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  1. लिवर ट्रांसप्लांट क्या है - Liver Transplant Surgery kya hai in hindi?
  2. लिवर ट्रांसप्लांट क्यों की जाती है? - Liver Transplant Surgery kab kiya jata hai?
  3. लिवर ट्रांसप्लांट होने से पहले की तैयारी - Liver Transplant Surgery ki taiyari
  4. लिवर ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है? - Liver Transplant Surgery kaise hota hai?
  5. लिवर ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल - Liver Transplant Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. लिवर ट्रांसप्लांट के बाद सावधानियां - Liver Transplant Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. लिवर ट्रांसप्लांट की जटिलताएं - Liver Transplant Surgery me jatiltaye

लिवर प्रत्यारोपण (Liver Transplantation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लिवर फेलियर के परिणामस्वरूप एक गैर-कार्यकारी लिवर को सर्जरी से हटा दिया जाता है और पूर्ण या आंशिक रूप से स्वस्थ लिवर से प्रतिस्थापित किया जाता है। लिवर कैंसर सर्जरी करवाते समय, अगर यह ज्ञात होता है कि लिवर की कार्यवाही बहुत ही बिगड़ चुकी है तो ऐसे में लिवर प्रत्यारोपण करना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि सिर्फ प्रभावित भाग हटाने से लिवर फेलियर हो सकता है। प्रत्यारोपण के लिए, लिवर जीवित या मृत डोनर से लिया जा सकता है।

चूंकि, कोई भी यंत्र या मशीन विश्वसनीय तरीके से लिवर का कार्य नहीं कर सकती, जिन मरीज़ों का लिवर फेल हो चुका हो उनकी स्थिति में प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प होता है।

जिन रोगियों को लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, वे आमतौर पर तीव्र या जीर्ण लिवर फेलियर से पीड़ित होते हैं। आमतौर पर, लिवर प्रत्यारोपण को गंभीर जटिलताओं, जैसे अंत-चरण जीर्ण लिवर रोग, से पीड़ित रोगियों के लिए वैकल्पिक उपचार के रूप में आरक्षित किया जाता है। अचानक से लिवर फेल होना एक दुर्लभ स्थिति है। 

(और पढ़ें - लिवर कैंसर)

जिन मरीज़ों की स्थिति अन्य उपचारों से नियंत्रित नहीं की जा सकती, ऐसे मरीज़ों में लिवर फेलियर के इलाज के विकल्प के रूप में लिवर प्रत्यारोपण किया जाता है। लिवर कैंसर से रोगग्रस्त लोगों के इलाज के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।

लिवर फेलियर दो प्रकार का होता है: तीव्र लिवर फेलियर (Acute Liver Failure or Fulminant Hepatic Failure) जिसमें अचानक से या जल्दी से (कुछ हफ़्तों में) लिवर की कार्यवाही विफल हो जाती है और यह आमतौर पर दवाओं से होने वाली लिवर की खराबी या क्षति से होता है।  

हालांकि लिवर प्रत्यारोपण तीव्र लिवर फेलियर के उपचार में प्रयोग किया जाता है लेकिन ज़्यादातर इसका प्रयोग जीर्ण (बहुकालीन) लिवर फेलियर (Chronic Liver Failure) के उपचार में किया जाता है। जीर्ण लिवर फेलियर कई महीनों या सालों में होता है।

विभिन्न स्थितियों के कारण जीर्ण लिवर फेलियर हो सकता है। इसका सबसे आम कारण है सिरहोसिस, एक प्रक्रिया जिसमें स्कार ऊतक सामान्य लिवर ऊतक की जगह ले लेते हैं और लिवर की कार्यवाही खराब हो सकती है। सिरहोसिस लिवर प्रत्यारोपण का अक्सर उद्धृत किया जाने वाला कारण है। 
सिरोसिस के प्रमुख कारण जिनसे लिवर फेलियर और अंततः लिवर ट्रांसप्लांट करने की आवश्यकता पड़ती है निम्न हैं:

  1. हेपेटाइटिस बी और सी (Hepatitis B and C)
  2. मदिरा या मादक पदार्थ से होने वाली लिवर की समस्या (Alcoholic Liver Disease)
  3. मादकता रहित वसायुक्त लिवर रोग (Nonalcoholic Fatty Liver Disease)
  4. पित्त वाहिका (Bile Duct; पित्त-विकार को लिवर से बाहर ले जानी वाली ट्यूब) को प्रभावित करने वाली बीमारियां जैसे कि प्राथमिक पित्त सिरोसिस (Primary Biliary Cirrhosis), प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलिन्जाइटिस (Primary Sclerosing Cholangitis) और पित्त अविवरता (Biliary Atresia)। पित्त अविवरता बच्चों में लिवर का सबसे प्रमुख कारण है। 
  5. लिवर को प्रभावित करने वाली अनुवांशिक बीमारियां, जिनमें रक्तवर्णकता (Hemochromatosis) और विलसन्स डिज़ीज़ (Wilson's Disease) भी शामिल हैं

सिरोसिस के कारण लिवर फेलियर के लक्षण:

  1. काला मल (Black stool)
  2. उल्टी में रक्त निकलना
  3. पेट में पानी (Ascites; जलोदरियां)
  4. उनींदापन और मानसिक भ्रम
  5. मामूली घावों से अत्यधिक रक्तस्राव
  6. पीलिया
  7. गुर्दे की शिथिलता
  8. अत्यधिक थकान (और पढ़ें – थकान कम करने के घरेलू उपाय)
  9. हीमोग्लोबिन और अन्य रक्तगणना की संख्या में कमी 

लिवर प्रत्यारोपण से लिवर में उत्पन्न होने वाले कई कैंसर (Primary Liver Cancer; प्राथमिक लिवर कैंसर) के उपचार में भी प्रयोग किया जा सकता है। 

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. प्रत्यारोपण के लिए डोनर ढूंढ़ना (Finding The Donor For The Transplant)
    प्रत्यारोपण 3 प्रकार के होते हैं: जीवित व्यक्ति (आम तौर पर परिवार के सदस्य) का लिवर प्रत्यारोपित करना (Living Donor Transplant), किसी मृत (हाल ही में) व्यक्ति का लिवर प्रत्यारोपित करना (Orthotopic Transplant), या स्प्लिट डोनेशन जिसमें मृत व्यक्ति के लिवर को दो हिस्सों (दांया और बांया) में करके दो शरीरों (एक बचा और एक वयस्क) में प्रत्यारोपित कर देते हैं (बड़ा हिस्सा व्यसक के शरीर में और छोटा हिस्सा बच्चे के शरीर में) (Split Donation)।
    टेस्ट्स और अन्य मूल्यांकन के बाद, मरीज को शवदायी डोनेशन (Cadaveric Donation) के लिए प्रतीक्षा सूची में रखा जाता है, या अगर परिवार में ही कोई डोनर जिसका ब्लड ग्रुप मरीज़ के ग्रुप से मैच करता हो और जो प्रत्यारोपण के लिए तैयार हो, तो उसकी डोनेशन के लिए जांच और जांच के परिणाम अनुकूल होने पर प्रत्यारोपण की योजना बनायी जाती है। 
    मृतक डोनर (Deceased Donor) की प्रतीक्षा के दौरान, जब तक एक उपयुक्त लिवर उपलब्ध नहीं हो जाता तब तक रोगी प्रत्यारोपण टीम के साथ फॉलो-अप करता रहता है। यदि रोगी की स्थिति में बिगड़ने के लक्षण दिखाई देते हैं, तो सामान्य रूप से परिवार को लिवर डोनेट करने पर विचार करने को कहा जाता है।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

लिवर डोनेशन से सम्बंधित ध्यान देने योग्य बातें:

  1. डोनर का लिवर स्वस्थ होना चाहिए। 
  2. आदर्श रूप से, डोनर का ब्लड ग्रुप प्राप्तकर्ता के ब्लड ग्रुप के लिए अनुकूल होना चाहिए। 
  3. डोनर की उम्र से 18-60 के बीच होनी चाहिए। 
  4. लिवर डोनेट करने के पीछे का उद्देश्य आर्थिक लाभ नहीं होना चाहिए बल्कि यह सहायता के भाव से किया जाना चाहिए।
  5. डोनर के लिवर का आकार प्राप्तकर्ता के लिवर के आकार से मेल खाना चाहिए।
  6. डोनर अगर जीवित है तो उसका शारीरिक परीक्षण किया जाना चाहिए, जिसमें उपर्लिखित टेस्ट्स भी शामिल हैं। 

अगर आपको यह सूचित किया जाता है कि किसी शवदायी डोनर का लिवर उपलब्ध है, तो आपको उस ही वक़्त अस्पताल आना होगा। आपको अस्पताल में भर्ती करवाया जायेगा और सर्जरी से पहले आपके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी जिससे यह सुनिश्चित हो जाए कि आप सर्जरी एक लिए तैयार हैं।

ट्रांसप्लांट सर्जन मरीज़ के पेट में एक लंबा चीरा (जिगर तक पहुंचने के लिए) बनाता है। चीरे का आकार आपकी शारीरिक बनावट और सर्जन के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। 

सर्जन लिवर में रक्त आपूर्ति और पित्त वासिका को वियोजित कर देता है और फिर रोगग्रस्त लिवर को निकाला जाता है। इसके बाद सावधानी से वास्तविक लिवर के स्थान पर डोनर का लिवर रख दिया जाता है और रक्त आपूर्ति व पित्त वासिका को फिर जोड़ दिया जाता है। सर्जरी का समय आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। सर्जरी में 6 से 18 घंटे लग सकते हैं।

इसके बाद सर्जिकल धागों और स्टेपल्स की मदद से चीरा सिल दिया जाता है। इसके बाद आपको Intensive Care Unit (ICU) में रखा जायेगा।

अगर लिवर जीवित शरीर से लिया जा रहा है, तो ऐसे में डोनर के लिवर का कुछ हिस्सा (40-70%) ही लिया जाता है नाकि पूरा लिवर। ऐसे में पहले डॉक्टर डोनर का एक ऑपरेशन करते हैं जिसमें डोनर के लिवर का हिस्सा निकाला जाता है। यह सर्जरी तीन से चार घण्टे चलती है। 

इसके बाद रोगी के शरीर में, उपर्लिखित मृत डोनर द्वारा प्रत्यारोपित लिवर को लगाने की सर्जरी की प्रक्रिया द्वारा, लिवर प्रत्यारोपित किया जाता है।

डोनर और प्राप्तकर्ता दोनों को शरीर में लिवर का पुनर्जनन होता है। इसमें कुछ महीने लगते हैं। लिवर का आकर और विस्तार-क्षेत्र फिरसे सामान्य लिवर की तरह हो जाता है।

  1. कुछ दिनों के लिए ICU आपको में रखा जायेगा। डॉक्टर और नर्स आपकी स्थिति को मॉनिटर करते रहेंगे जिससे किसी भी प्रकार की जटिल को टाला जा सके। वे आपके नए लिवर की कार्यवाही की जांच भी करेंगे। 
  2. आपको अस्पताल में 5 से 10 दिन बिताने हो सकते हैं।
  3. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी आपको नियमित रूप से डॉक्टर्स से चेक-अप करवाने होंगे। सर्जरी के बाद भी आपको कई हफ़्तों तक कुछ रक्त परीक्षण करवाने हो सकते हैं। 
  4. प्रत्यारोपण के बाद आपको आजीवन दवाएं लेनी होंगी, कुछ दवाएं रोग निरोधक क्षमता बनाये रखने के लिए जिससे बीमारियां प्रत्यारोपित लिवर पर हमला न कर सकें और कुछ दवाएं जटिलताओं से बचने के लिए दी जा सकती हैं।

पूरी तरह रिकवर होने और प्रत्यारोपण के बाद पूरी तरह बेहतर महसूस करने में छह महीने या उससे ज़्यादा लग सकते हैं। हालांकि आप सर्जरी के कुछ महीने बाद से सामान्य गतिविधियां एवं काम पर जाना शुरू कर सकते हैं। सर्जरी के बाद रिकवरी की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि आप सर्जरी से पहले कितने बीमार थे।

लिवर प्रत्यारोपण का कुल सफलता दर 94% से ज़्यादा है और अधिकांश प्राप्तकर्ता अपनी सामान्य गतिविधियां कर पाते हैं और 95% स्थितियों में जीवन की गुणवत्ता पहले के सामान हो जाती है। प्रत्यारोपण की सफलता इसपर भी निर्भर करती है कि रोग का निदान किस स्टेज पर हुआ। जितनी जल्दी रोग का पता चलेगा, उसके उपचार के परिणाम भी उतने ही बेहतर होंगे।

अधिक सफलता दर होने पर भी रोगी को इससे जुड़ी जटिलताओं का ज्ञान होना चाहिए। सर्जरी के बाद होने वाले कुछ जोखिम और जटिलताएं निम्न हैं:

  1. पित्त वासिका में जटिलताएं जैसे पित्त वासिका लीक्स या पित्त वासिका का सुकड़ना 
  2. रक्तस्त्राव 
  3. रक्त के थक्कों का गठन 
  4. डोनेट किये हुए लिवर का फेलियर 
  5. संक्रमण 
  6. शरीर द्वारा डोनेट किये हुए लिवर का अग्रहण
  7. मानसिक भ्रम या मिर्गी के दौरे 
  8. प्रत्यारोपित लिवर में लिवर की बीमारी की पुनरावृत्ति
  9. अग्रहण-रोधी दवाओं के प्रति दुष्प्रभाव
    लिवर प्रत्यारोपण के बाद, आपको आजीवन दवाएं लेनी होंगी जिनसे शरीर द्वारा डोनेट किये हुए लिवर का अग्रहण न हो। इन दवाओं से हड्डियों की कमज़ोरी, मधुमेहदस्तसिरदर्दउच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये दवाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता को रोक कर कार्य करती हैं इसलिए संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए आपको डॉक्टर द्वारा संक्रमण रोधी दवाएं भी दी जा सकती हैं।
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