थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा - Thrombotic Thrombocytopenic Purpura (TTP) in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

March 17, 2022

March 17, 2022

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा
थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परप्यूरा क्या है?

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परप्यूरा (टीटीपी) एक दुर्लभ विकार है, जो शरीर की खून के थक्के बनाने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस बीमारी में पूरे शरीर में छोटे-छोटे खून के थक्के बनने लगते हैं। ये छोटे थक्के रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध (ब्लॉक) कर सकते हैं, जिससे खून शारीरिक अंगों तक नहीं पहुंच पाता है। इसकी वजह से कई महत्वपूर्ण अंग जैसे हृदय, मस्तिष्क और किडनी प्रभावित होती है। कई बार ये छोटे थक्के खून के प्लेटलेट्स का अत्यधिक इस्तेमाल कर सकते हैं, नतीजन जब शरीर को खून के थक्के बनाने की जरूरत पड़ती है, तब वो नहीं बन पाते हैं। उदाहरण के लिए चोट लगने पर थक्के न बन पाने की वजह से ब्लीडिंग को रोकना मुश्किल हो जाता है।

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा के लक्षण - Thrombotic Thrombocytopenic Purpura (TTP) Symptoms in Hindi

बेवजह बैंगनी रंग की नील पड़ना। इन निशानों को 'परप्यूरा' कहा जाता है। इसके अलावा निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • छोटे लाल या बैंगनी रंग के धब्बे, जो चकत्ते की तरह दिख सकते हैं।
  • त्वचा पीली पड़ना (पीलिया)
  • त्वचा बेजान दिख सकती है

इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं, जैसे:

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा के कारण - Thrombotic Thrombocytopenic Purpura (TTP) Causes in Hindi

टीटीपी जेनेटिक कारणों से होता है। इसका मतलब है कि इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के माता-पिता में निश्चित ही दोषपूर्ण जीन था। यह विकार एडीएएमटीएस13 नामक जीन में किसी गड़बड़ी से होता है। यह जीन सामान्य तरीके से थक्के बनाने वाले एंजाइम के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। इस एंजाइम की अनुपस्थिति में असामान्य रूप से थक्के जमने लगते हैं। एंजाइम विशेष प्रोटीन होते हैं जो मेटाबोलिक केमिकल रिएक्शन (ये एक रसायनिक प्रतिक्रिया है जिसमें कोशिकाएं खाने को एनर्जी में बदलती हैं) की दर को बढ़ाते हैं।

हालांकि, कुछ मेडिकल प्रक्रियाओं के बाद भी यह बीमारी ट्रिगर हो सकती है, जैसे कि खून व मैरो स्टेम सेल का प्रत्यारोपण और सर्जरी। कुछ मामलों में, गर्भावस्था के दौरान या कैंसर या संक्रमण की स्थिति में भी यह बीमारी विकसित हो सकती है। इनके अलावा कुछ दवाओं की वजह से भी टीटीपी विकसित हो सकता है, जैसे कि:

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा का उपचार - Thrombotic Thrombocytopenic Purpura (TTP) Treatment in Hindi

थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परप्यूरा का इलाज

इस बीमारी का इलाज निम्न तरीकों से किया जा सकता है:

  • प्लाज्मा
    जब किसी व्यक्ति को जेनेटिक कारणों से टीटीपी होता है तो इस स्थिति में नस के जरिए शरीर में प्लाज्मा पहुंचाया जाता है। प्लाज्मा खून का एक तरल हिस्सा है जो खून के थक्के बनाने का कारक है। प्लाज्मा इंजेक्शन का उपयोग लिवर रोग, हार्ट सर्जरी या लिवर ट्रांसप्लांट से होने वाली कमियों के चलते रोगियों में थक्कों को रिप्लेस करने के लिए किया जाता है।
  • दवाइयां 
    यदि प्लाज्मा ट्रीटमेंट सफल नहीं रही है, तो डॉक्टर कुछ ऐसी दवाएं दे सकते हैं जो एडीएएमटीएस13 नामक एंजाइम को नष्ट होने से रोक सकें।
  • सर्जरी
    अन्य मामलों में, सर्जरी से प्लीहा को निकालने की जरूरत पड़ सकती है।

अगर अचानक से आपको इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बिना कोई देर किए डॉक्टर से चेकअप करवाएं और जितना जल्दी हो सके इलाज शुरू कर दें।



थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक परपूरा के डॉक्टर

Dr. Kartik Purohit Dr. Kartik Purohit रक्तशास्त्र
13 वर्षों का अनुभव
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