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आपने कई बार जिम में एक बेहद बड़ा ट्रक टायर, हवा से भरी एक बड़ी गेंद या जमीन पर रस्सी पड़ी देखी होंगी। इसके अलावा आप लगातार लोगों की रुचि पुश अप की बजाए बर्पी में बढ़ती देख रहे होंगे। दरअसल इसका कारण है क्रॉसफिट व्यायाम। इन व्यायामों में केवल एक मांसपेशियों के समूह को टारगेट करने की बजाए पूरे शरीर को ट्रेन किया जाता है।

कई लोग रोजाना भारी भरकम वजन उठाने वाले व्यायामों को छोड़कर फुल बॉडी वर्कआउट को अपनाने लगे हैं। क्रॉसफिट आज से 20 साल पहले 2000 में “ग्रेग ग्लासमैन” और “लॉरेन जेनाइ” द्वारा स्थापित किया गया था। इस व्यायाम को लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए बनाया गया था। इन 20 वर्षों में यह क्रॉसफिट बेहद लोकप्रिय हुआ है और दुनिया में कई लोग इसे अपना चुके हैं।

क्रॉसफिट एक बेहतरीन मिक्स-अप व्यायाम है, जिसमें एरोबिक्स की गतिविधियां, वजन उठाने वाले व्यायाम और ओलिंपिक वेटलिफ्टिंग की तकनीक शामिल हैं।

  1. क्रॉसफिट के फायदे - Benefits of Crossfit
  2. क्रॉसफिट करने का तरीका - How To Do Crossfit
  3. क्रॉसफिट व्यायाम करते समय यह सावधानियां बरतें - Precautions While Performing Crossfit Exercises

क्रॉसफिट व्यायामों की तीव्रता के कारण इसे करने वाले खिलाड़ियों में अत्यधिक क्षमता और मजबूती होती है। अन्य प्रकार के व्यायाम करने वाले लोगों को या तो पहलवान कहा जाता है या जिम ट्रेनर, जबकि क्रॉसफिट एक्सरसाइज वाले व्यक्तियों को एथलिट माना जाता है। इस व्यायाम को करने से व्यक्ति के शरीर का हर एक अंग मजबूत और प्रबल होता है।

  • स्ट्रेंथ (मजबूती) - क्रॉसफिट व्यायामों में व्यक्ति बॉडीवेट वर्कआउट के साथ-साथ वेट लिफ्टिंग व्यायाम भी करता है, जिसके कारण शरीर में मजबूती का स्तर ज्यादा तेजी से बढ़ने लगता है।
  • गति और चुस्ती - क्रॉसफिट में कई प्रकार की गतिविधियां शामिल होने के कारण यह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के मुकाबले अत्यधिक फ्लेक्सिबल होती हैं। खिलाड़ियों की गतिविधियों से व्यायाम करने पर आपके वर्कआउट की गति में भी तेजी आती है।
  • वेट लॉस - क्रॉसफिट में अलग-अलग प्रकार की गतिविधियां और सभी मांसपेशियों के इस्तेमाल के कारण यह विश्व भर में वजन कम करने के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।
  • प्रकार - हफ्ते में रोजाना नया व्यायाम होने के कारण व्यक्ति की क्रॉसफिट से रुचि कभी कम नहीं होती है।
  • हृदय के लिए है बेहतर - खिलाड़ियों की तेज गतिविधियों के साथ पहलवानों की तरह भारी भरकम वजन उठाने से वर्कआउट के दौरान हृदय लगातार पंप होता रहता है जिसके कारण हृदय संबंधित सम्याओं की आशंका कम हो जाती है।
  • रोजमर्रा के कार्य - क्रॉसफिट की अधिकतर गतिविधियां रोजाना के कार्यों में फायदेमंद हो सकती हैं, जैसे सिलिंडर उठाना या बाजार से कोई भारी सामान लाना।
  • कम समय - क्रॉसफिट वर्कआउट करने में अन्य व्यायामों जितना समय नहीं लगता है। इन्हें जिम में मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है।

आवश्यक उपकरण
क्रॉसफिट व्यायामों की अधिकतर गतिविधियां स्पोर्ट्स, जिमनास्टिक, रोइंग और तैराकी से प्रेरित होती हैं इसलिए इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरण विभिन्न प्रकार के होते हैं। इनमें जिमनास्टिक रिंग्स, क्लाइम्बिंग रोप (चढ़ाई करने वाली रस्सियां), पुल-अप बार, रस्सा कूदने वाली रस्सी, डंबल, बारबेल और केटलबेल के साथ-साथ रोइंग मशीनें भी शामिल हैं।

क्रॉसफिट व्यायामों के अधिक प्रकार होने के कारण व्यक्ति उपलब्ध उपकरण के अनुसार भी कसरत कर सकता है। कई प्रकार की क्रॉसफिट एक्सरसाइज को बिना किसी मशीन के किया जा सकता है जैसे बॉडी वेट एक्सरसाइज और दौड़ लगाने वाले व्यायाम।

कैसे करें
क्रॉसफिट व्यायामों को अपनी क्षमता और व्यायाम की रेंज के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा आप चाहें तो रोजाना क्रॉसफिट व्यायामों को खुद से चुनकर उनका अभ्यास कर सकते हैं। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले हमेशा कम तीव्रता के साथ करने की सलाह दी जाती है और उसके बाद धीरे-धीरे गतिविधियों की आदत पड़ने पर व्यायाम की तीव्रता का स्तर बढ़ाना चाहिए।

ऐसे कई प्रकार के व्यायाम हैं, जिन्हें एक साथ मिलाकर कई नए व्यायाम बनाए जा सकते हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी कसरते हैं जिन्हें क्रॉसफिट की दुनिया में बदला नहीं जा सकता जैसे कि -

  • बर्पी एक्सरसाइज - यह एक प्रकार बॉडी वेट व्यायाम है जो शरीर की लगभग सभी मांसपेशियों के समूह पर कार्य करता है। पुश अप, स्क्वाट और कूदने को एक साथ लगातार करने पर आप इस अद्भुत व्यायाम के प्रभाव को महसूस कर सकते हैं।
  • ओलिंपिक लिफ्टिंग - इस व्यायाम को करने के लिए कोर का मजबूत होना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि यह पूरे शरीर को ट्रेन करता है। आपने जिम में कई लोगों को बारबेल रॉड को कंधों से ऊंचा उठाते हुए देखा होगा, ठीक उसी प्रकार ओलंपिक लिफ्टिंग में बारबेल को सिर से भी ऊंचा उठाया जाता है ऐसा करने के लिए अत्यधिक बल और मजबूती की आवश्यकता होती है।
  • थ्रस्टर - रोजाना अपनी टांगों की मासंपेशियों को मजबूत बनाने के लिए स्क्वाट्स करने वाले व्यक्ति भी इस प्रकार की क्रॉसफिट कसरत को आसानी से नहीं कर पाते हैं। इस कसरत में वजन उठाने क बाद सबसे कठिन संतुलन बनाए रखना होता है। थ्रस्टर एक कठिन एक्सरसाइज है, जिसमें आपको अपने हाथों को हवा में सीधा रखे हुए बारबेल को अपने सिर से ऊंचा उठाना होता है और उसके बाद स्क्वाट करने होते हैं।
  • स्क्वाट जम्प या एयर स्क्वाट्स - आपने कठिन व्यायामों को शुरू करने से पहले काफी फ्री स्क्वाट्स किए होंगे, लेकिन एयर स्क्वाट्स व्यायाम में और बल शामिल कर देते हैं, इसमें आप स्क्वाट की पोजीशन में ही कूदते हैं और उसी पोजीशन में सीधा खड़े होते हैं।
  • बैटल रोप - यह व्यायाम क्रॉसफिट और “HIIT” अभ्यास में बेहद लोकप्रिय है। इसे करने का सबसे सामान्य तरीका होता है रस्सी को दोनों हाथों से फर्श की ओर तीव्रता से पटकना होता है, आप चाहें तो इसे दोनों दिशा में एक साथ या एक-एक करके भी कर सकते हैं। बैटल रोप व्यायाम एक और कोर को ट्रेन करने वाली कसरत है, जिसमें बांहों, कंधों और साथ ही साइड की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं।

क्रॉसफिट फिटनेस की दुनिया में सबसे लोकप्रिय व्यायामों में से एक है। अधिक तीव्रता और तेजी से वेट लॉस के कारण पहले से ही स्पोर्ट्स या फिटनेस वाले खिलाड़ी भी इसके प्रति आकर्षित होते हैं। हालांकि, कई लोगों के लिए यह अधिक तीव्रता वाले व्यायाम खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। इसलिए क्रॉससफिट व्यायाम को शुरू करने से पहले निम्न बातों का खास ध्यान रखें -

वार्म अप -  सभी प्रकार के व्यायामों की तरह क्रॉसफिट में भी एक्सरसाइज शुरू करने से पहले वार्म अप करना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि इन व्यायामों के दौरान आप अपनी मांसपेशियों और जोड़ों पर अत्यधिक तनाव डालते हैं जिसके कारण उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।

धैर्य - हर कोई ओलिंपिक लिफ्टिंग या अन्य स्पोर्ट्स से प्रेरित हुए व्यायामों की गतिविधियों से परिचित होता है। इसलिए इनके अभ्यास के समय धैर्य रखना बेहद जरूरी होता है। किसी भी व्यायाम में जल्द बाजी करने से पोस्चर में खराबी आ सकती है। इसके कारण कसरत के लाभ के विपरीत दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।

सीमाएं - यह बेहद महत्वपूर्ण होता है कि व्यक्ति अपने शरीर की क्षमता और सीमाओं को समझे व उन्हीं के अनुसार क्रॉसफिट व्यायाम चुने।

चोट लगने का जोखिम - क्रॉसफिट व्यायाम उच्च तीव्रता वाले होने के साथ बेहद प्रभावशाली होते हैं और इसके परिणामस्वरूप खिलाड़ियों में चोट लगने का खतरा होता है। कुछ सामान्य चोटों में लोगों को पीठ या जोड़ों के टेंडन में चोट लग सकती है जैसे कि रोटेटर कफ, अकिलीज टेंडन, घुटनों या कोहनियां।

क्रॉसफिट में उच्च तीव्रता और उच्च प्रभावशाली रेंज की कसरतें जल्दी परिणाम पाने के लिए बनी हैं। किसी ऐसे गुरु का मिल पाना जो आपके शरीर की सीमाओं और गतिविधियों को समझ सके ऐसा भारत जैसे देशों में फिलहाल बेहद मुश्किल है। आमतौर पर क्रॉससफिट जिम महंगे होते हैं, जिसके कारण अधिकतर लोग इसका फायदा नहीं उठा पाते।

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