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बद्ध कोणासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है: बद्ध और कोण। बद्ध का मतलब बँधा हुआ और कोण कर अर्थ कोना या अँग्रेज़ी में जिसे "ऐंगल" (angle) कहते हैं। यह आसन तितली आसन से काफ़ी मिलता जुलता है, यहाँ तक की अधिकांश लोग दोनो आसनों को एक ही समझते हैं। परंतु दोनो आसनों में बहुत अंतर है। तितली आसन में दोनो पैरों को जोड़ कर दोनो टाँगों को उपर-नीचे हिलाना होता है।

(और पढ़ें - प्राणायाम क्या है)

इस लेख में बद्ध कोणासन के फायदों और उसे करने के तरीको के बारे में बताया है। साथ ही इस लेख में बद्ध कोणासन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। लेख के अंत में बद्ध कोणासन से संबंधित एक वीडियो शेयर किया गया है।

(और पढ़ें: तितली आसन करने का तरीका)

  1. बद्ध कोणासन के फायदे - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) ke fayde in Hindi
  2. बद्ध कोणासन करने से पहले यह आसन करें - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) se pahle ye aasan kare in Hindi
  3. बद्ध कोणासन करने का तरीका - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) karne ka tarika in Hindi
  4. बद्ध कोणासन का आसान रूपांतर - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) ke easy Modifications in Hindi
  5. बद्ध कोणासन करने में क्या सावधानी बरती जाए - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) me kya savdhani barte in Hindi
  6. बद्ध कोणासन करने के बाद आसन - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) ke baad aasan in Hindi
  7. बद्ध कोणासन का वीडियो - Baddha Konasana (Bound Angle Pose) Video in Hindi

बद्ध कोणासन के फायदे इस प्रकार हैं:

  1. पेट के अंगों, अंडाशय और प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्राशय और गुर्दे को उत्तेजित करता है।
  2. दिल को उत्तेजित करता है और शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार लाता है बद्ध कोणासन।
  3. जांघों के अंदर के हिस्से, पीठ, और घुटनों में खिचाव लाता है।
  4. बद्ध कोणासन हल्के अवसाद, चिंता और थकान को दूर करने में मदद करता है। (और पढ़ें – थकान से बचने के उपाय)
  5. मासिक धर्म संबंधी परेशानी और कटिस्नायुशूल (साइटिका) से राहत दिलाता है।
  6. रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है बद्ध कोणासन।
  7. फ्लैट पैर, हाई बीपीबांझपन और अस्थमा के लिए चिकित्सीय है। (और पढ़ें – बांझपन का घरेलू इलाज)
  8. गर्भावस्था के अंत तक अगर इसे किया जाए तो बद्ध कोणासन प्रसव को आसान बनाने में मदद करता है।
  9. पारंपरिक ग्रंथों का कहना है कि बद्ध कोणासन अनेक बीमारियों को ख़तम करता है।

(और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)

बद्ध कोणासन करने से पहले आप यह आसन कर सकते हैं:

  1. वीरासन (Virasana or Hero Pose)
  2. प्रसारित पादोत्तासन (Prasarita Padottanasana or Wide-Legged Forward Bend)
  3. जानुशीर्षासन (Janu Sirsasana or Head-to-Knee Forward Bend)
  4. तितली आसन (Titli asana or Butterfly Pose)

बद्ध कोणासन करने की विधि इस प्रकार है:

  1. दंडासन में शुरू करें।
  2. तितली आसन की तरह ही घुटनों को मोड़ कर पैरों को दोनों हाथों से मिलाएं ताकि तलवे एक दूसरे को छू रहे हों। जितना हो सके पैरों को शरीर के करीब ले आयें, ज़बरदस्ती ना करें
  3. संस्करण 1:
    1. हाथों से घुटनों को नीचे की ओर दबायें ताकि वह जमीन को छुएें।
    2. लेकिन शारीरिक क्षमता से ज़्यादा ना करें।
    3. अगर शुरू में घुटने नीचे ना छुएें, तो धीरज रखें, समय के साथ घुटने नीचे लगने शुरू हो जाएँगे।
  4. संस्करण 2:
    1. जब घुटने नीचे लगने लगे और आपका लचीलापन बढ़ जाए तो ही यह संस्करण करें।
    2. दोनो पैरों को हाथों से पकड़ लें।
    3. कूल्हे के जोड़ों से आयेज की और झुकें जब तक की सिर ज़मीन को स्पर्श ना करे। (और पढ़ें - कूल्हे के जोड़ों की सर्जरी)
    4. ऐसा होने में कुछ दिन या हफ्ते या महीने लग सकते हैं। धीरज रखें।
  5. संस्करण 1 या 2, दोनो ही 30 से 60 सेकेंड के लिए करें।

(और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)

  1. बद्ध कोणासन को तनिक आसान बनाने के लिए पैरों को शरीर से तोड़ा दूर रख सकते हैं।जिनके घुटनों में दर्द या चोट हो उन्हे बद्ध कोणासन नहीं करना चाहिए
  2. अगर घुटनों में दर्द महसूस हो, या जो महिलायें गरबवस्था में हो, उन्हे संस्करण 2 नहीं करना चाहिए। और संस्करण 1 के करने के लिए घुटनों के नीचे एक कंबल या तौलिया फोल्ड करके रख लें।

(और पढ़ें - घुटनों में दर्द के घरेलू उपाय)

  1. जिनके घुटनों में दर्द या चोट हो उन्हे बद्ध कोणासन नहीं करना चाहिए।
  2. जिन लोगों को ग्राय्न में, या साइटिका की परेशानी हो, या कमर में चोट हो तो उन्हे बद्ध कोणासन नहीं करना चाहिए।

(और पढ़ें - जोड़ों में दर्द का इलाज)

बद्ध कोणासन करने के बाद आप यह आसन करें:

  1. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana or Half Lord of the Fishes Pose)
  2. गोमुखासन (Gomukhasana or Cow Face Pose)
  3. मरीच्यासन (Marichyasana or Pose of Marichi)
  4. पद्मासन (Padmasana or Lotus Pose)

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