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लगातार कान बजने की समस्या किसी को भी परेशान कर सकती है। इस आर्टिकल में टिनिटस की रोकथाम करने के लिए कुछ घरेलू उपाय, टिनिटस साउंड थेरेपी और टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी आदि के बारे में बताया गया है।

कान बजने की स्थिति का मेडिकल नाम टिनिटस होता है, खासतौर पर यह वृद्धावस्थता में होने वाली एक आम समस्या होती है। कान बजने के दौरान सुनाई देने वाली आवाज विभिन्न प्रकार की हो सकती है जैसे सीटी, भनभनाहट, चीं-चीं, या गर्जन और कभी-कभी चिल्लाने जैसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं। ऐसा महसूस हो सकता है कि यह आवाज एक या दोनों कानों में या फिर सिर के अंदर उत्पन्न हो रही है। कान बजने की समस्या लगातार या कभी-कभी हो सकती है और घटती-बढ़ती भी रह सकती है।

टिनिटस की समस्या को सहन कर पाना इतना आसान नहीं है। वास्तव में यह काफी परेशान कर देने वाली स्थिति हो सकती है, जो आपको पूरी तरह से विचलित कर सकती है और कहीं भी ध्यान नहीं लगाने देती है। इससे भी बड़ी परेशानी की बात ये होती है, कि कान बजने के लिए कोई विशिष्ट इलाज भी उपलब्ध नहीं है खासतौर पर अगर यह काफी समय से हो रही है।

लेकिन चिंता करने की बात नहीं है, क्योंकि कुछ घरेलू उपायों की मदद से इस स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इस आर्टिकल में बताया गया है कि ये उपाय क्या हैं, उन्हें कैसे करना है और अपनी रोजाना की जीवनशैली में उनको कैसे शामिल करना है।

इस लेख में आप टिटिनटस की रोकथाम करने के तरीकों के बारे में भी जान पाएंगे। जिसकी मदद से आप अपने दूसरे कान को प्रभावित होने से बचा सकते हैं या इससे पीड़ित किसी व्यक्ति की मदद भी कर सकते हैं।

  1. कान बजना क्या है - Kaan Bajna Kya Hai
  2. कान बजने की रोकथाम कैसे करें - Kaan Bajne Ki Roktham Kaise Karen
  3. अंदरुनी समस्याओं का इलाज करके टिनिटस की रोकथाम करना - Andruni Karno Ka Ilaaj Karke Tinnitus Ki Roktham Karna
  4. टिनिटस के लिए नॉइस कैन्सलेशन - Tinnitus Ke Liye Noise Cancellation
  5. टिनिटस को रोकने के लिए अपना ध्यान बंटाना - Tinnitus Ko Rokne Ke Liye Dhyan Ko Distract Karna
  6. कान बजने की रोकथाम के लिए तनाव का इलाज करना - Kaan Bajne Ki Roktham ke Liye Stress Ko Manage Karna
  7. टिनिटस से बचाव के लिए कैफीन से परहेज - Tinnitus Se Bachav Ke Liye Parhej
  8. कान बजने की रोकथाम के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी - Kaan Bajne Ki Roktham Ke Liye CBT
  9. टीआरटी की मदद से टिनिटस की रोकथाम - Tinnitus Ki Roktham Ke Liye TRT
  10. कान बजने की रोकथाम करने के लिए टिप्स - Kaan Bajne Ki Roktham Ke Liye Tips
  11. डॉक्टर को कब दिखाएं - Doctor Ke Pass Kab Jayen
  12. डॉक्टर को कब दिखाएं - Doctor Ke Pass Kab Jayen

कान बजना किसे कहते हैं?

टिनिटस या कान बजना कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर के अंदर किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी का एक लक्षण हो सकता है। हालांकि इसके सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यह मस्तिष्क के कार्यों में किसी प्रकार की बाधा या कान के काम में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने के कारण भी विकसित हो सकता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा प्रकाशित किए गए एक आर्टिकल के अनुसार, ज्यादातर मामलों में कान बजने के दौरान सुनाई देने वाली आवाज शरीर के अंदर किसी अज्ञात जगह पर होने वाला शोर होता है। ज्यादातर लोग अपने जीवन में एक बार टिटिनस के लक्षण महसूस कर ही लेते हैं, जैसे लंबे समय तक किसी अधिक शोर वाली जगह पर रहना जैसे कि कोई संगीत कार्यक्रम। टिनिटस के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे थायराइड संबंधी समस्याएं, वृद्धावस्था, साइनस संक्रमण या सिर में चोट लगना आदि। हालांकि कुछ मामलों में यह कान में बजने वाली आवाज आमतौर पर व्यक्ति के शरीर के अंदर से ही पैदा होती है। दिलचस्प बाद ये है कि आपका शरीर लगातार कुछ प्रकार की आवाजें उत्पन्न करता रहता है, जिन्हें दैहिक ध्वनियां (Somatic Sound) कहा जाता है। हालांकि मनुष्य का शरीर इस तरीके से बना है कि उनके कान ज्यादातर बाहरी ध्वनियों पर अपना ध्यान केंद्रित रखते हैं और शरीर के अंदर पैदा होने वाली ध्वनियों पर ध्यान नहीं देते हैं।

टिटिनस मस्तिष्क या कानों के अंदर उत्पन्न होने वाली एक आवाज होती है, जो आमतौर पर तब महसूस की जाती है जब बाहर किसी प्रकार का शोर ना हो रहा हो।

कान बजना कैसे रोकें?

कान के अंदर महसूस हो रहे शोर को रोकना इतना आसान काम नहीं है। इसे कम करने के लिए कई अलग-अलग प्रकार की उपचार प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे पूरी तरह से छुटकारा पाने के लिए अक्सर काफी लंबा समय लग जाता है। हालांकि कुछ मामलों में यह धीरे-धीरे अपने आप कम हो जाता है। यह पूरी तरह से टिटिनस होने के पीछे की वजह पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि इस स्थिति से जल्दी स्वस्थ होने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।

अंतर्निहित समस्याओं का इलाज करना

कान बजने के उपचार का सबसे पहला कदम इसका कारण बनने वाली अंदरुनी स्थितियों का इलाज करना है। ऐसा करने के लिए आपको किसी स्पेश्लिस्ट डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है। कान बजने से संबंधित कुछ स्थितियों का इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है, जैसे:

  • कान में मैल जम जाना:
    बाहरी कान में किसी प्रकार की रुकावट होना, कान बजने के सबसे आम कारणों में से एक होता है। यदि आपको यह समस्या आमतौर पर होती रहती है, तो निश्चित रूप से अपने बाहरी कान में किसी प्रकार की रुकावट की जांच करवाते रहें। क्योंकि अगर कान में मैल आदि जमा हुआ है, तो उसे निकलवाना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए कान, नाक व गले के विशेषज्ञ (ENT specialist) डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।

    कुछ साधारण घरेलू उपायों की मदद से भी आप कान बजने की समस्या का इलाज कर सकते हैं। हालांकि हमारे कान आमतौर पर चोट के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं, इसीलिए किसी भी प्रकार का घरेलू उपचार करने के दौरान विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। कान में रुई, पेन, चाबी या अन्य कोई भी नुकीली वस्तु डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
     
  • हृदय व रक्तवाहिकाओं से संबंधित रोगों का इलाज करना:
    हृदय व रक्त वाहिकाओं से भी विभिन्न प्रकार की आवाजें आती हैं, जो कान बजने की तरह लग सकती हैं। यदि आपको कान में कोई लगातार बजने वाली धड़कन जैसी ध्वनि सुनाई दे रही है, तो यह हृदय से जुड़ी स्थितियों से संबंधित हो सकती है। ऐसे में जल्द से जल्द कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोगों के विशेषज्ञ) को दिखा लेना चाहिए। कार्डियोलॉजिस्ट स्टीथोस्कोप की मदद से ध्वनि सुनकर स्थिति का परीक्षण करेंगे और इसका इलाज करने के लिए दवाओं व सर्जरी आदि जैसे उपचार तरीकों का इस्तेमाल करेंगे। इनकी मदद से उन सभी लक्षणों को कम कर दिया जाता है, जिनसे कान बजने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं।
     
  • वैकल्पिक दवाएं:
    ऐसी काफी प्रकार की दवाएं हैं, जिनके कारण भी कान बजने की समस्या हो सकती है जैसे एनएसएआइडी (एस्पिरिन, ईबुप्रोफेन), ब्लड प्रेशर की दवाएं, मलेरिया की दवाएं, मिर्गी की दवाएं और कुछ प्रकार की एंटीबायोटिक्स (सिप्रोफ्लैक्सिन, इरिथ्रोमाइसिन, टेट्रासायक्लिन) आदि। यदि आप इनमें से कोई भी दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में पहले ही बता दें, हो सकता है डॉक्टर आपकी दवाओं में कुछ बदलाव कर दें।

बाहरी शोर पैदा करना:

बाहरी शोर पैदा करके कान के अंदर की आवाज को दबाना, कान बजने की स्थिति को मैनेज करने का एक काफी अच्छा तरीका हो सकता है। ऐसा निम्न तरीकों से किया जा सकता है:

  • व्हाइट नॉइस (White noise):
    कान के अंदर आवाज सुनाई देना या कान बजने की समस्या आमतौर पर रात के समय या एकदम शांत माहौल के दौरान होती है। इसलिए लगातार बज रही कोई हल्की आवाज (व्हाइट नॉइस) से काफी मदद मिल सकती है। व्हाइट नॉइस के लिए गर्मियों में पंखे या एसी की आवाज और गर्मियों में ह्यूमिडिफायर और ब्लोअर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
     
  • सुनने में मदद करने वाले उपकरण:
    यह छोटे विद्युत उपकरण होते हैं, जिन्हें हीयरिंग एड्स कहा जाता है। इन्हें कान के अंदर लगाया जाता है। जिस व्यक्ति को कम सुनाई देता है और साथ ही उसको कान बजने की समस्या भी हो रही है, तो ऐसे में हीयरिंग एड्स के उपकरण उनकी काफी मदद कर सकते हैं। जिस व्यक्ति को कम सुनाई देता है, अक्सर उसके लिए कान बजने की समस्या काफी गंभीर होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब कोई व्यक्ति बाहरी आवाज को सुन ना पाए, तो उसको शरीर के अंदर की आवाज और अधिक सुनाई देती है। ये उपकरण बाहरी आवाजों को सुनने में मदद करते हैं, जिस से टिटिनस के लक्षण कम हो जाते हैं।
     
  • ईयर प्रोटेक्शन एड्स:
    टिटिनस के ग्रस्त लोगों के लिए अधिक शोर-शराबे वाली जगह से बचना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि ऐसा होने पर उनके कान बजने की समस्या अत्यधिक गंभीर हो सकती है। यदि आप किसी भी समय बाहर जा रहे हैं, आपको निश्चित रूप से ईयर प्रोटेक्शन एड्स या नॉइस कैंसलिंग डिवाइस लगा लेने चाहिए।

ध्यान बंटाना

खुद का ध्यान किसी अन्य चीज में लगा कर कान बजने की स्थिति को नजरअंदाज करने की कोशिश करना भी टिटिनस से निपटने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। ऐसे कई अच्छे तरीके हो सकते हैं, जिनकी मदद से अपने ध्यान को बंटाया जा सकता है:

मधुर संगीत सुनना: आपने वो मशहूर कहावत तो सुनी ही होगी कि “संगीत हर दर्द की दवा होती है”, तो फिर आपको बता दें कि यह कहावत टिटिनस पर भी लागू होती है। जब आप कोई संगीत सुनते हैं तो आपका पूरा ध्यान संगीत पर हो जाता है और आप कान बजने की आवाज को भूल जाते हैं। इसलिए खुद के लिए कुछ अच्छे संगीतों की एक लिस्ट बना लें और इसे बार-बार सुनें। ये संगीत आपके मस्तिष्क को शांत करेंगे और आपको अंदर से मजबूत बनाएंगे ताकि आप समस्याओं से लड़ सकें।

साउंड थेरेपी: यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें इलाज करने के लिए म्यूजिंक वाइब्रेशन (संगीत की कंपन) का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस थेरेपी से स्थिति को पूरी तरह से कंट्रोल तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से आपका ध्यान बंटाने में मदद कर सकती है। यह शरीर और दिमाग को शांत करती है, जिससे शारीरिक व मानसिक तनाव कम हो जाता है। साउंड थेरेपी में ज्यादातर व्हेल साउंड, विंड साउंड और रेनफॉल आदि सबसे आम आवाजें हैं, जो इसमें इस्तेमाल की जाती है। साउंड थेरेपी के लिए आपको किसी अस्पताल में या कहीं भी जाने की जरूरी नहीं है, क्योंकि आजकल इसके लिए इंटरनेट पर कई एप्लिकेशन उपलब्ध हैं जिनकी मदद से आप कहीं भी और कभी भी साउंड थेरेपी ले सकते हैं।

तनाव को कम करने वाली और रिलैक्स करने वाली तकनीकें

इसमें कोई संदेह वाली बात नहीं है कि लगातार कान बजने की समस्या किसी भी व्यक्ति को तनाव ग्रस्त कर सकती है, जिसके कारण व्यक्ति को चिंता होने लगती है और कभी-कभी डिप्रेशन भी हो जाता है। इसके अलावा तनाव के कारण भी टिनिटस के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपने शरीर के तनाव को सामान्य स्तर पर रखने के लिए आपको कुछ अच्छी आदतें अपनाने की आवश्यकता पड़ेगी:

मेडिटेशन (ध्यान लगाना): रोजाना मेडिटेशन करने की आदत डालें। मेडिटेशन से सिर्फ टिनिटस का इलाज करने में ही मदद नहीं मिलती है यह मस्तिष्क और शरीर को भी आपस में जोड़ता है, जिससे आप फिर से जवान व तरोताजा महसूस करते हैं और साथ ही आपको शांति भी महसूस होती है। यदि आप मेडिटेशन के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो ऐसे में आप इसकी बजाए "माइंडफुलनेस" का उपयोग कर सकते हैं। कुछ क्लिनिकल स्टडी के अनुसार माइंडफुलनेस मेडिटेशन टिनिटिस के लक्षणों को कम करने में काफी प्रभावी है और यह अन्य दवाओं व रिलैक्स करने की तकनीकों के मुकाबले अच्छा प्रभाव डालता है। यह तकनीक करने के लिए आपको अपनी रोजाना की दिनचर्या से सिर्फ 5 मिनट अलग निकाल लेने चाहिए। आप इस तकनीक को अपने रोजाना के घरेलू कार्य करने, यात्रा करने या फिर चलने के दौरान भी कर सकते हैं। लेकिन गाड़ी आदि चलाने के दौरान इस तकनीक को कभी नहीं करना चाहिए)

योग: यह विभिन्न प्रकार के रोगों व अन्य मेडिकल समस्याओं में सुधार करने के लिए एक वैकल्पिक तरीके के रूप में काफी तेजी से उभर रहा है। यह टिनिटस के कुछ अन्य कारणों का इलाज करने में भी मदद करता है, ताकि उनसे होने वाले लक्षणों को कम किया जा सके। एक क्लिनिकल स्टडी के अनुसार नियमित रूप से योग करते रहने से तनाव कम होता है और टिनिटस के लक्षणों में भी सुधार होता है। अगर योग करने से आपको लक्षणों संबंधी राहत ना मिल पाए, तो भी यह आपके मस्तिष्क को शांत करता है और बेचैनी को कम करता है।

कैफीन ना लें

यदि आप अधिक कॉफी पीते हैं और आपको कान बजने जैसी समस्याएं होने का खतरा भी है, तो आपको कॉफी पीने की आदत छोड़नी पड़ सकती है। ऐसा माना जाता है कि कॉफी में मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है, जिससे कान में बजने वाली आवाज और अधिक बढ़ जाती है। टिनिटस के लिए कैफीन को एक उत्तेजक कारक मानते हुऐ, कैफीन वाले पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए या जितना हो सके कम कर देना चाहिए। कैफीन मुख्य रूप से कोल्ड ड्रिंक, कॉफी और चाय आदि में पाई जाती है, जिनसे बचाव करके कान बजने के लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी:

टिनिटस को ठीक करने के लिए सीबीटी (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) भी एक अच्छा तरीका हो सकता है। हालांकि इससे कान बजने की समस्या को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसकी मदद से मरीज को ठीक होने के लिए काफी हद तक प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस थेरेपी के दौरान पीड़ित व्यक्ति को इस स्थिति संबंधित जरूरी शिक्षा व परामर्श दिए जाते हैं। साथ ही टिनिटस के प्रति मरीज के विचार को बदलने की कोशिश की जाती है, ताकि वे इसके बारे में थोड़ा सकारात्मक तरीके से सोच सकें। एक अध्ययन के अनुसार जो लोग काफी लंबे समय से टिनिटस से ग्रस्त हैं, सीबीटी से उनके जीवन में काफी सुधार किया जा सकता है। इतना ही नहीं इस थेरेपी के दौरान मरीज के पास कुछ विशेष लोग होते हैं, जिनके साथ वह अपनी चिंता व हताशा व्यक्त कर सकता है।

यदि आपको लंबे समय से कान बजने की समस्या हो रही है, जिससे आप भावनात्मक व मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं तो आपको बिना किसी संकोच के कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी प्राप्त कर लेनी चाहिए। सीबीटी से किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, बल्कि इसकी बजाए यह आपके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।

टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी (टीआरटी)

सामान्य आबादी में टिनिटस का प्रसार देखते हुऐ, 1980 में डॉ. पॉवेल जेस्ट्रेबोफ ने टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी नामक एक प्रोग्राम चलाया गया। इस थेरेपी में पीड़ित व्यक्ति के कान में एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस डाला जाता है, जो कान के अंदर हल्की आवाज में वातावरण में होने वाला या एक प्राकृतिक शोर छोड़ता है। इस शोर की क्वालिटी, वोल्यूम और पिच टिनिटस में सुनाई दे रही आवाज से काफी मिलती-झुलती है। टीआरटी में मरीज को मुख्य रूप से साउंड थेरेपी दी जाती है और अन्य आवश्यक परामर्श भी दिए जाते है। टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी का मुख्य उद्देश्य मनुष्य के ऑडीटरी सिस्टम (Auditory system) को बाहरी शोर से होने वाली उत्तेजनाओं के संपर्क में लाया जाता है और उसको सहन करने के लिए ट्रेन किया जाता है। ऐसा होने के बाद टिनिटस में सुनाई देना वाली आवाजें व्यक्ति के लिए सामान्य हो जाती हैं। 

टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी में लगने वाला समय लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। इसमें एक से दो साल के बीच का समय लग सकता है।

थेरेपिस्ट दावा करते हैं कि टिनिटस के लिए हीयरिंग एड्स और नॉइस कैन्सलेशन जैसे उपचारों के मुकाबले टीआरटी मरीजों को अधिक राहत पहुंचाता है।

कान बजने की रोकथाम कैसे करें?

यहां कुछ टिप्स बताए गए हैं, जो कानों की सुरक्षा करने और टिनिटस से बचाव करने में मदद करते हैं:

ईयर प्लग लगाएं: यदि आप किसी संगीत कार्यक्रम या किसी ऐसी जगह पर जा रहे हैं जहां पर बहुत अधिक शोर हो रहा है, तो इस दौरान ईयर प्लग जैसे सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करें। कुछ संगीत कार्यक्रमों व शो के आयोजक प्रोग्राम में शामिल होने वाले लोगों को ईयर प्लग प्रदान भी करते हैं।

तेज शोर के ज्यादा करीब न जाएं: मूवीज या कोई शो आदि देखने या गाने आदि सुनने के दौरान स्पीकर के अधिक पास में ना रहें। अपने कानों व सुनने में मदद करने वाले अन्य सभी अंदरुनी अंगों को सुरक्षित रखने के लिए स्पीकर या ध्वनि के मुख्य स्रोत से एक उचित दूरी बना कर रखें।

उच्च आवाज के संपर्क में ना आएं: मस्तिष्क की तरह आपके कानों को भी उत्तेजनाओं से हुई क्षति को ठीक करने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। यदि आप किसी अधिक शोर वाली जगह या किसी संगीत कार्यक्रम में हैं, तो बीच-बीच में अपने कानों को आराम देते रहें।

नियमित रूप से अपने कान साफ करें: रोजाना अपने कानों को साफ करने की आदत डालें। कान साफ करने के लिए डॉक्टर द्वारा स्वीकृति दी गई तकनीक का ही इस्तेमाल करें या प्रोफेशनल मदद लें।

डॉक्टर को कब दिखाएं

कान बजने से संबंधित समस्या में डॉक्टर को दिखा लेना सबसे बेहतर रहता है। क्योंकि ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी किसी भी जोखिम को कम किया जा सकता है और टिनिटस का कारण बनने वाली अंदरुनी स्थितियों का इलाज किया जा सकता है। निम्न कुछ समस्याएं हैं, जिनके होने पर जितना जल्दी हो सके डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

और पढ़ें ...

References

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