूकोज का स्तर प्रभावित हो सकता है। 

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इफ्तार और सहरी के समय आपको क्या-क्या और कितनी मात्रा में खाना चाहिए, यह जानकर ब्लड ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखा जा सकता है।

खानपान में जरा भी बदलाव टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति अलग होता है और रोजे का असर भी सेहत और अलग-अलग पड़ता है।

हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। यही वजह है कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को सलाह दी जाती है कि रमदान के दो से तीन माह पहले से ही अपनी जीवनशैली को संतुलित करें।

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नियिमत एक्सरसाइज और स्वस्थ डाइट लेने को कहा जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज के मरीज, जिन्हें दवाई लेनी पड़ती है या ग्लूकोज के स्तर को कम करने के लिए टैबलेट लेते हैं, वे इंसुलिन की मदद ले सकते हैं लेकिन इस संबंध में पहले डाॅक्टर से संपर्क करना बेहतर रहेगा।

इस तरह करें डाइट की प्लानिंग

सहरी के समय संतुलित आहार लें। ध्यान रखें कि आप जो भी खा रहे हैं उससे सभी जरूरी पोषक तत्व मिल रहे हों। खासकर आपकी थाली में ऐसे आहार शामिल करें जो गर्मी से लड़ने की शक्ति भी दे।

  • साबुत अनाज, दाल, लो-फैट दूध, पनीर आदि खाएं।
  • दही, नट बटर और फल भी इस समय खाना आपके लिए उपयोगी है।
  • खाने में गेहूं के आटे की रोटी, अंडा करी जैसी चीजें खा सकते हैं।
  • चूंकि रोजा इफ्तार के समय यानी सूरज के ढलने के बाद खजूर और पानी पीकर खोला जाता है। रोजाना एक से दो खजूर ही खाएं लेकिन अपनी डाइट से कैफीन युक्त पेय को निकाल लें। जैसा कि पहले ही जिक्र किया गया है, इससे प्यास लग सकती है तथा शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
  • इफ्तार, रमजान के महीने को सेलिब्रेट करने का समय होता है लेकिन ओवरईटिंग बिल्कुल न करें।
  • डाइटीशियन से पूछकर अपनी डाइट में मीट, मछली, अंडे आदि शामिल कर सकते हैं। ऐसे आहार जरूर शामिल करें जो आपके हृदय को स्वस्थ्स रखे और शुगर की मात्रा को संतुलित रखे।
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