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मिर्गी क्या है?

मिर्गी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार है। इसमें मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका (Nerve Cell) गतिविधि बाधित हो जाती है, जिसके कारण दौरे या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार, उत्तेजना और कभी-कभी बेहोशी हो जाती है।

मिर्गी संक्रामक नहीं है और मानसिक बीमारी या मानसिक कमज़ोरी के कारण नहीं होती है। कभी-कभी गंभीर दौरे के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकती है, लेकिन अधिकांश दौरे मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव नहीं डालते हैं। बीमारी से होने वाली मस्तिष्क क्षति से लेकर असामान्य मस्तिष्क विकास तक मिर्गी के कई संभव कारण हैं। इसमें जेनेटिक्स भी एक भूमिका निभा सकता है।

ब्रेन ट्यूमर, अधिक शराब पीने से होने वाली बीमारी, अल्जाइमर रोग, स्ट्रोक और दिल के दौरे सहित अन्य विकारों से मस्तिष्क को होने वाली क्षति के कारण भी मिर्गी विकसित हो सकती है। अन्य कारणों में सिर की चोट, जन्म के पूर्व (गर्भावस्था के दौरान) की चोट और विषाक्तता शामिल है।

(और पढ़ें – अल्जाइमर से बचने के लिए क्या खाएं)

मिर्गी के दौरे कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें आंशिक दौरे, माध्यमिक दौरे और सामान्यीकृत दौरे (Generalized Seizures) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

एक हल्के दौरे को पहचानना मुश्किल हो सकता है। यह कुछ सेकंड के लिए रह सकता है, जिसके दौरान आपकी चेतना कम हो जाती है। तेज़ दौरे ऐंठन और मांसपेशियों में अनियंत्रित झटकों का कारण बन सकते हैं तथा यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकते हैं। एक तेज़ दौरे की अवधि में कुछ लोग भ्रमित हो जाते हैं या चेतना खो देते हैं। इसके बाद हो सकता है कि आपको इस दौरे के बारे में कुछ याद भी न रहे।

दौरों को बढ़ाने में कम सोना, शराब का सेवन, तनाव या मासिक धर्म चक्र से संबंधित हार्मोनल परिवर्तन शामिल है।

(और पढ़ें - मासिक धर्म की समस्या)

मिर्गी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह छोटे बच्चों और अधेड़ व्यक्तियों में अधिक आम है। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखी जाती है। मिर्गी का इलाज करने के कई अलग-अलग तरीके हैं, जिनमें ध्यान (मेडिटेशन), मिर्गी का इलाज करने के लिए सर्जरी या मिर्गी की अंतर्निहित स्थितियों का उपचार, प्रत्यारोपित उपकरण और आहार शामिल है।

मिर्गी से पीड़ित ज्यादातर लोग पूरी तरह से सक्रिय जीवन जीते हैं। लेकिन उनके जीवन को खतरे में डालने वाली दो स्थितियों का उन्हें जोखिम है – स्टेटस एपिलेप्टिकस (जब एक व्यक्ति को असामान्य रूप से लंबे समय तक दौरा पड़ता है या दौरों के बीच पूरी तरह से चेतना नहीं रहती है) और अचानक होने वाली अस्पष्टीकृत मृत्यु।

(और पढ़ें - महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए हार्मोन का महत्व)

मिर्गी का प्रसार- 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रोग के वैश्विक बोझ का 0.5% या 7 मिलियन के लिए मिर्गी जिम्मेदार है। सिर की चोट दुनिया भर में मिर्गी का एक सामान्य कारण है। भारत में प्रति हजार आबादी में लगभग 14 लोगों के मिर्गी से पीड़ित होने की संभावना है, जिसका बच्चों व युवा-वयस्कों और ग्रामीण क्षेत्रों में होने का उच्च अनुमान है।

  1. मिर्गी के प्रकार - Types of Epilepsy in Hindi
  2. मिर्गी के लक्षण - Epilepsy Symptoms in Hindi
  3. मिर्गी के कारण - Epilepsy Causes in Hindi
  4. मिर्गी के बचाव के उपाय - Prevention of Epilepsy in Hindi
  5. मिर्गी का परीक्षण - Diagnosis of Epilepsy in Hindi
  6. मिर्गी का इलाज - Epilepsy Treatment in Hindi
  7. मिर्गी की जटिलताएं - Epilepsy Complications in Hindi
  8. मिर्गी में परहेज़ - What to avoid during Epilepsy in Hindi?
  9. मिर्गी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Epilepsy in Hindi?
  10. मिर्गी की आयुर्वेदिक दवा और इलाज
  11. मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करें
  12. मिर्गी की बीमारी का घरेलू उपाय
  13. मिर्गी की होम्योपैथिक दवा और इलाज
  14. मिर्गी की दवा - Medicines for Epilepsy in Hindi
  15. मिर्गी की दवा - OTC Medicines for Epilepsy in Hindi
  16. मिर्गी के डॉक्टर

मिर्गी के प्रकार - Types of Epilepsy in Hindi

मिर्गी के प्रकार:

दौरों के आधार पर मिर्गी के तीन प्रकार हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क के किस हिस्से पर मिर्गी की गतिविधि शुरू हुई –

(और पढ़ें - दिमाग के लिए योगासन)

1. आंशिक दौरा (Partial Seizure) एक आंशिक दौरे का अर्थ है कि रोगी के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में मिर्गी की गतिविधि हुई थी। आंशिक दौरे के दो प्रकार होते हैं –

  • सरल आंशिक दौरा इस दौरे की अवधि में रोगी जागरूक रहते हैं। ज्यादातर मामलों में रोगी अपने परिवेश से भी अवगत रहते हैं, भले ही दौरा बढ़ रहा हो। 
  • जटिल आंशिक दौरा –  इसमें रोगी की चेतना ख़त्म हो जाती है। मरीज को आमतौर पर दौरे के बारे में याद नहीं रहता।

2. सामान्यीकृतदौरा (Generalized Seizure) –  एक सामान्यीकृत दौरा तब आता है, जब मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में मिर्गी संबंधी गतिविधि होती है। जब दौरा बढ़ जाता है, तो मरीज की चेतना ख़त्म हो जाती है।

  • टॉनिक-क्लोनिक दौरे–  ये सामान्यीकृत दौरे के शायद सबसे प्रसिद्ध प्रकार हैं। ये चेतना के लुप्त होने, शरीर के अकड़ने और कांपने का कारण बनते हैं।
  • एब्सेंस दौरे   इसमें चेतना थोड़े समय के लिए लुप्त हो जाती है और ऐसा लगता है, जैसे व्यक्ति अंतरिक्ष को घूर रहा हो।
  • टॉनिक दौरे  मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं। इस दौरे में व्यक्ति नीचे गिर सकता है। 
  • एटोनिक दौरे मांसपेशियों पर नियंत्रण में कमी, जिसके कारण व्यक्ति अचानक गिर सकता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव के कारण)
  • क्लोनिक दौरे – ये दौरे नियत अंतराल के बाद लगने वाले झटकों के साथ संबद्ध हैं।

3. माध्यमिक सामान्यीकृत दौरे (secondary generalised seizure) – एक माध्यमिक सामान्यीकृत दौरा तब पड़ता है, जब मिर्गी संबंधी गतिविधि आंशिक दौरे के रूप में शुरू होती है, लेकिन फिर मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में फैल जाती है। जब दौरा बढ़ जाता है, तो मरीज अपनी चेतना खो देता है।

(और पढ़ें - मस्तिष्क संक्रमण के इलाज)

मिर्गी के लक्षण - Epilepsy Symptoms in Hindi

मिर्गी के लक्षण:

मिर्गी के मुख्य लक्षण दौरे पड़ना है। अलग-अलग व्यक्तियों में इसके लक्षण दौरों के प्रकार के अनुसार भिन्न होते हैं। 

1. फोकल (आंशिक) दौरे एक साधारण आंशिक दौरे में चेतना को कोई खास नुकसान नहीं होता। इसके लक्षणों में निम्न शामिल है –

  • स्वाद, गंध, दृष्टि, श्रवण या स्पर्श इन्द्रियों में बदलाव, 
  • चक्कर आना, (और पढ़ें - चक्कर के घरेलू उपाय)
  • अंगों में झनझनाहट महसूस होना इत्यादि।

2. जटिल आंशिक दौरे   इसमें जागरूकता या चेतना की क्षति शामिल है। अन्य लक्षणों में निम्न शामिल है –

  • एकतरफ नज़र टिकाये रखना, 
  • कोई प्रतिक्रिया न करना, 
  • एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना इत्यादि।

3. सामान्यीकृत दौरे – सामान्यीकृत दौरे में संपूर्ण मस्तिष्क शामिल होता है। इसके छह प्रकार हैं –

  • एब्सेंस दौरे (जिन्हें 'पेटीट मल दौरे' भी कहा जाता है) एकटक घूरते रहने का कारण बनते हैं। इस प्रकार के दौरे चटकारे लेना और आँखें झपकाने जैसी गतिविधियों को बार-बार दोहराने का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर चेतना थोड़े समय के लिए लुप्त भी हो जाती है।  
  • टोनिक दौरे मांसपेशियों में अकड़न पैदा करते हैं। 
  • एटोनिक दौरे में मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होता जाता है और व्यक्ति अचानक गिर सकता है।
  • क्लोनिक दौरों की पहचान चेहरे, गर्दन और बांह की मांसपेशियों में लगने वाले पुनरावृत्त झटकों से होती है।
  • मायोक्लोनिक दौरे के कारण हाथों और पैरों में स्वाभाविक रूप से तेज़ झनझनाहट होती है।
  • टॉनिक-क्लोनिक दौरों को 'ग्रैंड मल दौरे' कहा जाता था। इसके लक्षणों में शरीर में अकड़न, कम्पन या आंत्र नियंत्रण (Bowel Control) की हानि, जीभ को काटना, चेतना का लोप होना शामिल हैं। (और पढ़ें - पार्किंसन रोग के लक्षण)

दौरे के बाद आपको उसके बारे में याद नहीं रहता है या आप कुछ घंटों के लिए थोड़ा बीमार महसूस कर सकते हैं।

(और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन के कारण)

मिर्गी के कारण - Epilepsy Causes in Hindi

मिर्गी के कारण:

मिर्गी से पीड़ित लोगों में से लगभग आधे मरीज़ों में किसी विशेष कारण की पहचान नहीं होती है। अन्य व्यक्तियों में विभिन्न कारकों के द्वारा हालात का पता लगाया जा सकता  है –

  1. जेनेटिक  प्रभाव पीढ़ियों से चलते आ रहे मिर्गी के कुछ प्रकार, महसूस किये गए दौरों या मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से द्वारा वर्गीकृत होते हैं। इन मामलों में संभावना है कि यह एक जेनेटिक प्रभाव होता है।
  2. सिर में चोट एक कार दुर्घटना में या किसी अन्य घटना के कारण सिर में लगी चोट मिर्गी का कारण बन सकती है।
  3. मस्तिष्क की स्थितिमस्तिष्क की स्थिति, जो उसे ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक के रूप में क्षति पहुंचाती है, मिर्गी का कारण बन सकती है। 35 वर्ष से अधिक आयु वाले वयस्कों में स्ट्रोक मिर्गी का एक प्रमुख कारण है। (और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर कैसे होता है)
  4. संक्रामक रोग   संक्रामक रोग, जैसे – मेनिन्जाइटिस, एड्स और वायरल इन्सेफेलाइटिस, मिर्गी का कारण बन सकते हैं।
  5. जन्म के पूर्व की चोट जन्म से पहले बच्चे मस्तिष्क की चोट के प्रति संवेदनशील होते हैं, जो कई कारणों से हो सकती है, जैसे – माँ को होने वाला संक्रमण, अल्प पोषण या ऑक्सीजन की कमी। इस मस्तिष्क की क्षति के कारण मिर्गी या मस्तिष्क पक्षाघात हो सकता है।
  6. विकास संबंधी विकार – मिर्गी कभी-कभी विकास संबंधी विकारों से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे कि स्वलीनता और न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस।

(और पढ़ें - सिर की चोट का इलाज)

मिर्गी के बचाव के उपाय - Prevention of Epilepsy in Hindi

मिर्गी की रोकथाम: 

सीट बेल्ट्स बांधना और साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनना, बच्चों को कार की सीट पर अच्छे से बैठाना और सिर में चोट व अन्य आघातों से बचाव करने वाले उपायों को अपनाकर मिर्गी के कई मामलों में नुकसान को रोका जा सकता है।

(और पढ़ें - साइकिल चलाने के फायदे)

पहले या दूसरे दौरे या ज्वर दौरों (Febrile Seizures) के बाद सुझावित दवाएं लेने से कुछ मामलों में मिर्गी को रोकने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप और संक्रमण के उपचार सहित जन्म से पूर्व की जाने वाली देखभाल द्वारा विकसित हो रहे बच्चे में मस्तिष्क क्षति को रोका जा सकता है, जो बाद में मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।

(और पढ़ें - संक्रमण का इलाज)

हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, संक्रमण और अन्य विकार जो कि प्रौढ़ता और बुढ़ापे में मस्तिष्क को प्रभावित कर सकते हैं, इनका उपचार करके मिर्गी के कई मामलों को रोका जा सकता है। अंत में कई न्यूरोलॉजिकल विकारों के जीन की पहचान करने से जेनेटिक स्क्रीनिंग और जन्म के पूर्व निदान के अवसर मिल सकते हैं, जो अंततः मिर्गी के कई मामलों को रोक सकते हैं।

(और पढ़ें - बुढ़ापे में होने वाली मांसपेशियों की क्षति को रोकने का उपाय)

जीवन शैली में बदलाव करके, जैसे – 

  1. अपने तनाव, चिंता या अन्य भावनात्मक मुद्दों के साथ निपटना। (और पढ़ें - तनाव दूर करने के लिए योग)
  2. अल्कोहल या नशीली दवाओं का अत्यधिक सेवन या शराब व नशीली दवाओं को छोड़ने की प्रक्रिया। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के घरेलू नुस्खे)
  3. नींद के कार्यक्रम में परिवर्तन या पर्याप्त एवं अच्छी नींद लेना।

(और पढ़ें - अच्छी नींद के उपाय)

मिर्गी का परीक्षण - Diagnosis of Epilepsy in Hindi

मिर्गी का परीक्षण/ निदान:

अगर आपको संदेह है कि आपको मिर्गी का दौरा पड़ा है, तो अपने चिकित्सक को जल्द से जल्द दिखाएं। दौरा एक गंभीर चिकित्सा समस्या का लक्षण हो सकता है।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट कैसे होता है)

आपके मेडिकल इतिहास और लक्षण आपके डॉक्टर को यह तय करने में मदद करेंगे कि कौन से परीक्षण उपयोगी होंगे। आपकी शारीरिक क्षमताओं और मानसिक कार्यप्रणाली का परीक्षण करने के लिए संभव रूप से आपकी न्यूरोलॉजिकल जाँच की जाएगी।

आपके डॉक्टर संभवतः आपकी लाल और सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की गणना करने के लिए रक्त परीक्षण का आदेश देंगे।

1. रक्त परीक्षण द्वारा निम्न बातों का पता लगाया जा सकता है –

2. इलेक्ट्रोइन्सेफलोग्राम (ईईजी), मिर्गी का सबसे आम परीक्षण है। इसके तहत सबसे पहले, इलेक्ट्रोड एक पेस्ट के साथ आपकी खोपड़ी से जोड़े जाते हैं। यह एक गैर-आक्रामक, दर्दरहित परीक्षण है। आपको एक विशिष्ट कार्य करने के लिए कहा जा सकता है। कुछ मामलों में यह परीक्षण नींद के दौरान किया जाता है। इलेक्ट्रोड आपके दिमाग की विद्युतीय गतिविधि रिकॉर्ड करेगा। चाहे आपको दौरा आये या न आये, सामान्य मस्तिष्क तरंगों के पैटर्न में होने वाले परिवर्तन मिर्गी में आम हैं।

(और पढ़ें - अनिद्रा के लक्षण)

3. इमेजिंग टेस्ट ट्यूमर और अन्य असामान्यताओं का पता लगा सकते हैं, जिनके कारण दौरे आ सकते हैं। इन परीक्षणों में शामिल हो सकते हैं –

  1. सीटी स्कैन – ये छवियां (Images) सामान्य एक्स-रे छवियों की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान करती हैं। सीटी स्कैन के द्वारा शरीर के विभिन्न भागों के नरम ऊतकों, रक्त वाहिकाओं और हड्डियों को देखा जा सकता है। (और पढ़ें - सीटी स्कैन क्या है)
  2. एमआरआई  सिर का किया जाने वाला मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) एक पीड़ा रहित, गैर-आक्रामक परीक्षण है, जो आपके मस्तिष्क और मस्तिष्क स्टेम की विस्तृत इमेज दिखाता है। (और पढ़ें - एमआरआई स्कैन क्या है)
  3. पॉसिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) – यह एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसके द्वारा डॉक्टर आपके शरीर में बीमारियों की जाँच करते हैं। 

(और पढ़ें - मैमोग्राफी क्या है)

मिर्गी का इलाज - Epilepsy Treatment in Hindi

मिर्गी का उपचार:

अधिकांश लोग मिर्गी का प्रबंधन (Manage) कर सकते हैं। आपकी उपचार योजना लक्षणों की गंभीरता, आपके स्वास्थ्य और चिकित्सा के प्रति आपकी प्रतिक्रिया पर आधारित होगी।

 उपचार के कुछ विकल्पों में शामिल हैं –

  1. एंटी-एपिलेप्टिक (एंटीकंवलसेन्ट - Anticonvulsant) दवाएं ये दवाएं आपको पड़ने वाले दौरों की संख्या को कम कर सकती हैं। कुछ लोगों में ये दौरों को खत्म कर देती हैं। डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार दवाएं लेने से ये शीघ्र असर करती हैं।
  2. वेगस तंत्रिका उत्तेजक – यह उपकरण शल्यचिकित्सा द्वारा छाती पर त्वचा के नीचे लगाया जाता है और बिजली द्वारा गर्दन से होते हुए तंत्रिका को उत्तेजित करता है। इससे दौरों को रोकने में मदद मिल सकती है।
  3. केटोजेनिक आहार –  आधे से ज्यादा लोग जिनपर दवाओं का भी असर नहीं होता, उन्हें उच्च वसा और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार लेना चाहिए।
  4. मस्तिष्क की सर्जरी – मस्तिष्क का वह हिस्सा जो दौरों का कारण बनता है, उसे हटाया या बदला जा सकता है।

नए उपचारों हेतू अनुसंधान चल रहा है। एक ऐसा इलाज जो भविष्य में उपलब्ध हो सकता है, वो है –गहरी मस्तिष्क उत्तेजना (Deep Brain Stimulation)। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें इलेक्ट्रोड आपके मस्तिष्क में प्रत्यारोपित किये जाते हैं। फिर एक जनरेटर को आपकी छाती में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह जनरेटर विद्युत संवेगों (Electrical Impulses) को मस्तिष्क में भेजता है, जिससे दौरों को कम करने में मदद मिलती है। 

मिर्गी की दवाएं :  

मिर्गी का सबसे प्रारंभिक उपचार एंटी-सीज़्यूर दवाएं है। ये दवाएं दौरों की आवृत्ति और गंभीरता को कम करने में मदद करती हैं। इन दवाओं से गंभीर रूप से बढ़ चुके दौरों को नहीं रोका जा सकता और न ही मिर्गी का पूर्ण इलाज किया जा सकता है।

दवा पेट द्वारा अवशोषित कर ली जाती है, फिर यह रक्तप्रवाह के साथ मस्तिष्क तक पहुँच जाती है। यह दवा न्यूरोट्रांसमीटर को इस प्रकार प्रभावित करती है, जिससे दौरों को बढ़ाने वाली विद्युत गतिविधि कम हो जाती है। एंटी-सीज़्यूर दवाएं पाचन तंत्र से गुजरती हैं और मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाती हैं।

बाजार में कई एंटी-सीज़्यूर दवाएं उपलब्ध हैं। आपको पड़ने वाले दौरे के प्रकार के आधार पर आपके डॉक्टर एक तरह की दवा या मिलाकर एक साथ लेने वाली अलग-अलग दवाएं लिख सकते हैं।

 मिर्गी की साधारण दवाओं में शामिल हैं –

  1. फीनोबार्बिटल यह दवा पहली और सबसे पुरानी एंटी-सीज़्यूर दवाओं में से एक है। यह अभी भी मिर्गी का इलाज करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह सामान्यीकृत और आंशिक दौरे का इलाज कर सकती है। फीनोबार्बिटल आक्षेपरोधी कार्य (Anticonvulsant action) के साथ लंबे समय तक दर्द से राहत देने वाली दवा भी है। 
  2. डायजेपाम  – इसका उपयोग क्लस्टर और लंबे समय से पड़ने वाले दौरों का इलाज करने के लिए किया जाता है। 
  3. गाबापेंटिनयह दवा भी आंशिक दौरे का इलाज करने के लिए प्रयोग की जाती है।
  4. डिवाप्रोएक्स (डेपाकोट) – यह दवा एब्सेंस, आंशिक, जटिल आंशिक और कई प्रकार के दौरे का इलाज करने के लिए उपयोग की जाती है।
  5. लेवेतिराकेटम – यह सामान्यीकृत, आंशिक, असामान्य, एब्सेंस और अन्य प्रकार के दौरों के लिए पहला उपचार है।
  6. अथॉक्सीमाईड –  इसका उपयोग एब्सेंस दौरे के सभी प्रकारों का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसमें असामान्य, बाल्यावस्था और किशोरावस्था के एब्सेंस दौरे शामिल हैं।

उपरोक्त दवाएं आमतौर पर गोली, तरल या इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध हैं और दिन में एक या दो बार ली जाती हैं। आप सबसे कम खुराक के साथ शुरू कर सकते हैं, जिन्हें तब तक समायोजित किया जा सकता है, जब तक कि ये काम करना शुरू न कर दें। इन दवाओं को निर्धारित रूप से लगातार लिया जाना चाहिए।

मिर्गी हर व्यक्ति में अलग होती है, लेकिन ज्यादातर लोगों में एंटी-सीज़्यूर दवाओं के कारण सुधार आ जाता है। मिर्गी से पीड़ित कुछ बच्चों को दौरे पड़ना समाप्त हो जाते हैं और तब वे दवा लेना बंद कर सकते हैं।

(और पढ़ें - दिमाग तेज करने के उपाय)

मिर्गी की जटिलताएं - Epilepsy Complications in Hindi

मिर्गी के जोखिम कारक:

कुछ कारक मिर्गी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल है –

(और पढ़ें - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र अवसाद)

  1. आयु मिर्गी की शुरुआत प्रारंभिक बचपन और 60 वर्ष की उम्र के बाद सबसे आम है, लेकिन यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है।
  2. पारिवारिक इतिहास यदि आपका मिर्गी से सम्बन्धित पारिवारिक इतिहास है, तो आप में दौरों की समस्या के विकास का जोखिम बढ़ सकता है।
  3. सिर की चोटें – मिर्गी के कुछ मामलों के लिए सिर की चोटें जिम्मेदार हैं। आप सिर में लगने वाली चोटों के खतरों को कम करने के लिए कुछ बातों को अवश्य ध्यान में रखें, जैसे – कार में सवारी करते हुए सीट बेल्ट लगाएं और साइकिल चलाते समय, स्कीइंग, मोटर साइकिल की सवारी करते हुए या अन्य गतिविधियां करते समय जिनमें सिर की चोट के उच्च जोखिम होते हैं, हेलमेट ज़रूर पहनें।
  4. स्ट्रोक और अन्य वाहिकाओं सम्बन्धी रोग स्ट्रोक और अन्य रक्त वाहिका (संवहनी) रोगों से मस्तिष्क क्षति हो सकती है, जिससे मिर्गी का खतरा बढ़ सकता है।
  5. डिमेंशिया  डिमेंशिया (मनोभ्रंश) रोग अधेड़ उम्र के लोगों में मिर्गी के जोखिम को बढ़ा सकता है। 
  6. मस्तिष्क संक्रमण – मेनिन्जाइटिस जैसे संक्रमण, जो आपके मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में सूजन का कारण बनते हैं, आपके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
  7. बचपन में पड़ने वाले दौरे – बचपन में तेज़ बुखार कभी-कभी दौरे के साथ जुड़ा हो सकता है। जिन बच्चों को तेज़ बुखार होने की वजह से दौरे पड़ते हैं, उनमें आमतौर पर मिर्गी का विकास नहीं होता है। हालांकि जोखिम तब बढ़ जाता है, अगर उन्हें लंबे समय से दौरे आ रहे हों, तंत्रिका तंत्र की अन्य स्थितियां या मिर्गी का एक पारिवारिक इतिहास हो।

मिर्गी की जटिलताएं:

कभी-कभी दौरों से ऐसी परिस्थितियों पैदा हो सकती हैं, जो आपके लिए या दूसरों के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

  1. गिरना – यदि आप दौरे के दौरान गिर जाते हैं, तो आपके सिर में चोट लग सकती है या हड्डी टूट सकती है। (और पढ़ें - हड्डी टूटने का इलाज)
  2. डूबना – यदि आपको मिर्गी है, तो पानी में दौरा पड़ने के कारण बाकी जनसंख्या की तुलना में आपके तैराकी या स्नान के दौरान 15 से 19 गुना ज्यादा डूबने की संभावना है। (और पढ़ें - तैराकी के फायदे)
  3. कार दुर्घटनाएं – गाड़ी चलाते समय या अन्य उपकरण संचालित करने के दौरान दौरे के कारण चेतना या नियंत्रण की हानि खतरनाक हो सकती है।                         
  4. गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं – गर्भावस्था के दौरान पड़ने वाले दौरे माता और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकते हैं और कुछ एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं जन्म दोष के जोखिम को बढ़ाती हैं। यदि आपको मिर्गी है और आप माँ बनने के बारे में सोच रही हैं, तो आप अपनी गर्भावस्था की योजना के अनुसार अपने डॉक्टर से बात करें। मिर्गी से पीड़ित ज्यादातर महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। आपको गर्भावस्था के दौरान सावधानीपूर्वक जाँच और दवाओं को समायोजित करने की आवश्यकता हो सकती है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप अपने गर्भधारण से सम्बन्धित योजना के लिए अपने डॉक्टर से बात करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था के लक्षण)
  5. भावनात्मक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं मिर्गी से ग्रसित लोगों में मनोवैज्ञानिक समस्याओं, विशेष रूप से अवसाद, चिंता और चरम मामलों में आत्महत्या की अधिक संभावना होती है। ये समस्याएं हालत से निपटने के दौरान उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ दवाओं के साइड इफेक्ट का परिणाम हो सकती हैं।

(और पढ़ें - अवसाद के लिए योग)

ज़िन्दगी के लिए खतरा पैदा करने वाली मिर्गी की कई जटिलताएं असामान्य हो सकती हैं, जैसे –

  1. स्टेटस एपिलेप्टिकस यह स्थिति तब होती है, जब आपको पांच मिनट से अधिक समय तक निरंतर दौरा पड़ता है या आपको लगातार आवर्ती दौरे (Frequent Recurrent Seizures) पड़ते हैं, जिनके बीच में आपको पूरी तरह से होश नहीं रह पाता है। स्टेटस एपिलेप्टिकस वाले मरीजों में स्थायी मस्तिष्क क्षति और मौत का खतरा बढ़ जाता है।
  2. मिर्गी में होने वाली अचानक अस्पष्टीकृत मृत्यु (एसयूडीईपी) मिर्गी से ग्रसित लोगों में अचानक होने वाली अस्पष्टीकृत मौत का भी थोड़ा जोखिम रहता है। इसका कारण अज्ञात है, लेकिन कुछ शोधों से पता चलता है कि ऐसा हृदय या श्वसन की स्थिति के कारण हो सकता है।

(और पढ़ें - बीमारियों का कारण और इलाज)

मिर्गी में परहेज़ - What to avoid during Epilepsy in Hindi?

परहेज़:

  1. ड्रग्स और शराब से बचें। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के घरेलू नुस्खे)
  2. अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित सभी दवाएं लें। 
  3. तेज़ चमकती रोशनी और अन्य दृश्यात्मक उत्तेजनाओं (Visual Stimuli) से बचें।
  4. जितना संभव हो, टीवी और कंप्यूटर के आगे ज़्यादा समय तक न बैठें। 
  5. वीडियो गेम खेलने से बचें।
  6. तनाव से दूर रहें। 

(और पढ़ें - तनाव को दूर करने के लिए जूस)

मिर्गी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Epilepsy in Hindi?

मिर्गी में क्या खाएं

एक संतुलित आहार में आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, सब्ज़ियाँ और फल व बहुत सारे तरल पदार्थ शामिल होते हैं।  जिनमें निम्न शामिल हैं-

(और पढ़ें - संतुलित आहार के फायदे)

  1. कार्बोहाइड्रेट – यह ऊर्जा प्रदान करता है और आलू, ब्रेड, पास्ता और चावल जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इन खाद्य पदार्थों को साबुत अनाज के रूप में खाने से अतिरिक्त विटामिन, खनिज, और फाइबर मिलता है, जो शरीर से अपशिष्ट को बाहर निकालने में मदद करते हैं। (और पढ़ें - अनाज के फायदे)
  2. वसा – इसमें तेल, तेलयुक्त मछली, मेवे और बीज शामिल हैं। वसा हमें कुछ महत्वपूर्ण विटामिन सहित पोषक तत्वों को अवशोषित करने और हमें गर्म रखने में मदद करती है। वसा हमारी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है और हमें ऊर्जा देती है। (और पढ़ें - बीज के फायदे)
  3. प्रोटीन – यह हमारी मांसपेशियों, हार्मोन, एंजाइम, लाल रक्त कोशिकाओं और प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण और पोषण करता है। प्रोटीन दूध और पनीर जैसे डेयरी पदार्थों के साथ-साथ मांस, मछली, टोफू, फलियां, मसूर और अंडे में भी पाया जाता है। (और पढ़ें - प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्टर खाद्य पदार्थ)
  4. सब्जियां और फल – ये हमें संक्रमण, रोगों और हमारी कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने में मदद करते हैं। (और पढ़ें - फल खाने के फायदे)

तलकर बनाये गए भोजन के बजाय भाप से पकाया हुआ, बेक किया हुआ, ग्रिल किया हुआ या उबालकर बनाया गया भोजन आमतौर पर स्वस्थ होता है। अधिक मात्रा में पानी पीने से निर्जलीकरण से उत्पन्न होने वाले दौरे का खतरा कम करने में मदद मिलती है। 

(और पढ़ें - निर्जलीकरण का उपचार)

Dr. Virender K Sheorain

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Dr. Sushil Razdan

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मिर्गी की दवा - Medicines for Epilepsy in Hindi

मिर्गी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
TorlevaTorleva 1000 Mg Tablet215
G NeuroG Neuro 75 Mg/750 Mcg Capsule83
LeveraLevera 1000mg Tablet260
Pregeb MPregeb M 150 Capsule200
PregalinPregalin 100 Mg Capsule0
LamitorLAMITOR 150MG TABLET 10S100
TegritalTegrital 100 Mg Tablet5
Alnex NTALNEX NT 10MG TABLET130
LacosamLacosam 10 Mg Injection86
LevipilLevipil 100 Mg Injection91
OleptalOleptal 600 Mg Tablet109
OxetolOxetol 150 Mg Tablet45
Pregalin MPregalin M 1500 Mcg/150 Mg Tablet200
Milcy ForteMilcy Forte Tablet0
SycodepSycodep 25 Mg/2 Mg Tablet0
PlacidoxPlacidox 10 Mg Tablet19
EngabaEngaba 150 Mg Tablet117
GabaGaba 300 Mg Tablet75
ToframineToframine 25 Mg/2 Mg Tablet8
Mecobion PMecobion P 750 Mcg/150 Mg Tablet68
ValiumValium 10 Mg Tablet60
EzegalinEzegalin 75 Mg Tablet Sr76
GabacapGABACAP 100MG CAPSULE 10S0
TrikodepTrikodep 2.5 Mg/25 Mg Tablet0
Mecoblend PMecoblend P Tablet72

मिर्गी की दवा - OTC medicines for Epilepsy in Hindi

मिर्गी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Baidyanath Chaturbhuj RasBaidyanath Chaturbhuja Ras(Say)1245
Divya Rajat BhasmaDivya Rajat Bhasma160
Baidyanath Chaturmukh RasBaidyanath Chaturmukha Ras (S Yu)172
Divya Medha VatiPatanjali Divya Medha Vati-Extra Power148
Baidyanath Amar Sundari VatiBaidyanath Amarsundari Bati 40 Tabs56
Baidyanath Brahmi GhritaBaidyanath Bramhi Ghruta199
Himalaya Mentat SyrupHimalaya Mentat Syrup112
Baidyanath Brahmi Bati BuddhivardhakBaidyanath Brahmi Bati (Buddhivardh88
Himalaya Mentat TabletHimalaya Mentat Tablet84
Baidyanath Yogendra Ras (Smy)Baidyanath Yogendra Ras with Gold 25 Tabs1879
Baidyanath Vata Chintamani RasBaidyanath Vatachintamani Ras Vrihat With Gold and Pearl Tablet 25s1880
Divya SaraswatarishtaDivya Sarswatarishta84
Baidyanath Mahavatvidhwansan RasBaidyanath Mahavatvidhwansan Ras110
Divya AshwagandharishtaDivya Ashwagandharishta80

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

References

  1. World Health Organization [Internet]. Geneva (SUI): World Health Organization; Epilepsy.
  2. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Types of Seizures
  3. Oguni H. Epilepsy and intellectual and developmental disabilities.. Journal of Policy and Practice in Intellectual Disabilities. 2013 Jun;10(2):89-92. [Internet]
  4. healthdirect Australia. Head injuries. Australian government: Department of Health
  5. healthdirect Australia. What causes epilepsy?. Australian government: Department of Health
  6. Silverman IE, Restrepo L, Mathews GC. Poststroke seizures. Archives of neurology. 2002 Feb 1;59(2):195-201. PMID: 11843689
  7. Senthil Amudhan, Gopalkrishna Gururaj, Parthasarathy Satishchandra. Epilepsy in India I: Epidemiology and public health. Ann Indian Acad Neurol. 2015 Jul-Sep; 18(3): 263–277. PMID: 26425001
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  9. Ding K, Gupta PK, Diaz-Arrastia R. Epilepsy after Traumatic Brain Injury. In: Laskowitz D, Grant G, editors. Translational Research in Traumatic Brain Injury. Boca Raton (FL): CRC Press/Taylor and Francis Group; 2016. Chapter 14
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  12. National Institute of Neurological Disorders and Stroke [Internet] Maryland, United States; Epilepsy Information Page.
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