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दुनियाभर में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग को माना गया है, लेकिन शारीरिक रूप से गतिशील न रहने के कारण भी काफी बड़ी संख्या में मृत्यु हो रही है। वह दिन दूर नहीं है जब शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना मृत्यु का सबसे मुख्य कारण बन जाएगा। फिलहाल दुनियाभर में व्यायाम या शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण है। 2012 में  "यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन" द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार विश्व की एक तिहाई आबादी नियमित रूप से व्यायाम नहीं करती है।

दुनियाभर में लोगों को व्यायाम और फिट रहने के प्रति जागरुक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत सरकार द्वारा भी 23 अगस्त 2019 को "फिट इंडिया" अभियान चलाया गया, जिसकी मदद से लोगों को फिट रहने के लिए प्रेरित किया गया। वृद्ध लोग शारीरिक रूप से गतिशील रहने के लिए चलना, दौड़ना और कुछ कम मेहनत वाले स्पोर्ट्स खेलना आदि पसंद करते हैं। आजकल लोग ज्यादातर लो मिक्सिंग और हाई-इंटेंसिटी वाले व्यायामों को एक साथ करना अधिक पसंद कर रहे हैं।

क्या है हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग

हाई-इंटेंसिटी (उच्च तीव्रता) इंटरवल ट्रेनिंग को एचआईआईटी (हिट) भी कहा जाता है। ज्यादातर लोग हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग को अपने व्यायाम में शामिल कर लेते हैं वो भी बिना कोई ब्रेक लिए, जिसके कारण शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की पुष्टि के लिए कई शोध हो चुके हैं।

लोगों की मान्यता है कि "हिट" केवल एक प्रकार का वर्कआउट स्टाइल है, जबकि इसमें कई प्रकार के इंटेंस व्यायाम शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर कम समय में किए जाने वाले हैं। इसमें बीच-बीच में छोटे ब्रेक या अंतराल लिए जाते हैं। हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग बॉडीबिल्डिंग से काफी अलग होतती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बॉडीबिल्डिंग में मांसपेशियों के केवल एक समूह को इंटेंसिटी के साथ ट्रेन किया जाता है, ताकि शरीर में ऊर्जा बचाई जा सके।

इसके विपरीत हिट में शरीर की कई मांसपेशियों के समूह को ट्रेन किया जाता है, जिसमें ऊर्जा भी अधिक लगती है। हिट एक हृदय संबंधी व्यायाम है जो बेहद ऊर्जा के साथ किया जाता है। इससे आप उतनी कैलोरी बर्न कर सकते हैं, जितनी कि एक लंबे समय तक चलने वाले वर्कआउट से कर पाते हैं।

एचआईआईटी के फायदे

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी में छपी एक स्टडी के मुताबिक यह ट्रेनिंग युवा महिलाओं पर सबसे अधिक प्रभावशाली होती है। इस शोध में कई महिलाओं ने अपने मोटापे के कम होने के बारे सूचना दी उन्होनें बताया कि इस वर्कआउट के द्वारा उनके पेट और टांगों से काफी वसा कम हुई है। इसके अलावा शोध में यह भी पाया गया कि वेट ट्रेनिंग और रनिंग जैसे व्यायामों के मुकाबले हिट से इंसुलिन के स्तर में काफी कमी आती है।

व्यायाम को कम समय में समाप्त करने के अलावा निम्न कुछ और ऐसे फायदे हैं जो एचआईआईटी को अपनाने से प्राप्त होते हैं :

  • व्यायाम जल्दी खत्म होने के साथ-साथ एचआईआईटी 30 प्रतिशत ज्यादा कैलोरी बर्न करता है।
  • इस व्यायाम रूटीन को फॉलो करने वाले लोगों का मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है।
  • इसमें रनिंग और वेट लिफ्टिंग के मुकाबले व्यायाम पूरा करने के बाद भी अधिक कैलोरी बर्न होती रहती है।
  • एचआईआईटी के व्यायामों में अधिक तीव्रता होने के कारण अधिक वेट लॉस में मदद मिलती है। यह व्यायाम पेट के आसपास और अंदरूनी अंगों की वसा को टारगेट करता है।
  • व्यायाम की उच्च-तीव्रता हृदय गति और रक्त प्रवाह को सामान्नय गति में बनाए रखती है।
  • हृदय संबंधित लाभों के अलावा एचआईआईटी मसल मास बढ़ाने में मदद करता है। इसीलिए इस वेट लॉस व्यायाम को फॉलो करते समय मसल गिरने जैसी कोई समस्या भी नहीं आती है।
  • एचआईआईटी व्यायामों विभिन्न प्रकारों की मदद से आपको किसी भी तरह के महंगे उपकरणों या जिम जितनी जगह की आवश्यकता नहीं होती है। इन्हें कहीं भी किया जा सकता है।

एचआईआईटी के लिए जरूरी उपकरण

एचआईआईटी के अधिकतर व्यायामों में किसी प्रकार के उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन कुछ टारगेटेड वर्कआउट के लिए वेट्स, ट्रेडमिल, इलिप्टिकल ट्रेनर्स या बायसाइकिल की जरूरत पड़ सकती है। एचआईआईटी में अधिक तीव्रता वाले व्यायामों को जल्द ही शुरू न करने की सलाह दी जाती है। इसकी बजाए कठिन व्यायामों की ओर बढ़ने से पहले एंड्यूरेंस और स्टैमिना बढ़ा लेना चाहिए।

कैसे करें

एचआईआईटी वर्कआउट का मूल सिद्धांत है छोटे ब्रेक्स के साथ कम समय में कठिन अभ्यास करना। वर्कआउट के दौरान तीव्रता बढ़ाने की बजाए आपको सही तरीके से व्यायाम और उसके सेट पूरे करने चाहिए। व्यायाम शुरू करने से पहले स्ट्रेचिंग या वार्म-अप जरूर कर लें।

  • एचआईआईटी वर्कआउट में शामिल करने के लिए कई प्रकार के व्यायाम हैं। अगर आप पहले से ही पार्क या जिम में वर्कआउट करते आ रहे हैं तो अपने रूटीन में इंटरवल्स के साथ इंटेंसिटी बढ़ा लें।
  • अगर आप ट्रेडमिल पर भागते हैं तो एक ही गति में 30 मिनट के लिए भागने की बजाए 20 से 40 सेकेंड के लिए सबसे तेज गति के साथ भागें और फिर कुछ समय के लिए गति को कम कर लें। जैसे-जैसे आपको वर्कआउट की आदत पड़ने लगेगी वैसे-वैसे व्यायाम की तीव्रता को बढ़ाते रहें और बीच-बीच में ब्रेक लेने के समय को कम करते रहें।
  • अगर आपको बॉडी वेट वर्कआउट जैसे पुश-अप और स्क्वाट्स करना पसंद है तो उनकी तीव्रता को बढ़ाएं और स्ट्रेंथ व स्टैमिना को बढ़ाने के लिए बीच-बीच में आराम करते रहें। जिन्हें वजन उठाकर वर्कआउट करने की आदत है, वह भी अपने व्यायाम को बेहतर बनाने के लिए एचआईआईटी वर्कआउट को अपना सकते हैं। ऐसा करने के लिए अपने व्यायाम को 20 से 30 मिनट में पूरा करने की कोशिश करें।
  • एचआईआईटी व्यायाम को करने के कई तरीके हैं, जिन्हें कई लोगों द्वारा बताया गया है। जैसे कि सेबस्टियन कोए को ओलिम्पिक में गोल्ड मेडल हासिल करने में उनके पिता पीटर कोए के नियमों ने मदद की और वहीं दूसरी ओर जपानी प्रोफेसर इज़ुमी तबता ने अपना खुद का एचआईआईटी का वर्जन पेश किया और उसे ओलिम्पिक स्पीडस्कैटर्स में प्रदर्शित किया था।
  • तभी से तबाता ट्रेनिंग का नाम पड़ा। इसमें कम समय तक व्यायाम करने के साथ आराम को आधा कर दिया जाता है और वांछित परिणाम पाने के लिए इसे कई बार दोहराते हैं। इस प्रक्रिया को दुनियाभर के कई ट्रेनर और चिकित्सकों द्वारा अपनाया जा चुका है।

एचआईआईटी से जुड़ी सावधानियां

जहां एचआईआईटी के कई लाभ हैं, वहीं इसे करने से पहले कई सावधानियां भी बरतनी आवश्यक होती हैं। निम्न बातों को व्यायाम करते समय ध्यान में रखें :

  • सीधा इंटेंस प्रोग्राम न शुरू करें। इसकी बजाए धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाते जाएं।
  • जैसे कि ऊपर बताया गया है रनिंग, बॉडी वेट व्यायाम या वजन उठाने वाले व्यायाम, जो भी आपको सबसे ज्यादा पसंद हो उसमें ही एचआईआईटी रूटीन को शामिल करें।
  • अच्छे परिणाम पाने के लिए नियमित रूप से पानी और पोषण प्राप्त करना बेहद आवश्यक है। इन चीजों के बिना कोई भी व्यायाम पूरा नहीं हो सकता।
  • एचआईआईटी का पूरे सप्ताह अभ्यास करने की जरूरत नहीं होती है। इसकी बजाए आप चाहें तो इसे हफ्ते में तीन दिन अपना सकते हैं और अपने रोजाना के व्यायाम के साथ मिक्स कर सकते हैं।
  • क्योंकि यह एक इंटेंस या कठिन वर्कआउट है इसलिए अगर आप किसी शारीरिक समस्या जैसे चोट या जोड़ों में दर्द से ग्रस्त हैं तो इसे अपनाने से पहले किसी डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

चाहे आप पहले से ही एक्टिव हों या खुद को फिट बनाना चाहते हों, इसके लिए एचआईआईटी जल्द ही परिणाम पाने में एक बेहतरीन विकल्प है। हालांकि, इसे किसी प्रकार का शॉर्टकट न समझें। व्यायाम सभी की क्षमता अनुसार किए जाते हैं, इसीलिए किसी भी प्रकार की चोट से बचने के लिए एचआईआईटी को भी उसी प्रकार करें।

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