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नपुंसकता (स्तंभन दोष) भारत में एक आम समस्या है। ऐसा माना जाता है कि 40 से ऊपर की उम्र के 50% पुरुषों को कभी न कभी स्तंभन दोष का सामना करना पड़ता है। नपुंसकता के कारण हैं: हृदय रोग, हाई बीपी (उच्च रक्तचाप), और अत्यधिक धूम्रपान। नपुंसकता के उपचार के लिए बाजार में आज दवाइयां भी मौजूद हैं जैसे कि वियाग्रा

लेकिन वियाग्रा के उपयोग से सिर दर्द, पेट से सम्बंधित परेशानिया, और फ्लशिंग जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है पर नपुंसकता से लड़ने के लिए वियाग्रा का सेवन ही एक मात्र विकल्प नहीं है। नपुंसकता से छुटकारा पाने के लिए व्यायाम या योग आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। कई अध्ययनों से पता चला है कि योग और व्यायाम, नपुंसकता के रोकथाम और उपचार में मदद करते हैं। (और पढ़ें – सिर दर्द के घरेलु उपाय)

  1. नपुंसकता (स्तंभन दोष) के लिए योग कैसे है फायदेमंद - How does yoga help with Erectile Dysfunction in Hindi
  2. स्तंभन दोष के लिए पश्चिमोत्तानासन के फायदे - Stambhan dosh ke liye Paschimottanasana ke fayde in Hindi
  3. नपुंसकता के लिए उत्तानासन के लाभ - Napunsakta ke liye Uttanasana ke labh in Hindi
  4. इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए करें बद्ध कोणासन - Baddha Konasana for Erectile Dysfunction in Hindi
  5. मर्दाना कमजोरी दूर करने में करता है जानुशीर्षासन - Janu Sirsasana helps with Erectile Dysfunction in Hindi
  6. धनुरासन है नपुंसकता के लिए लाभदायक - Dhanurasana benefits for erectile dysfunction in Hindi

सिगरेट और शराब पीने से उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल की मात्रा, हृदय रोग और शुगर की बीमारी हो सकती हैं। इनसे आपके धमनियों और रक्त प्रवाह में नुकसान पहुँचता है जो नपुंसकता का कारण हो सकता है। अनुसन्धान में देखा गया है कि योग करने से नपुंसकता के कारक बहुत कम हो जाते हैं। उदहारण के तौर पर, "दी जर्नल ऑफ़ दी एसोसिएशन ऑफ़ फिजिशियन ऑफ़ इंडिया" में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि शोधकर्ताओं ने जब 42 ऐसे पुरुष जिनको हृदय रोग की समस्या थी, उनको लगातार योग करवाया तो उनकी हृदय रोग की समस्या कम हो गई थी। क्लिनिकल प्रैक्टिस में "लैंसेट एंड डायबिटीज रिसर्च" में अध्ययन किया गया है कि योग उच्च रक्तचाप और डायबिटीज़ का इलाज करने में भी काफी मदद कर सकता है। योगासन आपके शरीर को आराम देते हैं और रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं, जिसके कारण नपुंसकता की समस्या से छुटकारा मिलता है।

तो चलिए जानते हैं कि नपुंसकता से छुटकारा पाने के लिए कैसे और कौन से योग आपके लिए लाभदायक हैं।

पश्चिमोत्तानासन पैल्विक मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है जो लंबे समय तक बैठे रहने से तनावग्रस्त हो जाती हैं और साथ ही यह आसन रक्त प्रवाह को बेहतर करने में मदद करता है। यह आपको शांत करने और हल्के अवसाद से राहत देने का भी काम करता है। यह सभी नपुंसकता के बड़े कारण है जिनसे पश्चिमोत्तानासन राहत दिलाता है और नपुंसकता की परेशानी को कम करता है।

पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड (रीढ़ की हड्डी) लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। यह मेरूदंड के सभी विकार जैसे- पीठदर्द, पेट के रोग, यकृत रोग, तिल्ली, आंतों के रोग तथा गुर्दे के रोगों को दूर करता है। इसके अभ्यास से शरीर की चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक होता है। 

इस आसन को आप अपनी क्षमता के अनुसार 30 से 60 सेकेंड के लिए कर सकते हैं। (और पढ़ें - पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका और फायदे)

उत्तानासन कई योग रूटीनों में शामिल किया जाता है। यह तीव्र स्ट्रेच आपके तनाव को दूर करने में मदद कर सकता है। कुछ योग गुरुओं के अनुसार यह नपुंसकता में मदद के साथ-साथ पाचन में सुधार और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से मोटापा और शरीर की अतिरिक्त चर्बी दूर होती है। इससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिलता है। पाचन संबंधी रोग दूर होने से शरीर स्फूर्त व मन प्रफुल्लित रहता है।

आप इस आसन को 30 से 40 सेकंड तक कर सकते हैं। (और पढ़ें - उत्तानासन करने का तरीका और फायदे)

 

बद्ध कोणासन मूत्राशय, गुर्दे और पेट में अंगों के साथ साथ प्रोस्टेट ग्रंथि को भी उत्तेजित करता है। इससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन से राहत पाने में काफी मदद मिलती है। बंध कोणासन के नियमित अभ्यास से घुटने के हिस्सों में रक्त संचारित होता है।

आप इस आसन को 30 से 60 सेकंड तक कर सकते हैं। (और पढ़ें - बद्ध कोणासन करने का तरीका और फायदे)

 

"जानु" का अर्थ होता है घुटना और "शीर्ष" का अर्थ होता है सिर - इन दो शब्दों के मेल से बनता है जानुशीर्षासन। इसको करते समय आपका सिर आपके घुटने को स्पर्श करता है, इसलिए इसे जानुशीर्षासन कहा जाता है। यह आसन ख़ास तौर से खाली पेट किया जाना चाहिए क्यों इसको करने से आपके पेट पर बहुत दबाव पड़ता है। यह आपके लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करता है, खासकर हैमस्ट्रिंग, पीठ, जांघों, और कूल्हों की मांसपेशियों में। 

जानुशीर्षासन निचले पेट और गले में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में भी मदद करता है। इस कारण से या मरदाना कमज़ोरी डोर करने में काफी मददगार होता है। शारीरिक लाभ के साथ, यह तनाव कम करने में भी सहायक होता है। 

आप इस आसन को 20 से 40 सेकंड तक कर सकते हैं। (और पढ़ें - जानुशीर्षासन करने की विधि और फायदे)

धनुरासन को अँग्रेज़ी में बो पॉज़ कहते हैं। इस आसन में हाथो का उपयोग सिर, धड़ और टांगों को ऊपर खींचने के लिए प्रत्यंचा की तरह किया जाता है। शरीर को धनुष के समान मुद्रा में फ़ैलाने और शरीर को सशक्त बनाने की इस क्रिया से तरुणाई की प्राप्ति होती है। यह प्रजनन अंगों को उत्तेजित करने और इन अंगों में जाने वाले रक्त के प्रवाह में मदद करता है। यह आपके शरीर के सामने वाली सभी मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में भी मदद करता है जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन को कम करने में मदद मिलती है। 

आप इस आसन को 20 से 30 सेकंड तक कर सकते हैं। (और पढ़ें - धनुरासन करने की विधि और फायदे)

इन बातों का खास तौर से ध्यान रखें:

  1. याद रहे की योगाभ्यास से आराम निरंतर अभ्यास करने के बाद ही मिलता है और धीरे धीरे मिलता है।
  2. आसन से जोड़ों का दर्द बढे नहीं, इसके लिए अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देने वाली वस्तुओं, तकियों व अन्य उपकरणों की सहायता जैसे ज़रूरी समझें वैसे लें।
  3. अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न दें। अगर दर्द बढ़ जाता है तो तुरंत योगाभ्यास बंद कर दें और चिकित्सक से परामर्श करें। (और पढ़ें: योग के नियम)
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